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Bridal Glow: हर लड़की चाहती है कि अपनी शादी के दिन वह सबसे खूबसूरत दिखे. इसके लिए कई लोग पार्लर ट्रीटमेंट या महंगे स्किनकेयर प्रोडक्ट्स का सहारा लेते हैं, लेकिन असली निखार तो दादी-नानी के पुराने नुस्खों में छिपा होता है. उन्हीं में से एक है. उबटन, जो सदियों से भारतीय परंपरा का हिस्सा रहा है.
उबटन एक नैचुरल स्क्रब और फेस मास्क होता है, जो त्वचा को गहराई से साफ करने के साथ-साथ उसे मुलायम और ग्लोइंग बनाता है. इसमें हल्दी, बेसन, चंदन, दूध, बादाम, ओटमील और नीम जैसी चीजें मिलाई जाती हैं, जो बिना किसी साइड इफेक्ट के चेहरे को नेचुरल ब्राइटनेस देती हैं. आइए जानते हैं ऐसे 5 असरदार देसी उबटन, जो आपकी स्किन को शादी से पहले ब्राइडल ग्लो दे सकते हैं.
1. हल्दी और चंदन का उबटन
हल्दी में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीसेप्टिक गुण पिगमेंटेशन और दाग-धब्बों को कम करते हैं. चंदन पाउडर के साथ मिलाने पर यह त्वचा के पोर्स टाइट करता है और झुर्रियों को कम करने में मदद करता है. यह उबटन स्किन टोन को निखारकर चेहरे पर नेचुरल ग्लो लाता है.
2. मूंग दाल और बेसन का उबटन
मूंग दाल और बेसन दोनों ही स्किन को भीतर से पोषण देते हैं. इनमें मौजूद विटामिन A, B और C त्वचा की डलनेस कम करते हैं और रंगत निखारते हैं. इसे हफ्ते में 3 बार लगाने से ब्राइडल ग्लो साफ नजर आता है.
3. बादाम और दूध का उबटन
बादाम त्वचा को सॉफ्ट बनाते हैं और मुंहासों को कम करते हैं. कुछ बादाम को दूध में भिगोकर पीस लें और चेहरे पर लगाएं. यह उबटन स्किन को एक्सफोलिएट करता है, टैनिंग हटाता है और चेहरा फ्रेश दिखाता है.
4. ओटमील और बेसन का उबटन
ओटमील सेंसिटिव स्किन के लिए फायदेमंद है. यह स्किन को हाइड्रेट और डीप क्लीन करता है. बेसन के साथ मिलाने पर यह ऑयल कंट्रोल करता है और चेहरा दमकता हुआ बनाता है.
5. नीम और ऐलोवेरा का उबटन
नीम में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं जो पिंपल्स और इंफेक्शन से बचाते हैं. इसमें ऐलोवेरा मिलाने से त्वचा साफ, हेल्दी और पिंपल-फ्री रहती है.
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Navratri Vrat Breaking Tips: नवरात्रि के नौ दिनों में भक्त मां दुर्गा की पूजा-अर्चना के साथ उपवास भी रखते हैं. इस दौरान लोग हल्का, सात्विक और फलाहार वाला भोजन करते हैं. चूंकि कई दिनों तक शरीर हल्का खाना खाता है, इसलिए मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है. ऐसे में व्रत खत्म होने के तुरंत बाद भारी, तैलीय या मसालेदार खाना खाने से डाइजेशन पर असर पड़ सकता है. इससे गैस, एसिडिटी, पेट फूलना या कमजोरी जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. इसलिए जरूरी है कि व्रत को सही तरीके से तोड़ा जाए और धीरे-धीरे सामान्य डाइट पर लौटा जाए.
हल्का और सिंपल खाना खाएं
उपवास के तुरंत बाद तली-भुनी चीजों से परहेज करें. शुरुआत फल, छाछ, नारियल पानी या खिचड़ी जैसे हल्के भोजन से करें. इससे पेट पर दबाव नहीं पड़ता और शरीर आराम से सामान्य खानपान की ओर लौट पाता है.
