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इंसानी खोपड़ियों से बने बर्तन, मानव त्वचा की कुर्सियां; अमेरिका का सबसे खौफनाक सीरियल किलर
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जब पोखरण पर मंडराया अमेरिकी हमला! अटल के सामने चट्टान बनकर खड़ा था रूस, कुछ नहीं कर पाए क्लिंटन

व्लादिमिर पुतिन

व्लादिमिर पुतिन

साल 1998 में भारत ने पोखरण में अपने शक्तिशाली परमाणु परीक्षण कर दुनिया को चौंका दिया था. लेकिन इन धमाकों के बाद पर्दे के पीछे एक और बड़ा भू-राजनीतिक भूकंप आया था. अमेरिका भारत पर प्रतिबंधों और सैन्य दबाव की तैयारी कर चुका था, यहां तक कि ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ जैसी कार्रवाई पर भी चर्चा हुई, लेकिन तभी रूस भारत के समर्थन में ऐसी मजबूती से खड़ा हो गया कि बिल क्लिंटन की पूरी रणनीति ध्वस्त हो गई. यह वह दौर था जब दुनिया की दो महाशक्तियों के बीच भारत केंद्र में था. अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व ने देश को संकट से निकाल लिया. 

इस बात की चर्चा उस समय हो रही है, जब  इसी हफ्ते रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, भारत के दौरे पर आने वाले हैं. ये भारत-रूस के उस ऐतिहासिक संबंध को और मजबूत करने वाला है, जो आजादी के बाद से ही रहा है. जब भी भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सपोर्ट की जरूरत हुई, हमेशा रूस उसके साथ था. आज हम आपके साथ ऐसा ही एक किस्सा शेयर करने जा रहे हैं, जब भारत अपनी सुरक्षा मजबूत कर रहा था और दुनिया उस पर प्रतिबंध लगा रही थी. ऐसे में रूस ही था, जो उसके साथ खड़ा हुआ था.

सोवियत संघ के पतन के बावजूद रूस ने भारत को अपना खास विशेष साझेदार माना. यह नीति आज भी UNSC में दिखती है. साल 2019 में आर्टिकल 370 पर रूस ने कहा इंटरनेशनल जमात के सामने खुलकर कहा था कि ये भारत का आंतरिक मामला है. अब चलिए चलते हैं उस घटना की ओर, जब रूस ने दुनिया के सामने साबित कर दिया था कि एक भरोसेमंद दोस्त अगर साथ हो, तो कूटनीतिक गलियारे में भी राह आसान हो जाती है.

कौन मुश्किल वक्त में खड़ा हुआ भारत के साथ?

11 और 13 मई 1998 को भारत ने राजस्थान के पोखरण में 5 परमाणु परीक्षण किए. इस निर्णय ने पूरी दुनिया को चौंका दिया. अमेरिका, जापान और कई यूरोपीय देशों ने भारत पर कड़े प्रतिबंध लगाए और राजनयिक दबाव बढ़ा. इस उथल-पुथल भरे समय में एक देश ऐसा था, जिसने भारत के फैसले को समझा और उसका साथ दिया-रूस. उस वक्त रूस की कमान संभाल रहे थे – बोरिस येल्तसिन और प्रधानमंत्री थे- विक्टर चेर्नोमिर्दिन, बाद में सेर्गेई किरियेंको ने मार्च, 1998 में ये पद संभाला. यह वह दौर था जब रूस सोवियत संघ के टूटने के बाद राजनीतिक और आर्थिक कमजोरियों से गुजर रहा था, लेकिन भारत के साथ उसकी रणनीतिक दोस्ती अभी भी मजबूत थी.
 


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Written by: Dhirendra Mishra

02 Dec 2025  ·  Published: 06:48 IST

BIhar Chunav 2025: हरियाणा वाला अचूक प्लान तैयार, लालू के 'MY' फार्मूले को BJP ऐसे देगी मात

सम्राट चौधरी, नीतीश कुमार और लालू यादव

सम्राट चौधरी, नीतीश कुमार और लालू यादव

Bihar Vidhan Sabha Chunav 2025: बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर प्रदेश का सियासी माहौल अब गरमाने लगा है. एनडीए गठबंधन को सत्ता में बनाए रखने के लिए बीजेपी ने अभी से जातीय समीकरण को साधने का काम शुरू कर दिया है. इस रणनीति के तहत बीजेपी ने आरजेडी प्रभाव वाले छोटे जातियों को अपने पक्ष में करने के लिए यूपी और हरियाणा की तर्ज पर मुस्लिम-यादव यानी एमवाई फार्मूले को शिकस्त देने की योजना तैयार की है.

