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Ayurvedic drinks for sleep: नींद हमारे शरीर का सबसे अहम रिपेयरिंग टाइम है, लेकिन आजकल नींद की समस्या बहुत आम हो चुकी है. कई लोग दिनभर की थकान के बाद भी ठीक से सो नहीं पाते. ऐसे में आयुर्वेद के कुछ सरल और प्राकृतिक नुस्खे आपकी रातों को शांत, आरामदेह और तनावमुक्त बना सकते हैं. आइए जानते हैं उन पेयों के बारे में जिन्हें सोने से पहले पीने पर नींद की गुणवत्ता काफी बेहतर हो सकती है.
आयुर्वेद के अनुसार, रात के समय वात दोष बढ़ जाता है, जिससे मन सक्रिय और बेचैन हो जाता है. इसलिए गरम, हल्के और सात्त्विक पेय शरीर और दिमाग को तेजी से शांत करते हैं. विज्ञान भी मानता है कि गर्म पेय तंत्रिका तंत्र को रिलैक्स करते हैं, ट्रिप्टोफैन और मेलाटोनिन के स्तर को बढ़ाने में मदद करते हैं और पाचन को आसान बनाते हैं. ये सभी अच्छी नींद के लिए जरूरी हैं.
1. हल्दी दूध
रात में हल्दी दूध पीना सबसे बेहतरीन विकल्प माना जाता है. हल्दी शरीर और दिमाग की थकान मिटाती है. इसमें थोड़ा सा घी मिलाने से नींद और गहरी होती है और सुबह शरीर हल्का महसूस होता है.
2. अश्वगंधा दूध
अश्वगंधा तनाव कम करने के लिए आयुर्वेद की सबसे प्रसिद्ध जड़ी-बूटी है. इसे दूध में मिलाकर पीने से शरीर रिलैक्स होता है और नींद की गहराई बढ़ती है.
3. दालचीनी दूध
दालचीनी पाचन बेहतर करती है और इसकी हल्की मिठास मन को शांत करती है. इससे सोने में देरी नहीं होती और नींद लगातार आती है.
4. ब्राह्मी टी
जो लोग मानसिक तनाव, ओवरथिंकिंग या दिमाग में लगातार विचार आने से परेशान रहते हैं, उन्हें ब्राह्मी टी काफी राहत देती है. यह मन को तुरंत शांत करती है.
5. कैमोमाइल टी
कैमोमाइल भले ही आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी नहीं है, लेकिन इसकी चाय तनाव मिटाने, दिल की धड़कन को सामान्य करने और नींद की गुणवत्ता बढ़ाने में असरदार है.
6. गुनगुना पानी + शहद
हल्का शहद मिले गुनगुने पानी का एक गिलास शरीर, पाचन और मन तीनों पर सकारात्मक असर डालता है. यह नींद को प्राकृतिक रूप से बढ़ाता है.
7. खसखस या सौंफ का ड्रिंक
खसखस बेचैनी और अनिद्रा में राहत देता है. वहीं सौंफ का पानी पाचन सुधारकर रात में बार-बार जागने की समस्या कम करता है.
