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घर में मौजूद ये 5 छोटे-छोटे सीड्स हैं सुपरफूड, दिल, डायबिटीज़ और स्किन की समस्याओं से दिलाएंगे छुटकारा

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Superfood Seeds: आजकल लोग स्वस्थ और फिट रहने के लिए तरह-तरह की डाइट, सप्लीमेंट्स और महंगे प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे घर में आसानी से मिलने वाले छोटे-छोटे सीड्स (बीज) भी हमारी सेहत के लिए सुपरफूड का काम करते हैं? ये सीड्स शरीर को जरूरी पोषण देने के साथ कई गंभीर बीमारियों से भी बचाते हैं. आइए जानते हैं ऐसे 5 सीड्स और उनके फायदे.

1. फ्लैक्स सीड्स
फ्लैक्स सीड्स यानी अलसी के बीज में फाइबर, ओमेगा-3 फैटी एसिड और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में होते हैं. इन्हें नियमित खाने से कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल रहता है और दिल की बीमारियों का खतरा कम होता है. साथ ही ये कब्ज की समस्या को दूर करने और पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में मदद करते हैं.

2. चिया सीड्स
ये छोटे काले बीज फाइबर, ओमेगा-3 फैटी एसिड, प्रोटीन और मिनरल्स जैसे कैल्शियम और मैग्नीशियम से भरपूर होते हैं. चिया सीड्स का सेवन करने से ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है, डाइजेशन बेहतर होता है, हार्ट हेल्थ मजबूत होती है और पेट लंबे समय तक भरा रहता है, जिससे वजन कंट्रोल करने में मदद मिलती है.

3. पंपकिन सीड्स
कद्दू के बीज यानी पंपकिन सीड्स में प्रोटीन, हेल्दी फैट, फाइबर, मैग्नीशियम, जिंक और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर होते हैं. इन बीजों को रोजाना खाने से इंसुलिन लेवल बैलेंस रहता है, दिल स्वस्थ रहता है और नींद की गुणवत्ता में सुधार होता है. ये बीज शरीर को ऊर्जा देने और तनाव कम करने में भी मददगार होते हैं.

4. सनफ्लावर सीड्स
सूरजमुखी के बीज यानी सनफ्लावर सीड्स में विटामिन E, हेल्दी फैट, प्रोटीन और मिनरल्स जैसे मैग्नीशियम और सेलेनियम पाए जाते हैं. इनका नियमित सेवन स्किन हेल्थ, इम्यून सिस्टम और ब्रेन फंक्शन को बेहतर बनाता है. साथ ही ये एंटीऑक्सीडेंट्स क्रोनिक डिजीज से बचाव में मदद करते हैं.

5. हेम्प सीड्स
हेम्प सीड्स में प्रोटीन, फाइबर और ओमेगा-3 व ओमेगा-6 जैसे हेल्दी फैटी एसिड भरपूर मात्रा में होते हैं. इन बीजों के सेवन से हार्ट हेल्थ मजबूत होती है, ब्रेन फंक्शन बेहतर रहता है और स्किन संबंधी समस्याएं कम होती हैं.

सेवन का तरीका
इन सीड्स को अपनी डाइट में शामिल करना बहुत आसान है. आप इन्हें स्मूदी, दही, सलाद या सीधा चबाकर भी खा सकते हैं. रोजाना 1–2 चम्मच सीड्स खाने से लाभ मिलता है, लेकिन जरूरत से ज्यादा सेवन से बचना चाहिए. इन बीजों को खाने के बाद पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी है. अगर किसी को कोई स्वास्थ्य समस्या है तो डॉक्टर से सलाह लेकर ही सेवन करें.

इन सीड्स को संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली के साथ अपनी डाइट में शामिल करने से न सिर्फ आप हेल्दी और फिट रहेंगे, बल्कि दिल, डायबिटीज़, कब्ज और स्किन जैसी समस्याओं से भी राहत पाएंगे.