यूपी में पिछले दो विधानसभा चुनाव और तीन लोकसभा चुनावों से लगातार छोटी-छोटी जातियों को साधकर बीजेपी को सत्ता 22 साल बाद सत्ता में पहुंचने में कामयाब हुई थी. बीजेपी ने यूपी में अपना दल की अनुराधा पटेल, एसबीएसपी के ओम प्रकाश राजभर, निषाद पार्टी के संजय निषाद और आरएलडी के जयंत चौधरी को अपने गुट में शामिल किया था. इसी का नतीजा रहा कि यूपी में बीजेपी दूसरी बार लगातार सत्ता में वापसी करने में सफल हुई.

जहां तक हरियाणा की बात है तो वहां पर आजादी के बाद से यह माना जाता रहा है कि वहां सीएम जाट का ही कोई नेता बन सकता है. अगर को गैर जाट सीएम बन भी गया तो वहां पर वह पद पर टिका नहीं रह सकता, लेकिन बीजेपी ने हरियाणा में सवर्ण, अहीर, पंजाबी और एससी-एसटी और ओबीसी वोट बैंक को साधकर जाट मतदाताओं को अहसास कराया कि लोकतंत्र में सभी के वोटों की अहमियत एक जैसी ही होती है.

हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024 में इसका लाभ बीजेपी को हरियाणा में तीसरी बार लगातार अपनी सरकार बनाने में मिली. तीसरी बार भी बीजेपी ने किसी जाट को चेहरे को सीएम बनाने के बजाए नायब सिंह सैनी को सीएम बनाया.

 हरियाणा मॉडल पर जोर

बीजेपी अपनी इसी रणनीति के तहत बिहार में एमवाई मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के बदले अपने कोर वोट बैंक के अलावा अत्यंत पिछड़ा वर्ग और एससी-एसटी में शामिल जातियों को साधने में जुटी है. यही वजह है कि लालू यादव की पार्टी से नाराज उनके समर्थक जातियों को अपने पक्ष में करना बीजेपी की चुनावी रणनीति के केंद्र में हैं.
 

जाति जनगणना 2023: जनसंख्या के हिसाब से शीर्ष 12 जातियां

यादव  14.26 प्रतिशत, दुसाध 5.31 प्रतिशत, रविदास  5.2 प्रतिशत, कोइरी  4.2 प्रतिशत, ब्राह्मण 3.65 प्रतिशत, राजपूत 3.45 प्रतिशत, मुसहर 3.08 प्रतिशत, कुर्मी 2.87 प्रतिशत, भूमिहार 2.86 प्रतिशत, मल्लाह 2.60 प्रतिशत, बनिया 2.31 प्रतिशत और कायस्थ- 0.60 प्रतिशत हैं.

आरक्षण के लिए तय श्रेणियों के लिहाज से आबादी

जाति सर्वेक्षण के रिपोर्ट के मुताबिक अन्य पिछड़ा वर्ग 27.12 प्रतिशत, अत्यंत पिछड़ा वर्ग 36.01 प्रतिशत, अनुसूचित जाति 19.65 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति 1.68 प्रतिशत और अनारक्षित यानी सवर्ण 15.52 प्रतिशत हैं. बिहार में मुस्लिमों की आबादी 17.7 प्रतिशत है.

शहीद बुद्धू नोनिया जन्म शताब्दी समारोह क्यों?

बीजेपी के रणनीतिकार ने शहीद बुद्धू नोनिया की जन्म शताब्दी मनाने का फैसला लिया है. दरअसल, शहीद बुद्धू नोनिया समुदाय आते हैं. उन्होंने अपने समाज के कल्याण और स्वतंत्रता संग्राम में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था. अंग्रेजी हुकूमत की दमनकारी नीतियों के आगे वो झुके नहीं और शहीद होना पसंद किया. नोनिया व छोटे जातियों के बीच आज भी शहीद बुद्धू को लेकर काफी सम्मान का भाव है.


