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हर दिन बढ़ रहा हार्ट अटैक का खतरा, अकेले हैं तो जानिए कैसे बचा सकते हैं अपनी जान

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फाइल फोटो

Heart attack symptoms: आजकल हार्ट अटैक यानी दिल का दौरा एक आम बीमारी बनती जा रही है. पहले यह समस्या उम्रदराज़ लोगों में ही दिखती थी, लेकिन अब 30-35 साल के युवाओं को भी इसका शिकार होते देखा जा रहा है. आंकड़े डराने वाले हैं — WHO के मुताबिक, साल 2019 में दुनियाभर में 1.79 करोड़ लोगों की मौत दिल और ब्लड वेसल्स से जुड़ी बीमारियों के कारण हुई, जिनमें 85% की जान हार्ट अटैक या स्ट्रोक ने ली.

हार्ट अटैक कई बार बिना किसी चेतावनी के आता है. इसलिए ऐसे वक्त पर हर एक सेकेंड कीमती होता है, खासकर अगर आप उस समय अकेले हों. 25 साल का अनुभव रखने वाले मशहूर हार्ट सर्जन डॉ. जेरेमी लंदन ने बताया है कि ऐसी स्थिति में कुछ आसान से कदम आपकी जान बचा सकते हैं.

सबसे पहले इमरजेंसी हेल्प को कॉल करें

अगर आपको छाती में तेज दर्द, सांस लेने में दिक्कत या शरीर के बाएं हिस्से में कमजोरी महसूस हो रही हो, तो बिना देर किए एम्बुलेंस या इमरजेंसी नंबर पर कॉल करें. कॉल पर बने रहें और अपने लक्षण साफ-साफ बताएं. देर करना जानलेवा हो सकता है.

घर को इमरजेंसी के लिए तैयार करें

जब तक मदद आ रही है, अपने घर का मुख्य दरवाजा खोल दें. अगर रात का समय है, तो बाहर की लाइट जला दें ताकि मेडिकल टीम आसानी से आपका घर पहचान सके. इससे समय की बचत होगी.

आराम करें और हिलने-डुलने से बचें

अपने शरीर की एनर्जी बचाएं. बिस्तर या सोफे पर लेट जाएं और पैरों को थोड़ा ऊपर रखें, ताकि ब्लड फ्लो बना रहे. अगर लेटना मुमकिन न हो, तो कुर्सी पर आराम से बैठें और शांत रहें. ज्यादा हिलने-डुलने से बेहोशी या गिरने का खतरा बढ़ सकता है.

किसी करीबी को फोन करें

इमरजेंसी सेवा को कॉल करने के बाद, अपने किसी परिवार के सदस्य या दोस्त को फोन करें. उन्हें बताएं कि आप कैसा महसूस कर रहे हैं और एम्बुलेंस आ रही है. वे अस्पताल में पहुंचकर डॉक्टरों को आपकी मेडिकल हिस्ट्री बता सकते हैं.

ऐसे रखें ध्यान

  1. हार्ट अटैक कभी भी, किसी को भी आ सकता है.
  2. समय पर मदद मिलना जान बचा सकता है.
  3. खुद को शांत और स्थिर रखना बहुत ज़रूरी है.


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Written by: Taushif

28 Jul 2025  ·  Published: 05:18 IST

पेशाब में प्रोटीन दिखे तो समझें किडनी दे रही है चेतावनी, अपनाएं ये देसी नुस्खे

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Protein in Urine: मांसपेशियों की अच्छी ग्रोथ और मस्तिष्क के लिए प्रोटीन बहुत जरूरी होता है. शरीर में प्रोटीन की कमी को पूरा करने के लिए हम दाल, पनीर, सोयाबीन या मांसाहारी भोजन का सेवन करते हैं, लेकिन क्या हो अगर शरीर में मौजूद प्रोटीन यूरिन के रास्ते से बाहर आने लगे? इस परिस्थिति को प्रोटीन्यूरिया कहा जाता है, जो आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा दोनों में गंभीर समस्या बताई गई है.

जब किडनी में किसी तरह की समस्या होती है, तो पानी को फिल्टर करने के दौरान किडनी तय मात्रा से ज्यादा प्रोटीन मूत्र के साथ बाहर निकाल देती है. इससे संक्रमण का खतरा भी बना रहता है. आयुर्वेद में इस स्थिति को वात और कफ के बढ़ने से जोड़कर देखा गया है. ये परिस्थिति किडनी और फिर धीरे-धीरे बाकी अंगों को भी प्रभावित करने लगती है.