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Vitamin D Rich Foods: विटामिन D हमारे शरीर के लिए बहुत जरूरी होता है। यह सिर्फ हड्डियों को ही मजबूत नहीं बनाता, बल्कि मांसपेशियों, इम्यून सिस्टम (प्रतिरक्षा तंत्र) और हमारे मूड यानी इमोशनल हेल्थ को भी बेहतर बनाए रखने में मदद करता है। बाकी विटामिन हमें खाने-पीने से मिलते हैं, लेकिन विटामिन D थोड़ा अलग है – यह शरीर खुद बनाता है, जब हमारी त्वचा सूरज की रोशनी, खासकर यूवीबी किरणों के संपर्क में आती है।
हालांकि बरसात और सर्दियों के मौसम में सूरज कम निकलता है, और अगर निकलता भी है तो धूप में बैठना या निकलना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में शरीर को धूप से विटामिन D कम मिल पाता है, जिससे इसकी कमी हो जाती है। खासतौर पर अक्टूबर से फरवरी तक ये समस्या ज्यादा देखने को मिलती है।
'द जर्नल ऑफ न्यूट्रिशन' के अनुसार, मार्च से सितंबर तक सूरज की रोशनी से हमें अच्छी मात्रा में विटामिन D मिल जाता है। लेकिन जब धूप नहीं मिल पाती, तब खानपान के जरिए इसकी पूर्ति जरूरी हो जाती है। नीचे कुछ ऐसे खाद्य पदार्थ दिए गए हैं जिनसे विटामिन D की कमी को दूर किया जा सकता है:
1. ऑयली फिश (तेली मछली)
सैल्मन, सार्डिन, ट्राउट, हेरिंग और मैकेरल जैसी मछलियों में भरपूर विटामिन D होता है। जो लोग मछली खाते हैं, उनके लिए ये एक बेहतरीन विकल्प है।
2. अंडे की जर्दी
अंडे की पीली जर्दी में भी अच्छी मात्रा में विटामिन D होता है। अगर आप रोज एक अंडा खाते हैं, तो इससे थोड़ी मात्रा में विटामिन D मिल सकता है।
3. फोर्टिफाइड फूड्स
कुछ खाद्य पदार्थ जैसे दूध, नाश्ते के सीरियल और वसायुक्त स्प्रेड्स (बटर जैसे प्रोडक्ट्स) में विटामिन D को कृत्रिम रूप से मिलाया जाता है। इन्हें फोर्टिफाइड फूड्स कहते हैं।
4. लिवर (यकृत)
एनिमल बेस्ड प्रॉडक्ट्स में लिवर यानी जानवरों के यकृत में विटामिन D होता है। लेकिन गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन करने से बचना चाहिए क्योंकि इसमें कुछ ऐसे तत्व भी हो सकते हैं जो भ्रूण के लिए हानिकारक हो सकते हैं।
अगर आप सूरज की धूप में नहीं जा पा रहे हैं, तो ऊपर बताए गए खाद्य पदार्थ आपकी विटामिन D की कमी को काफी हद तक पूरा कर सकते हैं। जरूरत पड़े तो डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट भी लिया जा सकता है।
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Elderly Health: सीड्स यानी बीज देखने में छोटे जरूर होते हैं, लेकिन इनमें मौजूद पोषक तत्व शरीर के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं. इनमें विटामिन, मिनरल्स, हेल्दी फैट्स और प्लांट-बेस्ड प्रोटीन की भरपूर मात्रा होती है, जो दिल को हेल्दी रखते हैं, एनर्जी बढ़ाते हैं और डाइजेशन सुधारते हैं. लेकिन हर चीज की तरह सीड्स भी हर किसी के लिए फायदेमंद नहीं होते, खासकर बुजुर्गों के लिए.
उम्र बढ़ने के साथ पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है. ऐसे में कुछ बीज पेट फूलने, गैस या कब्ज जैसी दिक्कतें पैदा कर सकते हैं. कुछ छोटे और सख्त बीज गले में फंस सकते हैं या दम घुटने का खतरा बढ़ा सकते हैं. साथ ही, कई बीज ऐसी दवाओं के असर को भी कम कर देते हैं जो ब्लड प्रेशर, शुगर या कोलेस्ट्रॉल के लिए ली जाती हैं. इसलिए यह जानना जरूरी है कि कौन से सीड्स बुजुर्गों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकते हैं.
1. पॉपी सीड्स
खसखस केक या ब्रेड में स्वाद और क्रंच लाने के लिए डाली जाती है. लेकिन इनमें कुछ ऐसे प्राकृतिक तत्व होते हैं जो पेन किलर या ब्लड थिनर दवाओं के असर को प्रभावित कर सकते हैं. बुजुर्गों को इन्हें चबाना या निगलना भी मुश्किल होता है. इसलिए खसखस का इस्तेमाल बहुत सीमित मात्रा में और पका हुआ ही करें.
