(फाइल फोटो)
SEBI action on Finfluencer: SEBI ने एक बार फिर फिनफ्लुएंसर्स की दुनिया में बड़ा झटका दिया है. इस बार निशाने पर आए हैं मशहूर निवेश ट्रेनर अवधूत साठे, जिनकी करजत स्थित ट्रेडिंग एकेडमी पर 20-21 अगस्त को SEBI ने दो दिन तक सर्च ऑपरेशन चलाया. आरोप है कि अवधूत साठे अपनी अकादमी के ज़रिए निवेशकों को गुमराह कर रहे थे और स्टॉक टिप्स को एजुकेशन की आड़ में बेच रहे थे.
शेयर बाजार में लंबे समय से सक्रिय फिनफ्लुएंसर अवधूत साठे खुद को 'फाइनेंस ट्रेडर, ट्रेनर और मेंटर' बताते हैं. उनकी ट्रेडिंग एकेडमी 'अवधूत साठे ट्रेनिंग एकेडमी' (ASTA) सोशल मीडिया पर लाखों लोगों की फॉलोइंग रखती है. यूट्यूब पर 9.37 लाख और फेसबुक पर 4.78 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं. साठे 1991 से ट्रेडिंग कर रहे हैं और 2008 से सेमिनार के जरिए निवेशकों को ट्रेनिंग दे रहे हैं.
SEBI की टीम ने भारी बारिश के बावजूद करजत स्थित उनके गुरुकुल रेसिडेंशियल सेंटर पर छापा मारा और ट्रेडिंग से जुड़ा रिकॉर्ड ज़ब्त किया. SEBI अधिकारियों का शक है कि यहां स्टॉक मार्केट की पढ़ाई के नाम पर असली में निवेश सलाह दी जा रही थी, जो बिना रजिस्ट्रेशन अवैध है.
क्या बोले अवधूत साठे?
छापे के बाद 22 अगस्त को जारी एक वीडियो में साठे ने कहा, "आप सब जानते हैं कि हम कोई एडवाइजरी सर्विस नहीं देते. हम पूरा सहयोग कर रहे हैं." उन्होंने कहा कि SEBI यह जांचने आया था कि कहीं उनकी संस्था निवेश पर सलाह तो नहीं दे रही.
SEBI के Whole-Time Member कमलेश वर्शनेय ने बिना नाम लिए कहा, "अगर आप एजुकेशन दे रहे हैं, तो कोई दिक्कत नहीं. लेकिन अगर एजुकेशन के नाम पर गारंटीड रिटर्न, स्टॉक खरीदने या बेचने की सलाह या लाइव डेटा के जरिए ट्रेडिंग कर रहे हैं तो यह SEBI के नियमों का उल्लंघन है." उन्होंने यह भी कहा कि बड़ी मछलियों पर कार्रवाई करके SEBI बाकी फिनफ्लुएंसर्स को संदेश देना चाहता है, नजर हम सब पर है.
70,000 से ज्यादा फिनफ्लुएंसर्स हटाए गए
SEBI चेयरमैन ने पहले ही बताया था कि हर महीने करीब 5,000 अनरजिस्टर्ड फिनफ्लुएंसर्स पर कार्रवाई की जा रही है. इससे पहले अब तक 70,000 से ज्यादा अनरजिस्टर्ड फिनफ्लुएंसर्स लोगों को हटाया जा चुका है, वो भी गूगल और मेटा की मदद से. SEBI ने इस कार्रवाई के जरिये गैर-कानूनी और अवैध कार्य करने वाले फिनफ्लुएंसर्स को संदेश देने की कोशिश की है.
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प्रतीकात्मक तस्वीर
Indian Currency Value in International Market: विदेशी निवेशकों की लगातार लिवाली और कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट की बदौलत भारतीय रुपया सोमवार (20 अक्टूबर) को शुरुआती कारोबार में गिरावट दर्ज की गई. अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 14 पैसे की मजबूती के साथ एक महीने के उच्च स्तर 87.88 पर पहुंच गया.
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये की शुरुआत 87.94 पर हुई और शुरुआती कारोबार के दौरान यह सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव करता रहा. कारोबार के दौरान रुपये ने 87.95 का निचला स्तर और 87.88 का ऊपरी स्तर छुआ. खबर लिखे जाने तक रुपया 87.88 पर था, जो पिछले सत्र के मुकाबले 14 पैसे ज्यादा मजबूत है. शुक्रवार को यह डॉलर के मुकाबले 88.02 पर बंद हुआ था.
विश्लेषकों का कहना है कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) की तगड़ी खरीदारी और घरेलू शेयर बाजार में तेजी ने रुपये को सहारा दिया है. सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में सोमवार को शुरुआती सत्र में बढ़त देखने को मिली, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा.
इस बीच छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक मामूली रूप से 0.02 प्रतिशत बढ़कर 98.45 पर पहुंच गया. वहीं, वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड वायदा कारोबार में 0.31 प्रतिशत गिरकर 61.10 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भारत जैसे आयातक देशों के लिए राहत भरी खबर है, क्योंकि इससे आयात बिल घटता है और चालू खाते का घाटा नियंत्रित रहता है.
