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Triphala Health Henefits: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में गलत खानपान, जंक फूड, अनियमित दिनचर्या और तनाव हमारे पाचन तंत्र को सबसे ज्यादा प्रभावित करते हैं. ऐसे में आयुर्वेद में बताया गया त्रिफला, एक ऐसा प्राकृतिक उपाय है जो पेट की समस्याओं को दूर करके शरीर को भीतर से स्वस्थ बनाता है. त्रिफला तीन फलों, आंवला, हरड़ और बहेड़ा का मिश्रण है. इन तीनों फलों में ऐसे गुण हैं जो शरीर को साफ करने, सूजन कम करने और पाचन तंत्र को मजबूत बनाने का काम करते हैं.
1. विटामिन C का खजाना
आंवला एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन C से भरपूर होता है. यह इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है, पेट की सूजन कम करता है और शरीर को प्राकृतिक तरीके से डिटॉक्स करता है. त्रिफला में आंवला मिलाने से यह शरीर की सफाई में और भी असरदार हो जाता है.
2. हरड़
हरड़ स्वाद में भले कड़वी हो, लेकिन यह आंतों में जमा गंदगी, गैस और कब्ज को दूर करने में बेहद असरदार है. नियमित सेवन से पेट हल्का रहता है और पाचन बेहतर होता है.
3. बहेड़ा
बहेड़ा खट्टा-कड़वा होता है, लेकिन इसके एंटीबैक्टीरियल गुण आंतों में खराब बैक्टीरिया और हानिकारक सूक्ष्मजीवों को खत्म करते हैं. इससे पाचन सुधरता है और पेट के रोग दूर रहते हैं.
कैसे काम करता है त्रिफला?
वैज्ञानिक रिसर्च के अनुसार, त्रिफला में मौजूद फ्लावोनॉइड्स और एंटीऑक्सीडेंट्स, पेट की सूजन कम करते हैं. आंतों में अच्छे बैक्टीरिया बढ़ाते हैं. साथ ही शरीर से टॉक्सिन बाहर निकालते हैं. इसके अलावा, कब्ज, गैस और पेट दर्द को कम करते हैं. इसी कारण त्रिफला को आयुर्वेद में पेट और आंतों के लिए सबसे प्रभावी औषधि माना गया है.
कैसे लें त्रिफला?
चूर्ण को गर्म पानी के साथ रात में दूध में घोलकर या गोलियों के रूप में दूध के साथ लेने पर इसके फायदे और भी बढ़ जाते हैं क्योंकि यह पाचन शक्ति को मजबूत करता है.
कौन ले सकता है त्रिफला?
बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक सभी उम्र के लोग इसका सेवन कर सकते हैं. आयुर्वेद मानता है कि त्रिफला शरीर के वात, पित्त और कफ तीनों दोषों को संतुलित करता है, जिससे संपूर्ण स्वास्थ्य बेहतर होता है.
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Health News: सलमान खान की फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ से पहचान बनाने वाली भाग्यश्री आज भी अपने फिटनेस और ग्लो से चर्चा में रहती हैं. 56 साल की उम्र में भी वो 40 की नजर आती हैं. फिल्मों से दूर रहने के बावजूद वह सोशल मीडिया पर एक्टिव रहती हैं और हेल्थ टिप्स शेयर करती हैं.
भाग्यश्री इंस्टाग्राम पर ‘ट्यूसडे टिप विद बी’ नाम की सीरीज चलाती हैं, जिसमें वो फिटनेस और हेल्थ से जुड़े आसान उपाय बताती हैं. हाल ही में उन्होंने घर पर की जाने वाली एक आसान एक्सरसाइज बताई, जो खासतौर पर उन महिलाओं के लिए है जो जिम नहीं जा पातीं. उन्होंने कहा कि अगर जिम जाने का मन नहीं है, तो “गरबा को घर ले आइए”, यानी एक्सरसाइज को मजेदार बनाइए.
भाग्यश्री ने बताया कि gym stepper की मदद से आप कई वर्कआउट घर पर ही कर सकते हैं. इससे फिटनेस और एनर्जी दोनों बनी रहती हैं. उनके मुताबिक, हेल्दी रहने के लिए रोज थोड़ा समय खुद के लिए निकालना जरूरी है. इसी बीच, हार्वर्ड मेडिकल स्कूल की वेबसाइट Harvard Health Publishing ने भी घर पर की जाने वाली कुछ आसान एक्सरसाइज बताई हैं, जो खासकर महिलाओं के लिए बेहद फायदेमंद हैं. ये न सिर्फ वजन नियंत्रण में रखती हैं, बल्कि हड्डियों, जोड़ों और दिमाग को भी मजबूत बनाती हैं.
पैदल चलना (Walking)
यह सबसे आसान लेकिन असरदार एक्सरसाइज है. इससे कोलेस्ट्रॉल घटता है, हड्डियां मजबूत होती हैं, ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है और डायबिटीज या हार्ट डिजीज जैसी बीमारियों का खतरा कम होता है. रोज़ाना 30-45 मिनट चलने से मूड और याददाश्त दोनों बेहतर रहते हैं.
तैराकी (Swimming)
स्विमिंग को “संपूर्ण व्यायाम” कहा गया है. यह शरीर को बिना दबाव के फिट रखती है और गठिया जैसी समस्याओं में भी फायदेमंद है. इससे मूड अच्छा रहता है, तनाव कम होता है और कैलोरी तेजी से बर्न होती हैं.
स्ट्रेंथ ट्रेनिंग (Strength Training)
यह सिर्फ पुरुषों के लिए नहीं है. महिलाएं भी घर पर हल्के वजन उठाकर शुरुआत कर सकती हैं. इससे मांसपेशियां मजबूत होती हैं और उम्र के साथ आने वाली कमजोरी से बचाव होता है.
