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Best Rice for Weight Loss: भारत में चावल हमारी रोज़मर्रा की थाली का अहम हिस्सा है. दक्षिण भारत से लेकर उत्तर भारत तक, चावल हर घर की रसोई में नियमित रूप से पकाया जाता है लेकिन अक्सर लोग यह सोचकर चावल से दूरी बनाने लगते हैं कि इससे वजन बढ़ जाता है. हकीकत यह है कि चावल वजन बढ़ाने का सीधा कारण नहीं है, बल्कि चावल का चुनाव और उसका सेवन करने का तरीका मायने रखता है. अगर सही किस्म के चावल चुने जाएं तो न सिर्फ़ वजन नियंत्रित किया जा सकता है, बल्कि शरीर को ज़रूरी पोषण भी मिल सकता है.
रेड राइस
रेड राइस वजन घटाने के लिए बेहतरीन विकल्प माना जाता है. इसमें भरपूर मात्रा में फाइबर पाया जाता है, जो पेट को लंबे समय तक भरा रखता है और ओवरईटिंग से बचाता है. इसमें मौजूद एंथोसायनिन एंटीऑक्सीडेंट शरीर में सूजन को कम करते हैं और मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाते हैं. यही वजह है कि रेड राइस खाने वालों को बार-बार भूख नहीं लगती और कैलोरी का सेवन नियंत्रित रहता है.
ब्राउन राइस
ब्राउन राइस उन लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय है जो फिटनेस और वजन घटाने पर ध्यान देते हैं. यह पॉलिश नहीं किया जाता, इसलिए इसमें ब्रान लेयर सुरक्षित रहती है, जिसमें फाइबर, विटामिन और मिनरल्स भरपूर मात्रा में होते हैं. इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) कम होता है, जिससे ब्लड शुगर लेवल स्थिर रहता है. यही कारण है कि ब्राउन राइस धीरे-धीरे पचता है और शरीर को ज्यादा देर तक एनर्जी प्रदान करता है. नियमित रूप से ब्राउन राइस का सेवन वजन घटाने में मदद करता है.
ब्लैक राइस
ब्लैक राइस, जिसे फॉरबिडन राइस भी कहा जाता है, पोषण से भरपूर और बेहद खास माना जाता है. इसमें एंटीऑक्सीडेंट, प्रोटीन और फाइबर की मात्रा अन्य चावलों की तुलना में कहीं ज्यादा होती है. यह शरीर की सूजन को कम करता है और मेटाबॉलिज्म को तेज़ करता है, जिससे फैट बर्निंग की प्रक्रिया तेज़ होती है. हालांकि, यह हर जगह आसानी से उपलब्ध नहीं होता, लेकिन अगर आप वजन घटाने की सोच रहे हैं तो ब्लैक राइस सबसे असरदार विकल्प हो सकता है.
सफेद चावल
सफेद चावल भारतीय खाने में सबसे आम है, लेकिन वजन घटाने के दौरान इसका सेवन सीमित रखना चाहिए. इसमें फाइबर और पोषण की मात्रा कम होती है और इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स ज्यादा होता है, जिससे ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकता है. अगर सफेद चावल खाना हो तो उसे कभी-कभार और संतुलित मात्रा में ही लेना चाहिए.
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Lung Detox Benefits: आजकल हवा की गुणवत्ता लगातार खराब होती जा रही है. प्रदूषण, रसायन, धूल, धुआं, स्मोकिंग और अनियमित जीवनशैली की वजह से हमारे फेफड़ों पर लगातार दबाव पड़ रहा है. आयुर्वेद भी मानता है कि शरीर में प्राण यानी सांस का मार्ग जितना साफ होगा, स्वास्थ्य उतना बेहतर रहेगा. इसलिए लंग डिटॉक्स अब केवल विकल्प नहीं, बल्कि जरूरत बनता जा रहा है.
आसान शब्दों में कहें तो हमारे फेफड़े शरीर के ऑक्सीजन प्लांट की तरह काम करते हैं। हर मिनट सांस लेते हुए हजारों लीटर हवा को साफ करते हैं. ऐसे में जब हवा ही दूषित हो या हम कम पानी पिएं, स्मोकिंग करें या पूरे दिन बंद कमरों में रहें, तो फेफड़ों में कफ, बलगम और टॉक्सिन जमा होने लगते हैं. इससे सांस लेने में भारीपन, थकान, बार-बार खांसी और इम्यूनिटी कमजोर होने जैसी दिक्कतें सामने आती हैं.
