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Sapna Choudhary Biopic: हरियाणा की मशहूर लोक गायिका और डांसर सपना चौधरी की जिंदगी अब बड़े पर्दे पर आने वाली है. उनकी बायोपिक मैडम सपना को मशहूर फिल्म निर्माता महेश भट्ट प्रेजेंट कर रहे हैं. इस फिल्म में सपना के जीवन के संघर्ष, विवादों और प्यार भरे पलों को दिखाया जाएगा. सपना ने हाल ही में अपनी जिंदगी के इस सफर और 2016 में आत्महत्या की कोशिश के पीछे की वजहों पर खुलकर बात की.
उन्होंने बताया कि कैसे एक गाने के विवाद ने उनकी जिंदगी को हिला दिया था और कैसे उन्होंने उस मुश्किल दौर से उबरकर खुद को "मैडम सपना" के रूप में स्थापित किया. सपना ने फरीदून शहरयार से बातचीत में अपने जीवन को एक भावनात्मक रोलरकोस्टर बताया. उन्होंने कहा, "मेरी जिंदगी में संघर्ष, लोगों की बुरी नजर, गंदी बातें और साथ ही ढेर सारा प्यार भी रहा. मैंने हर इमोशन को जिया है. सपना से मैडम सपना बनने का सफर दर्द, टूटन और फिर जुड़ने की कहानी है. मैंने लोगों की आलोचनाएं सुनीं, उनकी गालियां देखीं लेकिन प्यार भी बहुत मिला."
सपना ने बताया कि उनकी जिंदगी का हर पहलू इस फिल्म में दिखेगा, जो दर्शकों को उनकी मेहनत और जज्बे से रूबरू कराएगा. 2016 में सपना ने जहर खाकर आत्महत्या की कोशिश की थी, जिसके पीछे की कहानी बेहद दुखद है. उस समय गुड़गांव में एक परफॉर्मेंस के बाद उनके गाने सॉलिड बॉडी पर विवाद खड़ा हो गया. कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि इस गाने के बोल जातिवाद को बढ़ावा देते हैं. इस वजह से सपना के खिलाफ SC/ST एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ और सोशल मीडिया पर उनकी जमकर आलोचना हुई.
सपना ने बताया, "मैं उस समय छोटी थी, ज्यादा पढ़ी-लिखी नहीं थी. मेरी दुनिया स्टेज पर परफॉर्म करने और घर लौटकर सोने तक सीमित थी. मुझे कानून या जात-पात की समझ नहीं थी. मैं तो बस अपने गानों से लोगों का मनोरंजन करना चाहती थी." विवाद बढ़ने पर सपना को भारी आलोचना और अपमान का सामना करना पड़ा. कुछ लोगों ने उनके चरित्र पर सवाल उठाए और कहा कि वह एक डांसर हैं, इसलिए उनकी इज्जत कम है. सपना ने कहा, "उन बातों का बोझ मैं सह नहीं पाई. मुझे लगा कि अगर मुझे वह सम्मान नहीं मिलेगा, जो मैं चाहती हूं, तो जीने का क्या फायदा. मैंने गलती से जहर खा लिया."
सपना सात दिन तक अस्पताल में बेहोश रहीं। लेकिन जब वह होश में आईं, तो उन्हें एहसास हुआ कि उनके चाहने वाले भी बहुत हैं. एक लड़के ने सात दिन तक अस्पताल के बाहर उनकी सलामती की दुआ मांगते हुए खड़े रहकर उनका हौसला बढ़ाया. इस घटना ने सपना को नई ताकत दी. उन्होंने माफी मांगी और वादा किया कि वह भविष्य में ऐसी गलतियां नहीं करेंगी. इस मुश्किल दौर ने उन्हें और मजबूत बनाया.
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Bigg Boss 19: बिग बॉस के हर सीजन में कुछ कंटेस्टेंट ऐसे होते हैं, जो जल्दी ही फैंस के फेवरेट बन जाते हैं लेकिन इस बार बिग बॉस 19 की कंटेस्टेंट तान्या मित्तल को पहले ही दिन से ट्रोलिंग झेलनी पड़ रही है. शो में एंट्री के पहले ही उनके कुछ बयान और एटीट्यूड ने फैंस का गुस्सा और मीम्स की बारिश ला दी.
क्यों हो रही हैं ट्रोल?
