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UNGA 2025: इंडोनेशिया ने इजरायल और फिलीस्तीन दोनों के लिए शांति की अपील की

File

फाइल फोटो

Indonesia President UNGA 2025: न्यूयॉर्क में हो रही संयुक्त राष्ट्र महासभा में इस बार गाजा और फिलीस्तीन के मुद्दे पर मुस्लिम देशों का रुख बेहद सख्त दिखा। कई देशों ने इजरायल की कार्रवाई को “नरसंहार” करार दिया और दो-राष्ट्र समाधान की मांग की. इस बीच दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम आबादी वाले देश इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबिआंतो का बयान अलग और संतुलित रहा.

सुबिआंतो ने महासभा के मंच से कहा कि आज फिलीस्तीनियों को न्याय और संवैधानिक पहचान नहीं मिल पा रही है, लेकिन इसके बावजूद हमें सभी पक्षों के लिए खड़ा होना होगा. “सिर्फ शक्तिशाली होना सही नहीं होता, सही को सही होना चाहिए”. उन्होंने यह कहते हुए स्पष्ट किया कि एक स्वतंत्र फिलीस्तीन होना चाहिए, लेकिन साथ ही हमें इजरायल को भी स्वीकार करना होगा.

उन्होंने मुस्लिम देशों को आईना दिखाते हुए कहा, “इजरायल के वजूद, उसकी सुरक्षा और सम्मान को मानना ही होगा, तभी हम सच्ची शांति पा सकते हैं. अब्राहम के दो वंशजों को शांति और सद्भाव के साथ रहना होगा.” उन्होंने वादा किया कि जैसे ही इजरायल फिलीस्तीन को मान्यता देगा, इंडोनेशिया तुरंत इजरायल को मान्यता देने के लिए तैयार है.

सुबिआंतो ने संयुक्त राष्ट्र के मजबूत होने पर जोर दिया और कहा कि अगर महासभा निर्णय लेती है तो इंडोनेशिया गाजा, यूक्रेन, सुडान और लीबिया जैसे संघर्ष क्षेत्रों में 20,000 सुरक्षा बल भेजने के लिए तैयार है. उन्होंने कहा कि इंडोनेशिया सिर्फ सैनिक ही नहीं बल्कि वित्तीय मदद देकर भी दुनिया में शांति के प्रयास करेगा.

दूसरी ओर, तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगान ने गाजा में इजरायली हमलों को नरसंहार बताया और यरुशलम को साझा राजधानी बनाने की बात दोहराई. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने गाजा में भुखमरी और बमबारी को असहनीय बताते हुए मुस्लिम देशों से इजरायल के साथ रिश्ते तोड़ने का आह्वान किया. कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी ने भी गाजा हमलों की निंदा करते हुए इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) के साथ मिलकर इजरायल के खिलाफ प्रस्ताव की योजना बनाई.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस्लामिक देशों से एकजुट होने की अपील की. इस तरह UNGA में जहां ज्यादातर मुस्लिम देशों ने इजरायल पर हमलावर रुख अपनाया, वहीं इंडोनेशिया के राष्ट्रपति का बयान संतुलित रहा जिसमें उन्होंने दोनों पक्षों के लिए शांति और सुरक्षा की गारंटी पर जोर दिया.


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Bindass Bol Dil Se

Written by: Taushif

24 Sep 2025  ·  Published: 11:56 IST

यूपी के बाद कर्नाटक में 'I Love Muhammad' पोस्टर पर BJP ने काटा बवाल, कांग्रेस पर लगाए गंभीर आरोप

दावणगेरे में आई लव मुहम्मद पोस्टर को लेकर विवाद (PC-Social Media)

दावणगेरे में आई लव मुहम्मद पोस्टर को लेकर विवाद (PC-Social Media)

I Love Muhammad Row in Karnataka: कर्नाटक के दावणगेरे में लगाए गए 'I Love Muhammad' पोस्टर को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है. पोस्टर लगाने के बाद दो पक्ष आमने-सामने आ गए, जिससे इलाके में तनाव फैल गया. स्थिति बिगड़ने से पहले पुलिस को दखल देना पड़ा और हालात पर काबू पाना पड़ा. यह मामला अब राज्य की राजनीति में भी गर्म मुद्दा बन गया है.

कर्नाटक विधान परिषद में विपक्ष के नेता चलवाडी नारायणस्वामी ने इस घटना को लेकर राज्य सरकार पर सीधा हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि सिद्धारमैया सरकार एकतरफा रवैया अपनाकर माहौल बिगाड़ रही है. नारायणस्वामी ने कहा, "राज्य में जो कुछ भी हो रहा है, उसका जिम्मेदार सरकार ही है. एक समुदाय को बढ़ावा देना और दूसरे को रोकना ठीक नहीं है. सरकार को सबको समान दृष्टि से देखना चाहिए और सबको साथ लेकर चलना चाहिए."

उन्होंने राज्य के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के हालिया बयानों पर भी प्रतिक्रिया दी. नारायणस्वामी ने कहा कि अगर डीके शिवकुमार वास्तव में विकास के मुद्दों पर गंभीर हैं, तो उन्हें सिर्फ बयानबाज़ी के बजाय व्यावहारिक काम करना चाहिए. उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, "कल हमने पूरे शहर में घूम-घूमकर गड्ढे भरे. अगर डीके शिवकुमार को प्रधानमंत्री के घर के बाहर भी गड्ढे दिखते हैं, तो उन्हें खुद जाकर भरना चाहिए."

