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Chia Seeds Benefits: हेल्दी और फिट रहने के लिए डॉक्टर हमेशा संतुलित डाइट की सलाह देते हैं. इस डाइट में ड्राई फ्रूट्स और सीड्स यानी बीजों की खास जगह होती है. आजकल चिया सीड्स, अलसी, कद्दू और सूरजमुखी के बीज काफी ट्रेंड में हैं. ये छोटे-छोटे बीज पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं. इनमें फाइबर, प्रोटीन, हेल्दी फैट्स, मिनरल्स और विटामिन्स पाए जाते हैं जो शरीर को एनर्जी देते हैं और कई बीमारियों से बचाते हैं.
लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन सीड्स को अगर सही समय पर खाया जाए तो इनके फायदे कई गुना बढ़ जाते हैं? चलिए जानते हैं कौन-सा सीड कब और कैसे खाना चाहिए.
1. चिया सीड्स
चिया सीड्स एनर्जी का बेहतरीन सोर्स हैं. इन्हें सुबह नाश्ते के साथ या एक्सरसाइज से 1 घंटे पहले खाना सबसे अच्छा रहता है.
2. अलसी के बीज
अलसी के बीज फाइबर और ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर होते हैं.
3. कद्दू के बीज
कद्दू के बीज मैग्नीशियम, प्रोटीन और हेल्दी फैट्स का अच्छा स्रोत हैं.
4. सूरजमुखी के बीज
सूरजमुखी के बीज विटामिन E और हेल्दी फैट्स से भरपूर होते हैं.
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Winter Skincare: सर्दियां शुरू होते ही जहां गर्म कपड़े और गरम चाय का मजा बढ़ जाता है, वहीं ठंडी हवा हमारी त्वचा की नमी छीन लेती है. इसके बाद स्किन डल, रूखी और बेजान हो जाती है. लेकिन अगर आप चाहें तो कुछ फलों को अपनी डाइट में शामिल करके इस समस्या से बच सकते हैं. ये फल न सिर्फ स्वादिष्ट होते हैं बल्कि इनमें मौजूद विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट आपकी स्किन को अंदर से हाइड्रेट और ग्लोइंग बनाए रखते हैं. आइए जानते हैं सर्दियों के पांच बेस्ट फल जो आपकी स्किन को हेल्दी रखेंगे.
1. संतरा
सर्दियों में ड्राइनेस और डलनेस से बचने के लिए संतरा जरूर खाएं. इसमें विटामिन C भरपूर मात्रा में होता है, जो कोलेजन को बढ़ाता है और स्किन को टाइट रखता है. यह प्रदूषण और फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से भी बचाव करता है. रोजाना एक संतरा खाने या इसका जूस पीने से स्किन ब्राइट और फ्रेश दिखती है.
2. अनार
अनार में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट स्किन को एजिंग के असर से बचाते हैं और डैमेज सेल्स को रिपेयर करते हैं. इससे ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और चेहरा गुलाबी, हेल्दी और ग्लोइंग दिखता है. आयुर्वेद के मुताबिक, अनार ‘वात दोष’ को संतुलित करता है, जिससे स्किन की ड्राइनेस कम होती है.
3. पपीता
पपीता स्किन के लिए नेचुरल क्लेंजर की तरह काम करता है. इसमें पपेन एंजाइम होता है जो डेड स्किन हटाकर नई, सॉफ्ट और चमकदार स्किन लाता है. विटामिन A, C और E की मौजूदगी स्किन को रिपेयर और मॉइस्चराइज करती है.
4. आंवला
आंवला सर्दियों का सुपरफूड है. यह विटामिन C से भरपूर होता है, जो स्किन को टाइट, ब्राइट और यंग बनाए रखता है. यह शरीर से टॉक्सिन्स निकालता है जिससे पिंपल्स और डलनेस कम होती है. इसे कच्चा, जूस या अचार के रूप में लिया जा सकता है.
5. ब्लूबेरी
ब्लूबेरी में एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन C भरपूर होते हैं, जो स्किन की रेडनेस और पफीनेस कम करते हैं. यह कोलेजन को बढ़ाकर स्किन को जवां और टाइट बनाते हैं.
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Aging after 50: समय तो निरंतर आगे बढ़ता रहता है, लेकिन उम्र बढ़ने की प्रक्रिया हर इंसान के लिए समान नहीं होती। बचपन में शरीर तेजी से बढ़ता है, युवावस्था में स्थिरता रहती है, लेकिन जैसे-जैसे उम्र आगे बढ़ती है, शरीर में कमजोरी झलकने लगती है। हाल ही में चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज द्वारा की गई एक स्टडी में पाया गया है कि यह बुढ़ापा 50 की उम्र के बाद अचानक तेज़ी से बढ़ने लगता है।
इस शोध में 14 से 68 साल की उम्र के 76 लोगों के अंगों का विश्लेषण किया गया, जिनकी मृत्यु सिर में चोट लगने से हुई थी. वैज्ञानिकों ने हार्ट, लिवर, स्किन, मसल्स और खून जैसे अंगों के सैंपल लिए और बारीकी से यह समझने की कोशिश की कि शरीर के कौन से हिस्से कब सबसे अधिक प्रभावित होते हैं.
शोध के अनुसार, 45 से 55 साल की उम्र के बीच शरीर में सबसे अधिक जैविक परिवर्तन देखे गए. खासकर एओर्टा यानी शरीर की मुख्य रक्त वाहिका में उम्र का असर सबसे तीव्र देखा गया. इसके अलावा प्लीहा और पैंक्रियास में भी उम्र के साथ बदलाव स्पष्ट रूप से देखे गए.
