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Amrood ke fayde: अमरूद भारत में आसानी से मिलने वाला एक साधारण लेकिन बेहद फायदेमंद फल है. यह बाकी फलों की तुलना में कीमत में सस्ता होता है, लेकिन इसके पोषक तत्व और फायदे किसी भी महंगे फल से कम नहीं हैं. अमरूद विटामिन सी, फाइबर और एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर होता है, जिसकी वजह से इसे हेल्थ एक्सपर्ट्स सुपरफ्रूट भी मानते हैं. रोजाना डाइट में अमरूद शामिल करने से शरीर को कई तरह के फायदे मिल सकते हैं.
पाचन तंत्र के लिए लाभकारी
अमरूद में फाइबर की मात्रा काफी अधिक होती है. यही वजह है कि यह आपके पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है और कब्ज की समस्या से राहत दिलाता है. इसमें मौजूद पोषक तत्व गट हेल्थ को बेहतर बनाने में मदद करते हैं. नियमित रूप से अमरूद खाने से पेट साफ रहता है और पाचन संबंधी दिक्कतें कम होती हैं.
स्किन और बालों के लिए फायदेमंद
अमरूद विटामिन सी, बीटा-कैरोटीन और अन्य एंटीऑक्सिडेंट्स का बेहतरीन स्रोत है. ये तत्व त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाने में मदद करते हैं. विटामिन सी कोलेजन प्रोटीन के निर्माण को बढ़ाता है, जो त्वचा को टाइट रखता है और एजिंग की प्रक्रिया को धीमा करता है. इसके सेवन से झुर्रियां देर से आती हैं और स्किन लंबे समय तक जवान दिखती है. बालों के लिए भी अमरूद पोषण का अच्छा स्रोत है, जो उन्हें मजबूत और घना बनाता है.
इम्युनिटी बढ़ाने में सहायक
अमरूद को विटामिन सी का खजाना कहा जाता है. यह एक शक्तिशाली एंटीऑक्सिडेंट है जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है. अमरूद का सेवन श्वेत रक्त कोशिकाओं (WBC) के उत्पादन को बढ़ाता है, जिससे शरीर संक्रमण और वायरस से लड़ने में सक्षम होता है. यही कारण है कि जो लोग नियमित रूप से अमरूद खाते हैं, उन्हें बार-बार बीमारियां नहीं घेरतीं.
दिल की सेहत के लिए अच्छा
अमरूद में पोटैशियम और घुलनशील फाइबर भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. पोटैशियम ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करता है और फाइबर खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करने में मदद करता है. दोनों ही चीजें दिल की सेहत के लिए जरूरी हैं. अमरूद का नियमित सेवन करने से हार्ट डिजीज का खतरा कम हो सकता है.
वजन कम करने में मददगार
अमरूद कम कैलोरी वाला फल है, लेकिन इसमें फाइबर और जरूरी पोषक तत्व भरपूर होते हैं. इसे खाने से जल्दी भूख नहीं लगती और ओवरईटिंग से बचा जा सकता है. इस तरह यह वजन घटाने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए एक बेहतरीन फल है.
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शरीर के हर जरूरी अंग की तरह दांत भी हमारी सेहत का बेहद अहम हिस्सा हैं. सुंदर मुस्कान के साथ-साथ दांत ही भोजन को चबाकर पाचन की प्रक्रिया शुरू करते हैं. अगर दांत और मसूड़े कमजोर हों, तो इसका सीधा असर पेट, पाचन और पूरे शरीर पर पड़ता है. आयुर्वेद में दांतों को पूरे शरीर की सेहत का आधार माना गया है.
Ayurveda के मुताबिक, दांतों को अस्थि धातु यानी हड्डियों से जोड़ा गया है. इसका मतलब है कि दांत जितने मजबूत होंगे, शरीर भी उतना ही मजबूत रहेगा. लेकिन आज की जीवनशैली में गलत खानपान, तनाव और लापरवाही की वजह से कम उम्र में ही दांतों की परेशानी शुरू हो जाती है. मसूड़ों से खून आना, बदबू, कैविटी, पीले दांत और दांत हिलने जैसी समस्याएं आम होती जा रही हैं.
विशेषज्ञों के मुताबिक, दिन में दो बार दांत साफ न करना, जिह्वा की सफाई न करना, तंबाकू का सेवन, बहुत ज्यादा मीठा खाना और बार-बार कुछ न कुछ खाते रहना दांतों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाता है. ज्यादा ठंडा या बहुत गर्म भोजन भी दांतों की जड़ों को कमजोर करता है.