हालांकि, विपक्षी दलों ने रुपये में आई इस मामूली मजबूती पर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं. कांग्रेस और अन्य दलों का कहना है कि रुपये में हालिया दिनों में लगातार रुपये की वैल्यू में गिरने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक नीतियां जिम्मेदार हैं. उनकी कोई भी नीतियां दीर्घकाल में देश के लिए फायदेमंद साबित नहीं हो रही हैं. विपक्ष का तर्क है कि मोदी सरकार की "मेक इन इंडिया" और "आत्मनिर्भर भारत" जैसी योजनाओं का जमीनी असर सीमित रहा है, जबकि निर्यात और औद्योगिक उत्पादन के आंकड़े अभी भी उम्मीद से नीचे हैं.
आर्थिक विशेषज्ञों का भी मानना है कि रुपये की मजबूती फिलहाल वैश्विक कारणों का परिणाम है, न कि घरेलू सुधारों का. विशेषज्ञों के अनुसार, अगर अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है या कच्चे तेल के दाम फिर से चढ़ते हैं, तो रुपये पर फिर दबाव बढ़ सकता है. फिलहाल बाजार में निवेशकों का रुख सकारात्मक बना हुआ है, लेकिन दीर्घकालिक स्थिरता के लिए भारत को अपने औद्योगिक उत्पादन, निर्यात और विदेशी निवेश को बढ़ाने पर ध्यान देना होगा.
प्रतीकात्मक तस्वीर
Gold Price Today: त्योहारी सीजन की दस्तक से पहले सोने की चमक भले ही थोड़ी फीकी पड़ी हो, लेकिन खरीदारों के चेहरे खिल उठे हैं. बीते दस दिनों में सोने की कीमतों में आई 2 फीसदी की गिरावट ने उन लोगों को राहत दी है जो लंबे समय से बड़ी खरीदारी का इंतजार कर रहे थे. रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचे दाम अब धीरे-धीरे नीचे आ रहे हैं और बाजार में फिर से रौनक लौटने लगी है.
दरअसल, बीते कुछ दिनों में अंतरराष्ट्रीय हालात में स्थिरता और घरेलू बाजार में सुधार के चलते सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है. बीते 10 दिनों में सोना करीब 2 फीसदी यानी 2,160 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता हुआ है, जिससे त्योहारों से पहले खरीदारों को राहत मिली है.
अगस्त से अक्टूबर के बीच गणेश चतुर्थी, नवरात्रि और दिवाली जैसे त्योहार आते हैं. जिनमें पारंपरिक रूप से सोने की मांग अधिक रहती है. हाल ही में सोना रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया था, जिस कारण लोग कीमतों में गिरावट का इंतजार कर रहे थे. अब दाम कुछ कम होने पर खरीदार एक बार फिर सक्रिय हो रहे हैं.
आज के सोने के भाव (प्रति 10 ग्राम):
कैरेट आज का भाव कल का भाव
24 कैरेट ₹1,00,750 ₹1,01,180
22 कैरेट ₹92,350 ₹92,750
18 कैरेट ₹75,560 ₹75,890
शहरों के अनुसार सोने का भाव (24 कैरेट)
दिल्ली – ₹1,00,090
मुंबई – ₹1,00,750
चेन्नई – ₹1,00,750
कोलकाता – ₹1,00,750
22 कैरेट और 18 कैरेट में भी सभी शहरों में मामूली गिरावट देखने को मिली है.
किन कारणों से घटती-बढ़ती है सोने की कीमत?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें डॉलर में तय होती हैं. अगर डॉलर मजबूत होता है या रुपया कमजोर होता है, तो भारत में सोना महंगा हो जाता है. भारत में सोने का अधिकतर हिस्सा आयात होता है. अगर सरकार इंपोर्ट ड्यूटी या टैक्स बढ़ा देती है, तो सोना महंगा हो सकता है. वैश्विक तनाव, युद्ध, मंदी या शेयर बाजार की गिरावट जैसे कारणों से निवेशक सोने की ओर रुख करते हैं, जिससे मांग बढ़ती है और दाम चढ़ते हैं.
भारतीय परंपरा और मांग
शादियों और त्योहारों में सोना खरीदना शुभ माना जाता है, जिससे इन मौकों पर इसकी मांग बढ़ जाती है. सोने को महंगाई के दौर में सुरक्षित निवेश माना जाता है. जब महंगाई बढ़ती है, लोग सोने में निवेश करते हैं जिससे इसकी कीमतें ऊपर जाती हैं.
क्या आगे और गिरेगा सोना?
चूंकि त्योहारी सीजन शुरू होने वाला है और मांग धीरे-धीरे बढ़ रही है, इसलिए कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि खरीदारों को अभी थोड़ी राहत मिल रही है, लेकिन लंबी अवधि में कीमतें फिर से ऊंचाई छू सकती हैं.
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