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Pakistan Flood 2025 Punjab: पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में भारी मानसूनी बारिश के कारण बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो गई है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक 20 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है. देश के पूर्वी हिस्से में यह आपदा सबसे ज्यादा असर डाल रही है, जहां कई गांव और कस्बे पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं.
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के प्रमुख इनाम हैदर मलिक ने बताया कि केवल सिंध प्रांत में ही करीब 1.5 लाख लोगों को बाढ़ग्रस्त इलाकों से निकालकर राहत शिविरों में भेजा गया है. उनका कहना है कि आने वाले दिनों में बाढ़ का दायरा और बढ़ सकता है, इसलिए सरकार लगातार बचाव और राहत कार्यों पर निगरानी रख रही है. इंटरनेशनल मेडिकल कोर के हालिया अपडेट में कहा गया है कि जून के आखिर से अब तक देशभर में तेज़ बारिश और बाढ़ के कारण 900 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. हजारों लोग घायल हुए हैं और बड़ी संख्या में परिवार बेघर हो गए हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन ने पाकिस्तान में मानसूनी बारिश और बाढ़ की तीव्रता को और बढ़ा दिया है. तेज़ बारिश से नदियों में पानी का स्तर अचानक बढ़ जाता है, जिससे गांव और शहर बुरी तरह प्रभावित होते हैं. हालांकि आलोचक यह भी कहते हैं कि सरकार ने समय रहते आपदा प्रबंधन और राहत ढांचे में पर्याप्त निवेश नहीं किया. बेहतर अलर्ट सिस्टम, मजबूत बांध और तटबंध जैसी तैयारियां समय पर नहीं होने की वजह से नुकसान बढ़ा है.
इस बाढ़ ने खास तौर पर उन इलाकों को प्रभावित किया है, जहां लोग पहले से ही गरीबी रेखा के नीचे जीवन बिता रहे थे. पाकिस्तान की करीब 40 प्रतिशत आबादी गरीब है, और उनके खेत-खलिहान तथा घर बर्बाद होने से उनकी मुश्किलें कई गुना बढ़ गई हैं. राहत सामग्री और अस्थायी आवास उपलब्ध कराने के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संगठनों की मदद ली जा रही है.
सरकार ने कहा है कि प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री भेजी जा रही है, लेकिन जरूरतमंदों की संख्या इतनी अधिक है कि सभी तक समय पर मदद पहुंचाना चुनौती बन गया है. विशेषज्ञों का सुझाव है कि भविष्य में ऐसी आपदाओं से निपटने के लिए दीर्घकालिक योजना और जलवायु अनुकूल ढांचे की आवश्यकता है.
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Delhi NCR Weather:भारत में मॉनसून का मौसम इस समय अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग रंग दिखा रहा है. कहीं झमाझम बारिश लोगों को राहत दे रही है, तो कहीं बारिश न होने से उमस और गर्मी से हाल बेहाल है. मौसम विभाग (IMD) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी में बना एक नया निम्न दबाव क्षेत्र आने वाले दिनों में कई राज्यों में भारी बारिश का कारण बन सकता है. वहीं, दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे इलाकों में लोग उमस और गर्मी से जूझ रहे हैं. आइए जानते हैं किस राज्य में कैसा रहेगा मौसम का हाल.
जानें दिल्ली-एनसीआर का मौसम
दिल्ली और एनसीआर में मॉनसून की बारिश फिलहाल गायब है. पिछले कुछ दिनों से राजधानी में बादल तो छाए हैं लेकिन बारिश नहीं हो रही. इसी वजह से उमस लगातार बढ़ रही है. सोमवार को पूरे दिन धूप और नमी ने लोगों का हाल बेहाल कर दिया. मौसम विभाग का कहना है कि आज यानी मंगलवार को दिल्ली-एनसीआर के कुछ इलाकों में हल्की बारिश हो सकती है. हालांकि इससे गर्मी से बहुत ज्यादा राहत नहीं मिलेगी. अगले कुछ दिनों तक यहां मौसम का मिजाज ऐसा ही बना रहने की संभावना है.
उत्तर प्रदेश में तीन दिन और झेलनी होगी गर्मी
उत्तर प्रदेश में इस समय भीषण गर्मी और उमस से लोग परेशान हैं. सोमवार को प्रदेश के ज्यादातर जिलों में तापमान 34 से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया. कहीं-कहीं पर बादल छाए लेकिन बारिश नहीं हुई. मौसम विभाग ने बताया है कि अगले तीन दिनों तक प्रदेश में गर्मी और उमस से राहत मिलने की संभावना नहीं है. हालांकि 23 और 24 अगस्त को भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है. इसका मतलब है कि तीन दिन बाद बारिश का जोरदार दौर लौट सकता है और लोगों को गर्मी से थोड़ी राहत मिल सकती है.