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चुकंदर को हेल्थ और स्किन दोनों के लिए सुपरफूड माना जाता है. यही वजह है कि आजकल कई लोग सुबह खाली पेट Beetroot Juice पीकर दिन की शुरुआत करना पसंद करते हैं. कहा जाता है कि इससे स्टैमिना बढ़ता है, ब्लड फ्लो बेहतर होता है और स्किन पर नैचुरल ग्लो आता है. लेकिन क्या खाली पेट इसे पीना सभी के लिए फायदेमंद है? इस सवाल का जवाब न्यूट्रिशनिस्ट राशी चहल ने एक इंटरव्यू में दिया.
खाली पेट चुकंदर का जूस पीने के फायदे
न्यूट्रिशनिस्ट के मुताबिक, अगर आपका पाचन ठीक है तो खाली पेट चुकंदर का जूस पीना बेहद फायदेमंद हो सकता है.
आयरन और विटामिन का बेहतर अवशोषण: खाली पेट पीने पर शरीर बीटरूट में मौजूद आयरन, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट्स को जल्दी और बेहतर तरीके से अवशोषित करता है.
न्यूट्रिशनिस्ट का सुझाव है कि इसे सुबह नाश्ते से करीब 30 मिनट पहले या वर्कआउट से पहले नींबू का रस मिलाकर पिएं, इससे असर दोगुना हो जाता है.
किन लोगों को सावधानी रखनी चाहिए?
चुकंदर का जूस हर किसी के लिए सुरक्षित नहीं है, खासकर जिन लोगों को पेट से जुड़ी कोई समस्या है, उन्हें इसे खाली पेट नहीं पीना चाहिए.
न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह
राशी चहल कहती हैं कि खाली पेट बीटरूट जूस पीना फायदेमंद है, लेकिन सीमित मात्रा में. अगर आपको लो ब्लड प्रेशर, किडनी स्टोन या पेट की समस्या है, तो इसे डॉक्टर की सलाह के बिना न पिएं. ऐसे लोगों के लिए बेहतर है कि चुकंदर का जूस अन्य फूड्स के साथ मिलाकर पिया जाए.
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Ulcer Early Symptoms: अक्सर लोग पेट में जलन या खट्टी डकारों को साधारण एसिडिटी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यही लक्षण आगे चलकर अल्सर का कारण बन सकते हैं. बार-बार जलन, गैस, पेट दर्द, भूख कम लगना या वजन घटना जैसे संकेतों को हल्का नहीं लेना चाहिए. अल्सर शरीर के कई हिस्सों, जैसे मुंह, पेट या आंतों में बन सकता है, लेकिन सबसे ज्यादा इसके मामले आमाशय और आंतों में पाए जाते हैं.
जब पेट में बनने वाला तेज़ अम्ल पेट की भीतरी दीवारों को नुकसान पहुंचाने लगता है, तो वहां घाव बन जाता है। यह एसिड इतना प्रबल होता है कि लोहे की ब्लेड को भी गलाने की क्षमता रखता है, इसलिए यह पेट के ऊतकों पर गंभीर असर डाल सकता है.
अल्सर क्यों होता है?
गलत खानपान अल्सर का सबसे बड़ा कारण माना जाता है. ज्यादा चाय-कॉफी, तला-भुना और मसालेदार खाना, शराब, खट्टे खाद्य पदार्थ और तनाव, गुस्सा व चिंता शरीर में अम्ल बढ़ाते हैं. जब पेट में एसिड आवश्यकता से अधिक बनने लगता है, तो यह पेट की दीवारों को नुकसान पहुँचाकर अल्सर बना देता है. शुरुआती चरण में पेट में जलन, गैस, खट्टी डकारें और दर्द दिखाई देता है. स्थिति बिगड़ने पर छाती में जलन, उल्टी, पाचन गड़बड़ होना और कई बार मल में खून आने तक की समस्या हो सकती है. समय पर ध्यान न दिया जाए तो रोग गंभीर हो सकता है.
कैसे करें अल्सर से राहत?
अल्सर सही आहार और जीवनशैली अपनाने से काफी हद तक ठीक हो सकता है. कुछ प्राकृतिक उपाय पेट की जलन और घाव भरने में बेहद कारगर हैं. पत्ता गोभी और गाजर का जूस पेट की सूजन कम करता है, जबकि गाय का दूध और घी अम्लता को शांत करते हैं. हल्दी वाला दूध, बादाम का दूध और नारियल पानी पेट को आराम देते हैं. मुलेठी पेट की परत की सुरक्षा और हीलिंग में मदद करती है. अल्सर में छाछ, हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन, कच्चे केले की सब्जी, पालक और जवारों का रस बेहद लाभकारी है. इन्हें नियमित आहार में शामिल करना फायदेमंद रहता है.
इन चीजों से बचें
अल्सर से बचने और उसे नियंत्रित करने के लिए कुछ चीजों से दूर रहना बेहद जरूरी है. मैदा, जंक फूड, चाय-कॉफी, सोडा और शराब पेट में अम्ल बढ़ाते हैं और अल्सर को और खराब कर सकते हैं. इनका सेवन पूरी तरह से सीमित या बंद करना चाहिए. बेहतर पाचन के लिए हर दो घंटे में थोड़ा-थोड़ा खाना फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि इससे पेट पर दबाव कम पड़ता है. इसके साथ ही तनाव कम करना, समय पर भोजन लेना और पूरी नींद लेना अल्सर के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. सही दिनचर्या अपनाने से पेट की सेहत तेजी से सुधरती है.