वैज्ञानिकों ने यह भी पाया कि जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, शरीर में 48 ऐसे प्रोटीन बनने लगते हैं जो हृदय रोग, फैटी लिवर, फाइब्रोसिस और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से जुड़े होते हैं. ये परिवर्तन कुछ अंगों में सामान्य रूप से दिखाई देते हैं जबकि कुछ में विशिष्ट बदलाव होते हैं.
इस शोध का उद्देश्य केवल उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को समझना नहीं, बल्कि इस आधार पर ऐसी दवाएं विकसित करना है जो इस प्रक्रिया को धीमा कर सकें या उससे जुड़ी बीमारियों को रोका जा सके. शोधकर्ताओं ने अब तक 50 की उम्र के बाद के प्रोटीन परिवर्तनों का विस्तृत डाटा तैयार कर लिया है, जिससे शरीर के अंगों में उम्र के साथ होने वाले असंतुलन को समझा जा सके.
यह रिसर्च उम्र बढ़ने से जुड़ी जटिलताओं को समझने और उन्हें नियंत्रित करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है. भविष्य में इसके जरिए बुढ़ापे को न केवल सहज बनाया जा सकेगा, बल्कि उससे जुड़ी बीमारियों को समय रहते रोका भी जा सकेगा.
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Hair Fall Causes: आयुर्वेद में बालों की देखभाल को बहुत ज़रूरी माना जाता है. पुराने ज़माने से ही कहा जाता रहा है कि बाल न सिर्फ़ खूबसूरती बढ़ाते हैं बल्कि हमारी सेहत और लाइफस्टाइल का सेंटर भी हैं. आयुर्वेद के अनुसार, हर इंसान के शरीर का नेचर अलग होता है, और बालों को पोषण देने का तरीका वात, पित्त और कफ के हिसाब से अलग-अलग होता है.
सही तेल, सही मात्रा, सही टेम्परेचर और सही समय का इस्तेमाल करना, ये सभी ज़रूरी बातें हैं. आजकल लोग बालों में तेल तो लगाते हैं, लेकिन अक्सर छोटी-छोटी गलतियों की वजह से फ़ायदा नहीं मिल पाता और बाल कमज़ोर या रूखे दिखने लगते हैं. सबसे बड़ी गलती जो लोग करते हैं, वह है बहुत ज़्यादा तेल लगाना. लोगों को लगता है कि ज़्यादा तेल लगाने से बाल शाइन करेंगे और मज़बूत बनेंगे, लेकिन असल में ऐसा नहीं है. बालों में ज़्यादा तेल लगने से वे चिपचिपे हो जाते हैं और उन्हें धोना मुश्किल हो जाता है. आयुर्वेद में उतना ही तेल लगाने की सलाह दी जाती है, जितनी बालों और स्कैल्प को ज़रूरत हो.
हल्का तेल, जो उंगलियों से आसानी से स्कैल्प तक पहुंच जाए, काफ़ी है. यह बालों की जड़ों को पोषण देता है और उन्हें मज़बूत बनाता है. एक और आम गलती है बहुत ज़्यादा गर्म तेल का इस्तेमाल करना. बहुत ज़्यादा गर्म तेल बालों और स्कैल्प दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है. यह बालों की नमी छीन लेता है और उन्हें टूटने का कारण बनता है. इसलिए, तेल थोड़ा गर्म होना चाहिए ताकि यह बालों और स्कैल्प को नुकसान पहुंचाए बिना बालों की जड़ों को पोषण दे सके. हल्का गर्म तेल लगाने से न सिर्फ़ बाल मज़बूत होते हैं बल्कि उनकी चमक भी बढ़ती है.
रात भर तेल लगाकर सोना भी सही तरीका नहीं है. पहले लोग रात भर तेल लगाकर सोते थे, लेकिन आजकल हवा में धूल और गंदगी ज़्यादा है. रात भर तेल लगा रहने से स्कैल्प पर धूल जम सकती है और खुजली या इंफेक्शन हो सकता है. इसलिए, तेल लगाने के बाद, लगभग आधे घंटे तक बालों की हल्के हाथों से मालिश करना और फिर धो लेना सबसे अच्छा है. इससे बालों को ज़रूरी पोषण मिलता है और स्कैल्प साफ़ रहता है. लोग अक्सर रोज़ तेल लगाते हैं, लेकिन यह तरीका हेल्दी नहीं है. रोज़ तेल लगाने से बाल ज़्यादा चिपचिपे हो जाते हैं और स्कैल्प की खुद तेल बनाने की क्षमता कम हो जाती है.
आयुर्वेद के अनुसार, हफ़्ते में दो या तीन बार तेल लगाना काफ़ी है. इससे बाल मज़बूत होते हैं, उनकी चमक बनी रहती है और जड़ों तक सही पोषण पहुंचता है. सही तेल चुनना भी बहुत ज़रूरी है. हर किसी के बालों की ज़रूरतें अलग-अलग होती हैं. अगर बाल रूखे, कमज़ोर हैं, या बाल झड़ने की समस्या है, तो नारियल, बादाम, या आंवला का तेल सबसे अच्छा है. ये नमी बनाए रखते हैं और जड़ों को मज़बूत करते हैं. अगर बाल जल्दी ऑयली हो जाते हैं या बहुत ज़्यादा चिपचिपे लगते हैं, तो जैतून या अरंडी का तेल इस्तेमाल करना चाहिए. ये बालों को मज़बूत करते हैं और स्कैल्प को बैलेंस करते हैं. गलत तेल चुनने से बाल खराब भी हो सकते हैं और उनकी चमक भी कम हो सकती है.