फाइल फोटो
Rise and Fall Show: अशनीर ग्रोवर का रियलिटी शो ‘राइज एंड फॉल’ लॉन्च होते ही दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बन गया है. शो को शुरू हुए अभी मुश्किल से दो हफ्ते ही हुए हैं, लेकिन इसने दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. खासतौर पर भोजपुरी सुपरस्टार पवन सिंह ने अपने देसी और मजाकिया अंदाज़ से इस शो में अलग ही रंग भर दिया था. उनके चुटकुले और बिंदास अंदाज ने न सिर्फ कंटेस्टेंट्स बल्कि फैन्स को भी खूब एंटरटेन किया.
हालांकि, पवन सिंह के चाहने वालों के लिए यह खबर झटका साबित हुई कि उन्होंने अचानक शो को अलविदा कह दिया. खबरों के मुताबिक, निजी और राजनीतिक कारणों से उन्हें यह कदम उठाना पड़ा. महज 14 दिनों में पवन सिंह ने ‘राइज एंड फॉल’ के मंच पर धमाल मचा दिया था. फैन्स और प्रतियोगियों ने उन्हें भरपूर प्यार दिया, लेकिन उनका जाना शो की लोकप्रियता पर असर डाल सकता है.
अब चर्चा यह है कि मेकर्स शो में एक और बड़े भोजपुरी स्टार को लाने की योजना बना रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पवन सिंह की जगह खेसारी लाल यादव को लाने की प्लानिंग चल रही है. हालांकि, इस बारे में अभी तक आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है. अगर खेसारी लाल वाकई शो में आते हैं, तो यह ‘राइज एंड फॉल’ के लिए एक नया ट्विस्ट साबित हो सकता है.
खेसारी लाल यादव भोजपुरी इंडस्ट्री के बड़े नाम हैं और उनकी भी जबरदस्त फैन फॉलोइंग है. उन्होंने पहले भी सलमान खान के शो ‘बिग बॉस’ में हिस्सा लिया था, हालांकि वहां वे ज्यादा असर नहीं छोड़ पाए थे. इसके बावजूद, उनकी पॉपुलैरिटी बनी हुई है. पिछले कुछ वर्षों में वे कई विवादों में भी रहे हैं, इसलिए अगर ‘राइज एंड फॉल’ में उनकी एंट्री होती है, तो यह शो के लिए फायदे का सौदा हो सकता है.
पवन सिंह ने जिस तरह अपने मजाकिया और देसी स्वभाव से दर्शकों के दिल जीते, वही चुनौती खेसारी लाल यादव के सामने भी होगी. फैन्स स्वाभाविक तौर पर उनकी तुलना पवन सिंह से करेंगे. ऐसे में देखना होगा कि खेसारी लाल यादव शो में आकर वही मनोरंजन और ऊर्जा ला पाते हैं या नहीं. मेकर्स के लिए भी यह एक बड़ा दांव होगा.
पवन सिंह के जाने के बाद शो की लोकप्रियता बनाए रखना जरूरी है. खेसारी लाल की एंट्री शो को दोबारा उसी स्तर पर ले जा सकती है. दोनों ही स्टार्स भोजपुरी सिनेमा के दिग्गज चेहरे हैं और उनकी ऑडियंस भी बहुत बड़ी है. फिलहाल दर्शकों को इंतजार है कि ‘राइज एंड फॉल’ में खेसारी लाल यादव कब और किस अंदाज में एंट्री करेंगे. अगर वे आते हैं, तो शो को नया रंग और ताजगी मिल सकती है.
काजोल ने ट्विंवकल सांग टॉक शो में खोले ब्यूटी सीक्रेट्स
Bollywood News Today: बॉलीवुड की दो जानी-मानी हस्तियां काजोल और ट्विंकल खन्ना जल्द ही एक खास टॉक शो 'टू मच विद काजोल एंड ट्विंकल' में एक साथ नजर आने वाली हैं. यह शो शुरू होने से पहले ही चर्चाओं में है. शो में दोनों अभिनेत्रियां न सिर्फ बॉलीवुड से जुड़ी बातों पर चर्चा करेंगी, बल्कि जिंदगी, रिश्तों और निजी अनुभवों को भी साझा करेंगी.
'टू मच विद काजोल एंड ट्विंकल' शो के शुरू होने से पहले, आइए आपको थोड़ा पीछे ले जाकर काजोल और ट्विंकल के बीच हुई पुरानी बातचीत पर नजर डालते हैं, जब काजोल ने बढ़ती उम्र की चिंता के बारे में खुलकर बात की थी.
