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Navratri Vrat Recipe: शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व आज से शुरू हो चुका है. नौ दिनों तक देवी दुर्गा की पूजा-अर्चना की जाती है और भक्त व्रत रखते हैं. व्रत के दौरान हल्के और हेल्दी स्नैक्स की तलाश हर किसी को रहती है. ऐसा ही एक नाश्ता है कच्चे केले के कटलेट, जो स्वादिष्ट होने के साथ-साथ सेहतमंद भी है.
कच्चे केले के कटलेट बनाने के लिए सामग्री
3-4 कच्चे केले
2-3 उबले आलू
स्वादानुसार नमक और काली मिर्च
2 बड़े चम्मच कटा हुआ ताजा हरा धनिया
2 हरी मिर्च (बारीक कटी)
तेल (ग्रीस करने और तलने के लिए)
बनाने का तरीका
सबसे पहले आलू को अच्छी तरह उबालकर छील लें और मैश करें. इसमें नमक, काली मिर्च, हरी मिर्च और हरा धनिया मिलाकर मसालेदार मिक्स तैयार कर लें. अब कच्चे केलों को उबालें. उबलने के बाद छीलकर मैश करें और स्वादानुसार नमक, काली मिर्च डालें. तेल लगे हाथों से आलू के मिक्स की छोटी-छोटी गोलियां बना लें.
मैश किए हुए केले का थोड़ा हिस्सा लें, उसे हल्का चपटा करें. बीच में आलू की गोली रखकर किनारे बंद कर टिक्की जैसा आकार दें. कड़ाही में तेल गरम करें और कटलेट को दोनों तरफ से गोल्डन और क्रिस्पी होने तक तलें. फिर एक्स्ट्रा तेल सोखने के लिए पेपर टॉवल पर रख दें. इन कटलेट्स को आप दही या हरी चटनी के साथ सर्व कर सकते हैं. व्रत में यह एक स्वादिष्ट और हेल्दी स्नैक है, जिसे बनाना बेहद आसान है.
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दिवाली के बाद से दिल्ली-NCR और आसपास के इलाकों में हवा की गुणवत्ता लगातार गिरती जा रही है. पराली जलाने, धूल, धुआं और मौसम में ठहराव के कारण प्रदूषण का स्तर बेहद बढ़ गया है. हवा में मौजूद जहरीले कणों से सांस लेने में दिक्कत, खांसी, एलर्जी और सीने में जलन जैसी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं. अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है.
क्या अब सुबह की सैर बंद करनी चाहिए?
डॉक्टरों का कहना है कि इस समय दिल्ली-NCR की हवा बेहद खराब है, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और दिल या फेफड़े के मरीजों के लिए. ऐसे में सुबह-सुबह टहलने जाना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है. दरअसल, सुबह के वक्त हवा में नमी और ठंडक ज्यादा होती है, जिससे प्रदूषण के कण नीचे जमा रहते हैं. ऐसे में जो लोग ताजी हवा समझकर मॉर्निंग वॉक पर निकलते हैं, वे वास्तव में प्रदूषित हवा में सांस ले रहे होते हैं.
क्या रात में टहलना सुरक्षित है?
शाम या रात के समय भी टहलना बहुत सुरक्षित नहीं है. रात को तापमान गिरने से धुंध बनती है और हवा में मौजूद धूल व प्रदूषक तत्व नीचे आ जाते हैं. इससे सांस की परेशानी बढ़ सकती है. डॉक्टर सलाह देते हैं कि इस दौरान सुबह और शाम के वक्त बाहर निकलने से बचें और घर के दरवाजे-खिड़कियां बंद रखें.
वॉक का सही समय क्या है?
अगर आप अपने वॉक का रूटीन नहीं छोड़ सकते, तो कोशिश करें कि लेट मॉर्निंग यानी सुबह 8-9 बजे के बाद टहलने जाएं. इस समय सूरज की रोशनी प्रदूषण को थोड़ा कम करती है और हवा कुछ साफ हो जाती है. बाहर निकलते समय N95 या FFP2 मास्क जरूर पहनें ताकि हानिकारक कणों से फेफड़े सुरक्षित रहें.
सेहत के लिए अपनाएं ये उपाय
सुबह और शाम खिड़कियां बंद रखें
घर में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें
घर के अंदर योग या हल्की एक्सरसाइज करें
गले में जलन, सीने में जकड़न या थकान महसूस होने पर डॉक्टर से तुरंत सलाह लें
वायु प्रदूषण का असर सिर्फ बाहर नहीं, बल्कि शरीर के अंदर भी होता है. इसलिए इस मौसम में अपनी सेहत को लेकर ज्यादा सतर्क रहें.
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Fennel Water Benefits: सुबह का दिन अगर हेल्दी शुरुआत के साथ हो, तो पूरे दिन शरीर और दिमाग बेहतर महसूस करता है. आयुर्वेद में एक आसान लेकिन असरदार आदत बताई गई है. सुबह खाली पेट सौंफ का पानी पीना. यह न सिर्फ पाचन और मेटाबॉलिज्म को दुरुस्त करता है, बल्कि शरीर से टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में भी मदद करता है, जैसे शरीर खुद को डिटॉक्स कर रहा हो.
ज़्यादातर लोग सौंफ को ठंडी तासीर वाली मानते हैं, लेकिन आयुर्वेद के मुताबिक इसकी तासीर गर्म होती है. इसका मतलब यह पाचन अग्नि (डाइजेस्टिव फायर) को बढ़ाती है, जबकि शरीर के बाहरी हिस्से को ठंडक देती है. यही वजह है कि लोग इसे ठंडा मान लेते हैं, लेकिन वास्तव में यह पाचन सुधारने और डिटॉक्सिफिकेशन में मदद करती है.
