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Herbal Tea Benefits: जब शरीर और दिमाग थक जाते हैं, तो लोग अक्सर चाय या कॉफ़ी पीते हैं. आमतौर पर माना जाता है कि चाय और कॉफ़ी थकान दूर करते हैं और दिमाग को ध्यान लगाने में मदद करते हैं, लेकिन इनका गलत समय पर और ज़्यादा सेवन पूरे शरीर की सेहत पर असर डालता है. ऐसे में, आयुर्वेद एक ऐसा उपाय बताता है जो कैफीन के स्वाद से बेहतर है और शरीर के लिए फायदेमंद भी है.
आयुर्वेद में थकान और तनाव को नर्वस सिस्टम से जोड़ा जाता है. जब नसें थक जाती हैं, तो आँखें बंद होने लगती हैं, नींद आने लगती है, काम करने का मन नहीं करता, और पूरा शरीर अपना संतुलन खो देता है. सिर से पैर तक, शरीर को सिर्फ़ आराम चाहिए होता है. इस स्थिति में, हर्बल चाय बहुत फायदेमंद होती है, क्योंकि यह शरीर को किसी भी तरह से नुकसान नहीं पहुँचाती और याददाश्त बेहतर बनाने में मदद करती है.
इस हर्बल चाय को बनाने के लिए आपको जटामांसी, ब्राह्मी और कैमोमाइल की ज़रूरत होगी. ये तीनों चीज़ें बाज़ार में आसानी से मिल जाती हैं. जटामांसी और ब्राह्मी जड़ी-बूटियाँ हैं, और कैमोमाइल एक औषधीय फूल है. इन तीनों को एक साथ पानी में उबालकर काढ़ा बना लें. इस मिश्रण को छान लें और गुनगुना होने पर पी लें. इससे शरीर एक्टिव और स्वस्थ रहेगा. ये तीनों चीज़ें मिलकर थकान कम करती हैं और नसों को आराम देती हैं, जिससे अच्छी नींद आती है.
जटामांसी दिल और चेतना को स्थिर करती है और दिमाग को संतुलित रखती है. यह घबराहट और बेचैनी से राहत देती है. इसमें मौजूद न्यूरो-रिलैक्सेंट कंपाउंड नर्वस सिस्टम को शांत करते हैं, और धीरे-धीरे शरीर में थकान कम महसूस होती है. दूसरी ओर, ब्राह्मी दिमाग में स्पष्टता और एकाग्रता लाती है. यह शरीर में तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन कोर्टिसोल और एड्रेनालाईन को भी संतुलित करती है. ये दोनों हार्मोन शरीर में चिंता और तनाव बढ़ाते हैं.
इसके अलावा, कैमोमाइल में ऐसे गुण होते हैं जो नींद लाने में मदद करते हैं. दिमाग को शांत करने के साथ-साथ, यह गहरी नींद लाने में भी मदद करता है. हर्बल चाय पीने का सबसे अच्छा समय जानना भी ज़रूरी है. इसे रात को सोने से पहले, या लंबे समय तक तनाव रहने पर पीना सबसे अच्छा होता है. आप काम करते समय एकाग्रता बढ़ाने के लिए भी इसे पी सकते हैं. रेगुलर चाय की तरह, इसकी लत नहीं लगती और यह पूरी तरह से सुरक्षित है.
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Causes of Wrinkles: जब भी झुर्रियों की बात होती है तो अक्सर हम उम्र बढ़ने, धूप में ज्यादा समय बिताने या स्किन के सूखने को जिम्मेदार मानते हैं लेकिन अमेरिका की बिंगहैमटन यूनिवर्सिटी की एक नई रिसर्च इस धारणा को पूरी तरह बदल सकती है. इस रिसर्च के अनुसार, झुर्रियों का मुख्य कारण स्किन की भौतिक (फिजिकल) स्थिति में आने वाला तनाव और खिंचाव है, न कि सिर्फ उम्र या सूरज की किरणें.
क्या है रिसर्च की खास बात?
