How to start Datacenter or Domain and hosting business ?
Top Digital Marketing Companies
Top Flutter App Development Companies
How to earn money Online ?
How to start Ecommerce business ?
इंसानी खोपड़ियों से बने बर्तन, मानव त्वचा की कुर्सियां; अमेरिका का सबसे खौफनाक सीरियल किलर
BBDS App Download
× Bindass Bol Home About News Contact Search

लद्दाख में आंदोलन ने लिया हिंसक रूप; 4 की मौत, 80 घायल, BJP के रूखे रवैये से नाराजगी बढ़ी!

लद्दाख में आंदोलन ने लिया हिंसक रुप

लद्दाख में आंदोलन ने लिया हिंसक रुप

Ladakh Violent Protest: लद्दाख में बुधवार (24 सितंबर) को राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर जारी आंदोलन ने हिंसक रूप ले लिया. सड़कों पर आगजनी और झड़पों में चार लोगों की मौत हो गई और कम से कम 80 लोग घायल हुए, जिनमें 40 पुलिसकर्मी भी शामिल हैं. अधिकारियों के मुताबिक, कई घायलों की हालत गंभीर होने के कारण मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है. हिंसा के बीच 15 दिन से भूख हड़ताल पर बैठे जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त कर दिया.

वांगचुक ने कहा कि युवा हिंसा को रोकें और आंदोलन को अहिंसक बनाएं. उन्होंने प्रशासन से अपील की कि आंसू गैस के गोले न चलाए जाएं और सरकार उनकी शांति की आवाज़ को सुने. वांगचुक ने कहा कि यह लद्दाख और उनके लिए बेहद दुखद दिन है क्योंकि पिछले पांच वर्षों से आंदोलन शांतिपूर्ण रहा है.

प्रदर्शन और हिंसा
सुबह लद्दाख की राजधानी में पूर्ण बंद रहा. सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आए, भाजपा कार्यालय में तोड़फोड़ हुई और कई वाहनों में आग लगी. पुलिस ने स्थिति नियंत्रण में लाने के लिए गोलीबारी और आंसू गैस का इस्तेमाल किया. प्रशासन ने लेह जिले में निषेधाज्ञा लागू कर पांच या अधिक लोगों के एकत्र होने पर रोक लगाई.

कांग्रेस नेता फुंटसोग स्टैनजिन त्सेपाग पर कथित रूप से भड़काऊ भाषण देने का मामला दर्ज किया गया. लेह एपेक्स बॉडी (एलएबी) की युवा शाखा ने प्रदर्शन और बंद का आह्वान किया. 10 सितंबर से 35 दिन से भूख हड़ताल पर बैठे 15 में से दो प्रदर्शनकारी की हालत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया.

वांगचुक का संदेश
वांगचुक ने कहा कि हिंसा आंदोलन के उद्देश्य को नुकसान पहुंचाती है. उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों के लिए आवाज उठाएं. उन्होंने कहा कि लद्दाख में बेरोजगारी और छठी अनुसूची की अनुपालना न होने के कारण युवा हताश हैं.

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा कि लद्दाख में हुई हिंसा कुछ भड़काऊ बयानों के कारण बढ़ी और कुछ लोग राजनीति प्रेरित रूप से स्थिति बिगाड़ना चाहते थे. मंत्रालय ने सभी से पुराने वीडियो और भड़काऊ सामग्री साझा न करने की अपील की. उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता ने कहा कि हिंसा फैलाने वालों की पहचान कर कानून के अनुसार कार्रवाई होगी.

क्या है मांगें?

वांगचुक और अन्य प्रदर्शनकारी चार सूत्री मांगों के समर्थन में हैं. उनकी पहली मांग लद्दाख को राज्य का दर्जा देना है. दूसरी मांग छठी अनुसूची का विस्तार है, जिससे स्थानीय जनजातीय आबादी की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके. तीसरी मांग लेह और कारगिल के लिए अलग लोकसभा सीटें बनाने की है. चौथी और अंतिम मांग नौकरियों में आरक्षण सुनिश्चित करने की है, ताकि क्षेत्र के युवाओं को रोजगार के अवसर मिलें. 

