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Mustard Oil For Hair Growth: एक समय था जब घरों में बालों की देखभाल के लिए सबसे पहला नाम सरसों के तेल का लिया जाता था. नानी-दादी के नुस्खों में यह गाढ़ा और तेज़ महक वाला तेल हमेशा शामिल होता था. सरसों का तेल सिर की त्वचा को हल्की गर्माहट देता है और बालों की जड़ों को मज़बूत बनाता है. यही वजह है कि सदियों से यह पतले और कमजोर बालों को जीवन देने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है.
आज भी अगर सरसों के तेल को रसोई में रखी कुछ दूसरी चीज़ों के साथ मिलाकर इस्तेमाल किया जाए तो इसका असर कई गुना बढ़ जाता है. हम आपको ऐसे ही 5 आसान और असरदार घरेलू नुस्खे बता रहे हैं, जिनकी मदद से बालों का झड़ना कम होगा, जड़ें मजबूत होंगी और नए बाल भी उगने लगेंगे.
1. प्याज का रस और सरसों का तेल
प्याज की तेज़ गंध भले ही सबको पसंद न आए, लेकिन बालों के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है. प्याज में मौजूद सल्फर कोलाजेन प्रोडक्शन को बढ़ाता है और बालों के फॉलिकल्स को सक्रिय करता है. इसके लिए प्याज का रस और हल्का गर्म सरसों का तेल बराबर मात्रा में मिलाएं. इस मिश्रण को सिर पर लगाकर 30-40 मिनट छोड़ दें और फिर धो लें. नियमित इस्तेमाल से बाल मजबूत होते हैं और नए बाल उगने लगते हैं.
2. मेथी के दाने और सरसों का तेल
मेथी में प्रोटीन और निकोटिनिक एसिड प्रचुर मात्रा में होता है, जो बालों की जड़ों को पोषण देता है. इसके लिए मेथी के दाने रातभर पानी में भिगोकर पेस्ट बना लें और उसमें सरसों का तेल मिलाकर सिर पर लगाएं. 45 मिनट बाद बाल धो लें. यह मास्क बालों के झड़ने को कम करता है और उन्हें मजबूत बनाता है.
3. एलोवेरा और सरसों का तेल
एलोवेरा सिर की स्किन को ठंडक और आराम देता है, जबकि सरसों का तेल गर्माहट और स्टिम्युलेशन प्रदान करता है. दोनों मिलकर सिर की त्वचा की इंफ्लेमेशन कम करते हैं, रूसी हटाते हैं और बालों के विकास में मदद करते हैं. ताजा एलोवेरा जेल सरसों के तेल में मिलाएं, हल्के हाथों से मालिश करें और 30 मिनट बाद धो लें.
4. करी पत्ता और सरसों का तेल
करी पत्ते एंटीऑक्सीडेंट्स और बीटा-कैरोटीन से भरपूर होते हैं. ये बालों के विकास को बढ़ावा देने के साथ सफेद बालों की समस्या को भी कम करते हैं. इसके लिए सरसों के तेल में करी पत्ते भूनकर तेल तैयार करें और हफ्ते में दो बार सिर पर मालिश करें. यह बालों को घना और मजबूत बनाएगा.
5. गुड़हल (हिबिस्कस) और सरसों का तेल
गुड़हल के फूल और पत्ते बालों के लिए बेहद फायदेमंद माने जाते हैं. यह बालों में केराटिन उत्पादन को बढ़ावा देते हैं, जिससे बाल घने और चमकदार बनते हैं. गुड़हल को पीसकर सरसों के तेल में मिलाएं और स्कैल्प पर लगाएं. 40-45 मिनट बाद धो लें. नियमित इस्तेमाल से बालों का झड़ना कम होगा और उनमें प्राकृतिक चमक लौट आएगी.
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Kidney Disease Symptoms: किडनी हमारे शरीर का एक बहुत जरूरी अंग है, जो शरीर से वेस्ट मटेरियल और टॉक्सिन्स को बाहर निकालने का काम करती है. यह इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बनाए रखती है और शरीर के मेटाबॉलिज्म को सपोर्ट करती है. लेकिन जब किडनी कमजोर होने लगती है, तो इसका असर सिर्फ शरीर के अंदर ही नहीं बल्कि बाहर भी दिखाई देता है. जैसे कि बालों का झड़ना, पतलापन या गंजापन.
