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हार्ट अटैक और स्ट्रोक से बचना है? डाइट में करें ये बदलाव

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फाइल फोटो

World Heart Day 2025: हर साल 29 सितंबर को दुनिया भर में वर्ल्ड हार्ट डे मनाया जाता है. इस दिन का मुख्य उद्देश्य लोगों को दिल की बीमारियों के बारे में जागरूक करना और उनकी रोकथाम के उपाय बताना है. आजकल हार्ट अटैक और स्ट्रोक के मामले बढ़ते जा रहे हैं. ऐसे में अपने दिल का खास ख्याल रखना और समय रहते सही कदम उठाना बेहद जरूरी हो गया है.

दिल को स्वस्थ रखने के लिए सबसे अहम भूमिका हमारी डाइट निभाती है. अगर हम रोजाना खाने में सही चीजें शामिल करें तो दिल की बीमारियों के खतरे को कम किया जा सकता है. डेनवर स्थित नेशनल ज्यूइश हेल्थ के हार्ट स्पेशलिस्ट डॉ. एंड्रयू फ्रीमैन का कहना है कि जो लोग ज्यादा फल और सब्जियां खाते हैं, उन्हें हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा काफी हद तक कम होता है. फलों में मौजूद फोलेट, पोटैशियम और विटामिन C स्ट्रोक और दिल की बीमारियों से बचाव करते हैं. इनके एंटीऑक्सीडेंट भी दिल को मजबूत बनाते हैं.

हर दिन फल खाने से शरीर को सभी जरूरी विटामिन, मिनरल और फाइटोकैमिकल्स मिलते हैं, जो दिल के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं. अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) भी रोजाना चार खास फलों को डाइट में शामिल करने की सलाह देता है, जिनमें से हर एक का अपना महत्व है.

सेब (Apple): इसमें फाइबर, विटामिन C और पॉलीफेनॉल्स होते हैं. यह कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करता है और दिल की बीमारियों का खतरा घटाता है.

अंगूर (Grapes): इसमें रिस्वेराट्रोल और एंथोसायनिन पाए जाते हैं, जो ट्राइग्लिसराइड और कोलेस्ट्रॉल घटाकर ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखते हैं.

एवोकाडो (Avocado): इसमें हेल्दी फैट और फाइबर होता है, जो खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) घटाता और अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) को बढ़ाता है.

ब्लूबेरी और स्ट्रॉबेरी: ये एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर फल हैं, जो धमनियों में प्लाक बनने की प्रक्रिया को धीमा करते हैं और हार्ट प्रॉब्लम व टाइप 2 डायबिटीज के खतरे को कम करते हैं.

इन फलों को रोजाना अपनी डाइट में शामिल करने से दिल की सेहत मजबूत रहती है और बीमारियों का खतरा कम हो जाता है.


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Written by: Taushif

30 Sep 2025  ·  Published: 00:17 IST

क्या एलोवेरा रगड़ने से गंजापन दूर हो सकता है? जानिए सच

प्रतीकात्मक फोटो

फाइल फोटो

Aloe Vera for Hair Growth: हर कोई चाहता है कि उसके बाल लंबे, घने और चमकदार हों. इसके लिए लोग महंगे शैंपू, सीरम और ट्रीटमेंट्स तक आजमाते हैं. सोशल मीडिया पर भी कई देसी नुस्खे वायरल हैं, जिनमें सिर पर एलोवेरा जेल रगड़ना सबसे पॉपुलर है. कहा जाता है कि इससे बाल झड़ना रुकता है और नए बाल उग आते हैं. लेकिन क्या ये सच है? आइए जानते हैं.

एलोवेरा बालों के लिए फायदेमंद क्यों है?
एलोवेरा एक हरा पौधा है, जिसकी पत्तियों में ठंडी और चिपचिपी जेल होती है. इस जेल में विटामिन A, C, E, B12, जिंक और मैग्नीशियम जैसे मिनरल्स पाए जाते हैं. इसी वजह से इसका इस्तेमाल स्कैल्प की खुजली, डैंड्रफ और बालों को मुलायम बनाने के लिए किया जाता है. एलोवेरा सिर को ठंडक और पोषण देता है, जिससे बाल स्वस्थ दिखते हैं.