आयुर्वेदिक उपाय जो घर बैठे अपनाए जा सकते हैं
आयुर्वेद में दांतों की देखभाल के लिए कुछ बेहद आसान और कारगर उपाय बताए गए हैं. सबसे पहला उपाय है तेल से कुल्ला करना. सुबह खाली पेट नारियल या तिल के तेल से 5 से 10 मिनट तक कुल्ला करने से दांतों की गंदगी साफ होती है और मसूड़े मजबूत होते हैं.
दूसरा असरदार उपाय है Triphala. रात को सोने से पहले गुनगुने पानी के साथ त्रिफला लेने से पेट साफ रहता है और पाचन मजबूत होता है. जब पेट सही रहेगा, तो दांत भी अपने आप मजबूत रहेंगे. दांत साफ करने के लिए बाजार के केमिकल युक्त टूथपेस्ट की बजाय नीम की दातुन या त्रिफला, लौंग, अजवाइन और नीम की छाल के पाउडर से दांत साफ करने की सलाह दी जाती है. इससे दांतों की चमक बढ़ती है और मुंह की बदबू भी दूर होती है.
लौंग का तेल और सही खानपान भी जरूरी
लौंग का तेल दांतों और मसूड़ों के लिए रामबाण माना जाता है. यह मसूड़ों की सूजन कम करता है और दांतों में कीड़ा लगने से बचाता है. इसके साथ ही दांतों को मजबूत और चमकदार बनाए रखता है. दांतों को स्वस्थ रखने के लिए शरीर में कैल्शियम और प्रोटीन की पर्याप्त मात्रा जरूरी है. सर्दियों में गुड़, तिल, मूंगफली, सूखे मेवे, बीज और छेना को खाने में शामिल करने से दांत और मसूड़े दोनों मजबूत होते हैं.
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Foods That Cause Wrinkles: आजकल हर कोई जवान और खूबसूरत दिखना चाहता है. इसके लिए लोग महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स, ट्रीटमेंट्स और घरेलू नुस्खे अपनाते हैं लेकिन असली फर्क हमारी डाइट से पड़ता है. हम जो खाते-पीते हैं वही हमारे हेल्थ और स्किन पर असर डालता है. कई बार हम ऐसी चीजें खा लेते हैं जो स्वाद में तो बेहतरीन लगती हैं लेकिन वे हमारी स्किन को डल और बेजान बना देती हैं. यही नहीं, ये फूड्स एजिंग प्रोसेस को भी तेज कर देते हैं, जिससे चेहरे पर झुर्रियां और ढीलापन जल्दी नजर आने लगता है. आइए जानते हैं ऐसी 5 चीजों के बारे में, जिन्हें हमें रोजमर्रा की डाइट से दूर रखना चाहिए.
1. आइसक्रीम
खुशियों का जश्न हो और आइसक्रीम ना हो, ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है लेकिन ये मीठी ठंडक हमारी स्किन के लिए उतनी अच्छी नहीं है. आइसक्रीम में शुगर और फैट दोनों ही भरपूर मात्रा में होते हैं. ये दोनों मिलकर शरीर में ग्लाइकेशन प्रोसेस को तेज कर देते हैं. इस प्रक्रिया से कोलेजन प्रोटीन कमजोर पड़ने लगता है, जो स्किन को टाइट और यंग बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है. नतीजा यह होता है कि स्किन ढीली हो जाती है और चेहरे पर झुर्रियां जल्दी आने लगती हैं. कभी-कभार आइसक्रीम खाना नुकसानदेह नहीं है, लेकिन इसे रोजाना खाना स्किन और सेहत दोनों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है.
2. सोडा
गर्मी में ठंडी बोतल वाला सोडा भले ही ताजगी का अहसास कराए, लेकिन हकीकत में यह स्किन और बॉडी को नुकसान पहुंचाता है. सोडा में शुगर और फॉस्फोरिक एसिड की मात्रा काफी ज्यादा होती है. ये हड्डियों और दांतों को कमजोर करते हैं और ब्लड शुगर लेवल को असंतुलित कर देते हैं. जब शरीर में शुगर का स्तर बढ़ता है तो स्किन पर ग्लो कम हो जाता है और चेहरा डल दिखने लगता है. ऐसे में अगर आप चाहते हैं कि आपकी स्किन हेल्दी और चमकदार दिखे, तो सोडा जैसे कार्बोनेटेड ड्रिंक्स से दूरी बनाना ही बेहतर है.
3. पैक्ड फ्रूट जूस
अक्सर लोग मानते हैं कि फ्रूट जूस हेल्दी होता है, लेकिन हकीकत कुछ और है. मार्केट में मिलने वाले ज्यादातर पैक्ड जूस में बहुत ज्यादा शुगर होती है और इनमें पूरे फल जैसा फाइबर नहीं होता. फाइबर की कमी की वजह से शरीर शुगर को बहुत तेजी से अब्जॉर्ब करता है. इसका असर इंसुलिन पर पड़ता है और शरीर में सूजन बढ़ जाती है. यही वजह है कि पैक्ड जूस ज्यादा पीने वालों की स्किन जल्दी ढीली पड़ने लगती है. अगर आप सच में हेल्दी रहना चाहते हैं तो पैक्ड जूस की जगह ताजे फल खाएं. इसमें फाइबर भी मिलेगा और एजिंग प्रोसेस भी स्लो हो जाएगी.