केंद्र और एलएबी और केडीए के बीच 6 अक्टूबर को वार्ता का नया दौर तय किया गया है. पिछले चार सालों से ये संगठन लगातार आंदोलनरत हैं और कई दौर की वार्ता कर चुके हैं. प्रदर्शनकारियों ने लेह शहर में बंद किया और एनडीएस स्मारक मैदान से शहर की सड़कों तक मार्च निकाला. कुछ युवाओं ने भाजपा और हिल काउंसिल मुख्यालय पर पथराव किया. प्रशासन ने स्थिति नियंत्रण में लाने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और आगजनी रोकने का प्रयास किया.

यह भी पढ़ें: बीजेपी नेता विनय कटियार की धमकी; मुसलमानों को दी अयोध्या छोड़ने की चेतावनी


BBDS Logo

Bindass Bol Dil Se

Written by: Raihan

25 Sep 2025  ·  Published: 02:16 IST

शादी रात में करनी चाहिए या दिन में, सच जानकर आप चौंक जाएंगे!

राम सीता विवाह

राम सीता विवाह

Shocking Facts: हम सबने बचपन से यही सुना है कि राम और सीता का विवाह दिन में हुआ था और शिव-पार्वती का विवाह भी दिन के समय सम्पन्न हुआ. पर आज जब भी आप किसी विवाह समारोह में जाते हैं, तो पाते हैं कि अधिकतर सात फेरे रात को ही लिए जाते हैं. तो आखिर यह बदलाव क्यों आया? क्या रात में विवाह करना सही है या शास्त्र इसे गलत मानते हैं? यह प्रश्न हर किसी के मन में आता है, लेकिन इसके पीछे का सच शायद ही किसी को पता हो.

राम और शिव के विवाह का रहस्य

वाल्मीकि रामायण के अनुसार, मिथिला में राम और सीता का विवाह मध्यान्ह काल में सम्पन्न हुआ था. शिव–पार्वती विवाह का वर्णन भी शिव पुराण में दिन के समय ही मिलता है. प्राचानी काल में यज्ञ और देवताओं का आह्वान मुख्य रूप से दिन में किया जाता था.अग्नि साक्ष्य और सूर्य की उपस्थिति को श्रेष्ठ माना जाता था. इसलिए विवाह को भी दिन के समय सम्पन्न करना ही उचित समझा गया.

शास्त्र क्या कहते हैं?

आश्वलायन गृह्यसूत्र कहता है कि विवाह दिन या रात दोनों में हो सकता है, बशर्ते ग्रह और नक्षत्र अनुकूल हों. मनुस्मृति में कहा गया है कि विवाह केवल शुभ मुहूर्त और चंद्रमा की अनुकूल स्थिति में किया जाना चाहिए. समय (दिन या रात) का कोई निषेध नहीं.नारद पुराण तो और भी स्पष्ट रूप से कहता है कि यदि रात की शुभ तिथि पर विवाह हो तो दंपत्ति को सुख और दीर्घायु प्राप्त होती है. यानि शास्त्रों में रात को विवाह करने की पूरी अनुमति है.

रात में शादी का मनोविज्ञान

भारत कृषि प्रधान रहा है. दिन का समय खेती और श्रम में जाता था, लोग दिन में अवकाश लेकर विवाह में सम्मिलित नहीं हो पाते थे. इसलिए धीरे-धीरे रात का समय विवाह के लिए अधिक सुविधाजनक माना जाने लगा. रात का ठंडा वातावरण बारात और मेहमानों के लिए आरामदायक रहा. साथ ही दीपक और बाद में बिजली की रोशनी ने विवाह को और भी आकर्षक और उत्सवमय बना दिया. यानि विवाह अब केवल संस्कार न होकर सामाजिक उत्सव भी बन गया. आधुनिक और व्यवसायिक दृष्टिकोण की मानें तो आज के दौर में रात्रिकालीन विवाह ने एक विशाल उद्योग को जन्म दिया है.