क्या एलोवेरा से दोबारा बाल उग सकते हैं?
अब तक की किसी भी रिसर्च ने ये साबित नहीं किया है कि एलोवेरा रगड़ने से गंजेपन की जगह बाल दोबारा उग आते हैं. एलोवेरा बालों की जड़ों को मजबूत करता है और स्कैल्प हेल्थ को बेहतर बनाता है, जिससे हेयर ग्रोथ को सपोर्ट तो मिलता है, लेकिन यह कोई जादुई उपाय नहीं है जो गंजापन खत्म कर दे.

कैसे लगाएं एलोवेरा जेल?

ताजी एलोवेरा पत्ती काटकर उसका जेल निकाल लें.

सिर की स्कैल्प पर हल्के हाथों से 5 मिनट मसाज करें.

इसे 30–45 मिनट तक रहने दें.

फिर हल्के शैंपू से धो लें.

हफ्ते में 2-3 बार यह उपाय दोहराएं.

धीरे-धीरे बालों में चमक और मुलायमपन नजर आने लगेगा.

सावधानियां ज़रूर बरतें

एलोवेरा सबकी स्किन के लिए सूटेबल नहीं होता, इसलिए पहले पैच टेस्ट करें.

अगर आप किसी मेडिकल हेयर ट्रीटमेंट (जैसे मिनॉक्सिडिल) पर हैं, तो डॉक्टर की सलाह जरूर लें.

याद रखें, बालों की ग्रोथ में डाइट, हेल्थ और जेनेटिक्स का भी बड़ा रोल होता है.

नोटे:-  एलोवेरा सिर की स्किन को ठंडक देता है, खुजली और डैंड्रफ को कम करता है और बालों को स्मूद बनाता है. लेकिन सिर्फ एलोवेरा से गंजापन दूर नहीं हो सकता. ये एक सस्ता और असरदार नेचुरल हेयर केयर उपाय जरूर है, मगर कोई चमत्कार नहीं है.


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Written by: Taushif

05 Nov 2025  ·  Published: 10:49 IST

अल्सर को एसिडिटी समझकर न करें नजरअंदाज़, शुरुआती लक्षण पहचानें और सही खानपान से पाएं राहत

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Ulcer Early Symptoms: अक्सर लोग पेट में जलन या खट्टी डकारों को साधारण एसिडिटी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यही लक्षण आगे चलकर अल्सर का कारण बन सकते हैं. बार-बार जलन, गैस, पेट दर्द, भूख कम लगना या वजन घटना जैसे संकेतों को हल्का नहीं लेना चाहिए. अल्सर शरीर के कई हिस्सों, जैसे मुंह, पेट या आंतों में बन सकता है, लेकिन सबसे ज्यादा इसके मामले आमाशय और आंतों में पाए जाते हैं.

जब पेट में बनने वाला तेज़ अम्ल पेट की भीतरी दीवारों को नुकसान पहुंचाने लगता है, तो वहां घाव बन जाता है। यह एसिड इतना प्रबल होता है कि लोहे की ब्लेड को भी गलाने की क्षमता रखता है, इसलिए यह पेट के ऊतकों पर गंभीर असर डाल सकता है.

अल्सर क्यों होता है?
गलत खानपान अल्सर का सबसे बड़ा कारण माना जाता है. ज्यादा चाय-कॉफी, तला-भुना और मसालेदार खाना, शराब, खट्टे खाद्य पदार्थ और तनाव, गुस्सा व चिंता शरीर में अम्ल बढ़ाते हैं. जब पेट में एसिड आवश्यकता से अधिक बनने लगता है, तो यह पेट की दीवारों को नुकसान पहुँचाकर अल्सर बना देता है. शुरुआती चरण में पेट में जलन, गैस, खट्टी डकारें और दर्द दिखाई देता है. स्थिति बिगड़ने पर छाती में जलन, उल्टी, पाचन गड़बड़ होना और कई बार मल में खून आने तक की समस्या हो सकती है. समय पर ध्यान न दिया जाए तो रोग गंभीर हो सकता है.