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Written by: Dhirendra Mishra

17 Jun 2025  ·  Published: 16:51 IST

कांग्रेस नेता उदित राज ने किया इंदिरा गांधी का बचाव, कहा- 'पीएम मोदी के राज में अघोषित इमरजेंसी'

उदित राज

उदित राज

Udit Raj On BJP: देश में 25 जून 1975 को भारत में आपातकाल लागू किया गया था. पूर्व पीएम इंदिरा गांधी द्वारा आपातकाल लागू होने के 50 साल पूरे होने पर मोदी सरकार देश भर में स्मृति कार्यक्रम का आयोजन करेगी. केंद्र सरकार के इस फैसले पर कांग्रेस नेता उदित राज ने तीखी प्रतिक्रिया दी है.

न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में उदित राज ने आपातकाल पर कहा, "वो सैड पार्ट था लेकिन वो ओपेन इमरजेंसी थी. आज इमरजेंसी घोषित नहीं है लेकिन उससे भी ज्यादा स्थिति खराब है. किसी भी इंडेक्स में आप देख सकते हैं. फ्रीडम ऑफ प्रेस, रिलीजियस टॉलरेंस...दो-चार ही इंडिकेटर होते हैं, जिससे पता चलता है कि देश में लोकतंत्र है या नहीं है.''

दलित आदिवासियों का हुआ था उत्थान- उदित राज

उदित राज आगे कहा, ''इमरजेंसी में सारी चीजें खराब नहीं थीं. दलित और आदिवासियों का इमरजेंसी में बड़ा उत्थान हुआ. 20 सूत्री कार्यक्रम उसी समय लागू हुआ था. जो भूमिहीन थे उनको जमीन दी गई. बहाली हुई. इसके अलावे बहुत सारे कल्याणकारी कार्य इंदिरा गांधी जी ने किए थे. उसके बाद शायद इतना अच्छा कार्य नहीं हो सका है.'' 

आज तो इमरजेंसी से भी बुरी स्थिति 

उन्होंने बीजेपी पर फासीस्टवादी होने का आरोप लगाते हुए कहा कि आज देश भर में अघोषित इमरजेंसी है. इनकी कहां से नैतिकता बन रही है जो उस इमरजेंसी की बात करें. आज तो उस इमरजेंसी से ज्यादा बुरी स्थिति है. 

चुनाव आयोग बीजेपी की कठपुतली

कांग्रेस नेता ने कहा है कि बीजेपी आज अपना हिसाब किताब बताए. आज चुनाव आयोग इनके कंट्रोल में है. उस समय का इंडिपेंडेंट ज्यूडिशियरी को देख सकते हैं कि एक प्राइम मिनिस्टर का चुनाव अवैध कर दिया गया. क्या आज कोई सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट का जज मोदी-शाह के खिलाफ इस तरह का फैसला दे सकते हैं? इसी से पता लगता है कि उस समय संस्थान कितने आजाद थे. 

बता दें कि देश में 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक 21 महीने के लिए इमरजेंसी रही. तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी की सरकार की सिफारिश पर इमरजेंसी की घोषणा की थी.


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Written by: Dhirendra Mishra

25 Jun 2025  ·  Published: 00:13 IST

भारतीय IT प्रोफेशनल्स के लिए ट्रंप का H-1B गिफ्ट! क्या अब छा जाएगा भारत?

ट्रंप की वीजा  नीति भारतीय आईटी कंपनियों के सुनहरा मौका

ट्रंप की वीजा नीति भारतीय आईटी कंपनियों के सुनहरा मौका

ट्रंप प्रशासन की नई H-1B वीजा नीति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह बदलाव भारतीय IT प्रोफेशनल्स के लिए वरदान साबित हो सकता है। अमेरिका की टेक इंडस्ट्री में भारतीयों की मौजूदगी पहले से ही मजबूत है, ऐसे में नई पॉलिसी उन्हें और बड़ा अवसर दे सकती है। सवाल यह है कि क्या इससे भारत का टेक टैलेंट दुनिया में और ज्यादा छा जाएगा?

