(फाइल फोटो)
Tarrif Impact on Indian Market: भारतीय शेयर बाजार अगस्त में दोहरी मार झेल रहा है. एक ओर सेंसेक्स में गिरावट थमने का नाम नहीं ले रही, तो दूसरी ओर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने अब तक की सबसे तेज निकासी कर बाजार की कमर तोड़ दी है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जरिये भारतीय निर्यात पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने का असर निवेशकों की धारणा पर साफ दिखाई दे रहा है.
अगस्त 2025 में एफपीआई की बिकवाली का आंकड़ा 34,993 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो फरवरी के बाद किसी भी महीने में सबसे बड़ी निकासी है. जुलाई में जहां 17,741 करोड़ रुपये बाजार से निकाले गए थे, वहीं अगस्त में यह आंकड़ा दोगुना हो गया. कुल मिलाकर, साल 2025 में एफपीआई ने अब तक 1.3 लाख करोड़ रुपये की निकासी कर दी है.
वैल्यूएशन और ग्लोबल टैरिफ दोनों जिम्मेदार
मार्केट विशेषज्ञ मानते हैं कि इस निकासी के पीछे केवल घरेलू बाजार में हाई वैल्यूएशन जिम्मेदार नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर पर टैरिफ से उपजे तनाव ने भी निवेशकों का भरोसा कमजोर किया है. फरवरी 2025 के बाद पहली बार इतने बड़े स्तर पर विदेशी निवेशकों ने पैसा बाहर निकाला. हालांकि, प्राइमरी मार्केट यानी IPO सेगमेंट में एफपीआई ने अब भी भरोसा दिखाया है और इस साल अब तक 40,305 करोड़ रुपये का निवेश किया है.
टैरिफ ने बिगाड़ा सेंटीमेंट
मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट के हिमांशु श्रीवास्तव का कहना है कि अमेरिकी टैरिफ ने निवेशकों की धारणा पर नकारात्मक असर डाला है. इससे भारत की ग्रोथ स्टोरी को लेकर शंका बढ़ी है और व्यापारिक रिश्तों पर दबाव भी गहराया है. इसके अलावा जून तिमाही के कमजोर कॉरपोरेट नतीजों ने भी एफपीआई को और हतोत्साहित किया.
ट्रंप टैरिफ और बिकवाली के दबाव का असर बीते हफ्ते सेंसेक्स में भी दिखा. इंडेक्स 1,497 अंक गिर गया और शीर्ष-10 कंपनियों में से आठ की मार्केट वैल्यू घटकर 2.24 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गई. सबसे ज्यादा झटका रिलायंस इंडस्ट्रीज और एचडीएफसी बैंक के निवेशकों को लगा.
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GST Cut 2025 India: त्योहारों से पहले केंद्र सरकार ने आम जनता को बड़ी राहत दी है. सोमवार को हुई 56वीं जीएसटी परिषद की बैठक में ऐसे फैसले लिए गए हैं, जिन्हें किसी प्री-दिवाली गिफ्ट से कम नहीं कहा जा सकता. बैठक में यह तय हुआ कि 22 सितंबर 2025 से 100 से ज्यादा जरूरी और रोजमर्रा की चीजों पर जीएसटी कम किया जाएगा. इस फैसले से आम लोगों के लिए न सिर्फ पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स बल्कि हेल्थ और फिटनेस सर्विसेज भी सस्ती हो जाएंगी. यानी अब जिम, सैलून, स्पा या योगा सेंटर जाने के लिए पहले की तुलना में कम खर्च करना पड़ेगा.
हेल्थ और फिटनेस सेवाएं
अभी तक जिम, सैलून, स्पा और योग केंद्रों जैसी सेवाओं पर 18% जीएसटी लगता था. अब इसे घटाकर सिर्फ 5% कर दिया गया है. हालांकि इसमें इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की सुविधा नहीं होगी, लेकिन इसका सीधा फायदा ग्राहकों को मिलेगा।
उदाहरण: जिम फीस
मान लीजिए किसी जिम की मासिक फीस ₹2,000 है.
| बेस फीस | GST% | GST राशि | टोटल फीस | |
| पहले (18% GST): | ₹2,000 | 18 | ₹360 | ₹2,360 |
| अब (5% GST): | ₹2,000 | 5 | ₹100 | ₹2,100 |
| बचत | ₹260 |
यानी हर महीने सिर्फ टैक्स कम होने से ही एक ग्राहक को ₹260 की बचत होगी। साल भर में यह रकम हजारों रुपये तक पहुँच सकती है.
पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स पर राहत
सरकार ने रोजाना इस्तेमाल होने वाले कई पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स पर भी टैक्स घटाने का ऐलान किया है. अब बालों का तेल, शैंपू, साबुन, टूथपेस्ट और शेविंग क्रीम जैसी चीजों पर सिर्फ 5% जीएसटी लगेगा. पहले इन पर 18% तक टैक्स देना पड़ता था.
उदाहरण: शैंपू की बोतल
मान लीजिए किसी शैंपू की बेस कीमत ₹300 है.
| बेस फीस | GST% | GST राशि | टोटल फीस | |
| पहले (18% GST): | ₹300 | 18 | ₹54 | ₹354 |
| अब (5% GST): | ₹300 | 5 | ₹15 | ₹315 |
| बचत | ₹39 |
यह तो सिर्फ एक बोतल का हिसाब है। अगर पूरे महीने का घरेलू खर्च देखें तो साबुन, शैंपू और पर्सनल केयर की अन्य चीजों पर परिवारों को सैकड़ों रुपये की बचत होगी।
इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) क्या है?
जीएसटी में अक्सर ITC (Input Tax Credit) शब्द सुनाई देता है. इसका मतलब है, जब कोई दुकानदार या सर्विस प्रोवाइडर (जैसे जिम मालिक या सैलून वाला) अपने काम के लिए सामान खरीदता है, तो उस पर टैक्स चुकाता है. बाद में जब वह कस्टमर से पैसा लेता है, तो पहले से चुकाए गए टैक्स को घटा लेता है. इसे ही ITC कहा जाता है. लेकिन जिम, सैलून और वेलनेस सर्विसेज पर जीएसटी घटाने के साथ सरकार ने ITC की सुविधा हटा दी है. इसका फायदा यह होगा कि सर्विस प्रोवाइडर कीमत बढ़ाने का बहाना नहीं बना पाएगा और ग्राहकों को सीधे कम जीएसटी का लाभ मिलेगा.
आम जनता पर असर
इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा आम लोगों को होगा. हेल्थ और वेलनेस सस्ती: जिम, योगा क्लास और सैलून की फीस अब पहले से कम होगी.
घरेलू खर्च हल्का: साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट जैसी चीजों पर टैक्स कम होने से हर महीने की बचत बढ़ेगी.
हेल्दी लाइफस्टाइल आसान: फिटनेस और पर्सनल केयर की सेवाएं सस्ती होंगी तो ज्यादा लोग इन्हें अपनाएंगे.
बजट में राहत: त्योहारों के मौसम में परिवारों का खर्च कम होगा और जेब पर बोझ घटेगा.
(प्रतीकात्मक तस्वीर)
India America Trade Deal: भारतीय शेयर बाजार के लिए आगामी सप्ताह काफी अहम रहने वाला है. बाजार की दिशा अमेरिका में ब्याज दरों में संभावित कटौती, भारत-अमेरिका और भारत-ईयू ट्रेड डील, और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की चाल से तय होगी. विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक में ब्याज दरों में 25 आधार अंक की कटौती की संभावना है.
हालांकि, अगर दरों में 50 आधार अंक की कटौती होती है तो यह बाजार के लिए एक बड़ा सरप्राइज़ होगा, जिससे अमेरिकी बाजारों में मजबूती आ सकती है और इसका सकारात्मक असर वैश्विक बाजारों पर पड़ सकता है. भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर बातचीत जारी है. केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में बताया था कि पहला चरण नवंबर तक अंतिम रूप ले सकता है.
वहीं, भारत-यूरोपियन यूनियन व्यापार समझौते पर भी बातचीत एडवांस चरण में पहुंच चुकी है. दोनों व्यापार सौदे भारतीय शेयर बाजार के लिए बड़े ट्रिगर बन सकते हैं, क्योंकि ये निवेश और निर्यात को गति देने में मदद करेंगे. इसके अलावा एफआईआई की चाल भी बाजार के लिए निर्णायक होगी. पिछले पांच कारोबारी सत्रों में एफआईआई ने दो सत्रों में खरीदारी की. शुक्रवार को विदेशी निवेशकों ने 129.58 करोड़ रुपये का निवेश किया, जो संकेत देता है कि एफआईआई का रुझान धीरे-धीरे सकारात्मक हो रहा है.
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रवृत्ति जारी रहती है तो घरेलू बाजारों को अच्छा समर्थन मिल सकता है. बीते सप्ताह भारतीय शेयर बाजार ने शानदार प्रदर्शन किया. निफ्टी 373 अंक यानी 1.51 प्रतिशत की बढ़त के साथ 25,114 पर बंद हुआ. वहीं, सेंसेक्स 1,193.94 अंक यानी 1.48 प्रतिशत बढ़कर 81,904.70 पर पहुंच गया. 8 से 12 सितंबर के बीच अधिकांश सेक्टर ने सकारात्मक रिटर्न दिया. निफ्टी ऑटो में 2.07 प्रतिशत, निफ्टी आईटी में 4.26 प्रतिशत, निफ्टी पीएसयू बैंक में 2.94 प्रतिशत, निफ्टी पीएसई में 2.70 प्रतिशत, निफ्टी हेल्थकेयर में 1.79 प्रतिशत और निफ्टी इंडिया डिफेंस इंडेक्स में 7 प्रतिशत की मजबूती दर्ज की गई.
मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स ने भी शानदार प्रदर्शन किया. निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1,152 अंक यानी 2.02 प्रतिशत बढ़कर 58,227.20 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 334.65 अंक यानी 1.90 प्रतिशत की मजबूती के साथ 17,989.90 पर पहुंच गया. कुल मिलाकर, अगले सप्ताह अमेरिकी ब्याज दरों में बदलाव, व्यापार समझौतों की प्रगति और विदेशी निवेशकों का रुख भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करेगा. विशेषज्ञ निवेशकों से सतर्क रहने और वैश्विक घटनाक्रमों पर नज़र बनाए रखने की सलाह दे रहे हैं.
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(प्रतीकात्मक तस्वीर)
New GST Slab 2025-26: नई दिल्ली में बुधवार (3 सितंबर) को हुई वस्तु एवं सेवा कर (GST) काउंसिल की 56वीं बैठक में आम जनता, उद्योगों और किसानों के लिए कई अहम फैसले लिए गए. बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने की. इस बैठक के बाद उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी दी कि जीएसटी प्रणाली को सरल और प्रभावी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है. अब देश में सिर्फ दो प्रमुख जीएसटी स्लैब- 5 फीसदी और 18 फीसदी रहेंगे. इसके अलावा विलासिता और हानिकारक वस्तुओं के लिए अलग से 40 फीसदी का एक विशेष टैक्स स्लैब रखा गया है.
12% और 28% स्लैब को किया गया समाप्त
वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि 12 फीसदी और 28 फीसदी वाले टैक्स स्लैब को खत्म कर दिया गया है. इन स्लैब्स में पहले कई जरूरी वस्तुएं आती थीं. अब इनकी दरों को या तो घटाकर 5 फीसदी कर दिया गया है या फिर इन्हें 18 फीसदी में समाहित किया गया है. इसके साथ ही कई दैनिक उपयोग की वस्तुएं और आवश्यक उत्पाद ऐसे भी हैं, जिन पर अब कोई जीएसटी नहीं लगेगा. यह नई कर संरचना पूरे देश में 22 सितंबर 2025 से लागू होगी.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में जीएसटी सुधार को प्राथमिकता दी गई. उन्होंने यह भी बताया कि जीएसटी में बदलाव को लेकर सभी राज्यों के वित्त मंत्रियों ने समर्थन दिया, जिससे यह फैसला सर्वसम्मति से लिया जा सका.
आम आदमी को राहत देने वाला निर्णय
निर्मला सीतारमण ने बताया कि यह पूरा सुधार आम जनता को ध्यान में रखकर किया गया है. दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर लगने वाले टैक्स की व्यापक समीक्षा की गई और ज्यादातर मामलों में दरों में भारी कटौती की गई है. खासकर मध्यम वर्ग और गरीब तबके को राहत देने के लिए कई जरूरी सामानों को 5 फीसदी या शून्य टैक्स के दायरे में लाया गया है.
किन वस्तुओं पर कितना जीएसटी लगेगा?
5 फीसदी GST वाले उत्पाद
अब 5 फीसदी जीएसटी के अंतर्गत वे सभी वस्तुएं शामिल की गई हैं जो आम आदमी के दैनिक जीवन में उपयोग होती हैं. इनमें हेयर ऑयल, टॉयलेट सोप, साबुन की टिकिया, शैंपू, टूथब्रश और टूथपेस्ट जैसे व्यक्तिगत देखभाल के उत्पाद शामिल हैं. इसके अलावा साइकिल, टेबलवेयर, किचनवेयर और अन्य घरेलू सामान भी इस श्रेणी में रखे गए हैं.
खाद्य पदार्थों की बात करें तो नमकीन, भुजिया, सॉस, पास्ता, इंस्टेंट नूडल्स, चॉकलेट, कॉफी, संरक्षित मांस, कॉर्नफ्लेक्स, मक्खन और घी जैसे रोजमर्रा के उपभोग वाले उत्पादों पर भी अब केवल 5 फीसदी जीएसटी लगेगा। इन बदलावों से आम उपभोक्ताओं को महंगाई से राहत मिलने की उम्मीद है.
