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योग हमारे शरीर को स्वस्थ रखने के साथ-साथ मन को शांत और सक्रिय बनाने में भी मदद करता है. इन्हीं में से एक बेहद फायदेमंद आसन है चक्रासन. इसे व्हील पोज़ भी कहा जाता है, क्योंकि इस आसन में शरीर पहिए जैसा आकार बना लेता है. चक्रासन रीढ़, कमर, पेट, आंखों और पूरे शरीर के लिए लाभकारी माना जाता है.
चक्रासन कैसे करें?
चक्रासन के फायदे
आयुष मंत्रालय और योग एक्सपर्ट के मुताबिक, नियमित चक्रासन करने से शरीर को कई लाभ मिलते हैं. रीढ़ और कमर मजबूत होती है, शरीर में लचीलापन बढ़ता है, पेट की मांसपेशियां टोन होती हैं, पाचन सुधरता है, कब्ज की समस्या में राहत मिलती है, हाथ, पैर और कंधे मजबूत होते हैं, मुद्रा (पोश्चर) में सुधार होता है, तनाव, चिंता और मानसिक थकान कम होती है और ऊर्जा और सक्रियता बढ़ती है. चक्रासन पूरे शरीर पर काम करता है, इसलिए इसे रोज़ाना करने से शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से फायदा मिलता है.
किन लोगों को चक्रासन नहीं करना चाहिए?
चक्रासन बहुत लाभदायक है, लेकिन कुछ लोगों को इससे बचना चाहिए.
इसके अलावा, चक्रासन खाली पेट करना चाहिए और शुरुआत में योग प्रशिक्षक की निगरानी में करना बेहतर होता है. चक्रासन सही तरीके से और नियमित रूप से करने पर न केवल शरीर मजबूत होता है, बल्कि मन भी शांत और संतुलित रहता है. यह आसन वास्तव में पूरे स्वास्थ्य को बेहतर बनाने वाला एक संपूर्ण योग अभ्यास है.
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राजस्थान और मध्यप्रदेश से हाल ही में आई खबरों ने पूरे देश को झकझोर दिया है. दोनों राज्यों में कफ सिरप पीने के बाद कई बच्चों की मौत के मामले सामने आए हैं. इस घटना के बाद से लोगों में डर और गुस्सा दोनों है. जिस कंपनी का ये सिरप था, उस पर जांच चल रही है कि आखिर इन मौतों की असली वजह क्या थी.
कफ सिरप हर घर में आम दवा मानी जाती है. लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि हर खांसी में सिरप पीना जरूरी नहीं होता, बल्कि गलत तरीके से लिया गया सिरप नुकसान भी पहुंचा सकता है. आइए जानते हैं कि खांसी के कितने प्रकार होते हैं और कब कफ सिरप से परहेज करना चाहिए.
खांसी क्यों होती है?
खांसी हमारे शरीर की एक प्राकृतिक रक्षा प्रणाली (Natural Defense System) है. जब गले या फेफड़ों में धूल, गंदगी या कोई बाहरी चीज जाती है, तो शरीर उसे बाहर निकालने के लिए खांसी करता है. यानी खांसी हमेशा बुरी नहीं होती यह शरीर को साफ रखने का तरीका भी है.
खांसी के प्रकार
कफ सिरप हर बार क्यों नहीं पीना चाहिए?
गलत सिरप नुकसानदायक होता है. हर सिरप अलग तरह की खांसी के लिए बनाया जाता है. गलत सिरप असर नहीं करता, बल्कि साइड इफेक्ट दे सकता है.
गीली खांसी में नुकसान: जब शरीर बलगम निकालने की कोशिश करता है, तब सिरप खांसी को दबा देता है, जिससे बलगम अंदर रह जाता है.
बच्चों के लिए खतरा: कई सिरप में अल्कोहल या स्लीपिंग एजेंट होते हैं, जो बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं.
बार-बार सिरप पीने से शरीर की नैचुरल सफाई प्रक्रिया कमजोर हो जाती है.
खांसी में क्या करें?
गुनगुना पानी या तुलसी-अदरक वाला काढ़ा पिएं.
नमक वाले गुनगुने पानी से गरारे करें.
भाप लें और हवा में नमी बनाए रखें.
सिर थोड़ा ऊंचा रखकर सोएं ताकि सांस लेने में दिक्कत न हो.
डॉक्टर के पास कब जाएं?
अगर खांसते समय खून आ रहा है, सांस लेने में तकलीफ हो रही है, खांसी तीन हफ्ते से ज्यादा चल रही है या सीने में दर्द है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.
