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फैटी लिवर से बचने के लिए इन 5 सब्जियों को डाइट में करें शामिल

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फाइल फोटो

Fatty Liver Diet: आजकल बदलती लाइफस्टाइल और खराब खानपान के कारण फैटी लिवर की समस्या तेजी से बढ़ रही है. फैटी लिवर तब होता है जब लिवर की कोशिकाओं में जरूरत से ज्यादा चर्बी जमा हो जाती है. शुरूआती समय में इसके लक्षण हल्के रहते हैं जैसे थकान, कमजोरी, पेट में भारीपन या हल्का दर्द. आमतौर पर लोग इन संकेतों को गंभीरता से नहीं लेते और समस्या बढ़ने पर ही डॉक्टर के पास जाते हैं. अगर लंबे समय तक इसे अनदेखा किया जाए तो यह लिवर सिरोसिस, डायबिटीज और हार्ट डिजीज जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है.

अच्छी बात यह है कि संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर फैटी लिवर को शुरुआती अवस्था में ही काबू किया जा सकता है. विशेषज्ञ बताते हैं कि अपनी रोजमर्रा की डाइट में कुछ खास सब्जियां शामिल करने से तीन महीनों में ही लिवर की सेहत में सुधार दिखाई देने लगता है.

1. पालक
पालक विटामिन E, विटामिन C और फाइबर का अच्छा स्रोत है. ये तत्व लिवर को नुकसान और सूजन से बचाते हैं. रोजाना पालक खाने से इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ती है और लिवर में फैट जमा नहीं होता. साथ ही यह पाचन तंत्र को भी मजबूत बनाता है जिससे अतिरिक्त चर्बी लिवर में जमा नहीं हो पाती.

2. ब्रोकोली
फैटी लिवर के मरीजों को ब्रोकोली जरूर खानी चाहिए. इसमें मौजूद ग्लूकोसिनोलेट्स लिवर को डिटॉक्स करने और फैट घटाने में मदद करते हैं. यह लिवर की सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करता है और बैक्टीरियल इंफेक्शन का खतरा भी घटाता है.

3. ब्रसेल्स स्प्राउट्स
ब्रसेल्स स्प्राउट्स में इंडोल नामक तत्व पाया जाता है जो लिवर में फैट स्टोर होने से रोकता है. यह लिवर की डिटॉक्स प्रक्रिया को तेज करता है और लिवर एंजाइम्स को संतुलित रखता है. नियमित रूप से इसे खाने से लिवर को होने वाला नुकसान कम होता है और फैटी लिवर का खतरा घट जाता है.

4. केल
एंटीऑक्सीडेंट और मैग्नीशियम से भरपूर केल भी फैटी लिवर के लिए फायदेमंद है. इसे खाने से लिवर एंजाइम्स सामान्य रहते हैं और फैट जमा होना कम होता है. इसमें मौजूद नाइट्रेट्स ब्लड फ्लो सुधारते हैं और लिवर की सूजन घटाते हैं.

5. गाजर
गाजर में बीटा-कैरोटीन होता है जो विटामिन A में बदलकर लिवर की कोशिकाओं की मरम्मत करता है. गाजर का फाइबर ब्लड शुगर को नियंत्रित रखता है और लिवर में जमा फैट धीरे-धीरे घटाता है. इसके नियमित सेवन से मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है और वजन कम करने में भी मदद मिलती है.


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Written by: Taushif

17 Sep 2025  ·  Published: 11:37 IST

यूरिक एसिड क्यों बढ़ता है? जानिए कारण, लक्षण और इलाज

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यूरिक एसिड एक केमिकल होता है जो शरीर में प्यूरिन (Purine) नामक तत्व के टूटने से बनता है। प्यूरिन हमें उन चीज़ों से मिलता है जो हम खाते हैं — जैसे रेड मीट, समुद्री भोजन, दालें, बियर, शराब आदि। जब शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा ज़रूरत से ज़्यादा हो जाती है और किडनी उसे फिल्टर करके बाहर नहीं निकाल पाती, तो यह खून में जमा होने लगता है और हाइपरयूरिसीमिया (Hyperuricemia) की स्थिति बनती है।