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Written by: Taushif

11 Sep 2025  ·  Published: 12:49 IST

Vitamin B12 की कमी से हो सकता है डिप्रेशन समेत 10 गंभीर बीमारी, जल्द पहचाने लक्षण

प्रतीकात्मक फोटो

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Vitamin B12 Deficiency Symptoms: विटामिन बी12 हमारे शरीर के लिए एक बेहद ज़रूरी पोषक तत्व है, जो रक्त निर्माण, मस्तिष्क स्वास्थ्य को बनाए रखने और तंत्रिकाओं को मज़बूत बनाने में अहम भूमिका निभाता है। लेकिन जब इसकी कमी हो जाती है, तो धीरे-धीरे शरीर में कई तरह की समस्याएँ शुरू हो जाती हैं, जैसे थकान, चक्कर आना, भूलने की बीमारी या हाथ-पैरों में झुनझुनी। अगर समय रहते इसकी पहचान और इलाज न किया जाए, तो ये सामान्य लक्षण गंभीर बीमारियों का रूप ले सकते हैं। आइए जानते हैं बी12 की कमी से होने वाली 10 मुख्य बीमारियाँ।

मेगालोब्लास्टिक एनीमिया
B12 की कमी से शरीर में लाल रक्त कोशिकाएँ असामान्य रूप से बड़ी और अपरिपक्व हो जाती हैं, जिससे मेगालोब्लास्टिक एनीमिया हो जाता है। इससे शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति कम हो जाती है, जिससे थकान, साँस लेने में तकलीफ, त्वचा का पीला पड़ना और तेज़ दिल की धड़कन जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। समय पर इलाज न होने पर यह स्थिति गंभीर हो सकती है।

न्यूरोपैथी 
B12 न्यूरॉन्स के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इसकी कमी से झुनझुनी, सुन्नता, हाथों और पैरों में तेज चुभन, संतुलन बिगड़ना और चलने में कठिनाई जैसी समस्याएं होती हैं। इस स्थिति को 'न्यूरोपैथी' कहा जाता है और लंबे समय तक B12 की कमी से स्थायी तंत्रिका क्षति हो सकती है। यह विशेष रूप से बुजुर्गों में आम है।

कमजोर याददाश्त
B12 की कमी से मस्तिष्क में न्यूरोट्रांसमीटर का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे याददाश्त कमजोर हो जाती है। व्यक्ति चीजें भूलने लगता है, भ्रमित हो जाता है और निर्णय लेने में परेशानी होती है। लंबे समय में, यह स्थिति, खासकर बुजुर्गों में, डिमेंशिया जैसी गंभीर मानसिक समस्याओं का रूप ले सकती है।

अवसाद
विटामिन बी12 मस्तिष्क में सेरोटोनिन और डोपामाइन जैसे "खुशी के हार्मोन" के उत्पादन में मदद करता है। इसकी कमी से व्यक्ति उदास रहने लगता है, मनोदशा में उतार-चढ़ाव आते हैं और अवसाद की स्थिति विकसित हो सकती है। अनिद्रा, चिंता और मन में निराशा जैसे लक्षण आम हो जाते हैं।

अत्यधिक थकान और कमजोरी
विटामिन बी12 की कमी से शरीर की कोशिकाओं को ऊर्जा नहीं मिल पाती, जिससे लगातार थकान बनी रहती है। बिना मेहनत किए भी शरीर भारी लगता है, छोटी-छोटी गतिविधियाँ भी मुश्किल हो जाती हैं। मांसपेशियों में कमजोरी, चक्कर आना और सिरदर्द जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।

सांस फूलना और चक्कर आना
विटामिन बी12 की कमी से ऑक्सीजन की आपूर्ति कम हो जाती है, जिससे सांस लेने में तकलीफ होती है। सांस फूलना खासकर सीढ़ियाँ चढ़ते या हल्का शारीरिक श्रम करते समय होता है। चक्कर आना, सिर चकराना और बेहोशी जैसा महसूस होना इसके साथ आम है।

मुँह और जीभ की समस्याएँ
विटामिन B12 की कमी से मुँह के छाले, जीभ में सूजन, जलन और लालिमा हो सकती है। इस स्थिति को "ग्लोसाइटिस" कहते हैं। जीभ अपनी चिकनाई खो देती है और स्वाद की अनुभूति कम हो जाती है। मुँह के कोनों में दरार पड़ना और खाने-पीने में भी कठिनाई हो सकती है।