बिहार में बारिश की कमी से बढ़ी उमस
बिहार में पिछले 24 घंटों में कुछ जगहों पर 7 से 10 सेंटीमीटर तक बारिश दर्ज की गई है लेकिन पूरे राज्य में मॉनसून कमजोर पड़ गया है. इसी वजह से उमस और गर्मी ने लोगों को परेशान कर दिया है. पटना और आसपास के जिलों में सोमवार को तापमान सामान्य से ऊपर रहा. मौसम विभाग का कहना है कि अगले 24 घंटों तक यही स्थिति बनी रहेगी. हालांकि 20 से 24 अगस्त के बीच बिहार में भारी बारिश की संभावना है. यानी फिलहाल लोगों को उमस सहनी पड़ेगी, लेकिन कुछ दिनों बाद तेज बारिश से राहत मिलने की उम्मीद है.
उत्तराखंड में फिलहाल धीमी बारिश, लेकिन अलर्ट जारी
उत्तराखंड में बीते दिनों हुई भारी बारिश से जनजीवन काफी प्रभावित हुआ था. फिलहाल वहां बारिश की रफ्तार धीमी पड़ी है. मौसम विभाग के मुताबिक आने वाले दिनों में हल्की से मध्यम बारिश जारी रहेगी. आज यानी मंगलवार को उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर, पिथौरागढ़, देहरादून और नैनीताल जिलों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है. अन्य जिलों में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश हो सकती है. देहरादून में सोमवार को सुबह से बादल छाए रहे, दोपहर के बाद हल्की धूप निकली और शाम को हल्की ठंडी हवाओं ने राहत दी. हालांकि रात के समय फिर से बादल मंडराने लगे और बारिश के आसार बन गए.
देशभर में मॉनसून का हाल
मौसम विभाग ने बताया कि बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दबाव क्षेत्र अगले 12 घंटों में और गहराएगा. इसके असर से दक्षिण ओडिशा और उत्तर आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में आज दोपहर तक भारी बारिश हो सकती है. साथ ही, दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत और मध्य भारत में भी मॉनसून सक्रिय रहेगा. अगले कुछ दिनों तक महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में भी अच्छी बारिश होने की संभावना है.
कब तक रहेगा यह मौसम?
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगस्त का तीसरा हफ्ता कई राज्यों के लिए भारी बारिश वाला साबित हो सकता है. जहां दिल्ली-एनसीआर, यूपी और बिहार जैसे राज्यों में अभी उमस बनी रहेगी, वहीं दक्षिण और मध्य भारत में झमाझम बारिश लोगों को राहत देगी. हालांकि भारी बारिश के चलते बाढ़ और जलभराव की स्थिति भी पैदा हो सकती है.
पिथौरागढ़ में लैंडस्लाइड के बाद रेस्क्यू करती NDRF की टीम
Pithoragarh Heavy Rain and Landslide News: उत्तराखंड में एक बार फिर बारिश आफत बनकर बरसी है. पिथौरागढ़ जिले में रविवार (31 अगस्त) को हुई मूसलाधार बारिश ने 280 मेगावाट की धौलीगंगा बिजली परियोजना को संकट में डाल दिया. बारिश से हुए भारी भूस्खलन ने परियोजना की सामान्य और इमरजेंसी दोनों सुरंगों के मुहाने को पत्थरों और मलबे से बंद कर दिया. इस दौरान सुरंगों के अंदर काम कर रहे 19 कर्मचारी फंस गए.
हालांकि राहत की बात यह है कि अब तक 8 कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है, जबकि 11 को बचाने का अभियान जारी है. जिलाधिकारी विनोद गोस्वामी ने जानकारी दी कि रविवार को बारिश के बाद अचानक बड़ा भूस्खलन हुआ, जिसकी चपेट में पावर प्रोजेक्ट की सुरंगों के बाहर का हिस्सा आ गया. इसके चलते सामान्य और आपातकालीन दोनों रास्ते बंद हो गए. सुरंग के अंदर मौजूद कर्मचारी बाहर नहीं निकल पाए और वहीं फंस गए.
बिजली उत्पादन पर नहीं पड़ा असर
घटना की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन और कंपनी प्रबंधन हरकत में आ गए. आनन-फानन में राहत-बचाव कार्य शुरू किया गया. सीमा सड़क संगठन (BRO) और स्थानीय प्रशासन की जेसीबी मशीनों को मौके पर लगाया गया. अब तक 19 में से 8 कर्मचारियों को बाहर निकाल लिया गया है. बाकी 11 को सुरक्षित निकालने की कोशिशें जारी हैं. अधिकारियों का कहना है कि सभी कर्मचारी सुरक्षित हैं और उनके पास खाने-पीने का पर्याप्त सामान मौजूद है.
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि भूस्खलन से पावर प्रोजेक्ट के संचालन पर कोई असर नहीं पड़ा है. विद्युत उत्पादन सामान्य रूप से जारी है. पिथौरागढ़ जिलाधिकारी विनोद गोस्वामी ने कहा, "स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है. सभी कर्मचारियों को बाहर निकालने की कोशिश की जा रही है. चिंता की कोई बात नहीं है."