घरेलू नुस्खों की बात करें तो सबसे आसान तरीका हल्दी वाला गुनगुना दूध है. हल्दी में करक्यूमिन होता है, जो सूजन और बलगम की समस्या को कम करता है. रात को सोने से पहले इसे पीने से फेफड़ों को आराम मिलता है. इसी तरह अदरक और शहद का मिश्रण भी काफी असरदार माना जाता है. यह बलगम को ढीला कर देता है और गले में जमा कफ बाहर निकालने में मदद करता है.
अगर छाती में जकड़न हो तो तुलसी की भाप लेना भी अच्छा उपाय है। इसकी खुशबू और गुण तुरंत आराम देते हैं. गुड़ और सौंफ का कॉम्बिनेशन भी पाचन और सांस दोनों को हल्का बनाता है, खासकर उन लोगों के लिए जो कम पानी पीते हैं या लंबे समय तक बैठे रहते हैं. गिलोय का काढ़ा फेफड़ों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए जाना जाता है.
वहीं अजवाइन की भाप कफ को ढीला करती है और साइनस-चेस्ट टाइटनेस में राहत देती है. सुबह खाली पेट नींबू पानी पीना भी फेफड़ों की झिल्ली को मजबूत करने में मदद करता है, खासकर उन लोगों के लिए जो स्मोकिंग छोड़ रहे हों. मुलेठी का चूर्ण भी गले की खराश, खांसी और बार-बार सांस अटकने में फायदेमंद माना जाता है.
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Gluten Allergy Diet Options: आजकल लोगों की लाइफस्टाइल और खाने-पीने की आदतों में तेजी से बदलाव आया है. बाहर का खाना, पैक्ड फूड और फास्ट फूड रोज़मर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गए हैं. यही कारण है कि अलग-अलग तरह की हेल्थ प्रॉब्लम बढ़ने लगी हैं. इनमें से एक आम समस्या है ग्लूटेन एलर्जी. ग्लूटेन एक तरह का प्रोटीन है, जो गेहूं, जौ और राई जैसे अनाजों में पाया जाता है. जिन लोगों को ग्लूटेन से एलर्जी होती है, उनके शरीर में इसे पचाने की क्षमता कम हो जाती है. ऐसे लोग जब गेहूं या जौ से बनी चीजें खाते हैं तो उन्हें पाचन संबंधी दिक्कतें, थकान, कमजोरी, पेट फूलना या स्किन रैश जैसी परेशानियां हो सकती हैं.
अक्सर लोग सोचते हैं कि ग्लूटेन एलर्जी होने के बाद उनकी डाइट बोरिंग और बहुत सीमित हो जाएगी. उन्हें लगेगा कि अब स्वादिष्ट खाना उनके लिए मना हो गया है. लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट है. सही जानकारी और थोड़ी-सी क्रिएटिविटी के साथ आप भी टेस्टी और हेल्दी ग्लूटेन-फ्री फूड खा सकते हैं.
दिल्ली के धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट (इंटरनल मेडिसिन) डॉ. गौरव जैन के मुताबिक, “अगर लोग सही फूड्स के बारे में जान लें तो उन्हें पता चलेगा कि ग्लूटेन-फ्री डाइट भी स्वादिष्ट और पौष्टिक हो सकती है.” डॉ. जैन ने कुछ ऐसे फूड्स बताए हैं जो न सिर्फ ग्लूटेन-फ्री डाइट को आसान बनाते हैं, बल्कि शरीर को जरूरी पोषण भी देते हैं.
1. ब्राउन राइस
ग्लूटेन एलर्जी वाले लोगों के लिए ब्राउन राइस एक बेहतरीन विकल्प है. यह कार्बोहाइड्रेट का अच्छा स्रोत है और सफेद चावल की तुलना में ज्यादा फाइबर देता है. ब्राउन राइस जल्दी डाइजेस्ट होते हैं और लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराते हैं. इसे आप दाल, सब्जी या सूप के साथ खा सकते हैं.