किडनी खराब होने पर क्यों झड़ते हैं बाल
किडनी की खराबी से शरीर में यूरिया और क्रिएटिनिन जैसे अपशिष्ट पदार्थ खून में बढ़ जाते हैं. यह टॉक्सिन्स बालों की जड़ों यानी हेयर फॉलिकल्स को कमजोर कर देते हैं. जब पोषक तत्वों का संतुलन बिगड़ता है, तो बालों को जरूरी विटामिन और मिनरल नहीं मिल पाते, जिससे हेयर ग्रोथ रुक जाती है और बाल झड़ने लगते हैं.
एनीमिया और हार्मोनल असंतुलन भी वजह
किडनी की बीमारी से शरीर में एनीमिया (खून की कमी) हो जाती है, जिससे ऑक्सीजन की सप्लाई बालों की जड़ों तक नहीं पहुंच पाती. इसके अलावा, विटामिन D, जिंक और पैराथाइरॉइड हार्मोन के स्तर में असंतुलन भी बालों को कमजोर कर देता है. कई बार क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) से पीड़ित मरीजों को बालों के रूखेपन, टूटने या गंजेपन जैसी समस्याएं भी होती हैं.
डायलिसिस और दवाएं बढ़ा सकती हैं दिक्कत
किडनी रोगियों को दी जाने वाली कुछ दवाएं या डायलिसिस ट्रीटमेंट भी हेयर लॉस बढ़ा सकते हैं. डॉक्टर आमतौर पर ऐसे मरीजों को पोषक तत्वों की निगरानी और सॉफ्ट हेयर केयर रूटीन अपनाने की सलाह देते हैं.
टेलोजन एफ्लुवियम का खतरा
किडनी की बीमारी से शरीर पर पड़ने वाला तनाव एक और स्थिति टेलोजन एफ्लुवियम (Telogen Effluvium) को जन्म दे सकता है. इसमें बालों का एक बड़ा हिस्सा ग्रोथ साइकिल से बाहर हो जाता है, जिससे अचानक हेयरफॉल बढ़ जाता है.
बाल झड़ना हो सकता है बीमारी का संकेत
अगर किसी व्यक्ति के बाल अचानक बहुत झड़ने लगें, तो इसे केवल सामान्य हेयरफॉल समझकर अनदेखा नहीं करना चाहिए. यह किडनी या अन्य गंभीर बीमारियों का संकेत भी हो सकता है. ऐसे में तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.
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Lung Cancer: जब फेफड़ों के कैंसर की बात आती है, तो लोग अक्सर इसे धूम्रपान से जोड़ते हैं। लेकिन हाल के वर्षों में, एक आश्चर्यजनक प्रवृत्ति सामने आई है. अब बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी फेफड़ों के कैंसर का शिकार हो रहे हैं जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया। अमेरिकन कैंसर सोसाइटी के अनुसार, अमेरिका में फेफड़ों के कैंसर के 20 फीसद मामले ऐसे हैं जिनका धूम्रपान से कोई संबंध नहीं था। कुछ एशियाई देशों में, यह आंकड़ा 50 फीसद तक पहुंच गया है, खासकर महिलाओं में।
इस बदलाव के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं, जिनमें सबसे प्रमुख है वायु प्रदूषण। PM2.5 जैसे सूक्ष्म कण, जो सांस के साथ शरीर में प्रवेश करते हैं, फेफड़ों के ऊतकों को नुकसान पहुंचाकर कैंसर के खतरे को बढ़ाते हैं। लंबे समय तक इनके संपर्क में रहने से इस बीमारी के होने का खतरा बहुत बढ़ जाता है। एक अन्य महत्वपूर्ण कारण रेडॉन गैस है, जो मिट्टी और चट्टानों में मौजूद यूरेनियम के टूटने से निकलती है। यह गैस घरों की दीवारों या फर्श की दरारों से प्रवेश कर सकती है और लंबे समय तक इसके संपर्क में रहना फेफड़ों के लिए घातक है।
