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मोटापे और बेली फैट से परेशान? आज़माएं मेथी दाना का यह नुस्खा

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फाइल फोटो

Fenugreek Seeds for Belly Fat: तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ-साथ लोगों की जीवनशैली भी बदल रही है. लंबे समय तक ऑफिस में बैठे रहना, कम फिजिकल एक्टिविटी और असंतुलित खान-पान ने मोटापे और उससे जुड़ी बीमारियों को तेज़ी से बढ़ाया है. इनमें सबसे बड़ी चिंता का कारण पेट की चर्बी या एब्डॉमिनल फैट है, जिसे विसरल फैट भी कहा जाता है. यह चर्बी पेट के अंगों को घेरकर उनके कामकाज को प्रभावित करती है और व्यक्ति में हार्ट डिज़ीज़, डायबिटीज़ और अन्य क्रॉनिक बीमारियों का खतरा बढ़ाती है.

डाइट और लाइफस्टाइल में बदलाव जरूरी
हार्वर्ड हेल्थ की रिपोर्ट बताती है कि पेट की चर्बी कम करना आसान नहीं होता, लेकिन सही आहार और नियमित व्यायाम से इसे घटाया जा सकता है. हेल्दी डाइट अपनाना, रोज़ाना कम से कम 30 मिनट वॉक, योग या किसी भी तरह की फिजिकल एक्टिविटी करना सबसे ज़रूरी कदम हैं.

मेथी दाना एक प्राकृतिक उपाय
भारतीय, ग्रीक, मिस्र और रोमन सभ्यताओं में मेथी दाना केवल मसाले के तौर पर नहीं, बल्कि औषधीय गुणों के लिए भी इस्तेमाल होता रहा है. आज भी यह एक प्राकृतिक हर्ब के रूप में कई स्वास्थ्य समस्याओं में मददगार माना जाता है. विशेषज्ञ बताते हैं कि पेट की चर्बी कम करने में भी मेथी दाना सहायक हो सकता है.

क्यों फायदेमंद है मेथी
मेथी दाना फाइबर से भरपूर होता है, जिससे पेट लंबे समय तक भरा महसूस होता है और अनावश्यक खाने की आदत कम होती है. इसमें मौजूद घुलनशील फाइबर ‘गैलेक्टोमानन’ पाचन को बेहतर बनाता है, मेटाबॉलिज़्म तेज़ करता है और ब्लड शुगर को संतुलित रखने में मदद करता है. मेटाबॉलिज़्म बढ़ने से शरीर अतिरिक्त कैलोरी और फैट को तेज़ी से जलाता है.

कैसे करें सेवन
सबसे आसान तरीका है, एक चम्मच मेथी दाना रातभर पानी में भिगो दें. सुबह खाली पेट इस पानी को छानकर पी लें और चाहें तो भीगे हुए दाने भी खा सकते हैं. दूसरा तरीका है, मेथी के दानों को हल्का भूनकर पाउडर बना लें. आधा चम्मच पाउडर गुनगुने पानी में मिलाकर सुबह खाली पेट पीने से भी फायदा मिल सकता है. इस पाउडर को आप सूप या जूस में मिलाकर भी ले सकते हैं.

सावधानी भी जरूरी
मेथी दाना एक प्राकृतिक उपाय है लेकिन किसी भी हर्बल उपाय की तरह इसे सीमित मात्रा में ही लेना चाहिए. डायबिटीज़ या अन्य क्रॉनिक बीमारी के मरीजों को इसे अपनाने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए.


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Written by: Taushif

21 Sep 2025  ·  Published: 12:25 IST

बरसात के मौसम में क्यों बढ़ जाता है स्किन इंफेक्शंस का खतरा? जानें इनसे बचने का तरीका

प्रतीकात्मक फोटो

प्रतीकात्मक फोटो

Monsoon Skin Problems: मानसून अपने साथ सुहावनी बारिश और ठंडी हवाएँ लेकर आता है, लेकिन इस मौसम में स्किन संबंधी कई गंभीर समस्याएँ भी तेज़ी से बढ़ने लगती हैं। बढ़ती नमी और गीले कपड़े शरीर को बैक्टीरिया और फंगस के लिए आदर्श स्थान बना देते हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, मानसून में स्किन संक्रमण के मामले 40 फीसद तक बढ़ जाते हैं। सबसे आम समस्याएँ हैं. एथलीट फुट, दाद, एरिथ्रास्मा, फॉलिकुलिटिस और घमौरियाँ।

एथलीट फुट एक फंगल संक्रमण है जो गीले मोज़े या बंद जूते पहनने से होता है। इससे खुजली, स्किन फटना और पैर की उंगलियों के बीच जलन हो सकती है। इससे बचने के लिए, पैरों को हमेशा साफ़ और सूखा रखें और एंटीफंगल पाउडर लगाएँ।

