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कम उम्र में हड्डियों की कमजोरी; इन फूड्स को डाइट में शामिल करें, मिलेगी मजबूती

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Bone Health Foods: हड्डियां हमारे शरीर का ढांचा हैं. वही जो पूरे शरीर को सहारा देती हैं. लेकिन आजकल हड्डियों से जुड़ी परेशानियां सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रहीं. अब युवा उम्र में भी हड्डियों की कमजोरी और दर्द की शिकायत आम हो गई है. इसका सबसे बड़ा कारण है हमारी असंतुलित दिनचर्या और गलत आदतें.

कैल्शियम और विटामिन D की कमी के साथ-साथ व्यायाम की कमी, धूम्रपान, शराब, ज़्यादा सोडा पीना और नमक का अधिक सेवन ये सभी चीज़ें हड्डियों को धीरे-धीरे कमजोर करती हैं. समय रहते ध्यान न दिया जाए तो यही कमजोरी आगे चलकर ऑस्टियोपोरोसिस जैसी गंभीर बीमारी में बदल सकती है, जिसमें हड्डियां बहुत जल्दी टूटने लगती हैं. लेकिन अच्छी बात यह है कि कुछ हेल्दी चीज़ें रोज़मर्रा की डाइट में शामिल करके हड्डियों को मजबूत बनाया जा सकता है.

1. कैल्शियम के सबसे अच्छे स्रोत
दूध, दही और पनीर हड्डियों के लिए बेहद ज़रूरी हैं. इनमें भरपूर कैल्शियम और प्रोटीन होता है जो हड्डियों की ग्रोथ और मजबूती बढ़ाता है. दूध रोज पीने से शरीर को पर्याप्त कैल्शियम और विटामिन D मिलता है.

दही न सिर्फ कैल्शियम का अच्छा स्रोत है, बल्कि इसमें मौजूद प्रोबायोटिक्स पाचन को भी दुरुस्त रखते हैं. पनीर में मौजूद प्रोटीन मांसपेशियों और हड्डियों दोनों को सपोर्ट करता है.

2. हरी पत्तेदार सब्जियां
हरी सब्जियों में कैल्शियम, आयरन और विटामिन K की भरपूर मात्रा होती है, जो हड्डियों की मजबूती के लिए बहुत ज़रूरी है. पालक, केल, और कोलार्ड ग्रीन्स जैसी सब्जियां कैल्शियम के साथ-साथ विटामिन K का भी अच्छा स्रोत हैं. ब्रोकली खाने से न सिर्फ कैल्शियम मिलता है बल्कि इसमें मौजूद विटामिन C हड्डियों के ऊतकों को स्वस्थ रखता है.

3. बीज और नट्स
नट्स और सीड्स में हड्डियों को मजबूत करने वाले कई पोषक तत्व होते हैं. बादाम में हेल्दी फैट्स और कैल्शियम दोनों होते हैं, जो हड्डियों को मज़बूती देते हैं. खसखस और तिल कैल्शियम के समृद्ध स्रोत हैं. चिया सीड्स ओमेगा-3 फैटी एसिड और कैल्शियम से भरपूर होते हैं, जो हड्डियों की हेल्थ के साथ-साथ जोड़ों को भी लचीला बनाते हैं.


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Written by: Taushif

29 Oct 2025  ·  Published: 11:18 IST

सिर्फ 5 मिनट का भुजंगासन, पेट की चर्बी गायब और पाचन बेहतर!

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Bhujangasana Benefits: व्यस्तता, कामकाजी, ट्रैफिक और घरेलू जिम्मेदारियों में फंसे लोगों के शरीर में तनाव, थकान, पेट की जिद्दी चर्बी और कब्ज जैसी समस्याएं घर कर जाती हैं, लेकिन ऐसे में योग करना एक प्रभावी उपाय हो सकता है. इन्ही में से एक है भुजंगासन.

आयुष मंत्रालय के मुताबिक, यह आसन तनाव घटाने, पेट की जिद्दी चर्बी पिघलाने और कब्ज जैसी पाचन परेशानियों को जड़ से खत्म करने में मददगार हो सकता है. पीठ दर्द, साइटिका और श्वसन तंत्र की दिक्कतों से छुटकारा दिलाने वाला यह योग हर उम्र के लिए वरदान है.

