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Winter Health Tips: सर्दियों में जरूर खाएं ये 5 ड्राई फ्रूट्स, देंगे गर्माहट और ताकत

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Winter Dry Fruits Benefits: सर्दियों का मौसम ठंडक और सुहावनेपन के साथ आता है, लेकिन इस समय शरीर को गर्म और मजबूत रखना बहुत जरूरी होता है. ठंड में अक्सर लोग थकान, कमजोरी, जोड़ों में दर्द और दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं से परेशान रहते हैं. ऐसे में सही खानपान बहुत मदद करता है. खासतौर पर ड्राई फ्रूट्स (सूखे मेवे) इस मौसम में शरीर को अंदर से ऊर्जा और गर्माहट देने का काम करते हैं.

ड्राई फ्रूट्स न सिर्फ पौष्टिक होते हैं बल्कि इनमें मौजूद विटामिन, मिनरल और हेल्दी फैट शरीर की इम्युनिटी को भी मजबूत बनाते हैं. यहां जानें सर्दियों में कौन से 5 ड्राई फ्रूट्स खासतौर पर खाने चाहिए और उनके क्या फायदे हैं.

बादाम
बादाम सबसे मशहूर ड्राई फ्रूट है. इसे सर्दियों में खाने की सलाह दी जाती है क्योंकि इसकी तासीर गर्म होती है. बादाम में प्रोटीन, विटामिन E, फाइबर और मैग्नीशियम पाया जाता है. यह दिमाग को तेज करता है, दिल की सेहत सुधारता है और शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाता है.

अखरोट
अखरोट ओमेगा-3 फैटी एसिड और विटामिन E से भरपूर होता है. यह शरीर में सूजन कम करता है और हृदय को स्वस्थ रखता है. अखरोट सर्दियों में होने वाले वायरल संक्रमण से लड़ने में भी मदद करता है क्योंकि इसमें एंटीऑक्सिडेंट अच्छी मात्रा में होते हैं.

अंजीर
अंजीर फाइबर का बेहतरीन स्रोत है. यह सर्दियों में कब्ज की समस्या को कम करता है. इसमें मौजूद कैल्शियम और पोटैशियम हड्डियों को मजबूत बनाते हैं और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखते हैं.

किशमिश
किशमिश आयरन से भरपूर होती है, इसलिए यह हीमोग्लोबिन बढ़ाने में मदद करती है. इसमें विटामिन C, जिंक और एंटीऑक्सिडेंट भी होते हैं, जिससे इम्यून सिस्टम मजबूत होता है और शरीर बीमारियों से लड़ने में सक्षम बनता है.

खजूर
खजूर सर्दियों में खूब खाया जाता है क्योंकि यह शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है और गर्माहट बनाए रखता है. इसमें आयरन और फाइबर होता है, जो खून की कमी और पाचन समस्याओं में फायदा करता है.


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Written by: Taushif

23 Nov 2025  ·  Published: 00:53 IST

जिंक की कमी चुरा सकती है बालों और स्किन का निखार, जानें कैसे करें इसकी भरपाई

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Zinc Deficiency Symptoms: मानव शरीर पानी और कई खनिज तत्वों से मिलकर बना है। शरीर में लोहा, जिंक, कॉपर, मैंगनीज और सेलेनियम जैसे ट्रेस मिनरल्स पाए जाते हैं, जो शरीर के लिए बहुत उपयोगी हैं. सप्लीमेंट लेकर उनकी कमी को पूरा करना पड़ता है. आज हम खनिज तत्व जिंक के बारे में बात करेंगे, जिसकी कमी होने पर शरीर में कई तरह के बदलाव दिखते हैं.

जिंक की मात्रा शरीर में बहुत कम ही चाहिए होती है, लेकिन अगर शरीर को पर्याप्त मात्रा में जिंक नहीं मिल पाता है तो इसका असर पाचन शक्ति, त्वचा, बालों, हॉर्मोन, भूख में कमी और रोग प्रतिरोधक क्षमता पर पड़ता है. जिंक शरीर में 300 से ज्यादा एंजाइम को सक्रिय रखता है और शरीर की कोशिकाओं को सही तरीके से बनने में मदद करता है.

अगर शरीर में जिंक की कमी है तो कुछ लक्षण बार-बार परेशान कर सकते हैं, जैसे बार-बार बुखार आना, स्किन पर एलर्जी होना, घावों का जल्दी न भरना, छोटे-छोटे काम करने पर थकान होना, और बालों का समय से पहले झड़ना और सफेद होना, लेकिन डॉक्टर की सलाह के बाद ही जिंक के सप्लीमेंट्स लेना शुरू करें.