इसके अलावा, ह्यूमन पेपिलोमावायरस (HPV) और एपस्टीन-बार वायरस (EBV) जैसे वायरस भी इस कैंसर का कारण बन सकते हैं। एक और अहम कारण है सेकेंड हैंड स्मोकिंग, यानी अगर कोई व्यक्ति धूम्रपान नहीं करता, लेकिन ऐसे माहौल में रहता है जहां लोग सिगरेट पीते हैं, तो वह भी इस बीमारी का शिकार हो सकता है। कुछ मामलों में यह बीमारी वंशानुगत यानी जेनेटिक कारणों से भी होती है। वहीं, गांवों या गरीब इलाकों में लकड़ी, गोबर या कोयले से खाना पकाते समय निकलने वाला धुआं भी महिलाओं में इस बीमारी का एक बड़ा कारण है।
यह स्थिति चिकित्सा विज्ञान के लिए भी एक चुनौती है, क्योंकि इससे पता चलता है कि फेफड़ों का कैंसर अब सिर्फ़ धूम्रपान से जुड़ी बीमारी नहीं रह गई है। समय पर जांच, जागरूकता और स्वच्छ वातावरण इस बीमारी को रोकने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
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Detox Herbs: शरीर में जब गंदगी जमा होती है तो उसका असर सीधे डाइजेशन, स्किन और एनर्जी लेवल पर दिखने लगता है. थकान, मुंहासे , पेट में भारीपन या सुस्ती, ये सब इसी की निशानी हैं. डिटॉक्स के लिए लोग महंगे ग्रीन जूस या सप्लीमेंट्स लेते हैं, लेकिन असली सफाई तभी होती है जब आंतें और लिवर ठीक से काम करें. इसका आसान उपाय आपके किचन में ही छिपा है. चार ऐसे पत्तों में, जो शरीर को भीतर से साफ कर देते हैं. आइए जानते हैं कौन से हैं ये 4 पत्ते और इस्तेमाल कैसे करें.
1. सेना पत्ता (Senna Leaf)
सेना पत्ता सबसे असरदार डिटॉक्स माना जाता है. यह आंतों की मसल्स को एक्टिव करता है और पुरानी जमा गंदगी को बाहर निकालता है. कब्ज या सख्त स्टूल की समस्या वाले लोगों के लिए यह बेहद फायदेमंद है. सबसे पहले आधा चम्मच सेना पाउडर में थोड़ा काला नमक मिलाकर रात को गर्म पानी के साथ लें. साथ ही इसका सेवन हफ्ते में 1-2 बार ही करें, क्योंकि ज्यादा लेने से आदत बन सकती है.
2. नीम की पत्तियां (Neem Leaves)
नीम की पत्तियां शरीर से बैक्टीरिया और टॉक्सिन्स को बाहर करती हैं. यह पेट में संक्रमण, माउथ अल्सर, फूड पॉइजनिंग और स्किन प्रॉब्लम्स में मददगार है. सबसे पहले सुबह खाली पेट कुछ नीम की पत्तियां चबाएं या नीम कैप्सूल लें. इसके बाद पेट की सफाई के साथ-साथ त्वचा भी साफ और चमकदार रहती है.
3. करी पत्ता (Curry Leaves)
करी पत्ता लिवर को एक्टिव करता है और बाइल प्रोडक्शन बढ़ाता है, जिससे पाचन बेहतर होता है. यह फैटी लिवर और पेट के आसपास जमा फैट को घटाने में मदद करता है. करी पत्ते को चबाकर या उसका पाउडर गर्म पानी के साथ रात को सोने से पहले लें.
4. पुदीना (Mint Leaves)
पुदीना पेट की मसल्स को रिलैक्स करता है, गैस और ब्लोटिंग को कम करता है और पेट की जलन को शांत करता है. यह इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (IBS) जैसी समस्याओं में भी असरदार है. सबसे पहले रात को सोने से पहले पुदीने की चाय पीएं. इसके बाद पेट ठंडा रहता है और नींद भी अच्छी आती है.