कैसे करें अल्सर से राहत?
अल्सर सही आहार और जीवनशैली अपनाने से काफी हद तक ठीक हो सकता है. कुछ प्राकृतिक उपाय पेट की जलन और घाव भरने में बेहद कारगर हैं. पत्ता गोभी और गाजर का जूस पेट की सूजन कम करता है, जबकि गाय का दूध और घी अम्लता को शांत करते हैं. हल्दी वाला दूध, बादाम का दूध और नारियल पानी पेट को आराम देते हैं. मुलेठी पेट की परत की सुरक्षा और हीलिंग में मदद करती है. अल्सर में छाछ, हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन, कच्चे केले की सब्जी, पालक और जवारों का रस बेहद लाभकारी है. इन्हें नियमित आहार में शामिल करना फायदेमंद रहता है.

इन चीजों से बचें
अल्सर से बचने और उसे नियंत्रित करने के लिए कुछ चीजों से दूर रहना बेहद जरूरी है. मैदा, जंक फूड, चाय-कॉफी, सोडा और शराब पेट में अम्ल बढ़ाते हैं और अल्सर को और खराब कर सकते हैं. इनका सेवन पूरी तरह से सीमित या बंद करना चाहिए. बेहतर पाचन के लिए हर दो घंटे में थोड़ा-थोड़ा खाना फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि इससे पेट पर दबाव कम पड़ता है. इसके साथ ही तनाव कम करना, समय पर भोजन लेना और पूरी नींद लेना अल्सर के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. सही दिनचर्या अपनाने से पेट की सेहत तेजी से सुधरती है.
 


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Written by: Taushif

19 Nov 2025  ·  Published: 14:51 IST

स्किन को चमकदार और गठिया जैसी बीमारियों को दूर में कारगर ये 'सुपरफ्रूट'

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Benefits of Figs: अंजीर एक खास और पौष्टिक ड्राई फ्रूट है, जो सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इसमें विटामिन, मिनरल्स, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। अंजीर का रोजाना सेवन करने से शरीर को कई बीमारियों से लड़ने की ताकत मिलती है। यह त्वचा को चमकदार और स्वस्थ बनाता है, पाचन क्रिया को बेहतर करता है और शरीर की इम्यूनिटी को भी मजबूत बनाता है।

भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने भी अंजीर को ‘सुपरफ्रूट’ बताया है। मंत्रालय के अनुसार अंजीर रोज खाने से गठिया, लकवा और पेशाब में जलन जैसी समस्याओं में राहत मिलती है। यह शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है और ताकत बढ़ाता है।

अंजीर में पोटेशियम, कैल्शियम, फॉस्फोरस और मैग्नीशियम जैसे खनिज होते हैं जो हड्डियों को मजबूत बनाते हैं और दिल को स्वस्थ रखते हैं। पोटेशियम ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करता है जबकि कैल्शियम हड्डियों के लिए फायदेमंद होता है।

हेल्थ एक्सपर्ट्स बताते हैं कि अंजीर को रात में पानी में भिगोकर सुबह खाली पेट खाना सबसे अच्छा तरीका है। इससे पाचन तंत्र मजबूत होता है, मेटाबॉलिज्म बढ़ता है और वजन घटाने में भी मदद मिलती है। अंजीर का पानी पीना भी लाभकारी होता है क्योंकि यह शरीर की चर्बी कम करने की प्रक्रिया को तेज करता है।

इसमें मौजूद फाइबर पेट की समस्याओं जैसे कब्ज या गैस में राहत देता है। साथ ही यह लंबे समय तक पेट भरा हुआ रखने में मदद करता है, जिससे अधिक खाने की इच्छा नहीं होती और वजन भी नियंत्रित रहता है।

अंजीर में विटामिन सी होता है, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। इसमें कार्बोहाइड्रेट और नेचुरल शुगर भी होता है, जो शरीर को ऊर्जा देता है। हालांकि, डायबिटीज के मरीजों को अंजीर का सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए क्योंकि इसमें नैचुरल शुगर होती है।

कुल मिलाकर, अंजीर एक स्वादिष्ट और सेहतमंद फल है जिसे नियमित रूप से खाने से शरीर को कई तरह के फायदे मिलते हैं। यह एक आसान, सस्ता और असरदार तरीका है अपने स्वास्थ्य को बेहतर बनाने का।


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Written by: Taushif

27 Jul 2025  ·  Published: 05:11 IST