H-1B वीजा नीति में बदलाव का असर

अमेरिकी सरकार की नई पॉलिसी के तहत H-1B वीजा प्रक्रिया को सरल और तेज बनाया गया है. इससे हाई स्किल प्रोफेशनल्स के लिए वीजा मिलने की संभावना बढ़ गई है. यह अब पहले से ज्यादा मेरिट और इनोवेशन ड्रिवन होगा. जबकि न्यूनतम वेतन स्तर पर भी बदलाव किए गए हैं. ताकि अमेरिकी कंपनियां अनुभवी भारतीय पेशेवरों को आसानी से भर्ती कर सकें. अब अमेरिका में IT, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर सिक्योरिटी, क्वांटम कंप्यूटिंग और डेटा साइंस जैसे क्षेत्रों के प्रोफेशनल्स को ज्यादा मौके मिल सकते हैं.

भारत को क्यों होगा फायदा?

सिलिकॉन वैली और अमेरिकी कंपनियों में भारतीय IT इंजीनियरों की पहले से ही सबसे बड़ी हिस्सेदारी है. नई नीति से लो-स्किल वर्कर्स की एंट्री कम होगी और भारतीय IT प्रोफेशनल्स, जो दुनिया में सबसे प्रतिस्पर्धी माने जाते हैं, को प्राथमिकता मिलेगी. अगर भारतीय एक्सपर्ट्स ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर और ज्यादा चमकेंगे, तो भारत के टेक इकोसिस्टम की इमेज और वैल्यू भी बढ़ेगी.

इंडियन कंपनियां उठा सकती हैं लाभ 

TCS, Infosys, Wipro जैसी कंपनियां लंबे समय से अमेरिका में अपने टैलेंट पर निर्भर हैं. नई पॉलिसी से उन्हें बेहतर और स्थायी वीजा सपोर्ट मिल सकता है. दूसरी तरफ सिलिकॉन वैली में भारतीय आईटी विशेषज्ञों की मांग लगातार बढ़ रही है. नई नीति के तहत भारतीय एक्सपर्ट्स अपनी तकनीकी क्षमता दिखाकर अमेरिका की बड़ी टेक कंपनियों में नौकरी पा सकते हैं.

यदि हम केवल उन भारतीयों की बात करें जो IT कंपनियों के तहत वीजा पर काम कर रहे हैं तो उनकी संख्या  संख्या लगभग 80 हजार है. सभी भारतीय IT प्रोफेशनल्स में अन्य श्रेणियां भी शामिल होंगी जैसे कि अमेरिकी कंपनियों में काम करने वाले भारतीय, ग्रीन कार्ड धारी भारतीय आदि. तब यह संख्या कहीं अधिक हो सकती है.

बदलाव चुनौती कैसे? 

भारतीय आईटी सेक्टर के लिए ट्रंप प्रशासन की यह नीति एक सुनहरा अवसर है. ऐसा इसलिए कि हाई लेवल प्रतिस्पर्धा और अमेरिकी कंपनियों की अपेक्षाओं को पूरा करना चुनौतीपूर्ण होगा. इसकी भरपाई वहां की कंपनियां भारतीय पेशेवरों का तकनीकी कौशल और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट करने की कोशिश करेगी. इस बीच भारतीय पेशेवरों को खुद को निखारना होगा. वीजा फीस और शर्तें कड़ी हो सकती हैं, जिससे भारतीय कंपनियों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है. अमेरिका अपनी घरेलू वर्कफोर्स को बढ़ावा देने के लिए कुछ प्रतिबंध भी लागू कर सकता है.

सीएनबीसी ने अमिताभ कांत के हवाले से कहा है कि दुनियाभर के टैलेंट के लिए दरवाजे बंद करके अमेरिका लैब्स, पेटेंट, इनोवेशन और स्टार्टअप की अगली लहर को बैंगलोर, हैदराबाद, पुणे और गुरुग्राम की ओर धकेल रहा है. भारत में बेहतरीन इनोवेटर्स और प्रोफेशनल्स हैं, जो देश के विकास में योगदान दे सकते हैं. उन्होंने ये भी कहा कि भारत के बेहतरीन डॉक्टरों, इंजीनियरों, साइंटिस्ट और इनोवेटर्स के पास भारत के विकास में योगदान देने का अवसर है. यानी अमेरिका का नुकसान भारत के लिए फायदेमंद होगा.


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Written by: Dhirendra Mishra

23 Sep 2025  ·  Published: 05:54 IST