पानी और लिक्विड का सेवन करें
व्रत के दौरान अक्सर शरीर में पानी की कमी हो जाती है. इसलिए पहले पानी या लिक्विड जरूर लें. नींबू पानी, हर्बल टी या वेजिटेबल सूप लेना बेहतर रहेगा. ये शरीर को हाइड्रेट करते हैं और डाइजेशन को खाने के लिए तैयार करते हैं.
धीरे-धीरे सामान्य खाना शुरू करें
पहले उबला या स्टीम्ड खाना खाएं. अचानक पूरी, पराठा या भारी सब्जियां खाने से बचें. 1–2 दिन में धीरे-धीरे सामान्य डाइट पर लौटें.
स्पाइसी, ऑयली और मीठे से दूरी बनाएं
उपवास के बाद मन लजीज खाने की ओर जाता है, लेकिन तुरंत मसालेदार, तैलीय या ज्यादा मीठा खाना पेट को नुकसान पहुंचा सकता है. पकौड़ी, समोसा, पूरी या बहुत ज्यादा मिठाइयां तुरंत खाने से बचें.
छोटे-छोटे हिस्सों में खाएं
एक बार में ज्यादा खाने के बजाय दिनभर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में खाना सही रहता है. इससे डाइजेशन पर दबाव नहीं पड़ता और शरीर धीरे-धीरे नॉर्मल रूटीन में ढल जाता है.
प्रोबायोटिक्स और फाइबर लें
पेट की सेहत बनाए रखने के लिए दही, छाछ, सलाद, खीरा और गाजर जैसी चीजें खाएं. ये डाइजेशन को बेहतर बनाते हैं और शरीर को एनर्जी देते हैं.
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हम बचपन से सुनते आए हैं कि लोहे के बर्तन में खाना पकाने से शरीर को आयरन मिलता है. आजकल स्टील, एल्युमिनियम या नॉन-स्टिक के बर्तन आम हो गए हैं, लेकिन पहले घरों में ज्यादातर लोहे के कढ़ाहे, तवा और पैन का इस्तेमाल होता था. सवाल यह है कि क्या वाकई लोहे के बर्तन में खाना बनाने से खाने में आयरन की मात्रा बढ़ जाती है?
लोहे के बर्तन से कैसे मिलता है आयरन
अमेरिका की ‘कोलंबिया हेल्थ’ वेबसाइट के मुताबिक, लोहे के बर्तनों में खाना पकाना शरीर में आयरन की कमी को पूरा करने का एक आसान और प्राकृतिक तरीका है. जब खाना, खासकर खट्टे या अम्लीय पदार्थ, लोहे के संपर्क में पकते हैं तो बर्तन से थोड़ी मात्रा में आयरन खाने में मिल जाता है. इस तरह पका हुआ खाना खाने पर शरीर उस आयरन को सोख लेता है.
खाने में कितनी मात्रा में आयरन मिलेगा, यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि आप क्या और कैसे पका रहे हैं. लंबे समय तक धीमी आंच पर खट्टे पदार्थ पकाने से सबसे ज्यादा आयरन मिलता है. उदाहरण के लिए – टमाटर, इमली या नींबू वाला स्टू अगर लोहे के पैन में पकाया जाए तो उसमें तेजी से तले अंडे की तुलना में ज्यादा आयरन होगा. शोधों में पाया गया है कि लोहे के बर्तन में नियमित रूप से खाना बनाने से महिलाओं की रोजाना की आयरन जरूरत का बड़ा हिस्सा पूरा हो सकता है.
आयरन क्या है और क्यों जरूरी है
आयरन एक मिनरल है, जिसकी जरूरत शरीर के विकास और स्वस्थ रहने के लिए होती है. शरीर आयरन का उपयोग हीमोग्लोबिन और मायोग्लोबिन बनाने में करता है. हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं में मौजूद प्रोटीन है, जो पूरे शरीर में ऑक्सिजन पहुंचाता है, जबकि मायोग्लोबिन मांसपेशियों तक ऑक्सिजन पहुंचाने में मदद करता है. पर्याप्त आयरन होने से खून की कमी (एनीमिया) का खतरा कम होता है, ऊर्जा स्तर सही रहता है और इम्यून सिस्टम मजबूत बनता है.