जिंक की पूर्ति आहार से भी की जा सकती है, जो मांसाहारी और शाकाहारी दोनों खाद्य पदार्थों में पाया जाता है। महिलाओं को रोजाना 8 मिलीग्राम जिंक और पुरुषों को 11 मिलीग्राम जिंक की जरूरत होती है, जबकि स्तनपान कराने वाली महिलाओं को जिंक ज्यादा मात्रा में चाहिए. सीप में भरपूर मात्रा में जिंक होता है. 90 ग्राम सीप में 15 मिलीग्राम जिंक होता है. अगर इसे कम मात्रा में खाया जाए तो जिंक की डेली डोज पूरी की जा सकती है. 100 ग्राम मांस में 5 मिलीग्राम जिंक होता है, जबकि 100 ग्राम केकड़े से 6 मिलीग्राम जिंक मिल जाएगा.

अगर आप शाकाहारी हैं तो ओट्स का सेवन कर सकते हैं। एक कटोरी ओट्स में 3 मिलीग्राम जिंक मिल पाता है. इसके अलावा 30 ग्राम कद्दू के बीज में 2 मिलीग्राम, अंडे में 1.2 मिलीग्राम और एक कप दूध में 1 मिलीग्राम जिंक मिल जाएगा. काजू जिंक का सबसे ज्यादा सोर्स है. 100 ग्राम काजू में लगभग 5 से 7 मिलीग्राम जिंक होता है, और इसकी मात्रा को बढ़ाकर जिंक की डेली डोज को पूरा किया जा सकता है.
 


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Written by: Taushif

25 Oct 2025  ·  Published: 19:06 IST

50 की उम्र के बाद भी फिटनेस की शुरुआत करें, सेहत में दिखेगा चमत्कारी फर्क

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Exercise After 50 for Women: अगर आपने 50 की उम्र से पहले एक्सरसाइज नहीं की है, तो घबराने की जरूरत नहीं है. विशेषज्ञों का मानना है कि आप 50 के बाद भी फिजिकल एक्टिविटी शुरू करें तो इसके फायदे तुरंत मिलने लगते हैं. महिलाओं के लिए यह और भी जरूरी हो जाता है, क्योंकि इस उम्र में मेनोपॉज के लक्षण दिखने लगते हैं, जैसे कि गर्मी लगना, नींद की परेशानी, मूड में बदलाव और जोड़ों का दर्द. ऐसे में एक्सरसाइज न सिर्फ इन लक्षणों को कम करती है बल्कि आपकी पूरी सेहत को बेहतर बनाती है.

क्यों जरूरी है एक्सरसाइज?
50 की उम्र के बाद हृदय रोग, डायबिटीज और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है लेकिन नियमित व्यायाम से इनका जोखिम काफी हद तक कम किया जा सकता है. एक्सरसाइज करने से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन अच्छा रहता है, वजन नियंत्रित रहता है और पेट की चर्बी भी घटती है. खास बात यह है कि फिट रहने से आपकी जैविक उम्र यानी बायोलॉजिकल एज कम हो जाती है. यानी 55 की उम्र में भी आप 35 जैसी एनर्जी महसूस कर सकती हैं.

कौन-कौन सी एक्सरसाइज करें?
एरोबिक एक्सरसाइज

जैसे तेज़ चलना (ब्रिस्क वॉक), जॉगिंग, तैराकी और डांस. ये व्यायाम आपके दिल को मजबूत बनाते हैं और वजन घटाने में मदद करते हैं.

स्ट्रेंथ ट्रेनिंग
हफ्ते में दो बार हल्के वेट उठाने या शरीर के वजन से व्यायाम करने से हड्डियाँ मजबूत होती हैं और मांसपेशियाँ टोन होती हैं.

स्ट्रेचिंग और योग
इससे जोड़ों में लचीलापन बढ़ता है और चोट लगने का खतरा कम होता है. योग और पिलेट्स इस उम्र में बहुत फायदेमंद होते हैं.

एक्सरसाइज शुरू करने से पहले…
अगर आपको ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, डायबिटीज या कोई अन्य पुरानी बीमारी है, तो किसी डॉक्टर से सलाह जरूर लें. उसके बाद ही किसी फिटनेस रूटीन की शुरुआत करें.


