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Turmeric Water Benefits: भारत में हल्दी केवल रसोई का मसाला नहीं, बल्कि एक पारंपरिक औषधि भी मानी जाती है. हल्दी में एंटीबैक्टीरियल, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सिडेंट गुण पाए जाते हैं, जो सेहत के लिए बेहद लाभकारी होते हैं. हल्दी का पानी रोजाना पीना शरीर को अंदर से मजबूत बनाता है और कई तरह की बीमारियों से सुरक्षा देता है.
1. त्वचा के लिए फायदेमंद
हल्दी वाला पानी त्वचा की चमक बढ़ाने में मदद करता है. इसके एंटीऑक्सिडेंट गुण त्वचा को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाते हैं और एजिंग की प्रक्रिया को धीमा करते हैं. मुंहासे, झाइयां और त्वचा की जलन जैसी समस्याओं में भी यह राहत प्रदान करता है. नियमित सेवन से त्वचा साफ, मुलायम और दमकती हुई नजर आती है.
2. पाचन क्रिया को सुधारता है
अगर आप अक्सर अपच, गैस या भारीपन महसूस करते हैं, तो हल्दी का पानी आपके लिए फायदेमंद हो सकता है. हल्दी पित्त रस (Bile) के स्राव को उत्तेजित करती है, जिससे फैट्स जल्दी पचते हैं और पोषक तत्व बेहतर तरीके से शरीर में अवशोषित होते हैं. यह पेट की सूजन और गैस की समस्या को भी कम कर सकती है.
3. इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है
हल्दी के प्राकृतिक गुण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सहायक होते हैं. इसके नियमित सेवन से सर्दी-खांसी, जुकाम और अन्य संक्रमणों से बचाव होता है. हल्दी में करक्यूमिन (Curcumin) नामक तत्व पाया जाता है, जो वायरस और बैक्टीरिया से लड़ने में मदद करता है.
4. वजन घटाने में करता है मदद
हल्दी का पानी मेटाबॉलिज्म को तेज करता है, जिससे शरीर की चर्बी जल्दी जलती है. यह शरीर को डिटॉक्स करने में भी सहायता करता है, जिससे वजन कम करने की प्रक्रिया में सहायता मिलती है.
5. दिल के स्वास्थ्य में लाभदायक
हल्दी का पानी शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है और ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है. इससे दिल की बीमारियों का खतरा घटता है और हृदय स्वस्थ बना रहता है.
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Premature Grey Hair Causes: बदलती लाइफस्टाइल और तनाव भरी जिंदगी बीमारियों की वजह बन रही है. कम उम्र में ही स्किन और बालों से जुड़ी परेशानियां होने लगती हैं. आज बच्चों से लेकर युवाओं में जल्दी बाल सफेद होने की परेशानी देखी जा रही है. बाल सफेद होना सिर्फ खराब लाइफस्टाइल का कारण नहीं है, बल्कि ये पोषण की कमी, तनाव और लापरवाही का संकेत देता है। पहले जानते हैं कि बाल क्यों असमय सफेद होते हैं.
आयुर्वेद में बाल सफेद होने की परेशानी को वात दोष, रक्त धातु, हॉर्मोन के असंतुलन और रस धातु से जोड़कर देखा गया है. जब शरीर अंदर से स्वस्थ होता है, तो बाल और स्किन दोनों ही चमकदार होते हैं. आयुर्वेद में सफेद बालों की परेशानी को कम करने के लिए कई जड़ी-बूटियों को लाभकारी बताया है. इसमें आंवला, ब्रह्मी, जटामांसी, करी पत्ता, भृंगराज, गुड़हल, मुलेठी और नीम का पाउडर शामिल है. डॉक्टरी परामर्श के साथ अगर इन जड़ी-बूटियों का सेवन किया जाए, तो सफेद बाल होने की परेशानी को रोका जा सकता है.
ये सभी जड़ी बूटियां बालों की जड़ों को पोषित करती हैं और प्राकृतिक तरीके से उन्हें रंग भी देती हैं. वैज्ञानिक दृष्टिकोण से बाल तब सफेद होना शुरू होते हैं जब शरीर में मेलानिन प्रभावित होता है. यह स्किन और बाल दोनों को स्वस्थ रखने में मदद करता है. इसके अलावा, विटामिन बी12, आयरन की कमी, नींद आने में परेशानी होना, तनाव लेना, सिर दर्द की परेशानी लगातार होना और आंखों की रोशनी कम होना भी बालों के सफेद होने का कारण होते हैं.