प्रोटीन्यूरिया होने पर शरीर कई तरह के संकेत देता है, जैसे पेशाब अत्याधिक पीला और झाग के साथ आता है, यूरिन मार्ग में संक्रमण बढ़ने लगता है, आंखों और पैरों में सूजन आने लगती है, किडनी पर सूजन आ जाती है. इसमें इंफेक्शन के साथ बुखार भी होने लगता है. आयुर्वेद में प्रोटीन्यूरिया से बचने के लिए कुछ उपाय बताए गए हैं, जिससे काफी हद तक प्रोटीन्यूरिया से होने वाली परेशानियों को कम किया जा सकता है.

प्रोटीन्यूरिया से बचने के लिए किडनी का स्वस्थ होना बहुत जरूरी है, ऐसे में किडनी और पूरे शरीर को डिटॉक्स करना होगा. इसके लिए पुनर्नवा चूर्ण या रस का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके लिए सुबह खाली पेट पुनर्नवा चूर्ण या रस का सेवन करें. गोखरू चूर्ण भी इस स्थिति से राहत देने में मदद करता है. गोखरू चूर्ण में सूजन कम करने के गुण होते हैं, जो किडनी की सूजन को कम कर उसकी कार्यक्षमता को बढ़ाता है। इसका सेवन भी सुबह खाली पेट किया जा सकता है.

इसके अलावा, त्रिफला चूर्ण भी लाभकारी होता है, इससे पाचन की शक्ति बढ़ती है और किडनी पर वर्कलोड कम करता है. त्रिफला चूर्ण का इस्तेमाल सुबह और शाम दोनों समय किया जा सकता है. इसके अलावा, आहार में भी बदलाव करना जरूरी होगा. प्रोटीन्यूरिया की स्थिति में कम नमक वाले आहार का सेवन करना अच्छा रहता है. इसके अलावा, लौकी, तोरी, टिंडा और मूंग दाल का सेवन ज्यादा से ज्यादा करना चाहिए. इससे शरीर में फाइबर और प्रोटीन दोनों अच्छी मात्रा में बने रहते हैं.
 


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Written by: Taushif

09 Nov 2025  ·  Published: 09:50 IST

1 नहीं, 2 नहीं, पूरे 10 दिखते हैं महिलाओं में डिप्रेशन लक्षण! जानकार हो जाएंगे हैरान

प्रतीकात्मक फोटो

प्रतीकात्मक फोटो

Depression Symptoms in Women: पुरुषों और महिलाओं के बीच तनाव एक आम सामाजिक और भावनात्मक स्थिति है, जो अक्सर सोच, अपेक्षाओं, जिम्मेदारियों और संवाद की कमी में अंतर के कारण पैदा होती है। दोनों की परवरिश, अनुभव, सामाजिक दबाव और व्यक्तित्व अलग-अलग होते हैं, जिससे गलतफहमियाँ और संघर्ष हो सकते हैं। कई बार भावनात्मक असुरक्षा, निर्णयों में असहमति या एक-दूसरे की अपेक्षाओं को न समझ पाना भी तनाव का कारण बन जाता है। रिश्तों में समानता, सम्मान और खुले संवाद की कमी के कारण यह तनाव बढ़ता है। समझ, सहानुभूति और संवाद से इस दूरी को कम किया जा सकता है। ऐसे में आज हम आपको बताने वाले हैं कि महिलाओं में डिप्रेशन के कितने लक्षण दिखते हैं।

1. लगातार उदासी या रोने जैसा महसूस होना
महिलाएं अक्सर बिना किसी खास वजह के उदास महसूस करती हैं। छोटी-छोटी बातें उन्हें भावुक कर देती हैं और उन्हें रोने का मन करता है। अगर यह स्थिति बनी रहती है, तो यह डिप्रेशन का संकेत हो सकता है।

2. ऊर्जा की कमी और थकान महसूस होना
अवसाद के दौरान महिलाएं अक्सर थका हुआ महसूस करती हैं, भले ही उन्होंने पर्याप्त आराम किया हो। उन्हें काम करने का मन नहीं करता और छोटा-सा काम भी उन्हें भारी लगता है।

3. नींद में बदलाव (कम या ज़्यादा नींद)
अवसाद से पीड़ित महिलाएं या तो बहुत ज़्यादा सोने लगती हैं या फिर बिल्कुल नहीं सोती हैं। वे रात में बार-बार उठती हैं या दिन भर उनींदापन महसूस करती हैं।

4. भूख या वज़न में बदलाव
अवसाद से पीड़ित महिलाएं या तो ज़रूरत से ज़्यादा खाने लगती हैं या उन्हें बिल्कुल भी भूख नहीं लगती। इसका असर उनके वज़न पर भी पड़ता है - वज़न तेज़ी से बढ़ या घट सकता है।