'भुजंगासन' को 'कोबरा पोज' या फिर 'सर्पासन' के नाम से भी जाना जाता है. इसे सूर्य नमस्कार के 12 आसनों में से आठवां स्थान प्राप्त है. आयुष मंत्रालय ने भी 'भुजंगासन' पर विशेष जानकारी दी, जिसमें बताया गया है कि 'भुजंग' शब्द का अर्थ होता है 'सर्प' या 'नाग'. इस आसन में शरीर की आकृति सर्प के फन की तरह ऊपर उठती है, इसलिए इसे भुजंगासन कहा जाता है. यह आसन तनाव को कम करने, चर्बी घटाने और कब्ज दूर करने में सहायक है. साथ ही, यह पीठ दर्द व श्वसन नली से संबंधित समस्याओं को दूर करता है.

'भुजंगासन' को करने के लिए सबसे पहले योगा मैट पर पेट के बल लेट जाएं और अपनी दोनों हथेलियों को जांघों के पास जमीन की तरफ करके रखें और इस बात का ध्यान रखें कि आपके दोनों टखने एक-दूसरे को छूते रहें. इसके बाद दोनों हाथों को कंधे के बराबर लेकर आएं और साथ ही दोनों हथेलियों को जमीन की तरफ रखें. अब शरीर का वजन हथेलियों पर डालें और धीरे-धीरे सांस भीतर की ओर खींचे और सिर को उठाते हुए पीठ की तरफ खींचें. 

ध्यान दें कि इस वक्त तक आपकी कुहनी मुड़ी हुई है और फिर सिर को पीछे की तरफ ले जाएं और साथ ही अपनी छाती को आगे की तरफ निकालें. फिर पुन: वाली अवस्था में आ जाएं और अपनी क्षमता के अनुसार इस प्रक्रिया को दोहराएं. पीठ दर्द, हाल की सर्जरी, रीढ़ की गंभीर समस्या या मासिक धर्म के दौरान यह आसन न करें. डॉक्टर से सलाह लें। योग अपनाकर हम स्वस्थ और खुशहाल जीवन जी सकते हैं.


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Written by: Taushif

01 Nov 2025  ·  Published: 09:57 IST

डायबिटीज से लेकर पाचन तक, हरे धनिये में छिपा है इन बड़ी बीमारियों का इलाज

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Health benefits of Coriander leaves: दाल और सब्जी धनिया के बिना अधूरी है, लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि हरा धनिया सिर्फ गार्निश नहीं है, यह हमारी थाली में एक नेचुरल दवा है. सर्दी हो या गर्मी, हर मौसम में धनिया खाने के अपने अलग फायदे हैं. आयुर्वेद इसे त्रिदोष बैलेंसर, पाचन बढ़ाने वाला और खून साफ ​​करने वाला मानता है. मॉडर्न साइंस इसे माइक्रोन्यूट्रिएंट्स और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर एक सुपर हर्ब कहता है.

धनिया का एक छोटा सा पत्ता विटामिन A, C, K, पोटैशियम, कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम और कई तरह के एंजाइम्स से भरा होता है. इसके अलावा, एक मुट्ठी धनिया एक सेब जितने एंटीऑक्सीडेंट्स देता है. यह शरीर को साफ करने और सेल्स को बचाने में बहुत असरदार है. इसलिए, भारतीय किचन में इसे थाली के लिए एक रिफ्रेशिंग टॉनिक माना जाता है.

अब सवाल यह है कि इसे हर दाल और सब्जी में क्यों डाला जाता है? इसका मुख्य कारण थर्मोरेगुलेशन है. पकी हुई सब्जियां शरीर में थोड़ी गर्मी पैदा करती हैं, जबकि धनिया ठंडा होता है. ये दोनों मिलकर डाइजेशन को आसान बनाते हैं, जिससे खाना भारी नहीं लगता.