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Written by: Taushif

02 Aug 2025  ·  Published: 05:02 IST

शारीरिक काम कम, फिर भी थकान ज्यादा? जानिए असली कारण

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Mental Fatigue Causes: अक्सर हम सोचते हैं कि अगर शरीर थका हुआ नहीं है तो हमें थकान क्यों महसूस होती है लेकिन सच यह है कि मानसिक थकान भी उतनी ही गहरी हो सकती है जितनी शारीरिक थकान. दिनभर का बोझ, छोटी-छोटी आदतें और लगातार चलने वाला मानसिक दबाव हमारी ऊर्जा को धीरे-धीरे खत्म करता है. आइए जानते हैं सात ऐसी आदतों के बारे में, जो हमारी मेंटल एनर्जी को चुपचाप खा जाती हैं.

1. बार-बार अपनी बात समझाना
हम अक्सर सोचते हैं कि हमारी भावनाएं, फैसले या पसंद दूसरों को पूरी तरह समझ आनी चाहिए. इसी वजह से हम बार-बार सफाई देने लगते हैं लेकिन यह आदत थकान का कारण बनती है, क्योंकि हर किसी को मनाना या संतुष्ट करना जरूरी नहीं होता. याद रखें, आपके फैसले आपकी सहजता पर आधारित होने चाहिए, न कि सबको खुश करने पर.

2. हर किसी की समस्या हल करने की कोशिश
कभी कोई दोस्त दुखी हो या सहकर्मी तनाव में हो, तो तुरंत सलाह देने या उनकी समस्या सुलझाने की कोशिश करते हैं. ऐसा करने से हम अनजाने में दूसरों का बोझ भी अपने सिर ले लेते हैं. ज़रूरी नहीं कि हर बार समाधान दें, कई बार सिर्फ ध्यान से सुन लेना भी मददगार होता है.

3. मल्टीटास्किंग
आजकल लोग मल्टीटास्किंग को एक बड़ी कला मानते हैं, लेकिन हमारा दिमाग इसके लिए बना ही नहीं है. जब हम एक साथ कई काम करते हैं, तो दिमाग बार-बार ध्यान बदलता है. इससे न तो काम ठीक से हो पाता है और न ही दिमाग को आराम मिलता है. बेहतर है कि एक समय पर सिर्फ एक काम पर ध्यान दें.

4. पुराने विवादों को याद करना
बीती बातें बार-बार दिमाग में घूमती रहती हैं और हमें भीतर से थका देती हैं. पुरानी लड़ाइयां या विवाद सिर्फ तनाव बढ़ाते हैं. जब भी ऐसा हो, खुद को याद दिलाएं कि वो समय खत्म हो चुका है. इससे आपका मन धीरे-धीरे वर्तमान पर केंद्रित होगा.

5. बिना मन से हां कहना
कभी-कभी हम सिर्फ सामने वाले को नाराज़ न करने के लिए हां कह देते हैं लेकिन अंदर ही अंदर यह हमें परेशान करता है. अपनी क्षमता और भावनाओं को समझकर ही कोई निर्णय लें. याद रखें, मना करना भी उतना ही जरूरी है जितना हां कहना.

6. बहुत ज्यादा शोर और स्क्रीन टाइम
लगातार सोशल मीडिया, वीडियो, खबरें और नोटिफिकेशन हमारे नर्वस सिस्टम को थका देते हैं. यह मानसिक शांति को खत्म करता है. कोशिश करें कि दिन में कुछ समय के लिए फोन से दूर रहें, चाय पिएं या खुली हवा में टहलें. यह छोटा-सा ब्रेक दिमाग को तरोताज़ा कर देता है.

7. अपनी भावनाओं को अनदेखा करना
जब आप उदास, चिड़चिड़े या तनावग्रस्त हों और इसे नज़रअंदाज़ कर दें, तो यह मन पर दबाव बनाता है. बेहतर होगा कि अपनी भावनाओं को पहचानें, उन्हें लिखें या किसी भरोसेमंद व्यक्ति से साझा करें. इससे मन हल्का होता है और ऊर्जा वापस आती है.

क्या करें मानसिक शांति के लिए?
इन आदतों को बदलने के साथ एक आसान-सा अभ्यास आपकी मदद कर सकता है. सांसों पर ध्यान देना.
रोज़ाना सिर्फ 2 मिनट शांति से बैठकर अपनी सांसों को आते-जाते देखें. इसे बदलने की कोशिश न करें, बस महसूस करें. यह अभ्यास दिमाग और शरीर दोनों को आराम देता है और आपकी मानसिक ऊर्जा को फिर से ताजा कर देता है.


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Written by: Taushif

09 Sep 2025  ·  Published: 13:06 IST