5. अपराधबोध और बेकार होने का एहसास
महिलाएं खुद को दूसरों से कमतर समझने लगती हैं। उन्हें लगता है कि वे बेकार हैं और अपनी गलतियों के लिए वे खुद को ही दोषी मानती रहती हैं।

6. एकाग्रता की कमी
अवसाद से गुज़रने वाली महिलाएँ किसी भी चीज़ पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाती हैं। उन्हें किताब पढ़ना, फ़िल्म देखना या बातचीत में भी ध्यान बनाए रखना मुश्किल लगता है।

7. आत्महत्या के विचार
अवसाद के गंभीर चरण में, महिलाओं के मन में अपनी ज़िंदगी खत्म करने के ख़याल आने लगते हैं। उन्हें लगता है कि ज़िंदगी में कुछ भी अच्छा नहीं बचा है और वे उदास हो जाती हैं।

8. रुचि का खत्म होना (जो पहले पसंद था, अब अच्छा नहीं लगता)
अवसाद से पीड़ित महिलाओं की उन चीज़ों में भी रुचि खत्म हो जाती है जो उन्हें पहले पसंद थीं - जैसे संगीत, यात्रा करना, दोस्तों से मिलना या उनके शौक।

9. चिड़चिड़ापन और गुस्सा
बार-बार मूड बदलना, छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आना और चिड़चिड़ापन महसूस करना अवसाद का एक आम लक्षण है, जो महिलाओं में ज़्यादा देखा जाता है।

10. सिरदर्द या पेट दर्द जैसी शारीरिक समस्याएँ
कभी-कभी अवसाद मानसिक नहीं बल्कि शारीरिक होता है। महिलाओं को सिरदर्द, पीठ दर्द, बदन दर्द या पेट की समस्याओं की शिकायत होती है, जबकि इनका कोई मेडिकल कारण नहीं पाया जाता है।


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Written by: Taushif

05 Jul 2025  ·  Published: 06:22 IST

खाना खाने के बाद पेट फूलना और गैस की दिक्कत? ये देसी नुस्खे दिलाएंगे आराम

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फाइल फोटो

Bloating After Eating: अक्सर लोग शिकायत करते हैं कि जैसे ही वे खाना खाते हैं, उनका पेट फूलने लगता है या खट्टी डकारें आने लगती हैं. कई लोग इसे मामूली पाचन समस्या समझकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं, लेकिन सच यह है कि यह दिक्कत धीरे-धीरे शरीर को अंदर से कमजोर और विषाक्त बना सकती है.

क्यों होती है पेट फूलने की समस्या?
आयुर्वेद के अनुसार पेट फूलने की समस्या वात दोष बढ़ने से होती है. जब शरीर में वात दोष असंतुलित हो जाता है, तो पाचन शक्ति कमजोर पड़ जाती है. इसका असर सीधे लिवर, आंतों और हार्मोन सिस्टम पर पड़ता है.

गलत खानपान और जीवनशैली इसके कई बड़े कारण हैं. ज्यादा तला-भुना या मसालेदार खाना खाने से भी ये समस्या हो जाती है. इसके अलावा, गलत फूड कॉम्बिनेशन (जैसे कढ़ी के साथ दही या रायता), बार-बार चाय, कॉफी या ठंडे पेय पीना, खाना खाने के बाद तुरंत लेटना या टहलना न करना और खाते वक्त बात करना, जिससे हवा पेट में चली जाती है. इन छोटी-छोटी गलतियों के कारण ही गैस, पेट दर्द और पेट फूलने की समस्या बार-बार होती रहती है. इस समस्या को दूर कैसे करें आइए जानते हैं.

अजवाइन और काला नमक
थोड़ी सी अजवाइन और काले नमक को हल्का भूनकर उसका पाउडर बना लें. खाने के बाद एक चुटकी सेवन करें. इससे गैस और पेट फूलने में काफी राहत मिलेगी.

अदरक का पानी
ताजा अदरक को पानी में उबालें और दिन में दो बार पिएं. यह पाचन शक्ति को बढ़ाने में मदद करता है और पेट से जुड़ी परेशानियों को दूर करता है.

सौंफ और मिश्री
सौंफ और धागे वाली मिश्री को दरदरा पीसकर खाने के बाद लें. यह न सिर्फ मुंह का स्वाद ठीक करता है, बल्कि पेट को भी हल्का रखता है. अगर कब्ज की समस्या रहती है तो इसे गुनगुने दूध के साथ लें.

मुनक्का और काला नमक
कुछ मुनक्कों के अंदर थोड़ा काला नमक भरकर सुबह खाली पेट खाएं. यह आंतों की सफाई करता है और पेट को हल्का रखता है.


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Written by: Taushif

26 Oct 2025  ·  Published: 15:21 IST