यूरिक एसिड बढ़ने के प्रमुख कारण:-

1. खानपान में गड़बड़ी
अधिक मात्रा में रेड मीट, सी-फूड, दालें, राजमा, मटर, मशरूम, बीयर और शराब जैसी चीज़ें यूरिक एसिड बढ़ा सकती हैं।

2. कम पानी पीना
जब शरीर में पानी की कमी होती है तो किडनी सही से फिल्टरिंग नहीं कर पाती और यूरिक एसिड शरीर में जमा हो जाता है।

3. मोटापा और लाइफस्टाइल
निष्क्रिय जीवनशैली, अधिक वजन और कम शारीरिक गतिविधि भी यूरिक एसिड के स्तर को बढ़ा देती है।

4. शुगर और ब्लड प्रेशर की दवाएं
कुछ दवाएं, जैसे डाइयूरेटिक्स (पेशाब बढ़ाने वाली दवाएं), भी यूरिक एसिड बढ़ाने में भूमिका निभा सकती हैं।

5. अनुवांशिक कारण
अगर परिवार में किसी को यह समस्या है, तो आपको भी इसका खतरा हो सकता है।

लक्षण:-

जोड़ों में तेज दर्द, खासकर पैर के अंगूठे में

जोड़ों में सूजन और लाली

चलने-फिरने में परेशानी

थकावट और बेचैनी

बचाव और उपाय:-

प्यूरिन युक्त चीज़ों से परहेज करें

खूब पानी पिएं (दिन में 2.5–3 लीटर)

वजन नियंत्रित रखें और नियमित व्यायाम करें

विटामिन-C युक्त फल (नींबू, संतरा) और हाई-फाइबर फूड्स लें

शराब और बीयर से दूरी बनाएं


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Written by: Taushif

24 Jul 2025  ·  Published: 06:24 IST

डायबिटीज के मरीजों के लिए बेहद फायदेमंद दालचीनी की चाय, ऐसे बनाएं

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Cinnamon Tea for Diabetes: डायबिटीज ऐसी बीमारी है जो धीरे-धीरे शरीर को कमजोर करती जाती है. लेकिन भारतीय रसोई में मौजूद कई मसाले इस बीमारी को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं. इन्हीं में से एक है दालचीनी, जिसे आयुष मंत्रालय ने डायबिटीज मरीजों के लिए खास फायदेमंद बताया है.

भारत में डायबिटीज तेजी से बढ़ रही है, ऐसे में आयुष मंत्रालय प्राकृतिक और घरेलू उपाय अपनाने की सलाह देता है. दालचीनी की चाय न सिर्फ स्वादिष्ट होती है, बल्कि यह ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में भी मदद करती है. दालचीनी में ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो इंसुलिन की कार्यक्षमता बढ़ाते हैं, जिससे शरीर ग्लूकोज को बेहतर तरीके से इस्तेमाल कर पाता है.

नियमित रूप से दालचीनी की चाय पीने से ब्लड शुगर का लेवल स्थिर रहता है और अचानक बढ़ने-घटने की समस्या कम होती है. यह चाय कोलेस्ट्रॉल को संतुलित करने में भी मदद करती है. खराब कोलेस्ट्रॉल कम होने से दिल की बीमारियों का जोखिम घटता है, जो डायबिटीज मरीजों में आम समस्या है. दालचीनी में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी होते हैं, जो शरीर में सूजन कम करते हैं और इम्यूनिटी को मजबूत बनाते हैं.

दालचीनी की चाय बनाने का आसान तरीका
सबसे पहले एक कप पानी लें और इसमें आधा चम्मच दालचीनी पाउडर या एक छोटी दालचीनी की स्टिक डालें. इसके बाद  5–10 मिनट तक उबालें, छानकर गर्म-गर्म पिएं. साथ ही चाहें तो थोड़ा शहद या नींबू मिला सकते हैं.