तान्या ने खुद को स्पिरिचुअल इंफ्लुएंसर बताया था. फैंस को लगा था कि वो सिंपल और सादगी भरी लाइफ जीती होंगी लेकिन शो में उनके बयान बिल्कुल उलट दिखे. तान्या ने कहा कि उन्हें “बॉस” कहा जाए और उनके छोटे भाई भी उन्हें बॉस कहते हैं. उनका कहना है कि महिलाओं को इज्जत पाने के लिए इंतजार नहीं करना चाहिए, बल्कि मांगना चाहिए. जब सह प्रतियोगी कुनिका ने तान्या की बात पर आपत्ति जताई, तो तान्या ने जवाब दिया कि वो 50 साल की उम्र का इंतजार नहीं कर सकती. इस तरह के बयान फैंस को पसंद नहीं आए.
विवादित बयान
एक और एपिसोड में तान्या ने बताया कि उनके बॉडीगार्ड्स हैं, जिन्होंने महाकुंभ में 100 लोगों की जान बचाई. उन्होंने कहा कि उन्हें और उनके परिवार को सुरक्षा रखना पसंद है और वो इसे एन्जॉय करती हैं. इसके अलावा तान्या ने कहा कि उन्होंने साड़ी पहनकर बिग बॉस तक का सफर तय किया, जो उनके लिए बड़ी उपलब्धि है. उन्होंने तुलना की कि कई लड़कियां छोटे कपड़े पहनकर या अलग-अलग सीन्स करके आगे बढ़ती हैं, लेकिन उन्होंने बिना कंप्रोमाइज किए यह सफर तय किया. इस बयान पर फैंस ने विरोध जताया और कहा कि यह दूसरों की तुलना में अहंकार दिखाता है.
फैंस की प्रतिक्रिया
तान्या की शोबाजी, कॉन्फिडेंस और कंट्रोवर्शियल बयान फैंस को फेक और नकली लग रहे हैं. सोशल मीडिया पर उनके मीम्स बन रहे हैं और लोग उन्हें “शोऑफ क्वीन” कह रहे हैं. कई फैंस मान रहे हैं कि तान्या इस सीजन की सबसे निगेटिव कंटेस्टेंट हैं.
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Asrani Death News: दिवाली के दिन यानी 20 अक्टूबर को हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता गोवर्धन असरानी का निधन हो गया. वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे. शोले फिल्म में उनके यादगार “जेलर” के किरदार ने उन्हें अमर बना दिया था. असरानी ने अपने करियर में मेरे अपने, बावर्ची, अभिमान, चुपके चुपके, छोटी सी बात, भूल भुलैया, बंटी और बबली 2, वेलकम, ऑल द बेस्ट जैसी कई हिट फिल्मों में काम किया और दर्शकों को खूब हंसाया. उनके निधन से फिल्म इंडस्ट्री और फैंस में गहरा दुख है. असरानी अपने पीछे पत्नी मंजू असरानी को अकेला छोड़ गए हैं.
कौन हैं मंजू असरानी?
मंजू असरानी भी एक समय बॉलीवुड की जानी-मानी एक्ट्रेस रही हैं. उन्होंने 70 और 80 के दशक में कई फिल्मों में काम किया. मंजू और असरानी की मुलाकात फिल्मों ‘आज की ताजा खबर’ और ‘नमक हराम’ के सेट पर हुई थी. दोनों में जल्दी ही गहरी दोस्ती और फिर प्यार हुआ, और यही रिश्ता शादी में बदल गया. मंजू ने पति असरानी की तरह फिल्म इंडस्ट्री में नाम कमाया और बाद में निर्देशन की ओर रुख किया. उन्होंने 1995 में फिल्म ‘मां की ममता’ का निर्देशन भी किया था.
मंजू का शांत और सादगी भरा जीवन
मंजू असरानी ने अपने करियर से ज्यादा महत्व अपने परिवार को दिया. उन्होंने शोबिज़ की चमक-दमक से दूरी बना ली थी और एक लो-प्रोफाइल जिंदगी जीती थीं. वह सार्वजनिक कार्यक्रमों या अवॉर्ड शो में शायद ही कभी नजर आईं. असरानी भी अपनी पत्नी की तरह लाइमलाइट से दूर रहना पसंद करते थे. दोनों ने हमेशा अपने निजी जीवन को प्राथमिकता दी और एक-दूसरे का पूरा साथ निभाया.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, असरानी और मंजू के कोई संतान नहीं है, हालांकि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में एक बेटे नवीन असरानी का जिक्र भी मिलता है, लेकिन इस बारे में दंपती की ओर से कभी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई.