दरअसल, एक बार ट्विंकल ने काजोल से पूछा था, क्या आपको एक अभिनेत्री होने के नाते कभी उम्र बढ़ने की चिंता होती है?" इस काजोल ने अपने चुटीले अंदाज में रिप्लाई किया. उन्होंने कहा,"हां, मुझे इस बात की चिंता बहुत होती है, मुझे उम्र बढ़ने की चिंता से ज्यादा झुर्रियों आने का डर बना रहता है."
बातीचत में काजोल ने आगे कहा, "मुझे लगता है कि उम्र का असर सिर्फ चेहरे की झुर्रियों या शारीरिक बदलावों तक सीमित नहीं है. बल्कि यह एक व्यक्ति की ऊर्जा, उत्साह और जीवन के प्रति दृष्टिकोण में दिखता है. जब कोई व्यक्ति थका हुआ या अपने काम से ऊबा हुआ महसूस करता है, तो उसकी आंखों में यह भाव झलकता है और यही वह समय होता है जब लोग उसकी उम्र या झुर्रियों पर ध्यान देने लगते हैं."
'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे, कुछ कुछ होता है, कभी खुशी कभी गम, फना, माई नेम इज खान और बाजीगर जैसी फिल्मों से दशकों तक लोगों की दिलों पर राज करने वाली काजोल ने कहा, "हां, मुझे इसकी चिंता होती है. मैं इस बारे में सोचती हूं, कौन नहीं सोचता? लेकिन फिर भी मैं अपने डेली रूटीन का पालन बहुत अच्छे से करती हूं."
अभिनेत्री ने अपनी उम्र बढ़ने की चिंता और अपने स्वास्थ्य और सौंदर्य रूटीन के बारे में खुलकर बात की. उन्होंने बताया कि वह दिन में 8 गिलास पानी पीती हैं, 8 से 10 घंटे सोती हैं. रात को सोने से पहले फेस वॉश करके क्रीम लगाना कभी नहीं भूलती हैं और वर्कआउट करके अपने शरीर का ख्याल रखती हैं.
काजोल और ट्विंकल खन्ना एक नए टॉक शो 'टू मच विद काजोल एंड ट्विंकल' की मेजबानी करेंगी. इस टॉक शो में बॉलीवुड के बड़े सितारे मेहमान के रूप में शामिल होंगे. काजोल और ट्विंकल खन्ना की यह बातचीत सुर्खियों में है. हालिया दिनों काजोल अपनी फिल्म 'मां' को लेकर सुर्खियों में रही हैं. हालांकि, उनकी यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कुछ कमाल नहीं कर पाई.
फाइल फोटो
Haq Movie Review: इमरान हाशमी और यामी गौतम स्टारर फिल्म ‘हक’ सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि एक महिला की आवाज है. जो अपने अधिकारों, अपनी पहचान और अपने अस्तित्व के लिए खड़ी होती है. फिल्म आपको सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर समाज में औरत को इंसाफ के लिए इतना संघर्ष क्यों करना पड़ता है.
क्या है पूरी कहानी
‘हक’ की कहानी है शाजिया बानो (यामी गौतम) की एक ऐसी औरत की जो अपने पति और मशहूर वकील अब्बास खान (इमरान हाशमी) के खिलाफ अपने बच्चों के मुआवजे का केस लेकर अदालत पहुंचती है. अदालत में जब जज उसे ‘काजी के पास जाने’ की सलाह देता है, तो शाजिया का सवाल सबको झकझोर देता है. “अगर मैंने किसी का खून किया होता, तब भी आप यही कहते?” यही सवाल फिल्म का मूल है, इंसाफ के दो पैमाने क्यों?
शाह बानो केस से प्रेरित
फिल्म ‘हक’ 1985 के चर्चित शाह बानो केस से प्रेरित है। उस केस ने तीन तलाक और मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों पर राष्ट्रीय बहस छेड़ी थी. निर्देशक सुपर्ण वर्मा ने उसी संवेदनशील मुद्दे को आधुनिक दौर की पृष्ठभूमि में पेश किया है. जहां प्यार, रिश्ते और धार्मिक व्यवस्था के बीच एक महिला की लड़ाई दिखती है.
रिश्ते, धोखा और दर्द
फिल्म की शुरुआत शाजिया और अब्बास के खूबसूरत रिश्ते से होती है. दोनों का प्यार, एक-दूसरे के लिए समर्पण, सब कुछ परफेक्ट लगता है. लेकिन वक्त गुजरते ही अब्बास की जिंदगी में दूसरी औरत सायरा (वर्तिका सिंह) की एंट्री होती है. शाजिया का टूटना, सवाल करना और फिर खुद के लिए खड़ा होना. ये सफर ही फिल्म का भावनात्मक केंद्र है.