आयुर्वेदिक उपायों के अलावा शरीर को भीतर से ठीक करने की भी जरूरत होती है. शरीर का आंत का साफ होना और रक्त का शुद्ध होना बालों का स्वास्थ्य दर्शाता है. शरीर की अंदरूनी सफाई के लिए रोजमर्रा की दिनचर्या में बदलाव की जरूरत होती है. इसके लिए सुबह गुनगुना पानी पीना, आंवला का सेवन करना, नाश्ते में फलों का सेवन करना, भुने काले तिल का सेवन करना, सुबह की धूप लेना और हफ्ते में कम से कम दो बार गुनगुने तेल से मालिश करना चाहिए. ये तरीके शरीर को अंदर से पोषण देंगे.
बालों को सही पोषण देने के लिए घर पर आसानी से पोषक तत्वों से भरपूर तेल भी बना सकते हैं, जिसे पोटली तेल कहा जाता है. इसमें अपने पसंदीदा तेल में करी पत्ता, भृंगराज, गुड़हल, नीम, मेथी दाना और आंवला को सूती पोटली में बांधकर तेल में तब तक उबालें जब तक उसका रंग गहरा न हो जाए. तेल को छानकर इस्तेमाल करें और हफ्ते में दो बार लगाएं. इससे बालों को मजबूती मिलेगी.
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Fatty Liver Treatment: लिवर हमारे शरीर का बेहद अहम हिस्सा है, जो पाचन, पोषक तत्वों के अवशोषण और टॉक्सिन्स को बाहर निकालने का काम करता है. लेकिन गलत खान-पान, आलस भरी लाइफस्टाइल, ज्यादा शराब और प्रोसेस्ड फूड्स का सेवन लिवर में फैट जमा कर देता है, जिससे फैटी लिवर की समस्या बढ़ रही है.
इस बीमारी का इलाज संभव है, लेकिन इसके लिए दवाइयों के साथ जीवनशैली में सुधार और सही खानपान की जरूरत होती है. एम्स, हार्वर्ड और स्टैनफोर्ड से प्रशिक्षित गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. सौरभ सेठी ने हाल ही में अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें उन्होंने तीन ऐसे ड्रिंक्स बताए जो लिवर की चर्बी कम करने और उसकी सेहत सुधारने में मदद करते हैं.
1. चुकंदर का जूस (Beetroot Juice)
डॉ. सेठी के मुताबिक, चुकंदर के जूस में बीटालेन्स नामक एंटीऑक्सिडेंट्स होते हैं, जो लिवर कोशिकाओं की रक्षा करते हैं और फैट के जमाव को कम करने में मदद करते हैं. अगर इसे हफ्ते में कुछ दिन एक गिलास पिया जाए तो लिवर स्वस्थ रहने में मदद मिलती है.
2. कॉफी (Coffee)
डॉ. सेठी बताते हैं कि कॉफी लिवर में फैट और फाइब्रोसिस के खतरे को कम करती है. उन्होंने सलाह दी कि ऑर्गेनिक कॉफी का सेवन करें और उसमें चीनी न मिलाएं. अगर स्वाद में मिठास चाहिए तो आप शहद, मॉन्क फ्रूट या स्टीविया का इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन एरिथ्रिटोल से बचें.
3. ग्रीन टी (Green Tea)
ग्रीन टी में मौजूद कैटेचिन (EGCG) लिवर एंजाइम्स को बेहतर बनाते हैं और फैट स्टोरेज को घटाते हैं.
नियमित रूप से हफ्ते में कुछ दिन ग्रीन टी पीने से लिवर की सेहत में सुधार होता है और शरीर में हल्की ऊर्जा भी महसूस होती है.
डॉ. सेठी ने कहा कि इन ड्रिंक्स के साथ हेल्दी डाइट और एक्टिव लाइफस्टाइल अपनाना जरूरी है.
नियमित वॉक, एक्सरसाइज और संतुलित आहार से न सिर्फ लिवर की चर्बी घटती है बल्कि शरीर की समग्र सेहत भी बेहतर होती है.