2. चिया सीड्स
चिया सीड्स फाइबर और ओमेगा-3 से भरपूर होते हैं, लेकिन इन्हें सूखा खाने से पेट में सूजन या कब्ज हो सकता है क्योंकि ये पानी के संपर्क में आने पर फूल जाते हैं. इन्हें खाने से पहले पानी या दूध में भिगोना जरूरी है. बुजुर्ग दिन में 1–2 चम्मच तक ही सुरक्षित रूप से खा सकते हैं.
3. अलसी के बीज
अलसी के बीज पाचन और हार्ट हेल्थ के लिए लाभदायक हैं, लेकिन अधिक मात्रा में खाने से गैस या दस्त की दिक्कत हो सकती है. साथ ही, ये कुछ दवाओं के असर को भी कम कर सकते हैं. इन्हें खाने से पहले पीसकर थोड़ी मात्रा में ही लें.
4. सूरजमुखी के बीज
सूरजमुखी के बीज हेल्दी स्नैक हैं, लेकिन मार्केट में मिलने वाले पैक्ड बीजों में नमक या चीनी मिलाई जाती है, जो ब्लड प्रेशर बढ़ा सकती है और किडनी पर असर डाल सकती है. हमेशा बिना नमक-चीनी वाले बीज चुनें और कम मात्रा में खाएं.
5. हेम्प सीड्स
भांग के बीज प्रोटीन और हेल्दी फैट से भरपूर हैं, लेकिन ज्यादा मात्रा में खाने से पेट खराब हो सकता है. साथ ही ये ब्लड थिनर दवाओं के असर को भी प्रभावित कर सकते हैं. इसलिए दिन में 1–2 बड़े चम्मच तक ही लें और अगर कोई दवा ले रहे हों तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें.
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Belly Fat: अगर आप सेब का सिरका, ग्रीन टी या नींबू पानी जैसे घरेलू नुस्खे आजमा चुके हैं, लेकिन पेट की जिद्दी चर्बी कम नहीं हो रही, तो यह खबर आपके लिए है. आयुर्वेदिक गुणों से भरपूर एक आसान सा मिश्रण रात में पीने से न केवल वजन कम करने में मदद मिलती है, बल्कि पेट फूलने की समस्या, नींद की गुणवत्ता और शुगर क्रेविंग पर भी असर पड़ता है. खास बात यह है कि यह ड्रिंक पूरी तरह घरेलू और सुरक्षित है.
इस मिश्रण को बनाने के लिए ज़रूरी है - धनिया, मेथी, सौंफ, दालचीनी और अदरक.
1. धनिया के बीज लिवर को साफ करने और सूजन घटाने में मदद करते हैं.
2. मेथी के बीज ब्लड शुगर कंट्रोल करते हैं और भूख कम करने में सहायक होते हैं.
3. सौंफ गैस और पेट फूलने को कम करती है तथा पाचन सुधारती है.
4. दालचीनी इंसुलिन सेंसिटिविटी को बढ़ाती है और शुगर लेवल को संतुलित रखती है.
5. अदरक मेटाबॉलिज्म तेज करता है और शरीर को ज्यादा कैलोरी जलाने में मदद करता है.
कैसे बनाएं यह ड्रिंक?
एक-एक चम्मच धनिया और मेथी को रात भर डेढ़ कप पानी में भिगो दें. शाम को इस पानी में आधा चम्मच सौंफ, आधा इंच दालचीनी और कद्दूकस किया हुआ अदरक डालकर 5 मिनट उबालें. छानकर रात के खाने के लगभग एक घंटे बाद पिएं.
रात में पीना क्यों फायदेमंद है?
नींद के दौरान शरीर स्वाभाविक रूप से डिटॉक्स होता है. लिवर रीसेट होता है, इंसुलिन सेंसिटिविटी सबसे बेहतर रहती है और तनाव से जुड़े हार्मोन कम हो जाते हैं. इन सभी प्रक्रियाओं से फैट बर्निंग और डाइजेशन दोनों तेज़ होते हैं, जिससे खासकर पेट की चर्बी घटाने में मदद मिलती है.