रिसर्चर्स ने 16 से 91 साल के लोगों के स्किन सैंपल लेकर एक विशेष मशीन ‘टेंसोमीटर’ में उनकी टेस्टिंग की. यह मशीन बताती है कि स्किन कैसे खिंचती और सिकुड़ती है. नतीजों में सामने आया कि जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, स्किन में इलास्टिसिटी (लचीलापन) कम होती जाती है. स्किन अब पहले की तरह सीधी और बराबर नहीं सिकुड़ती, बल्कि किनारों की तरफ ज्यादा खिंचती है और जब ये खिंचाव संतुलित नहीं होता तो झुर्रियां बन जाती हैं.
वैज्ञानिकों ने इस प्रोसेस को “बकलिंग” कहा है कि एक ऐसा फिजिकल रिएक्शन जिसमें सतह (जैसे स्किन) अंदर की ओर मुड़ जाती है, ठीक वैसे ही जैसे कागज को मोड़ने पर सिलवटें पड़ती हैं.
धूप और उम्र कैसे असर डालते हैं?
हालांकि रिसर्च कहती है कि फिजिक्स मुख्य कारण है, लेकिन उम्र बढ़ने और धूप से कोलेजन और इलास्टिन फाइबर पर पड़ने वाला असर इस प्रक्रिया को और तेज कर देता है. सूरज की UV किरणें स्किन के इन संरचनात्मक प्रोटीन को नुकसान पहुंचाती हैं, जिससे स्किन कमजोर और कम लचीली हो जाती है.
झुर्रियों के इलाज के नए रास्ते
यह स्टडी अब स्किनकेयर के क्षेत्र में भी नए बदलाव ला सकती है. परंपरागत क्रीम और लोशन केवल कोलेजन बढ़ाने या स्किन को हाइड्रेटेड रखने पर ध्यान देते हैं, लेकिन इस रिसर्च के बाद वैज्ञानिक माइक्रोमेश पैच और पेप्टाइड्स पर काम कर रहे हैं.
माइक्रोमेश पैच स्किन के तनाव को बराबर करने में मदद कर सकते हैं, जबकि कुछ विशेष पेप्टाइड्स स्किन सेल्स को फिर से संगठित करते हैं ताकि इलास्टिसिटी और मजबूती लौटाई जा सके.
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Amla Water Benefits: आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में सुबह का वक्त सबसे व्यस्त होता है. लेकिन यही समय आपकी पूरी दिनचर्या की दिशा तय करता है. अगर दिन की शुरुआत किसी हेल्दी चीज़ से की जाए, तो शरीर और मन दोनों एनर्जेटिक बने रहते हैं. आयुर्वेद के अनुसार, सुबह खाली पेट किसी नैचुरल और पौष्टिक ड्रिंक से दिन की शुरुआत करना शरीर को डिटॉक्स करने और ऊर्जा से भरने में मदद करता है.
ऐसी ही एक ड्रिंक है आंवला पानी में हल्दी मिलाकर पीना. सर्दियों के मौसम में आंवला खुद में एक सुपरफूड है, और जब इसमें हल्दी के गुण जुड़ जाते हैं, तो इसके फायदे दोगुने हो जाते हैं. यह ड्रिंक न सिर्फ आपकी इम्यूनिटी बढ़ाती है, बल्कि स्किन, पेट और मूड सब पर अच्छा असर डालती है. जानिए सुबह 5 बजे आंवला पानी में हल्दी मिलाकर पीने के पांच बड़े फायदे.
1. इम्यूनिटी को मजबूत बनाता है
आंवला विटामिन C से भरपूर होता है, जो शरीर को इंफेक्शन से बचाता है. हल्दी में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-बैक्टीरियल गुण शरीर की अंदरूनी सफाई करते हैं. दोनों को मिलाकर पीने से शरीर को एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच मिलता है, जो मौसम बदलने या थकान के दौरान भी आपको बीमार नहीं होने देता.
2. स्किन को देता है नेचुरल ग्लो
अगर आप बिना किसी महंगे क्रीम या ट्रीटमेंट के चमकदार त्वचा चाहते हैं, तो आंवला-हल्दी पानी एक बेहतरीन उपाय है. आंवला शरीर से टॉक्सिन्स निकालता है, जिससे त्वचा साफ होती है. वहीं हल्दी ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाती है, जिससे चेहरे पर नैचुरल ग्लो आता है.