सौंफ गैस, ब्लोटिंग, एसिडिटी और कब्ज के लिए रामबाण है. इसे खाने के बाद चबाने या सुबह खाली पेट पानी के रूप में पीने से पाचन तंत्र मजबूत होता है और शरीर से हानिकारक तत्व (टॉक्सिन्स) बाहर निकलते हैं.
आयुर्वेद के मुताबिक सौंफ वजन कम करने में भी फायदेमंद है. यह मेटाबॉलिज्म को तेज करती है, भूख पर कंट्रोल रखती है और ब्लोटिंग कम करती है. अगर आप इसे रोजाना लें, तो 2-3 हफ्तों में असर दिख सकता है.
सौंफ महिलाओं के लिए भी बेहद फायदेमंद है. यह ब्रेस्ट मिल्क बढ़ाने, पीरियड्स के दर्द में राहत देने और हार्मोन बैलेंस बनाए रखने में मदद करती है. इसे त्रिदोषिक हर्ब कहा जाता है, यानी यह शरीर के तीनों दोष, वात, पित्त और कफ को संतुलित रखती है.
वैज्ञानिक शोध भी सौंफ के फायदे मानते हैं. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर में ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस को कम करते हैं, जिससे कोशिकाओं को नुकसान से बचाया जा सकता है. इससे डायबिटीज, हार्ट डिजीज और यहां तक कि कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा भी घटता है. यह आईबीएस (इर्रेगुलर बाउल सिंड्रोम) के मरीजों के लिए भी राहतदायक है.
भिगोकर पीना – रात में 1-2 चम्मच सौंफ पानी में भिगो दें और सुबह खाली पेट पिएं.
उबालकर पीना – सौंफ को हल्का कूटकर 2 कप पानी में उबालें, आधा रह जाने पर छानकर गर्म पी लें.
सुबह खाली पेट पीना सबसे बेहतर है, क्योंकि यह हाइड्रेशन बढ़ाता है, पाचन अग्नि को तेज करता है और टॉक्सिन्स निकालता है.
इन स्थितियों में सौंफ का पानी पीने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.
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सर्दी की शुरुआत और दिवाली के बाद लगभग हर राज्य में वायु की गुणवत्ता में गिरावट आती है और प्रदूषण, कोहरे के साथ मिलकर लोगों को बीमार करने लगता है. ऐसे में खुद को स्वस्थ रखने के लिए आप घर में मौजूद मूंगफली के दानों और गुड़ का इस्तेमाल कर सकते हैं.
सर्दी में प्रदूषण का स्तर बढ़ने से लोगों में श्वसन संबंधी रोग, बुखार, सर्दी-जुकाम, त्वचा संबंधी रोग, हेपेटाइटिस ए और हृदय रोग की समस्या बढ़ जाती है. ऐसे मौसम में मधुमेह और अस्थमा से पीड़ित लोगों को घर से न निकलने की सलाह दी जाती है.
प्रदूषण की वजह से बच्चों से लेकर बड़े तक प्रभावित होते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि प्रदूषण की हल्की सर्दी का मौसम रोग प्रतिरक्षा प्रणाली पर असर डालता है और बार-बार बीमार होने का कारण बनता है, लेकिन घर में मौजूद मूंगफली और गुड़ प्रदूषण से होने वाली बीमारियों से बचाव के साथ-साथ सर्दी से होने वाली बीमारियों से भी बचाएंगे. इसके लिए सुबह की शुरुआत मूंगफली के नाश्ते से करें.
इसे बनाने के लिए भुनी हुई मूंगफली, गुड़ और इलायची को मिलाकर छोटे-छोटे लड्डू बना लें और रोज सुबह इनका सेवन करें. मूंगफली में प्रोटीन, वसा, फाइबर, विटामिन और खनिज होते हैं, जो हृदय का संचालन अच्छे से करते हैं, शरीर को गर्म रखते हैं, और पाचन प्रबंधन में मदद करते हैं. गुड़ में मैग्नीशियम, आयरन, पोटैशियम, कैल्शियम, कार्बोहाइड्रेट और विटामिन बी 6 होता है, जो पाचन को अच्छा रखते हैं, रोग प्रतिरोधक प्रणाली को मजबूत बनाते हैं, शरीर से विषैले पदार्थों को निकालने में मदद करते हैं और शरीर में खून की कमी को पूरा करते हैं.
इलायची में एंटीऑक्सीडेंट, जिंक और सेलेनियम, कैल्शियम, पोटैशियम, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट और एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं, जो नींद लाने में सहायक होते हैं, पाचन को अच्छा बनाते हैं, पेट की गर्मी को शांत करते हैं, दिल की बीमारियों के जोखिम को कम करते हैं और संक्रमण से भी बचाते हैं.
मूंगफली का नाश्ता (वेरकादलाई उरुंडई) दक्षिण भारत का नाश्ता है, जिसे सर्दी की शुरुआत में ही खाया जाता है. ये एक पारंपरिक मीठी डिश है, जिसे दक्षिण में दवा की तरह भी प्रयोग किया जाता है. खास बात ये है कि व्यंजन को बड़े से लेकर बच्चे तक खा सकते हैं. बच्चों के लिए लड्डू की मात्रा कम रखें, जबकि बड़े ज्यादा मात्रा में इसका सेवन कर सकते हैं. लड्डू का स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें सफेद तिल का इस्तेमाल भी कर सकते हैं.