4. अल्कोहल
अल्कोहल का असर सिर्फ लीवर पर ही नहीं, बल्कि स्किन पर भी नजर आता है. बार-बार शराब पीने से शरीर डिहाइड्रेट हो जाता है और विटामिन A की कमी हो जाती है. विटामिन A स्किन रिपेयर और सेल ग्रोथ के लिए बेहद जरूरी है। इसकी कमी से स्किन डल, बेजान और कमजोर हो जाती है. इसके अलावा अल्कोहल लीवर को भी नुकसान पहुंचाता है, जिससे शरीर से टॉक्सिन्स बाहर नहीं निकल पाते. नतीजा यह होता है कि स्किन पर पिंपल्स, झुर्रियां और उम्र से पहले बूढ़ापन नजर आने लगता है.
5. आर्टिफिशियल स्वीटनर
कई लोग चीनी से बचने के लिए आर्टिफिशियल स्वीटनर का इस्तेमाल करते हैं लेकिन रिसर्च बताती है कि ये स्वीटनर गट हेल्थ को बिगाड़ सकते हैं और हेल्दी बैक्टीरिया को मार सकते हैं. इससे मीठा खाने की क्रेविंग और बढ़ जाती है और मेटाबॉलिक स्ट्रेस भी बढ़ने लगता है. लंबे समय में इसका असर चेहरे पर दिखता है, जहां झुर्रियां और ढीलापन जल्दी आने लगता है. यानी कैलोरी बचाने के चक्कर में लोग अपनी स्किन का नुकसान कर बैठते हैं.
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Winter Dehydration Risks: सर्दियां शुरू होते ही शरीर की प्यास अपने आप कम होने लगती है. ठंड की वजह से लोग पानी पीना भूल जाते हैं या ठंडे पानी के डर से बहुत कम पानी पीते हैं. लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदत लंबे समय में शरीर को नुकसान पहुंचा सकती है. खासतौर पर यदि कोई व्यक्ति रोज़ 500 मिली लीटर से भी कम पानी पी रहा है, तो उसे कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा हो सकता है. आइए जानें कम पानी पीने से शरीर पर कैसा असर पड़ता है.
1. किडनी की फिल्टरेशन क्षमता कम होना
बहुत कम पानी पीने से किडनी को शरीर के अपशिष्ट पदार्थ निकालने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. इससे यूरिन गाढ़ा हो जाता है और शरीर में टॉक्सिन जमा होने लगते हैं. यह स्थिति आगे चलकर किडनी को नुकसान पहुंचा सकती है.
2. दिमाग तक ऑक्सीजन की कमी
कम पानी पीने से ब्लड वॉल्यूम घटता है, जिससे दिमाग तक पहुंचने वाली ऑक्सीजन भी कम हो जाती है. इसका असर फोकस, मूड और ऊर्जा पर पड़ता है. व्यक्ति को चिड़चिड़ापन, थकान और ध्यान की कमी का अनुभव हो सकता है.
3. मसल्स का थकना और दर्द बढ़ना
पानी शरीर की मसल्स को ऊर्जा देता है. कम पानी पीने पर मसल्स कमजोर महसूस होने लगते हैं. थोड़ी-सी मेहनत में थकावट आ जाती है और मसल्स सोरनेस बढ़ सकती है.
4. डाइजेशन धीमा होना
पानी पाचन प्रक्रिया में बड़ा रोल निभाता है. यदि शरीर में पानी की कमी हो जाए तो खाना पचने में दिक्कत आती है. इससे कब्ज, गैस और अपच जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं. भूख भी कम लगने लगती है.
5. लंबे समय में कई क्रॉनिक बीमारियों का खतरा
लगातार कम पानी पीने से शरीर पर स्ट्रेस बढ़ता है. यूरिन का रंग गहरा हो जाता है, किडनी की फिल्टरेशन रेट धीमी हो जाती है और शरीर का तापमान नियंत्रित करने की क्षमता भी प्रभावित होती है. लंबे समय में यह आदत किडनी, दिल और ब्रेन से जुड़ी गंभीर बीमारियों की वजह बन सकती है.
कैसे बचें?
सर्दियों में भी दिनभर 6–8 गिलास पानी जरूर पिएं. गरम पानी या हर्बल चाय का सेवन बढ़ाएं. प्यास न लगे तब भी थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पानी पीते रहें.