होटल, मैरिज हॉल, कैटरिंग, लाइटिंग, सजावट और इवेंट मैनेजमेंट ये सब रात के विवाह से ही फल-फूल रहे हैं. शहरी जीवन में दिन का समय नौकरी और कारोबार में जाता है. रात का विवाह इसीलिए अधिक सुविधाजनक हो गया. फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी भी रात की रोशनी में अधिक प्रभावशाली होती है. इस तरह से रात का विवाह अब परंपरा नहीं, बल्कि आवश्यकता और व्यवसाय दोनों बन गया है.


BBDS Logo

Bindass Bol Dil Se

Written by: Dhirendra Mishra

04 Sep 2025  ·  Published: 06:03 IST

पति से 12 करोड़ रुपये एलिमनी मांग रही महिला को CJI गवई ने भरी कोर्ट में लगाई फटकार, कहा - नौकरी ढूंढ़ो और मौज करो

सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट

देश के न्यायाधीश भूषण रामकृष्ण गवई ने 22 जुलाई को तलाक के एक मामले में सुनवाई करते हुए महिला को फटकार लगाई है. कोर्ट ने 12 करोड़ रुपये एलमनी मांगने पर महिला से कहा कि इतना पढ़ा लिखा होने के बावजूद पति से इतना पैसा मांगना गलत है, बल्कि खुद काम करना चाहिए. सीजेआई ने महिला से साफ कहा कि या तो एक घर मिलेगा या 4 करोड़ रुपये और अपने गुजारे के लिए नौकरी ढूंढे.

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार सीजेआई गवई ने कहा कि महिला की शादी को सिर्फ 18 महीने हुए हैं और वह बीएमडब्ल्यू, 12 करोड़ रुपये और मुंबई में घर की डिमांड कर रही है. सीजेआई गवई ने महिला से कहा कि आप एक आईटी पर्सन हैं और आपने एमबीए भी किया है. बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहरों में आईटी पर्सन की बहुत डिमांड है तो आप भी वहां काम क्यों नहीं करते हैं.

महिला ने कहा, 'लेकिन मेरा पति एक अमीर आदमी है और उसने शादी खत्म करने के लिए मुझे सिजोफ्रेनिया से पीड़ित बता दिया है. क्या आपको मैं इस बीमारी से पीड़ित लगती हूं?' सीजेआई गवई ने महिला से कहा कि पर आप अपने पति के पिता की प्रॉपर्टी पर दावा नहीं कर सकती हैं. 

पति के लिए पेश हुईं सीनियर एडवोकेट माधवी दीवान ने कहा कि महिला को काम भी तो करना चाहिए वह हर चीज के लिए ऐसे डिमांड नहीं कर सकती है. माधवी दीवान ने कहा कि महिला के पास घर के अलावा दो कार पार्किंग भी हैं, वह उससे भी कमाई कर सकती है. उन्होंने यह भी बताया कि जिस बीएमडब्ल्यू का महिला सपना देख रही है वो 10 साल पुरानी है और कबाड़ में पड़ी है.

सुनवाई के दौरान महिला ने आरोप लगाया कि पति ने उनके वकील को प्रभावित किया है. सीजेआई गवई ने महिला से दो टूक कहा या तो एक घर लेकर संतुष्ट रहो या 4 करोड़ रुपये लो और नौकरी ढूंढो. सीजेआई गवई ने मामले में अहम टिप्पणी करते हुए कहा, 'आप इतनी पढ़ी-लिखी हैं. आपको खुद के लिए मांगना नहीं चाहिए बल्कि खुद कमा कर खाना चाहिए.' 

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर महिला ने कहा कि उस पर पति ने कई आरोप लगाए हैं और उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज हैं. ऐसे में मुझे कौन-सी नौकरी मिलेगी. सीजेआई बी आर गवई तब कहा कि हम सभी शिकायतों को रद्द करते हैं.