इसके अलावा, धनिया शरीर से टॉक्सिन, हेवी मेटल और नुकसानदायक चीज़ों को निकालने में मदद करता है. इसे नैचुरल कीलेटिंग एजेंट माना जाता है. यह शरीर को साफ़ करने का एक आसान तरीका है. धनिए की खास खुशबू सिर्फ़ खुशबू नहीं है. इसे सूंघने से दिमाग में डाइजेस्टिव एंजाइम तुरंत एक्टिवेट हो जाते हैं, जिससे भूख बढ़ती है और डाइजेशन तेज़ होता है.

धनिए को लिवर का डिटॉक्स स्विच भी कहा जाता है. इसके एंजाइम लिवर की सफ़ाई की प्रक्रिया को तेज़ करते हैं. धनिए का जूस सिर्फ़ 15 मिनट में सीने की जलन या गैस से राहत देता है. यह उन लोगों के लिए खास तौर पर फ़ायदेमंद है जो ज़्यादा सोडियम लेते हैं या हाई ब्लड प्रेशर में हैं क्योंकि यह ब्लड सोडियम लेवल को कम करने में मदद करता है. तीन दोषों (वात, पित्त और कफ) को बैलेंस करने वाली खाने की चीज़ें बहुत कम मिलती हैं, लेकिन धनिया उनमें से एक है.

धनिए का पानी यूरिक एसिड और ज़्यादा नमक को बाहर निकालकर किडनी को काम करने में मदद करता है. इसलिए, बहुत से लोग इसे सुबह खाली पेट पीते हैं. लेकिन अगर सही तरीके से लिया जाए तो इसके फायदे दोगुने हो जाते हैं, जैसे कि धनिया के बीज पकाने के बाद डालें, न कि आंच बंद करने के बाद ताकि विटामिन C और उसके एसेंशियल ऑयल्स खराब न हों. नींबू के साथ यह और भी असरदार होता है, क्योंकि नींबू आयरन एब्जॉर्प्शन को बढ़ाता है.
 


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Written by: Taushif

03 Dec 2025  ·  Published: 01:27 IST

‘साइलेंट किलर’ फूड्स से रहें सावधान, बढ़ा सकते हैं हार्ट अटैक का खतरा

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पिछले कुछ सालों में भारतीय युवाओं में हार्ट अटैक, कार्डियक अरेस्ट और दिल की बीमारियों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. डॉक्टरों का कहना है कि इसकी मुख्य वजह लोगों की लाइफस्टाइल और गलत खानपान की आदतें हैं. आजकल युवा न तो सही समय पर खाते हैं और न ही शरीर को एक्टिव रखते हैं. इसके अलावा तनाव, धूम्रपान और शराब का अत्यधिक सेवन भी दिल को कमजोर बना रहा है.

1. नमक पर लगाम लगाएं
ज्यादा नमक खाने से शरीर में पानी जमा होने लगता है जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है. लगातार हाई बीपी रहने पर दिल पर दबाव बढ़ता है और धीरे-धीरे वह कमजोर हो जाता है.

2. प्रॉसेस्ड फूड से दूरी रखें
बर्गर, पिज़्ज़ा, चिप्स या पैकेट वाले फूड्स का ज्यादा सेवन धमनियों में चर्बी जमाता है. इससे ब्लड फ्लो रुकने लगता है और हार्ट अटैक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है.

3. ज्यादा चीनी से बचें
मीठा ज़रूरत से ज़्यादा खाने पर शरीर में इंसुलिन का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे मोटापा और डायबिटीज का खतरा बढ़ता है. यही आगे चलकर हृदय रोग की वजह बनता है.

4. आलस भरी दिनचर्या से बचें
लंबे समय तक बैठे रहना, एक्सरसाइज न करना और देर तक सोना दिल की मांसपेशियों को कमजोर करता है. रोजाना 30 मिनट की वॉक, योग या हल्की कसरत से हार्ट अटैक का खतरा काफी कम हो जाता है.

5. धूम्रपान और शराब से दूरी बनाएं
सिगरेट में मौजूद निकोटिन और शराब, दोनों ही दिल की नसों को नुकसान पहुंचाते हैं. ये खून में ऑक्सीजन की मात्रा घटाते हैं और ब्लड प्रेशर बढ़ाते हैं, जिससे दिल की गति रुकने तक की स्थिति बन सकती है.


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Written by: Taushif

13 Oct 2025  ·  Published: 10:23 IST