3. शरीर को करता है डिटॉक्स
सुबह खाली पेट आंवला और हल्दी का पानी पीने से शरीर के अंदर जमा गंदगी बाहर निकलती है. यह लिवर को साफ रखता है और पूरे दिन आपको हल्का और फ्रेश महसूस कराता है.
4. पेट की समस्याओं से दिलाए राहत
अगर आपको एसिडिटी, गैस या पेट फूलने की दिक्कत है, तो यह ड्रिंक काफी फायदेमंद साबित हो सकती है. यह पाचन तंत्र को मजबूत करती है, आंतों को साफ रखती है और पेट में जलन या भारीपन को दूर करती है. जब पेट ठीक रहता है, तो मूड और स्किन दोनों ही बेहतर दिखते हैं.
5. मूड और फोकस को करता है बेहतर
हल्दी में पाया जाने वाला करक्यूमिन दिमाग को एक्टिव और मूड को पॉजिटिव बनाता है. वहीं आंवले की खटास सुबह-सुबह शरीर को ताजगी का एहसास दिलाती है. इस ड्रिंक से तनाव कम होता है और दिनभर फोकस बनाए रखने में मदद मिलती है.
कैसे पिएं
रात में एक गिलास पानी में एक चम्मच आंवला पाउडर और आधा चम्मच हल्दी पाउडर डालकर रख दें. सुबह खाली पेट हल्का गुनगुना करके पी लें. चाहें तो थोड़ा शहद मिलाकर स्वाद बढ़ा सकते हैं.
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Winter Throat Pain Remedies: सर्दियों का मौसम जहां ठंड और सुहावना एहसास देता है, वहीं इस मौसम में गले से जुड़ी समस्याएं भी तेजी से बढ़ जाती हैं. बार-बार तापमान बदलना और ठंडी, सूखी हवा गले की नमी छीन लेती है. आयुर्वेद के मुताबिक, इस मौसम में शरीर का वात और कफ असंतुलन में आ जाता है, जिससे गला सूखना, आवाज बैठना, खराश और दर्द जैसी परेशानियां बढ़ जाती हैं.
विज्ञान भी मानता है कि ठंडी हवा गले की म्यूकस लाइनिंग को कमजोर कर देती है, जिससे वायरस और बैक्टीरिया आसानी से संक्रमण फैला देते हैं. लेकिन राहत की बात यह है कि इन समस्याओं से बचाव के लिए महंगी दवाओं की जरूरत नहीं होती. हमारी रसोई में मौजूद कुछ घरेलू चीजें ही गले की परेशानी को जड़ से खत्म करने में मदद कर सकती हैं.
काली मिर्च और मिश्री का कमाल
काली मिर्च को आयुर्वेद में बलगम कम करने वाली औषधि माना गया है. इसमें मौजूद पाइपरीन तत्व गले में जमा कफ को कम करता है और आवाज को साफ करता है. जब काली मिर्च को मिश्री के साथ चबाया जाता है तो यह गले की सूजन, भारीपन और जलन को काफी हद तक कम कर देता है. वैज्ञानिक भी मानते हैं कि काली मिर्च का एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण गले की सूजन को कम करता है.
अदरक
अदरक का रस सर्दियों में गले के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. अदरक में मौजूद जिंजरॉल तत्व सूजन को कम करता है और दर्द से राहत देता है. नींबू और सेंधा नमक के साथ इसका सेवन करने से गले की सफाई होती है और इंफेक्शन तेजी से ठीक होता है.
मुलेठी
मुलेठी को गले के लिए एक प्राकृतिक टॉनिक माना जाता है. यह गले पर एक सुरक्षात्मक परत बनाती है, जिससे जलन और दर्द कम होता है. आंवला शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है और इंफेक्शन से लड़ने में मदद करता है. मिश्री इस मिश्रण को संतुलित करके गले को ठंडक और राहत देती है.
नोट:- डॉक्टरों का मानना है कि अगर इन घरेलू उपायों को सही तरीके से अपनाया जाए तो सर्दियों में गले की अधिकांश समस्याओं से बिना दवा के ही राहत मिल सकती है. हालांकि अगर दर्द ज्यादा समय तक बना रहे तो चिकित्सकीय सलाह जरूर लेनी चाहिए.