पुलिस-SDM ने दी स्थिति की जानकारी
पिथौरागढ़ की पुलिस अधीक्षक रेखा यादव ने बताया कि बड़े-बड़े पत्थरों ने सुरंग का रास्ता पूरी तरह बंद कर दिया था, जिसे हटाने के लिए लगातार जेसीबी मशीनें लगी हुई हैं. उन्होंने कहा कि फंसे हुए मजदूर और कर्मचारी लगातार कंपनी और प्रशासन से संपर्क में हैं. वहीं, धारचूला के उप-जिलाधिकारी जितेंद्र वर्मा ने भी आश्वस्त किया कि बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) की टीम मौके पर लगातार काम कर रही है और जल्द ही सभी को सुरक्षित निकाल लिया जाएगा.
हिंदुस्तान में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों का कहना है कि सुरंग के अंदर कर्मचारी सुरक्षित हैं और जल्द ही बाहर आ जाएंगे. जेसीबी मशीनों से लगातार मलबा हटाया जा रहा है. बिजली उत्पादन पूरी तरह से सामान्य है और किसी प्रकार का बड़ा खतरा नहीं है. अधिकारियों ने जल्द से जल्द स्थिति सामान्य होने की आशंका जताई है.
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Delhi Floods News: दिल्ली इन दिनों भीषण बाढ़ की चपेट में है. यमुना का पानी खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है और इसका असर राजधानी के ज्यादातर इलाकों पर दिखाई दे रहा है. निचले इलाकों में पानी भरने से हजारों लोग अपने घर छोड़ने पर मजबूर हो गए हैं. प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए हैं, लेकिन हालात अभी भी बेहद चिंताजनक बने हुए हैं.
यमुना का जलस्तर लगातार बढ़ा
मौसम विभाग और जल विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में हुई लगातार बारिश और पहाड़ी राज्यों से छोड़े गए पानी की वजह से यमुना का जलस्तर तेजी से बढ़ा है. कई जगहों पर यमुना का पानी खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया है. इसका सीधा असर दिल्ली के निचले इलाकों पर पड़ा है, जहां पानी भरकर लोगों की जिंदगी अस्त-व्यस्त हो गई है.
हजारों लोग बेघर
बाढ़ के कारण दिल्ली के कई इलाकों में पानी भर गया है। खासकर मजनू का टीला, कश्मीरी गेट, वजीराबाद, लोहे का पुल और यमुना किनारे बसी बस्तियों में हालात सबसे ज्यादा खराब हैं. यहां रहने वाले हजारों परिवार बेघर हो गए हैं और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया है. लोग अपने घरों का सामान, छोटे बच्चे और बुजुर्गों को लेकर राहत शिविरों में शरण ले रहे हैं. कई परिवारों को सड़क किनारे या फ्लाईओवर के नीचे रात बितानी पड़ रही है.
यातायात और जनजीवन पर असर
बाढ़ ने दिल्ली की रफ्तार पर भी ब्रेक लगा दिया है. कई प्रमुख सड़कों पर पानी भरने से ट्रैफिक जाम की स्थिति पैदा हो गई है. सार्वजनिक परिवहन भी प्रभावित हुआ है. मेट्रो स्टेशन के आसपास पानी भर जाने से यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. कई स्कूलों और दफ्तरों को बंद करना पड़ा है ताकि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.
प्रशासन और एनडीआरएफ की टीम अलर्ट
हालात को देखते हुए प्रशासन ने एनडीआरएफ (राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल) और एसडीआरएफ की टीमों को राहत और बचाव कार्य में लगाया है. नावों की मदद से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है. दिल्ली सरकार ने यमुना के किनारे रहने वाले लोगों से अपील की है कि वे तुरंत सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं और किसी तरह का जोखिम न उठाएं.
स्वास्थ्य और स्वच्छता की चिंता
बाढ़ के कारण बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है. गंदे पानी और नमी की वजह से डेंगू, मलेरिया, दस्त और स्किन इंफेक्शन जैसी बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है. स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल टीमें तैनात की हैं और प्रभावित इलाकों में हेल्थ कैंप लगाए जा रहे हैं. वहीं, पीने के पानी और साफ-सफाई को लेकर भी चुनौतियां बढ़ गई हैं.
आम लोगों की परेशानियां
बाढ़ से सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों को हो रही है जो रोज कमाने-खाने वाले हैं. उनके घर और सामान पानी में डूब गए हैं, रोजगार बंद हो गया है और खाने-पीने की समस्या खड़ी हो गई है. बच्चों की पढ़ाई भी बाधित हो रही है. लोग राहत सामग्री और सरकारी मदद का इंतजार कर रहे हैं.
सरकार ने की मदद की घोषणा
दिल्ली सरकार ने बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए राहत पैकेज का ऐलान किया है. प्रभावित इलाकों में अस्थायी कैंप लगाए जा रहे हैं, जहां लोगों को खाना, पीने का पानी और दवाइयां उपलब्ध कराई जा रही हैं. सरकार ने दावा किया है कि हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.