फिल्म का एक सीन बेहद प्रतीकात्मक है. जब शाजिया रसोई में तीन प्रेशर कुकर देखती है, और नौकरानी कहती है, “साहब में सब्र नहीं है, कुछ खराब होता है तो उसे ठीक करवाने की बजाय नया ले आते हैं.” वो सीन आगे आने वाली कहानी का संकेत देता है और बताता है कि अब्बास अपनी बीवी के साथ भी यही करेगा.
एक्टिंग और निर्देशन
यामी गौतम ने शाजिया बानो को बेहद संवेदनशीलता के साथ जिया है. उनके चेहरे की खामोशी, आंखों का दर्द और गुस्से का संयम, हर फ्रेम में झलकता है. इमरान हाशमी अपने करियर के सबसे सशक्त किरदारों में से एक में नजर आते हैं. वो अब्बास खान के रूप में एक ऐसे आदमी को पेश करते हैं, जो प्यार करता भी है और अपनी मर्दानगी के जाल में उलझा भी है. वर्तिका सिंह, शीबा चड्ढा और दानिश हुसैन भी अपनी भूमिकाओं में असरदार हैं. डायरेक्टर सुपर्ण वर्मा का निर्देशन सधा हुआ है. उन्होंने इमोशन और सामाजिक संदेश के बीच संतुलन बनाए रखा है.
कमजोरियां
फिल्म के कुछ हिस्से थोड़े ड्रामेटिक लगते हैं, खासकर कोर्टरूम सीन्स में संवाद ज़रूरत से ज़्यादा तीखे हैं. कहीं-कहीं कहानी अपने मूल मुद्दे से हटती भी है. फिर भी इसका संदेश, महिलाओं के अधिकार और न्याय की समानता, दर्शकों तक साफ पहुंचता है.
फाइल फोटो
Rishi Kapoor Depression: ऋषि कपूर 70 और 80 के दशक के एक बहुत बड़े फ़िल्मी सितारे थे. उनकी फ़िल्में आमतौर पर हिट होती थीं और लोग उन्हें खूब पसंद करते थे लेकिन 1980 में जब उनकी फ़िल्म 'कर्ज' रिलीज़ हुई, तो उनके साथ एक ऐसी घटना घटी जिससे वे बहुत दुखी हुए. 'कर्ज' फ़िल्म के निर्देशक सुभाष घई ने बताया कि ऋषि कपूर को इस फ़िल्म से बहुत उम्मीदें थीं. उन्होंने फ़िल्म में बहुत मेहनत की थी और उन्हें पूरा विश्वास था कि यह फ़िल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट होगी.
फ़िल्म की कहानी, गाने और अभिनय, सब दमदार थे लेकिन उसी हफ़्ते 'क़ुर्बानी' नाम की एक और बड़ी फ़िल्म भी रिलीज़ हुई, जिसे लोगों ने खूब पसंद किया. इस वजह से 'कर्ज' को उतनी अच्छी प्रतिक्रिया नहीं मिली. जब 'कर्ज' को शुरुआत में सफलता नहीं मिली, तो ऋषि कपूर बहुत निराश हो गए. उन्हें लगा कि फ़िल्म फ्लॉप हो गई है. वे इससे इतने परेशान हो गए कि डिप्रेशन में चले गए. उनकी तबीयत इतनी बिगड़ गई कि उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा.
सुभाष घई ने बताया कि ऋषि कपूर ने फिल्म के हर सीन के लिए खूब मेहनत की थी. उन्होंने अपने दोस्तों को फिल्म के प्रीव्यू भी दिखाए थे और उन्हें पूरा यकीन था कि फिल्म हिट होगी. जब ऐसा नहीं हुआ, तो उन्हें गहरा सदमा लगा. उनके पिता राज कपूर ने सुभाष घई को फोन किया और कहा, "अपने दोस्त को समझाओ, वह बहुत उदास हो गया है."
हालांकि, कुछ हफ़्तों बाद लोगों को यह फिल्म पसंद आने लगी और समय के साथ 'कर्ज' एक कल्ट क्लासिक मानी जाने लगी. इसके गाने 'ओम शांति ओम', 'दर्द-ए-दिल' और 'एक हसीना थी' आज भी बहुत मशहूर हैं. बाद में हिमेश रेशमिया ने इस फिल्म का रीमेक भी बनाया.
इस किस्से से हमें समझ आता है कि एक बड़ा सितारा भी बहुत दुखी होता है जब उसकी मेहनत पर उसकी मेहनत की कद्र नहीं होती. लेकिन अच्छा काम हमेशा अपनी छाप छोड़ता है -भले ही देर से ही सही. ऋषि कपूर ने जो दर्द सहा, वही आज उनकी शानदार फिल्म की सफलता में बदल गया है.