BBDS Logo

Bindass Bol Dil Se

Written by: Dhirendra Mishra

23 Jul 2025  ·  Published: 01:00 IST

पुणे की अदालत ने रेप के आरोप को किया खारिज, जस्टिस एसआर सालुंखे बोले - 'सहमति से संबंध रेप नहीं'

पुणे की अदालत ने रेप के आरोप को किया खारिज, जस्टिस एसआर सालुंखे बोले - 'सहमति से संबंध रेप नहीं'

पुणे की अदालत ने रेप के आरोप को किया खारिज

महाराष्ट्र के पुणे की एक अदालत ने एक शख्स को उस मामले में बरी कर दिया है, जिसमें उसकी पूर्व पत्नी ने उस पर तलाक के बाद फिर से शादी करने का वादा कर रेप करने का आरोप लगाया था. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एस आर सालुंखे ने महिला द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि दोनों के बीच शारीरिक संबंध सहमति से बने थे.

अभियोजन पक्ष ने आईपीसी की धारा 376(2)(एन) के तहत अपराध नहीं माना है. न ही इस तरह के अपराध को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं. अगर यह मान भी लिया जाए कि महिला और आरोपी के बीच इस तरह के शारीरिक संबंध सहमति से बने थे, तो भी वे ऐसा अपराध नहीं बनते, क्योंकि वे सहमति से बने थे और शादी के बहाने नहीं थे. इसका कानूनी परिणाम यह है कि आरोपी को दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए और इसलिए, वह बरी होने का हकदार है.” 

महिला ने हाईकोर्ट में अपील का लिया फैसला 

पुणे की अदालत के जज जस्टिस एसआर सालुंखे ने अपने आदेश में कहा कि फैसले के बाद महिला ने कहा कि वह हाईकोर्ट में अपील करेगी. इंडियन एक्सप्रेस ने महिला के हवाले से बताया है, "मैं निराश हूं, लेकिन फैसले का सम्मान करती हूं. न्याय मिलने तक मैं उच्च न्यायालय में केस लड़ूंगी." श्

क्या है पूरा मामला? 

पुणे की अदालत के एक शख्स की पत्नी के पूर्व पति पर फिर से शादी करने की आड़ में रेप का आरोप लगाया था. 
अभियोजन पक्ष के अनुसार शिकायतकर्ता महिला और पुरुष की शादी 2002 में हुई थी. उनकी दो बेटियां हैं. हालांकि, आरोपी ने 2010 में महिला को छोड़ दिया और 2012 में फिर से शादी कर ली. साल 2015 में अदालत ने उन्हें तलाक दे दिया.

तलाक के बाद महिला ने दूसरे व्यक्ति से शादी कर ली, लेकिन उनकी शादी सिर्फ पांच महीने ही चल पाई. अभियोजन पक्ष ने कहा था कि आरोपी 2019 में फिर से महिला के संपर्क में आया. अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि महिला को फिर से शादी का आश्वासन देने के बाद उसने उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए. जब ​​महिला ने आरोपी से शादी के बारे में पूछा तो उसने कथित तौर पर उससे शादी करने से इनकार कर दिया.

महिला ने साल 2020 में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने प्रारंभिक जांच की और बाद में आईपीसी की धारा 376(2)(एन) के तहत व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया. अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि आरोपी ने महिला की सहमति के बिना दोबारा शादी का झूठा वादा करके उसके साथ बार-बार बलात्कार किया.त्र

आरोपी का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिवक्ता मिलिंद पवार ने तर्क दिया कि शिकायत फर्जी थी और यह महिला के खिलाफ जबरन वसूली के लिए आरोपी द्वारा दर्ज की गई एक अन्य शिकायत का परिणाम थी. उन्होंने तर्क दिया, "आरोपी के खिलाफ इस तरह के गंभीर अपराध को साबित करने के लिए आवश्यक पुष्टि के अभाव में महिला का अकेला बयान पर्याप्त नहीं है. शिकायत दर्ज करने में अत्यधिक देरी हुई है, जिसका कारण स्पष्ट नहीं है."

वकील ने कहा, "वह अपने कानूनी अधिकारों के प्रति सचेत थी, क्योंकि उसने पहले ही आरोपी के खिलाफ दो कानूनी कार्यवाही दायर की थी. जब आरोपी ने उसके खिलाफ जबरन वसूली की शिकायत दर्ज की, तभी उसने यह शिकायत दर्ज कराई."


BBDS Logo

Bindass Bol Dil Se

Written by: Dhirendra Mishra

08 Jul 2025  ·  Published: 00:30 IST