दाद एक और आम फंगल संक्रमण है जो त्वचा पर गोल आकार के लाल चकत्ते के रूप में दिखाई देता है। इससे तेज़ खुजली होती है। दाद से बचने के लिए, ढीले सूती कपड़े पहनें, शरीर को सूखा रखें और संक्रमण होने पर एंटीफंगल क्रीम का इस्तेमाल करें।

एरिथ्रास्मा एक जीवाणु संक्रमण है जो बगल, कमर या उंगलियों के बीच भूरे या गुलाबी धब्बों के रूप में दिखाई देता है। इससे बचने के लिए, रोज़ाना एंटीबैक्टीरियल साबुन से नहाएँ और त्वचा की नमी को सूखने न दें।

फॉलिकुलिटिस पसीने और घर्षण के कारण बालों की जड़ों में सूजन और लाल फुंसियाँ पैदा करता है। इससे बचने के लिए एलोवेरा जेल या हल्के स्क्रब का इस्तेमाल करें।

स्किन के बंद रोमछिद्रों में पसीने के फंस जाने से घमौरियाँ होती हैं। गर्दन, छाती और पीठ पर छोटे-छोटे लाल या सफेद फुंसियाँ निकल आती हैं। इससे बचने के लिए, ढीले कपड़े पहनें, ठंडे पानी से नहाएँ और कैलामाइन लोशन लगाएँ।

नोट- अगर संक्रमण 7-14 दिनों में ठीक न हो, दर्द हो या दाने फैलने लगें, तो डॉक्टर से सलाह लें। अगर आपको मधुमेह या कमज़ोर रोग प्रतिरोधक क्षमता है, तो विशेष ध्यान रखें।


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Written by: Taushif

21 Jul 2025  ·  Published: 05:28 IST

अखरोट को भिगोकर खाने के फायदे, दिमाग से लेकर दिल तक करता है हेल्दी

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Walnut: कहा जाता है कि अगर शरीर और दिमाग को फिट रखना है तो डाइट पर खास ध्यान देना ज़रूरी है. सही खानपान न सिर्फ हमें बीमारियों से बचाता है बल्कि हमारी उम्रभर की सेहत की भी गारंटी बन सकता है. इन्हीं हेल्दी फूड्स में से एक है अखरोट (Walnut). इसे अक्सर सुपरफूड कहा जाता है, क्योंकि यह छोटे से आकार में पोषण का खजाना छुपाए बैठा है.

कई लोग अखरोट को ऐसे ही खा लेते हैं, लेकिन अगर इन्हें पानी में भिगोकर खाया जाए तो इसके फायदे और भी ज़्यादा बढ़ जाते हैं. दरअसल, अखरोट भिगोने से यह जल्दी पचता है और शरीर इसे आसानी से अवशोषित कर लेता है. आइए जानते हैं, भिगोए हुए अखरोट खाने के क्या-क्या फायदे हैं.

दिमाग को बनाता है तेज और शार्प

  • अखरोट को दिमागी सेहत के लिए बेस्ट माना जाता है। इसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड, ऐंटीऑक्सीडेंट और पॉलीफेनॉल्स पाए जाते हैं जो दिमाग की कोशिकाओं को मजबूत करते हैं.
  • यह याददाश्त बेहतर करने में मदद करता है.
  • ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करता है, जिससे अल्जाइमर और पार्किंसन जैसी बीमारियों से बचाव होता है.
  • बच्चों और स्टूडेंट्स के लिए तो यह ‘ब्रेन फूड’ साबित हो सकता है.

दिल को रखता है हेल्दी

  • आजकल दिल की बीमारियां बहुत तेज़ी से बढ़ रही हैं. ऐसे में रोज़ाना कुछ अखरोट खाना दिल के लिए फायदेमंद है.
  • अखरोट बुरे कोलेस्ट्रॉल (LDL) को घटाते हैं और अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) को बढ़ाते हैं.
  • इसमें मौजूद पॉलीअनसैचुरेटेड फैट्स और ओमेगा-3 शरीर की सूजन को कम करते हैं.
  • इससे ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और हार्ट अटैक व स्ट्रोक का खतरा कम होता है.

डाइजेशन और गट हेल्थ को मजबूत करता है?

  • कई लोगों को अखरोट खाने से गैस या पचने में दिक्कत होती है. यही वजह है कि इसे पानी में भिगोकर खाने की सलाह दी जाती है.
  • भिगोने से अखरोट में मौजूद फाइटिक एसिड और टैनीन कम हो जाते हैं.
  • इससे इसे पचाना आसान हो जाता है और शरीर ज़रूरी पोषक तत्व आसानी से सोख लेता है.
  • इसमें मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है और कब्ज जैसी समस्या से बचाता है.
  • गट हेल्थ अच्छी होने पर इम्यूनिटी भी मजबूत होती है.