दृष्टि संबंधी समस्याएँ
विटामिन B12 की कमी से ऑप्टिक तंत्रिका प्रभावित हो सकती है, जिससे धुंधली दृष्टि, दोहरी छवि या आँखों में जलन जैसी समस्याएँ हो सकती हैं। इसे "ऑप्टिक न्यूरोपैथी" कहते हैं। अगर समय पर इलाज न किया जाए, तो यह स्थिति अंधेपन का कारण बन सकती है।

बांझपन
लंबे समय तक विटामिन B12 की कमी पुरुषों और महिलाओं दोनों की प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकती है। महिलाओं को अनियमित मासिक धर्म और गर्भधारण में कठिनाई हो सकती है, जबकि पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या कम हो सकती है। समय पर इलाज करने पर यह प्रभाव कभी-कभी ठीक हो जाता है।

हृदय रोग
विटामिन B12 की कमी से शरीर में होमोसिस्टीन नामक अमीनो एसिड का स्तर बढ़ जाता है, जो रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुँचाता है। इससे हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। विटामिन बी12 हृदय स्वास्थ्य के लिए एक आवश्यक विटामिन है, जो हृदय को मजबूत और धमनियों को साफ रखता है।


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Written by: Taushif

20 Jul 2025  ·  Published: 05:15 IST

पेट रहेगा स्वस्थ तो शरीर रहेगा तंदरुस्त, जानिए किन चीज़ों से मिलेगा फायदा

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Fermented Foods For Gut Health: अगर आप अपनी सेहत को लंबे समय तक अच्छा बनाए रखना चाहते हैं तो सबसे पहले अपने गट यानी पाचन तंत्र की सेहत का ध्यान रखना जरूरी है. एक हेल्दी गट न सिर्फ पोषक तत्वों के अवशोषण में मदद करता है, बल्कि यह हार्मोन बैलेंस, इम्युनिटी बढ़ाने और स्किन ग्लो तक में अहम भूमिका निभाता है. रिसर्च से यह भी साबित हो चुका है कि हेल्दी गट हमारे मूड और मानसिक स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाता है.

गट हेल्थ सुधारने में फर्मेंटेड फूड्स (Fermented Foods) की अहम भूमिका होती है. ये फूड्स प्रोबायोटिक्स, एंटीऑक्सिडेंट्स और विटामिन से भरपूर होते हैं, जो पाचन क्रिया को बेहतर बनाते हैं और शरीर में अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ावा देते हैं. आइए जानते हैं ऐसे कुछ बेहतरीन फर्मेंटेड फूड्स के बारे में जो आपके गट के लिए रामबाण की तरह काम कर सकते हैं.

1. घर का बना दही
दही भारतीय रसोई में रोज़मर्रा का हिस्सा है और यह सबसे लोकप्रिय प्रोबायोटिक फूड है. यह अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ावा देता है, सूजन कम करता है और पाचन शक्ति मजबूत बनाता है.

2. सॉरक्रॉट (Sauerkraut)
यह फर्मेंटेड पत्ता गोभी से बनाया जाता है. इसमें फाइबर, विटामिन C और प्रोबायोटिक्स भरपूर मात्रा में होते हैं. यह गट के बैक्टीरियल बैलेंस को सुधारने में मदद करता है.

3. इडली और डोसा
इडली और डोसा भी फर्मेंटेड फूड की श्रेणी में आते हैं. ये चावल और उड़द दाल को भिगोकर और फर्मेंट करके बनाए जाते हैं, जिससे पाचन में आसानी होती है.

4. कोम्बुचा
कोम्बुचा एक फर्मेंटेड चाय है जो प्रोबायोटिक्स और एंटीऑक्सिडेंट्स से भरपूर होती है। यह डाइजेशन, डिटॉक्स और एनर्जी बूस्ट के लिए बहुत लाभकारी मानी जाती है.

5. फर्मेंटेड चावल
बचे हुए चावल को रात भर पानी में भिगोकर सुबह छाछ या दही के साथ खाने से यह एक बेहतरीन प्रोबायोटिक फूड बन जाता है. यह शरीर को ठंडक देता है और गट हेल्थ को सपोर्ट करता है.