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Yoga for Flexibility: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में सुबह उठते ही शरीर में अकड़न, थकान और कमजोरी महसूस होना आम बात है. लंबे समय तक मोबाइल या कंप्यूटर के सामने बैठना, नींद पूरी न होना और अनियमित खान-पान जैसी आदतें हमारी सेहत पर बुरा असर डालती हैं. ऐसे में अगर आप दिन की शुरुआत कुछ आसान योगासन से करें, तो शरीर और मन दोनों को राहत मिल सकती है.
आयुष मंत्रालय के अनुसार, योग सिर्फ एक व्यायाम नहीं बल्कि जीवनशैली है, जो शरीर, मन और आत्मा को संतुलित रखती है. रोजाना योग करने से मांसपेशियां मजबूत होती हैं, पाचन और हृदय क्रिया बेहतर होती है और मानसिक तनाव भी कम होता है. यहां जानिए तीन ऐसे आसान योगासन जो रोजाना करने से शरीर में लचीलापन और ताकत दोनों बढ़ती है.
पर्वतासन (Mountain Pose)
इस आसन में शरीर को सीधा और स्थिर रखा जाता है. जब आप हाथों को ऊपर उठाकर पूरे शरीर को खींचते हैं, तो कंधे और बाजुओं की मांसपेशियां स्ट्रेच होती हैं. इससे रक्त संचार बेहतर होता है और मांसपेशियों की जकड़न दूर होती है. पर्वतासन से शरीर ऊर्जावान महसूस करता है और पूरे दिन थकान नहीं होती.
शलभासन (Locust Pose)
इस आसन में पेट के बल लेटकर पैरों को ऊपर उठाया जाता है. इससे रीढ़, कमर और पेट की मांसपेशियां मजबूत होती हैं. लंबे समय तक बैठने या ऑफिस के काम के कारण जो पीठ दर्द या अकड़न होती है, उसमें यह आसन बहुत लाभकारी है. साथ ही यह रक्त प्रवाह और दिल की कार्यक्षमता को बेहतर बनाता है.
Boat Pose
नौकासन में शरीर को नाव के आकार में बनाया जाता है. इसमें आप हाथ और पैर दोनों को एक साथ ऊपर उठाते हैं. यह आसन पेट की मांसपेशियों को टोन करता है, पाचन तंत्र को सक्रिय करता है और शरीर में ऊर्जा भरता है. नियमित अभ्यास से शरीर का संतुलन बेहतर होता है और चलने-फिरने में हल्कापन महसूस होता है.
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Bitter Gourd Health Benefits: मानसून का मौसम, अपनी ठंडी हवाओं और बारिश के साथ, कभी-कभी बीमारियों का कारण भी बन जाता है। इस दौरान सर्दी-ज़ुकाम, पाचन संबंधी समस्याएं और रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी आना आम बात है। कई लोग दवाइयों का सहारा लेते हैं, लेकिन एक प्राकृतिक उपाय आपकी रसोई में ही मौजूद है, करेला।
करेला स्वाद में भले ही कड़वा हो, लेकिन इसके इतने स्वास्थ्य लाभ हैं कि इसे "दूत की औषधि" कहा जा सकता है। खासकर मानसून के मौसम में, करेले को आहार में शामिल करना बेहद फायदेमंद होता है। आइए जानते हैं कैसे:
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है
मानसून में वायरल संक्रमण और सर्दी-ज़ुकाम होना आम बात है। करेले में मौजूद विटामिन सी, फ्लेवोनोइड्स और पॉलीफेनॉल जैसे पोषक तत्व शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मज़बूत करते हैं। ये शरीर को बीमारियों से लड़ने की ताकत देते हैं और संक्रमण से बचाते हैं।
रक्त शर्करा को नियंत्रित करता है
करेले में ऐसे यौगिक होते हैं जो शरीर में इंसुलिन की तरह काम करते हैं। ये मधुमेह या प्री-डायबिटीज़ के रोगियों के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। यह प्राकृतिक रूप से रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है।
पाचन और डिटॉक्स के लिए फायदेमंद
करेला फाइबर से भरपूर होता है, जो पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है और कब्ज से बचाता है। इसका कड़वा स्वाद पित्त रस को सक्रिय करता है, जो शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है।
स्किन को साफ़ और स्वस्थ रखता है
मानसून के दौरान मुंहासे और रैशेज़ होना आम बात है। करेला रक्त को साफ़ करता है और शरीर में सूजन को कम करता है। यह त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाए रखता है।
लिवर के लिए वरदान
भारी भोजन और खराब पाचन लिवर को प्रभावित करते हैं। करेला लिवर को साफ़ रखने और उसके कार्य को बेहतर बनाने में मदद करता है।
नोट- मानसून के दौरान अपने आहार में करेले को ज़रूर शामिल करें। यह न केवल बीमारियों से लड़ने में मदद करेगा, बल्कि आपको बिना किसी दुष्प्रभाव के स्वस्थ और तंदुरुस्त भी रखेगा।