इसके साथ ही नारायणस्वामी ने बैकवर्ड क्लास कमीशन के सर्वे को भी एक सुनियोजित साज़िश बताया. उन्होंने आरोप लगाया कि इस सर्वे के पीछे कांग्रेस की साजिश है. उन्होंने कहा, "मैं खुद कमीशन के ऑफिस गया और वहां देखा कि दलित क्रिश्चियन, वोकालिगा क्रिश्चियन जैसी श्रेणियां शामिल की गई हैं. आखिर यह सब किसके इशारे पर हुआ? हमने जाकर इसे बंद करवाया. यह कांग्रेस की साजिश है और हम इसे लगातार उजागर करते रहेंगे."

कांग्रेस द्वारा बीजेपी पर लगाए गए ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर भी नारायणस्वामी ने पलटवार किया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस बेवजह मुद्दे गढ़ रही है और चुनाव से पहले भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही है. उन्होंने कहा, "जो मुद्दा असल में है ही नहीं, कांग्रेस उसी को मुद्दा बनाती है. इनकी हालत देखकर कहना मुश्किल है कि चुनाव के बाद इनका क्या होगा. हम इलेक्शन कमीशन का बचाव नहीं कर रहे हैं क्योंकि वह स्वतंत्र संस्था है, लेकिन जब कांग्रेस हमें टारगेट करती है, तो उसका जवाब देना जरूरी हो जाता है."

दावणगेरे का यह विवाद अब सिर्फ एक पोस्टर तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि यह कर्नाटक की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन चुका है. जहां एक ओर विपक्ष सरकार पर सांप्रदायिक संतुलन बिगाड़ने का आरोप लगा रहा है, वहीं कांग्रेस और उसके नेता इसे बीजेपी की राजनीति का हिस्सा बता रहे हैं. आने वाले दिनों में यह विवाद राज्य की चुनावी सियासत को और गर्म कर सकता है.

यह भी पढ़ें: सीडीएस अनिल चौहान का कार्यकाल बढ़ा, 2026 तक बने रहेंगे देश के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ


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Bindass Bol Dil Se

Written by: Raihan

26 Sep 2025  ·  Published: 01:24 IST

कांग्रेस ने किया बड़ा ऐलान, धनखड़ के इस्तीफे के बाद बदल गया संसद का सीन

NEWS UPDATE ON OPERATION SINDUR

धनखड़ एक नहीं दो महाभियोग नोटिस स्वीकार करने वाले थे? विपक्ष का दावा


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Bindass Bol Dil Se

Written by: Rajeev

22 Jul 2025  ·  Published: 15:12 IST

दारुल उलूम देवबंद का नया फतवा, कैंपस में नहीं आएंगी महिलाएं, रील्स बनाने पर रोक

दारुल उलूम

दारुल उलूम

उत्तर प्रदेश के देवबंद स्थित दारुल उलूम एक बार फिर सुर्खियों में हैं. इसके पीछे मुख्य वजह दारुम उलूम प्रबंधन की ओर से जारी नया फरमान है. दारुल उलूम ने अपने ताजा आदेश के तहत संस्थान के परिसर में महिलाओं की एंट्री रोक लगा दी है. प्रबंधन ने यह फैसला सोशल मीडिया गाइड लाइन के बार-बार उल्लंघन के कारण लिया है. 

दारुम उलूम देवबंद ने पिछले साल नवंबर में पहले के प्रतिबंध को हटा दिया था और सशर्त अपने कैंपस में महिलाओं के प्रवेश करने की इजाजत दी थी. संस्थान के इस फैसले के बाद आगंतुकों द्वारा नियमों का उल्लंघन किया गया. कैंपस में आने वाली महिलाओं ने बिना घूंघट के रील और वीडियो बनाए और उसे ऑनलाइन पोस्ट किए."

रील बनाना गलत 

दारुल उलूम प्रबंधन के सूत्रों ने बताया कि महिला आगंतुकों की बढ़ती संख्या ने छात्राओं की एकाग्रता को प्रभावित करना शुरू कर दिया था. इसके कारण कई शिकायतें सामने आईं. अधिकारियों ने देखा कि कई महिला आगंतुकों ने मदरसा के अंदर से रील फिल्माई और प्रसारित की थीं. दारुल उलूम देवबंद के मुताबिक बिना घूंघट के ऐसा करना असम्मानजनक और बाधा डालने वाला माना जाता है. 

मोबाइल ले जाने पर भी प्रतिबंध
 
इस बात को ध्यान में रखते हुए प्रबंधन ने अब मुख्य द्वार पर एक सार्वजनिक नोटिस जारी किया कर फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी या मोबाइल फोन ले जाने पर प्रतिबंध लगा दिया है. यह गुटखा या तंबाकू के सेवन पर भी प्रतिबंध लगाता है. पौधों को छूने पर रोक लगाता है और सभी आगंतुकों को सूर्यास्त से पहले बाहर निकलने का आदेश देता है.

कुलपति कार्यालय के प्रभारी मौलाना मुफ्ती रेहान कासमी ने इस मसले पर बताया कि पिछले साल 17 मई को परिसर में फिल्माए जा रहे वीडियो की शिकायतों के बाद संस्थान ने महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया था. नवंबर में सख्त शर्तों के साथ प्रतिबंध हटा लिया गया था. 

दारुल उलूम की शर्तें 

दारुल उलूम परिसर में महिलाओं के लिए नकाब पहनना जरूरी. महिलाओं को एक अभिभावक के साथ आना होगा. संस्थान के गेट पर मोबाइल फोन जमा करना होगा. दो घंटे का आगंतुक पास लेना होगा. संस्थान का कहना है कि इन शर्तों का बार-बार उल्लंघन किया गया. इसलिए दारुल उलूम ने नया प्रतिबंध मंगलवार को लगा दिया है. 


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Bindass Bol Dil Se

Written by: Dhirendra Mishra

01 Aug 2025  ·  Published: 00:34 IST