फैंस ने नम आंखों से दी विदाई
गोवर्धन असरानी के निधन की खबर से फिल्म जगत में शोक की लहर है. अक्षय कुमार ने भी सोशल मीडिया पर दुख जताया और बताया कि वह असरानी से एक हफ्ते पहले ही मिले थे. उन्होंने उन्हें “बेहद प्यारा इंसान” बताया. फैंस सोशल मीडिया पर “थांबा थांबा” और “राइट राइट राइट” जैसे असरानी के मशहूर डायलॉग याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं.
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Haq Movie Review: इमरान हाशमी और यामी गौतम स्टारर फिल्म ‘हक’ सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि एक महिला की आवाज है. जो अपने अधिकारों, अपनी पहचान और अपने अस्तित्व के लिए खड़ी होती है. फिल्म आपको सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर समाज में औरत को इंसाफ के लिए इतना संघर्ष क्यों करना पड़ता है.
क्या है पूरी कहानी
‘हक’ की कहानी है शाजिया बानो (यामी गौतम) की एक ऐसी औरत की जो अपने पति और मशहूर वकील अब्बास खान (इमरान हाशमी) के खिलाफ अपने बच्चों के मुआवजे का केस लेकर अदालत पहुंचती है. अदालत में जब जज उसे ‘काजी के पास जाने’ की सलाह देता है, तो शाजिया का सवाल सबको झकझोर देता है. “अगर मैंने किसी का खून किया होता, तब भी आप यही कहते?” यही सवाल फिल्म का मूल है, इंसाफ के दो पैमाने क्यों?
शाह बानो केस से प्रेरित
फिल्म ‘हक’ 1985 के चर्चित शाह बानो केस से प्रेरित है। उस केस ने तीन तलाक और मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों पर राष्ट्रीय बहस छेड़ी थी. निर्देशक सुपर्ण वर्मा ने उसी संवेदनशील मुद्दे को आधुनिक दौर की पृष्ठभूमि में पेश किया है. जहां प्यार, रिश्ते और धार्मिक व्यवस्था के बीच एक महिला की लड़ाई दिखती है.
रिश्ते, धोखा और दर्द
फिल्म की शुरुआत शाजिया और अब्बास के खूबसूरत रिश्ते से होती है. दोनों का प्यार, एक-दूसरे के लिए समर्पण, सब कुछ परफेक्ट लगता है. लेकिन वक्त गुजरते ही अब्बास की जिंदगी में दूसरी औरत सायरा (वर्तिका सिंह) की एंट्री होती है. शाजिया का टूटना, सवाल करना और फिर खुद के लिए खड़ा होना. ये सफर ही फिल्म का भावनात्मक केंद्र है.
फिल्म का एक सीन बेहद प्रतीकात्मक है. जब शाजिया रसोई में तीन प्रेशर कुकर देखती है, और नौकरानी कहती है, “साहब में सब्र नहीं है, कुछ खराब होता है तो उसे ठीक करवाने की बजाय नया ले आते हैं.” वो सीन आगे आने वाली कहानी का संकेत देता है और बताता है कि अब्बास अपनी बीवी के साथ भी यही करेगा.
एक्टिंग और निर्देशन
यामी गौतम ने शाजिया बानो को बेहद संवेदनशीलता के साथ जिया है. उनके चेहरे की खामोशी, आंखों का दर्द और गुस्से का संयम, हर फ्रेम में झलकता है. इमरान हाशमी अपने करियर के सबसे सशक्त किरदारों में से एक में नजर आते हैं. वो अब्बास खान के रूप में एक ऐसे आदमी को पेश करते हैं, जो प्यार करता भी है और अपनी मर्दानगी के जाल में उलझा भी है. वर्तिका सिंह, शीबा चड्ढा और दानिश हुसैन भी अपनी भूमिकाओं में असरदार हैं. डायरेक्टर सुपर्ण वर्मा का निर्देशन सधा हुआ है. उन्होंने इमोशन और सामाजिक संदेश के बीच संतुलन बनाए रखा है.
कमजोरियां
फिल्म के कुछ हिस्से थोड़े ड्रामेटिक लगते हैं, खासकर कोर्टरूम सीन्स में संवाद ज़रूरत से ज़्यादा तीखे हैं. कहीं-कहीं कहानी अपने मूल मुद्दे से हटती भी है. फिर भी इसका संदेश, महिलाओं के अधिकार और न्याय की समानता, दर्शकों तक साफ पहुंचता है.