शून्य फीसदी GST वाले उत्पाद
शून्य फीसदी जीएसटी के दायरे में अब वे वस्तुएं शामिल कर दी गई हैं जो आमतौर पर हर घर की जरूरत होती हैं. इनमें दूध, ब्रेड, छेना और पनीर जैसे आवश्यक खाद्य पदार्थ प्रमुख हैं. इसके अलावा सभी प्रकार की भारतीय रोटियों को भी पूरी तरह से जीएसटी से मुक्त कर दिया गया है। चाहे वह सादी रोटी हो, पराठा हो या अन्य कोई प्रकार, अब इन पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। इस निर्णय से विशेष रूप से मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग को सीधा लाभ मिलेगा और उनकी रसोई पर खर्च कम होगा.
18 फीसदी स्लैब में शामिल हैं ये उत्पाद
जीएसटी दरों में किए गए बदलाव के तहत अब कई महंगे उपकरणों और वाहनों को 28 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी स्लैब में लाया गया है. इनमें एयर कंडीशनर, टीवी और डिशवॉशर जैसी घरेलू उपयोग की मशीनें शामिल हैं, जो पहले 28 फीसदी जीएसटी के अंतर्गत आती थीं. इसके अलावा छोटी कारें और मोटरसाइकिलें भी अब 18 फीसदी जीएसटी स्लैब में रखी गई हैं. इस बदलाव से उपभोक्ताओं को इन वस्तुओं की खरीद पर सीधी लागत में कमी का फायदा मिलेगा, जिससे इनकी मांग बढ़ने की संभावना है.
हेल्थ सेक्टर में बड़ी राहत
स्वास्थ्य क्षेत्र में आम जनता को बड़ी राहत देते हुए सरकार ने 33 जीवन रक्षक दवाओं पर लगने वाला जीएसटी पूरी तरह से समाप्त कर दिया है. पहले इन दवाओं पर 12 फीसदी की दर से जीएसटी वसूला जाता था, जो अब शून्य कर दिया गया है. इस फैसले से गंभीर बीमारियों का इलाज करा रहे मरीजों और उनके परिवारों को आर्थिक बोझ से राहत मिलेगी, साथ ही आवश्यक दवाओं की उपलब्धता और वहनयोग्यता भी बेहतर होगी.
किसानों को क्या मिलेगा?
कृषि और किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सरकार ने कई कृषि उपकरणों पर जीएसटी दर को 12 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दिया है. इसमें ट्रैक्टर, खेत की मिट्टी तैयार करने वाली मशीनें, कटाई और थ्रेशिंग मशीनें शामिल हैं. इसके अलावा पुआल बेलर, घास काटने की मशीन और खाद बनाने की मशीन जैसे उपकरण भी अब कम जीएसटी दर के अंतर्गत आएंगे। इस फैसले से किसानों की खेती-किसानी से जुड़ी लागत में कमी आएगी और आधुनिक कृषि उपकरणों की खरीद उनके लिए और अधिक सुलभ हो सकेगी.
जैव-कीटनाशकों पर छूट
सरकार ने पर्यावरण अनुकूल खेती को बढ़ावा देने और किसानों को राहत देने के उद्देश्य से 12 विशेष प्रकार के जैव-कीटनाशकों पर जीएसटी दर को 12 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दिया है. इस निर्णय से जैविक और सतत खेती को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही किसानों की उत्पादन लागत में भी कमी आएगी. जैव-कीटनाशकों के इस्तेमाल से मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहती है और फसलों की पैदावार पर भी सकारात्मक असर पड़ता है, जिससे दीर्घकालिक रूप से कृषि क्षेत्र को लाभ होगा.
अर्थव्यवस्था को मिलेगी रफ्तार
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि श्रम प्रधान उद्योगों, कृषि क्षेत्र और स्वास्थ्य सेवाओं को विशेष रूप से ध्यान में रखते हुए ये बदलाव किए गए हैं. इससे देश की आर्थिक गति को भी बल मिलेगा. साथ ही, मध्यम वर्ग की आर्थिक स्थिति को सुधारने की दिशा में यह एक सकारात्मक पहल मानी जा रही है.
जीएसटी काउंसिल की यह 56वीं बैठक ऐतिहासिक साबित हुई, क्योंकि इसमें टैक्स प्रणाली को सरल बनाकर आम आदमी, किसान, और उद्योग जगत को राहत देने वाले निर्णय लिए गए. टैक्स स्लैब्स की संख्या घटाकर दो करना, टैक्स दरों में कमी और आवश्यक वस्तुओं पर शून्य जीएसटी लगाना इस बात का संकेत है कि सरकार आम जनजीवन को आर्थिक रूप से सहज बनाने के लिए प्रतिबद्ध है. आगामी 22 सितंबर 2025 से ये सभी बदलाव लागू हो जाएंगे, जिसका सीधा फायदा देश के हर नागरिक को मिलेगा.
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