कितनी मात्रा में आयरन लेना चाहिए
भारत सहित कई देशों के पोषण मानकों के अनुसार, 19–50 वर्ष की उम्र की महिलाओं को प्रतिदिन लगभग 18 मिलीग्राम और पुरुषों को 8 मिलीग्राम आयरन की जरूरत होती है. गर्भवती महिलाओं के लिए यह मात्रा और बढ़ जाती है. हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, गुड़, मांस, मछली और अंडा भी आयरन के अच्छे स्रोत हैं.
ज्यादा आयरन के नुकसान
जैसे किसी भी पोषक तत्व की अधिकता हानिकारक होती है, वैसे ही आयरन की ज्यादा मात्रा भी नुकसान कर सकती है. लगातार ज्यादा आयरन लेने से पेट की परत में सूजन, अल्सर और पाचन संबंधी दिक्कतें हो सकती हैं. इसके अलावा, शरीर को जिंक जैसे दूसरे जरूरी मिनरल्स को सोखने में भी मुश्किल हो सकती है, जो विकास, वृद्धि और इम्यूनिटी के लिए जरूरी हैं. इसलिए सप्लीमेंट्स या दवाओं से आयरन लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.
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Winter Health Tips: सर्दियां शुरू होते ही पाचन, श्वसन और जोड़ों पर असर, हींग बनेगी सर्द मौसम की नैचुरल दवा जैसे ही ठंड का मौसम शुरू होता है, शरीर की पाचन-अग्नि कमजोर होने, श्वसन-तंत्र पर असर पड़ने और जोड़ों में दर्द बढ़ने जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं. इस दौरान गैस, पेट फूलना, खांसी, बलगम, सिरदर्द और ठंड लगना जैसे लक्षण कई लोगों में दिखाई देते हैं. ऐसे में आयुर्वेद के अनुसार कुछ सरल उपाय इन दिक्कतों को प्राकृतिक रूप से कम करने में मदद कर सकते हैं.
इन्हीं उपायों में एक प्रमुख नाम है, हींग. रसोई में रोज़ इस्तेमाल होने वाली यह तीखी सुगंध वाली रेजिन सिर्फ स्वाद बढ़ाने वाली मसाला नहीं, बल्कि आयुर्वेद में इसे सर्दियों के लिए विशेष औषधि माना गया है. हींग में मौजूद एंटी-गैस, एंटी-इंफ्लेमेटरी और नेचुरल एंटीऑक्सीडेंट तत्व शरीर को मौसमी बदलावों से लड़ने में सक्षम बनाते हैं.
आयुर्वेद के अनुसार हींग के गुण इसके प्राकृतिक यौगिकों में छिपे हैं, जिनमें फेरूलिक एसिड, सल्फर कंपाउंड, कुमरिन्स और वाष्पशील तेल प्रमुख हैं. ये तत्व पाचन को बेहतर बनाने, बलगम कम करने और खांसी में राहत देने का काम करते हैं. इसी कारण इसे सर्दियों की "नेचुरल हीट बैटरी" भी कहा जाता है, क्योंकि यह ठंडी हो चुकी पाचन-अग्नि को फिर से सक्रिय करने में मदद करती है.
सर्दियों में तली-भुनी और मसालेदार चीजों का सेवन बढ़ जाने पर पेट पर बोझ पड़ना स्वाभाविक है. ऐसे में हींग का नियमित और सही तरीके से उपयोग राहत देता है. गुनगुने पानी में चुटकीभर हींग मिलाकर पीने से गैस और पेट फूलना कम होता है. वहीं हींग और अजवाइन का चूर्ण बदहजमी और पेट दर्द में असरदार माना जाता है.
ठंड लगने पर पेट में होने वाली ऐंठन या क्रैम्प में हींग का लेप लगाने से आराम मिल सकता है. वहीं घी या गर्म पानी के साथ इसका सेवन कफ जमने, गले की जकड़न और सांस की तकलीफ में मददगार होता है. हींग की भाप लेना, दही या काले नमक के साथ लेना और भोजन के बाद हींग-नींबू पानी पीना सर्दियों में शरीर को हल्का और सक्रिय बनाए रखने में कारगर माना जाता है.