6. किमची और मिसो (वैकल्पिक विदेशी विकल्प)
कोरियन डिश किमची और जापानी मिसो भी बेहतरीन फर्मेंटेड फूड्स हैं. हालांकि ये हर जगह आसानी से नहीं मिलते, लेकिन जहां उपलब्ध हों वहां ये गट हेल्थ के लिए बहुत लाभकारी हैं.


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Written by: Taushif

31 Jul 2025  ·  Published: 05:05 IST

कमजोर हृदय बढ़ा सकता है परेशानी, कम ईएफ को बिलकुल न करें नजरअंदाज

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Low Ejection Fraction Heart: दिल की ताकत समझनी हो तो कभी भी इजेक्शन फ्रैक्शन (EF) को हल्के में नहीं लेना चाहिए. दिल हर धड़कन में जितना खून शरीर में भेजता है, उसी का प्रतिशत ईएफ कहलाता है. अगर दिल मजबूती से सिकुड़ता है तो पम्पिंग अच्छी रहती है और ईएफ नॉर्मल आता है, लेकिन जब दिल की मांसपेशियां थकने लगती हैं, जकड़न बढ़ने लगती है या दिल को जरूरी ताकत नहीं मिल पाती, तब ईएफ कम होने लगता है.

इसी वजह से डॉक्टर हार्ट मरीज का सबसे पहले ईएफ की रिपोर्ट चेक करते हैं. ईएफ मापने के लिए सबसे आसान और सुरक्षित तरीका है इको टेस्ट. इसमें दिल की दीवारें साफ दिखाई देती हैं और पता चलता है कि दिल कितना खून पंप कर रहा है, वाल्व ठीक काम कर रहे हैं या नहीं और खून का फ्लो कैसा है. साल में कम से कम एक बार ये टेस्ट कराना अच्छा माना जाता है. ईएफ की रेंज भी बहुत कुछ बताती है. 55-70 नॉर्मल, 41-54 हल्की कमी, 31-40 मध्यम कमी और 30 से कम गंभीर स्थिति मानी जाती है.

ईएफ कम होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे पुराना हाई बीपी, हार्ट अटैक का इतिहास, ज्यादा तनाव, शराब का अधिक सेवन, अनकंट्रोल शुगर, ब्लॉकेज, थायरॉयड समस्या, स्मोकिंग और कुछ वायरल इंफेक्शन जो दिल की मांसपेशियों को कमजोर कर देते हैं. ईएफ कम होने के लक्षण भी अक्सर धीरे-धीरे सामने आते हैं, जैसे सीढ़ियां चढ़ते समय सांस फूलना, जल्दी थक जाना, धड़कन बढ़ना, पैरों में सूजन या रात में सांस लेने में परेशानी.

आयुर्वेद के मुताबिक, जब हृदय कमजोर होता है तो शरीर की शक्ति और प्राणवायु पर असर पड़ने लगता है. रसधातु की कमी, दोषों का असंतुलन और मानसिक तनाव इसे और बिगाड़ सकते हैं. अर्जुन, द्राक्ष, अश्वगंधा और पुष्करमूल जैसी औषधियां हृदय को पोषण देने वाली मानी जाती हैं. हल्की वॉक, संतुलित भोजन और मन को शांत रखकर भी काफी सुधार देखा गया है. वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो ईएफ कम होने का मतलब है कि दिल की मांसपेशियां कमजोर या डैमेज हैं. 

सही मेडिसिन और लाइफस्टाइल सुधार मिलकर कई मरीजों में ईएफ को 10-15 प्रतिशत तक बढ़ा देते हैं. कम नमक, हल्का खाना, सुबह टहलना, बीपी–शुगर कंट्रोल, तनाव कम करना और समय पर सोना-जागना दिल को मजबूत बनाने में मदद करते हैं, लेकिन अगर अचानक सांस रुकने लगे, तेज सीने में दर्द हो या धड़कन बहुत तेज महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.
 


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Written by: Taushif

24 Nov 2025  ·  Published: 11:21 IST