नोट
अगर आप फैटी लिवर से परेशान हैं, तो दवाओं के साथ इन तीन ड्रिंक्स को अपनी दिनचर्या में शामिल करें. यह लिवर की सेहत सुधारने का प्राकृतिक और असरदार तरीका है.
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Superfoods for Women: आज के दौर में महिलाएं न सिर्फ घर और बाहर की जिम्मेदारियां संभालती हैं बल्कि उनका शरीर भी भीतर से कई अहम भूमिकाएं निभाता है. हार्मोन संतुलन बनाए रखना, हड्डियों को मजबूत करना, मानसिक शांति देना, मां बनने की तैयारी करना और उम्र के साथ होने वाले बदलावों को सहन करना. ये सब एक महिला का शरीर रोज़ करता है. इसके बावजूद कई महिलाएं थकान, तनाव, सूजन (इंफ्लेमेशन) और हार्मोनल असंतुलन जैसी समस्याओं से जूझती हैं. इसका मुख्य कारण कमजोरी नहीं, बल्कि पोषण की कमी है. जब शरीर की जड़ों तक सही पोषण नहीं पहुंचता, तो असंतुलन और परेशानी महसूस होने लगती है.
आयुर्वेद में महिलाओं के शरीर को बेहद पवित्र और शक्तिशाली माना गया है. यही वजह है कि आयुर्वेद रोजाना पोषण और संतुलन पर ज़ोर देता है. अगर महिलाएं अपनी डाइट में कुछ विशेष सुपरफूड शामिल करें तो उनका स्वास्थ्य लंबे समय तक बेहतर रह सकता है. आइए जानते हैं ऐसे ही पांच सुपरफूड के बारे में...
1. शतावरी
शतावरी को आयुर्वेद में महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए सबसे खास माना गया है. यह न केवल प्रजनन स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है, बल्कि मानसिक शांति और हार्मोन संतुलन में भी मदद करता है. शतावरी शरीर को ठंडक देती है, जिससे पीरियड्स में ज्यादा रक्तस्राव, पेट में जलन या चिड़चिड़ापन जैसी समस्याओं से राहत मिलती है. इसे रात में गर्म दूध के साथ लेने से शरीर को गहरी नींद भी आती है और मन शांत रहता है.
2. काला तिल
काले तिल कैल्शियम, आयरन और हेल्दी फैट्स से भरपूर होते हैं. यह हड्डियों को मज़बूती देने के साथ-साथ हार्मोन को संतुलित करने में भी अहम भूमिका निभाते हैं. खासकर डिलीवरी के बाद और मेनोपॉज़ के समय यह महिलाओं के लिए बेहद फायदेमंद हैं. इन्हें सब्ज़ियों या चावल में भूनकर मसाले की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। नियमित सेवन से यह न केवल शरीर को ताकत देते हैं बल्कि बालों और त्वचा की सेहत भी बनाए रखते हैं.
3. आंवला
आंवला विटामिन C का सबसे अच्छा प्राकृतिक स्रोत माना जाता है. यह बाल, त्वचा, इम्यून सिस्टम और पाचन तंत्र के लिए वरदान है. एक्ने की समस्या हो या बालों का झड़ना, आंवला हर तरह से मदद करता है. सुबह आंवला जूस पीने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और स्किन ग्लो करने लगती है. आंवले को अचार, चटनी या मुरब्बे के रूप में भी डाइट में शामिल किया जा सकता है.
4. रागी
रागी को ‘कैल्शियम का पावरहाउस’ कहा जाता है. इसमें आयरन और अमीनो एसिड भी भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. यह न केवल हड्डियों की मज़बूती के लिए जरूरी है बल्कि नींद की गुणवत्ता को भी बेहतर बनाता है. मेनोपॉज़ के बाद जब महिलाओं की हड्डियां कमजोर होने लगती हैं, उस समय रागी बेहद लाभकारी होती है. इसे खिचड़ी, रोटी या दलिया बनाकर आसानी से खाया जा सकता है.
5. घी
घी भारतीय खानपान का अहम हिस्सा है और आयुर्वेद में इसे अमृत समान माना गया है. यह शरीर के ऊतकों को पोषण देता है, तनाव कम करता है और पाचन को मजबूत बनाता है. ड्राई स्किन की समस्या हो या नींद की कमी, घी दोनों में मदद करता है. रात को दूध में थोड़ा सा जायफल और घी मिलाकर पीने से नींद गहरी आती है और मन शांत रहता है.