2. क्विनोआ
क्विनोआ आजकल सुपरफूड के तौर पर काफी लोकप्रिय है. यह ग्लूटेन-फ्री होने के साथ-साथ प्रोटीन और जरूरी अमीनो एसिड से भरपूर है. इसमें मौजूद मिनरल्स हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत बनाते हैं. क्विनोआ से आप सलाद, खिचड़ी, पुलाव या यहां तक कि स्नैक भी तैयार कर सकते हैं.
3. अंडे
ग्लूटेन-फ्री डाइट में प्रोटीन के लिए अंडे बेहतरीन विकल्प हैं. यह न सिर्फ सस्ते हैं, बल्कि इन्हें बनाना भी आसान है. अंडों में प्रोटीन के साथ विटामिन D, B6, B12 और कई जरूरी मिनरल्स भी पाए जाते हैं, जो शरीर को ताकत और इम्यूनिटी देने में मदद करते हैं.
4. नट्स और सीड्स
बादाम, अखरोट, काजू, अलसी के बीज, चिया सीड्स और सूरजमुखी के बीज जैसे नट्स और सीड्स प्रोटीन, हेल्दी फैट्स और फाइबर का शानदार स्रोत हैं. ये दिमाग की सेहत, एनर्जी और इम्यून सिस्टम के लिए भी फायदेमंद हैं. इन्हें आप सुबह के नाश्ते में, स्मूदी में या शाम के स्नैक के तौर पर खा सकते हैं.
5. शकरकंद
शकरकंद फाइबर, विटामिन और मिनरल्स से भरपूर होता है. यह ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने के साथ पाचन में भी मदद करता है. आप इसे उबालकर, रोस्ट करके या स्नैक की तरह खा सकते हैं. खासतौर पर सर्दियों के मौसम में शकरकंद बेहद हेल्दी और स्वादिष्ट विकल्प है.
ग्लूटेन-फ्री डाइट को मजेदार बनाने के टिप्स
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Makhana farming UP: उत्तर प्रदेश के बागवानी, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार और कृषि निर्यात राज्य मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने सोमवार को लखनऊ में मखाना विकास योजना की औपचारिक घोषणा की. भारत सरकार द्वारा 2025 में राष्ट्रीय मखाना बोर्ड के गठन के बाद शुरू की गई यह योजना पहले चरण में उत्तर प्रदेश सहित 10 राज्यों में लागू की जा रही है.
इस योजना का संचालन उत्तर प्रदेश का बागवानी विभाग करेगा. केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए कार्य योजना को मंजूरी दे दी है और 158 लाख रुपये जारी किए हैं, जिसके माध्यम से राज्य में मखाना उत्पादन बढ़ाने के लिए व्यापक कार्यक्रम चलाए जाएंगे.
इस फंड का उपयोग तालाबों के चयन और निर्माण, किसान प्रशिक्षण, फ्रंटलाइन प्रदर्शन, खरीदार-विक्रेता बैठकों, मखाना पवेलियन के माध्यम से प्रचार, अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में निर्यातकों की भागीदारी और जिला और राज्य स्तरीय सेमिनारों के आयोजन के लिए किया जाएगा. मखाना के लिए उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना का भी प्रस्ताव है. मंत्री सिंह ने कहा कि मखाना एक सुपरफूड है, जिसकी मांग देश और विदेश दोनों जगह तेजी से बढ़ रही है और उत्तर प्रदेश की जलवायु इसके उत्पादन के लिए बहुत उपयुक्त मानी जाती है.
पूर्वांचल के कुशीनगर, सिद्धार्थनगर, गाजीपुर, बलिया, महाराजगंज, वाराणसी और बस्ती जिलों को मखाना की खेती के लिए सबसे उपयुक्त माना गया है. जहां भी सिंघाड़े की खेती सफल होती है, वहां मखाना आसानी से उगाया जा सकता है. सरकार अगले वित्तीय वर्ष में मखाना उत्पादन क्षेत्र का काफी विस्तार करने, गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री उपलब्ध कराने और प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन को बढ़ावा देने की तैयारी कर रही है, ताकि मखाना किसानों को सीधे आर्थिक लाभ मिल सके.