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इंसानी खोपड़ियों से बने बर्तन, मानव त्वचा की कुर्सियां; अमेरिका का सबसे खौफनाक सीरियल किलर
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बेहतर नींद के लिए दो आसान उपाय, जिंदगी में आएगा सकारात्मक बदलाव

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अगर आप खराब नींद से परेशान हैं, तो याद रखें, आप अकेले नहीं हैं. दुनिया भर में लाखों लोग क्रोनिक इंसोम्निया से परेशान हैं. लेकिन अब रिसर्च से पता चला है कि सोने से पहले हल्की-फुल्की एक्टिविटीज़ से नींद की क्वालिटी बेहतर हो सकती है. 2019 की एक स्टडी में पाया गया कि सोने से पहले किताब पढ़ने से दिमाग शांत होता है, ज़्यादा सोचने की आदत धीमी होती है, और शरीर और दिमाग को आराम मिलता है, जिससे दिमाग नींद के लिए तैयार होता है.

यह नतीजा 991 लोगों के एक ऑनलाइन रीडिंग ट्रायल से निकाला गया. दिसंबर 2019 में कुल 991 लोगों ने द रीडिंग ट्रायल में हिस्सा लिया, जिनमें से आधे (496) इंटरवेंशन ग्रुप (जिन्होंने ट्रायल में हिस्सा लिया था) में थे और आधे (495) कंट्रोल ग्रुप में थे. सभी ने ट्रायल पूरा नहीं किया: इंटरवेंशन ग्रुप में 127 और कंट्रोल ग्रुप में 90 ने हिस्सा नहीं लिया.

नतीजे पॉजिटिव थे. जिन लोगों ने रीडिंग ट्रायल में हिस्सा लिया, उनकी नींद में काफी सुधार हुआ. इसी तरह, ताई ची (चीनी मार्शल आर्ट)—एक धीमी, बैलेंस्ड, मेडिटेटिव एक्सरसाइज—भी नींद सुधारने के लिए बहुत फायदेमंद साबित हुई है। 2025 में पब्लिश हुई एक स्टडी (अमेरिकन एकेडमी ऑफ़ स्लीप मेडिसिन) में 50 साल और उससे ज़्यादा उम्र के 200 लोग शामिल थे, जिन्हें क्रोनिक इंसोम्निया था.

इसमें पाया गया कि ताई ची और कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT-I) दोनों ने इंसोम्निया से राहत दिलाने में अहम भूमिका निभाई. CBT-I शुरू में बेहतर लगा, लेकिन 15 महीने बाद, ताई ची ने नींद में लगभग उतना ही सुधार किया. इससे पता चला है कि ताई ची लंबे समय के लिए एक अच्छा ऑप्शन है. ताई ची के फायदे सिर्फ़ नींद तक ही सीमित नहीं हैं. यह एंग्जायटी, डिप्रेशन, थकान और दिन में नींद आने से भी राहत दिलाने में मदद करता है.

तो अगर आप अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी के स्ट्रेस, लंबे काम के घंटों, स्क्रीन टाइम, आँखों और दिमाग की थकान, या बेचैन विचारों के साथ सोते हैं, तो सोने से पहले कुछ लाइनें पढ़ना और ताई ची की प्रैक्टिस करना आपकी नींद की क्वालिटी में फ़र्क ला सकता है और सबसे अच्छी बात इनमें दवा नहीं लगती, इनके कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं होते और ये सस्ते भी होते हैं.


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Written by: Taushif

02 Dec 2025  ·  Published: 01:38 IST

हर बार परफेक्ट दाल बनाना अब होगा आसान, जानें 5 जरूरी टिप्स

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हर बार स्वादिष्ट और परफेक्ट दाल बनाना एक कला है, लेकिन थोड़ी समझदारी और कुछ आसान टिप्स से यह काम बहुत आसान हो सकता है. अक्सर देखा गया है कि दाल बनाते समय कभी पानी ज़्यादा पड़ जाता है तो कभी दाल कच्ची रह जाती है. कई बार स्वाद भी फीका लगने लगता है लेकिन अगर आप कुछ बुनियादी बातें ध्यान में रखें, तो हर बार होटल जैसी टेस्टी और नरम दाल बना सकते हैं.