वजन घटाने में मददगार

  • भले ही अखरोट में कैलोरी ज्यादा होती है, लेकिन ये वजन कंट्रोल करने में काफी असरदार साबित हो सकता है.
  • इसमें मौजूद प्रोटीन और फाइबर लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराते हैं.
  • इससे बार-बार स्नैकिंग की आदत कम होती है और कुल कैलोरी इनटेक घट जाता है.
  • अगर आप डाइटिंग कर रहे हैं, तो सुबह खाली पेट 2-3 भिगोए हुए अखरोट खाना आपके वजन घटाने की जर्नी को आसान बना सकता है.

स्किन को बनाए ग्लोइंग और हेल्दी

  • अखरोट केवल दिमाग और दिल के लिए ही नहीं, बल्कि आपकी स्किन के लिए भी बेस्ट सुपरफूड है.
  • इसमें मौजूद विटामिन E और ऐंटीऑक्सीडेंट्स फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं.
  • इससे समय से पहले झुर्रियां और बुढ़ापे के लक्षण नहीं आते.
  • ओमेगा-3 फैटी एसिड स्किन को हाइड्रेटेड और सॉफ्ट रखते हैं.
  • रोज़ाना अखरोट खाने से चेहरा हेल्दी और नेचुरली ग्लोइंग दिखता है.

कब और कैसे खाएं अखरोट?

  • रात में सोने से पहले 3-4 अखरोट पानी में भिगो दें.
  • सुबह खाली पेट इन्हें खाएं.
  • चाहें तो इन्हें शहद के साथ भी ले सकते हैं.
  • दिनभर में 4-5 अखरोट से ज्यादा खाने की ज़रूरत नहीं है.

किन्हें नहीं खाना चाहिए अखरोट?

  • जिन्हें नट्स से एलर्जी है, वे अखरोट से परहेज़ करें.
  • डायबिटीज़ और ब्लड प्रेशर के मरीज डॉक्टर से सलाह लेकर ही इन्हें डाइट में शामिल करें.
  • ज़्यादा मात्रा में खाने से गैस या अपच हो सकता है.

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Written by: Taushif

25 Aug 2025  ·  Published: 12:25 IST

सर्दियों में कम पानी पीना पड़ सकता है भारी, जानें कौन-कौन सी बीमारियों का बढ़ जाता है खतरा

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Winter Dehydration Risks: सर्दियां शुरू होते ही शरीर की प्यास अपने आप कम होने लगती है. ठंड की वजह से लोग पानी पीना भूल जाते हैं या ठंडे पानी के डर से बहुत कम पानी पीते हैं. लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदत लंबे समय में शरीर को नुकसान पहुंचा सकती है. खासतौर पर यदि कोई व्यक्ति रोज़ 500 मिली लीटर से भी कम पानी पी रहा है, तो उसे कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा हो सकता है. आइए जानें कम पानी पीने से शरीर पर कैसा असर पड़ता है.

1. किडनी की फिल्टरेशन क्षमता कम होना
बहुत कम पानी पीने से किडनी को शरीर के अपशिष्ट पदार्थ निकालने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. इससे यूरिन गाढ़ा हो जाता है और शरीर में टॉक्सिन जमा होने लगते हैं. यह स्थिति आगे चलकर किडनी को नुकसान पहुंचा सकती है.

2. दिमाग तक ऑक्सीजन की कमी
कम पानी पीने से ब्लड वॉल्यूम घटता है, जिससे दिमाग तक पहुंचने वाली ऑक्सीजन भी कम हो जाती है. इसका असर फोकस, मूड और ऊर्जा पर पड़ता है. व्यक्ति को चिड़चिड़ापन, थकान और ध्यान की कमी का अनुभव हो सकता है.

3. मसल्स का थकना और दर्द बढ़ना
पानी शरीर की मसल्स को ऊर्जा देता है. कम पानी पीने पर मसल्स कमजोर महसूस होने लगते हैं. थोड़ी-सी मेहनत में थकावट आ जाती है और मसल्स सोरनेस बढ़ सकती है.

4. डाइजेशन धीमा होना
पानी पाचन प्रक्रिया में बड़ा रोल निभाता है. यदि शरीर में पानी की कमी हो जाए तो खाना पचने में दिक्कत आती है. इससे कब्ज, गैस और अपच जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं. भूख भी कम लगने लगती है.

5. लंबे समय में कई क्रॉनिक बीमारियों का खतरा
लगातार कम पानी पीने से शरीर पर स्ट्रेस बढ़ता है. यूरिन का रंग गहरा हो जाता है, किडनी की फिल्टरेशन रेट धीमी हो जाती है और शरीर का तापमान नियंत्रित करने की क्षमता भी प्रभावित होती है. लंबे समय में यह आदत किडनी, दिल और ब्रेन से जुड़ी गंभीर बीमारियों की वजह बन सकती है.

कैसे बचें?
सर्दियों में भी दिनभर 6–8 गिलास पानी जरूर पिएं. गरम पानी या हर्बल चाय का सेवन बढ़ाएं. प्यास न लगे तब भी थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पानी पीते रहें.


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Written by: Taushif

18 Nov 2025  ·  Published: 11:29 IST