नोट
दालचीनी फायदेमंद है, लेकिन यह दवा का विकल्प नहीं है। शुगर मरीजों को अपनी दवा, डाइट और एक्सरसाइज जारी रखना जरूरी है. दालचीनी की चाय का सेवन डॉक्टर की सलाह के साथ ही करना चाहिए. गर्भवती महिलाएं और गंभीर मरीज इसे लेने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर लें.


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Written by: Taushif

15 Nov 2025  ·  Published: 12:26 IST

जिम जाने से पहले कराएं ये 5 टेस्ट, 50 साल से कम उम्र वालों में भी बढ़ रहा हार्ट अटैक का खतरा

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Gym Heart Attack Risk: पिछले कुछ समय से जिम या वर्कआउट के दौरान अचानक हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. खास बात यह है कि इनमें अधिकतर लोग 50 साल से कम उम्र के रहे हैं. हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, बदलती जीवनशैली, तनाव, अनुचित आहार और आनुवंशिक कारणों के चलते हृदय रोग का खतरा अब युवाओं तक पहुंच चुका है. ऐसे में जिम शुरू करने से पहले सावधानी बरतना और जरूरी स्वास्थ्य जांच करवाना बेहद जरूरी है.

अंग्रेज़ी वेबसाइट ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ऑर्थोपैथ और स्पोर्ट्स सर्जन डॉ. ओबैदुर रहमान ने इंस्टाग्राम पर एक संदेश साझा कर बताया कि जिम शुरू करने से पहले दिल की सेहत का आकलन करने के लिए 5 महत्वपूर्ण टेस्ट करवाना जीवन रक्षक साबित हो सकता है. उन्होंने कहा कि सुंदर दिखने या फिट बॉडी पाने की दौड़ में अक्सर लोग सबसे अहम अंग, ‘दिल’ को नजरअंदाज कर देते हैं.

डॉ. रहमान के मुताबिक, ये टेस्ट्स महंगे नहीं हैं बल्कि आपके स्वास्थ्य निवेश की तरह हैं. विशेषकर 30 साल से ज्यादा उम्र के लोगों, जिनके परिवार में डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या हृदय रोग का इतिहास रहा है, उन्हें इन जांचों को जरूर करवाना चाहिए. इससे दिल की मौजूदा स्थिति का पता चलता है और जोखिम कम करने में मदद मिलती है.

डॉ. रहमान द्वारा सुझाए गए 5 जरूरी टेस्ट्स

  • ईसीजी (इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम) – यह टेस्ट दिल की बेसलाइन रिदम और इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी की जांच करता है. इससे किसी भी अनियमित धड़कन या शुरुआती समस्या का पता चलता है.
  • 2डी इको (2D Echocardiography) – यह दिल की संरचना और कार्यप्रणाली को दर्शाता है. इससे स्ट्रक्चरल हार्ट डिज़ीज़, वाल्व या पंपिंग क्षमता जैसी समस्याओं की पहचान होती है.
  • टीएमटी (ट्रेडमिल टेस्ट) – यह स्ट्रेस टेस्ट दिल की क्षमता और तनाव में उसके प्रदर्शन को जांचने के लिए किया जाता है. वर्कआउट के दौरान दिल पर पड़ने वाले दबाव का आकलन करने के लिए यह बेहद अहम है.
  • हाई सेंसिटिविटी ट्रोपोनिन + एनटी-प्रोबीएनपी (HS-Troponin + NT-ProBNP) – ये ब्लड मार्कर्स दिल की छुपी हुई थकान (Silent Cardiac Strain) और शुरुआती डैमेज का संकेत देते हैं. साथ ही, HSCRP और ESR जैसी जांचें शरीर में सूजन और कार्डियोवस्कुलर रिस्क का पता लगाने में मदद करती हैं.
  • लिपिड प्रोफाइल + HbA1C – यह टेस्ट कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड्स और ब्लड शुगर लेवल का आकलन कर मेटाबॉलिक रेड फ्लैग्स को पहचानने में मदद करता है.
     

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Written by: Taushif

15 Sep 2025  ·  Published: 12:11 IST