1. दाल का सही चुनाव करें
हर दाल की अपनी खासियत होती है. मूंग दाल हल्की होती है और जल्दी पक जाती है, तो वहीं चना दाल थोड़ी भारी और गाढ़ी होती है, जिसे पकने में समय लगता है. इसी तरह तुअर दाल (अरहर) या मसूर दाल को भी अलग-अलग तरह से पकाना पड़ता है. इसलिए सबसे पहले यह समझें कि आप कौन सी दाल बना रहे हैं और उसकी नेचर क्या है.

2. भिगोना न भूलें
दाल पकाने से पहले उसे कम से कम 30 मिनट से 1 घंटे तक पानी में भिगो देना चाहिए. इससे दाल जल्दी पकती है और उसका टेक्सचर भी बेहतर होता है. साथ ही इसमें मौजूद स्टार्च टूट जाता है जिससे वह पचने में आसान हो जाती है.

3. प्रेशर कुकर का करें सही इस्तेमाल
दाल को तेज़ और अच्छी तरह से पकाने के लिए प्रेशर कुकर सबसे अच्छा विकल्प है. इससे न सिर्फ समय बचता है, बल्कि दाल मुलायम भी बनती है. हालांकि ध्यान रखें कि कुकर में कितनी सीटी लगानी है, यह दाल की किस्म पर निर्भर करता है.

4. नमक डालने का सही समय
दाल बनाते समय अक्सर लोग शुरुआत में ही नमक डाल देते हैं, लेकिन इससे दाल का टेक्सचर हार्ड हो सकता है. बेहतर यही है कि जब दाल पूरी तरह पक जाए, तभी नमक डालें. इससे दाल सॉफ्ट बनी रहती है और स्वाद भी बराबर बैठता है.

5. तड़का है स्वाद का राजा
सिंपल दाल को लाजवाब बनाने में तड़का बहुत अहम भूमिका निभाता है. थोड़ा घी या तेल गरम करें और उसमें राई, जीरा, लहसुन, अदरक, सूखी लाल मिर्च या करी पत्ता डालें. इसे दाल पर डालते ही उसकी खुशबू और स्वाद में चार चांद लग जाते हैं.


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Written by: Taushif

02 Aug 2025  ·  Published: 05:18 IST

कम उम्र में हड्डियों की कमजोरी; इन फूड्स को डाइट में शामिल करें, मिलेगी मजबूती

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Bone Health Foods: हड्डियां हमारे शरीर का ढांचा हैं. वही जो पूरे शरीर को सहारा देती हैं. लेकिन आजकल हड्डियों से जुड़ी परेशानियां सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रहीं. अब युवा उम्र में भी हड्डियों की कमजोरी और दर्द की शिकायत आम हो गई है. इसका सबसे बड़ा कारण है हमारी असंतुलित दिनचर्या और गलत आदतें.

कैल्शियम और विटामिन D की कमी के साथ-साथ व्यायाम की कमी, धूम्रपान, शराब, ज़्यादा सोडा पीना और नमक का अधिक सेवन ये सभी चीज़ें हड्डियों को धीरे-धीरे कमजोर करती हैं. समय रहते ध्यान न दिया जाए तो यही कमजोरी आगे चलकर ऑस्टियोपोरोसिस जैसी गंभीर बीमारी में बदल सकती है, जिसमें हड्डियां बहुत जल्दी टूटने लगती हैं. लेकिन अच्छी बात यह है कि कुछ हेल्दी चीज़ें रोज़मर्रा की डाइट में शामिल करके हड्डियों को मजबूत बनाया जा सकता है.

1. कैल्शियम के सबसे अच्छे स्रोत
दूध, दही और पनीर हड्डियों के लिए बेहद ज़रूरी हैं. इनमें भरपूर कैल्शियम और प्रोटीन होता है जो हड्डियों की ग्रोथ और मजबूती बढ़ाता है. दूध रोज पीने से शरीर को पर्याप्त कैल्शियम और विटामिन D मिलता है.

दही न सिर्फ कैल्शियम का अच्छा स्रोत है, बल्कि इसमें मौजूद प्रोबायोटिक्स पाचन को भी दुरुस्त रखते हैं. पनीर में मौजूद प्रोटीन मांसपेशियों और हड्डियों दोनों को सपोर्ट करता है.

2. हरी पत्तेदार सब्जियां
हरी सब्जियों में कैल्शियम, आयरन और विटामिन K की भरपूर मात्रा होती है, जो हड्डियों की मजबूती के लिए बहुत ज़रूरी है. पालक, केल, और कोलार्ड ग्रीन्स जैसी सब्जियां कैल्शियम के साथ-साथ विटामिन K का भी अच्छा स्रोत हैं. ब्रोकली खाने से न सिर्फ कैल्शियम मिलता है बल्कि इसमें मौजूद विटामिन C हड्डियों के ऊतकों को स्वस्थ रखता है.

3. बीज और नट्स
नट्स और सीड्स में हड्डियों को मजबूत करने वाले कई पोषक तत्व होते हैं. बादाम में हेल्दी फैट्स और कैल्शियम दोनों होते हैं, जो हड्डियों को मज़बूती देते हैं. खसखस और तिल कैल्शियम के समृद्ध स्रोत हैं. चिया सीड्स ओमेगा-3 फैटी एसिड और कैल्शियम से भरपूर होते हैं, जो हड्डियों की हेल्थ के साथ-साथ जोड़ों को भी लचीला बनाते हैं.


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Written by: Taushif

29 Oct 2025  ·  Published: 11:18 IST

छोटा बाजरा: सर्दियों में सेहत के लिए सुपरफूड, आयुर्वेद भी करता है इसकी सिफारिश

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Little Millet Benefits: भारत के कई ग्रामीण इलाकों में सदियों से खाया जाने वाला छोटा बाजरा, जिसे अंग्रेज़ी में Little Millet कहा जाता है, आज एक बार फिर लोकप्रिय हो रहा है. पहले यह आम भोजन का हिस्सा था, लेकिन अब इसे एक सुपरफूड माना जा रहा है, क्योंकि इसके फायदों की सूची लंबी है.

छोटा बाजरा पोषण का बेहतरीन स्रोत है और इसमें प्रोटीन, फाइबर, आयरन, कैल्शियम, विटामिन बी और कई एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं. यह शरीर को ऊर्जा देने, खून की कमी दूर करने, हड्डियों को मजबूत करने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है. खासकर सर्दियों के मौसम में इसे खाना बेहद फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि यह शरीर को गर्म रखता है और पाचन शक्ति को मजबूत करता है.

भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने भी छोटा बाजरा को सुपरफूड की श्रेणी में रखा है. मंत्रालय का कहना है कि यह अनाज शरीर में ऊर्जा बनाए रखने, मेटाबॉलिज्म सुधारने और कई पाचन संबंधी बीमारियों में मदद करता है.

आयुर्वेद में छोटा बाजरा के फायदे और भी विस्तार से बताए गए हैं. आयुर्वेदिक सिद्ध साहित्य के अनुसार इसमें गैलिक एसिड, क्लोरोजेनिक एसिड, फेरुलिक एसिड और पी-कौमरिक एसिड जैसे सक्रिय बायो-कंपाउंड होते हैं. ये तत्व शरीर में एंटीऑक्सीडेंट के रूप में काम करते हैं, जिससे सूजन कम होती है और शरीर की प्राकृतिक हीलिंग क्षमता बढ़ती है.

विशेषज्ञों का कहना है कि रोज़ाना भोजन में छोटा बाजरा शामिल करने से पाचन मजबूत होता है और मोटापे, गैस और एसिडिटी जैसी समस्याओं में राहत मिलती है. साथ ही यह डायबिटीज वालों के लिए भी सुरक्षित विकल्प है, क्योंकि इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है. छोटा बाजरा को खिचड़ी, उपमा, दलिया या रोटी की तरह आसानी से रोज़ाना की डाइट में शामिल किया जा सकता है.
 


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Written by: Taushif

24 Nov 2025  ·  Published: 11:41 IST