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पीठ, हाथ, पैर और पेट की मांसपेशियों को मजबूत करता है चक्रासन, जानें फायदे

पीठ, हाथ, पैर और पेट की मांसपेशियों को मजबूत करता है चक्रासन, जानें फायदे

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योग हमारे शरीर को स्वस्थ रखने के साथ-साथ मन को शांत और सक्रिय बनाने में भी मदद करता है. इन्हीं में से एक बेहद फायदेमंद आसन है चक्रासन. इसे व्हील पोज़ भी कहा जाता है, क्योंकि इस आसन में शरीर पहिए जैसा आकार बना लेता है. चक्रासन रीढ़, कमर, पेट, आंखों और पूरे शरीर के लिए लाभकारी माना जाता है.

चक्रासन कैसे करें?

  1. सबसे पहले पीठ के बल जमीन पर लेट जाएं.
  2. अब पैरों को घुटनों से मोड़ें और एड़ियों को कूल्हों के पास ले आएं.
  3. अपने दोनों हाथों को सिर के पास रखें—हथेलियां जमीन पर टिकाएं और उंगलियां कंधों की ओर हों.
  4. अब गहरी सांस लेते हुए हाथ और पैरों पर जोर दें और शरीर को ऊपर उठाएं.
  5. आपका शरीर पहिए जैसा गोल दिखाई देगा.
  6. सिर को आराम से पीछे की ओर छोड़ दें.
  7. 10 से 20 सेकंड तक इसी स्थिति में रुकें और सामान्य सांस लेते रहें.
  8. फिर धीरे-धीरे शरीर को नीचे लेकर वापस लेट जाएं.

चक्रासन के फायदे
आयुष मंत्रालय और योग एक्सपर्ट के मुताबिक, नियमित चक्रासन करने से शरीर को कई लाभ मिलते हैं. रीढ़ और कमर मजबूत होती है, शरीर में लचीलापन बढ़ता है, पेट की मांसपेशियां टोन होती हैं, पाचन सुधरता है, कब्ज की समस्या में राहत मिलती है, हाथ, पैर और कंधे मजबूत होते हैं,  मुद्रा (पोश्चर) में सुधार होता है, तनाव, चिंता और मानसिक थकान कम होती है और ऊर्जा और सक्रियता बढ़ती है. चक्रासन पूरे शरीर पर काम करता है, इसलिए इसे रोज़ाना करने से शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से फायदा मिलता है.

किन लोगों को चक्रासन नहीं करना चाहिए?
चक्रासन बहुत लाभदायक है, लेकिन कुछ लोगों को इससे बचना चाहिए.

  • गर्भवती महिलाएं
  • हाई ब्लड प्रेशर के मरीज
  • हृदय रोग से पीड़ित लोग
  • कमर या रीढ़ की गंभीर समस्या वाले लोग
  • लगातार होने वाले क्रोनिक दर्द वाले लोग

इसके अलावा, चक्रासन खाली पेट करना चाहिए और शुरुआत में योग प्रशिक्षक की निगरानी में करना बेहतर होता है. चक्रासन सही तरीके से और नियमित रूप से करने पर न केवल शरीर मजबूत होता है, बल्कि मन भी शांत और संतुलित रहता है. यह आसन वास्तव में पूरे स्वास्थ्य को बेहतर बनाने वाला एक संपूर्ण योग अभ्यास है.
 


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Written by: Taushif

26 Nov 2025  ·  Published: 23:33 IST

एनीमिया क्या है? जानें इसके कारण, लक्षण और इलाज

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Iron Deficiency Symptoms: आयरन हमारे शरीर के लिए एक बेहद ज़रूरी पोषक तत्व है. यह न सिर्फ खून बनाने में मदद करता है, बल्कि पूरे शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने का काम भी करता है. अगर शरीर में आयरन की कमी हो जाए तो इसका सीधा असर हमारी ऊर्जा, रोग प्रतिरोधक क्षमता और अंगों के कामकाज पर पड़ता है. आयरन की कमी से सबसे ज्यादा एनीमिया नामक बीमारी होती है, जो आज के समय में बहुत आम हो चुकी है.

अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) की रिपोर्ट के मुताबिक, आयरन की कमी खासकर उन लोगों में देखी जाती है जो फोर्टिफाइड अनाज या आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थों का कम सेवन करते हैं. फोर्टिफाइड अनाज में मौजूद पोषक तत्व रोज़ाना की ज़रूरत का एक बड़ा हिस्सा पूरा कर सकते हैं. अगर इन्हें डाइट से हटा दिया जाए तो शरीर में धीरे-धीरे आयरन की कमी हो सकती है.

एनीमिया किन कारणों से होता है?


एनीमिया सिर्फ आयरन की कमी से नहीं होता, बल्कि इसके कई और भी कारण हैं:-

विटामिन की कमी – खासकर फोलेट और विटामिन बी12 की कमी

क्रॉनिक बीमारियां – लंबे समय तक चलने वाले रोग, जैसे किडनी या लिवर की समस्या

थैलेसीमिया और जेनेटिक रेड ब्लड सेल डिसऑर्डर – वंशानुगत बीमारियां

संक्रमण और ऑटो-इम्यून डिजीज़ – शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता से जुड़ी दिक्कतें

कुछ दवाओं का असर

गर्भावस्था – इस दौरान महिलाओं को अतिरिक्त आयरन की ज़रूरत होती है

इन सब कारणों में सबसे कॉमन कारण आयरन की कमी है, जो धीरे-धीरे गंभीर समस्या का रूप ले सकती है.

आयरन की कमी के प्रमुख लक्षण

1. लगातार थकान रहना
थकान आयरन की कमी का सबसे आम लक्षण है. आयरन हीमोग्लोबिन बनाने में मदद करता है, जो खून के जरिए शरीर के हर हिस्से तक ऑक्सीजन पहुंचाता है. अगर खून में आयरन की मात्रा कम हो जाती है तो शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और इंसान अक्सर थका हुआ महसूस करता है. हालांकि, थकान के पीछे अन्य कारण भी हो सकते हैं जैसे – डिप्रेशन, ज्यादा तनाव, नींद की दिक्कत या स्लीप एप्निया. लेकिन अगर बिना किसी बड़ी वजह के लगातार थकान महसूस हो रही है तो आयरन की जांच करवाना जरूरी है.

2. हर वक्त ठंड लगना
आयरन की कमी की वजह से कुछ लोगों को हमेशा ठंड लगती रहती है. खासकर हाथ-पांव ठंडे रहने लगते हैं. 2022 के एक अध्ययन में पाया गया कि शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में थायरॉइड हार्मोन की अहम भूमिका होती है. थायरॉइड का सही से काम करने के लिए आयरन बेहद जरूरी है. अगर शरीर में आयरन की कमी हो तो थायरॉइड प्रभावित हो सकता है और शरीर का तापमान असंतुलित हो सकता है.

3. सांस फूलना
अगर आप रोजाना हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करते हैं और फिर भी आपको सांस लेने में दिक्कत होती है, तो यह भी आयरन की कमी का लक्षण हो सकता है. 2023 की एक स्टडी में बताया गया कि आयरन शरीर में ऑक्सीजन को हर सेल तक पहुंचाने का काम करता है. जब शरीर में आयरन कम हो जाता है तो मांसपेशियों और अंगों तक ऑक्सीजन की सप्लाई प्रभावित होती है. इसके चलते हल्की गतिविधि करने पर भी सांस फूलने लगती है.

आयरन की कमी क्यों खतरनाक है?
आयरन की मामूली कमी शुरुआत में सामान्य लग सकती है, लेकिन अगर इसे नज़रअंदाज कर दिया जाए तो यह गंभीर एनीमिया का कारण बन सकती है. इससे इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है, जिससे बार-बार संक्रमण होता है. गर्भवती महिलाओं में आयरन की कमी से प्रीमैच्योर डिलीवरी और शिशु के कम वजन की समस्या हो सकती है. लंबे समय तक कमी रहने पर दिल और दिमाग पर असर पड़ सकता है.

आयरन की कमी से बचाव के उपाय

आहार में बदलाव

  • पालक, मेथी, चुकंदर, हरी पत्तेदार सब्जियां

  • सेब, अनार, किशमिश, खजूर

  • मसूर और चना जैसी दालें

  • मीट, मछली, अंडा (नॉन-वेज खाने वालों के लिए)

फोर्टिफाइड अनाज और खाद्य पदार्थ का सेवन
गेहूं, चावल और आटे में मिलने वाले फोर्टिफाइड प्रोडक्ट्स

विटामिन C का सेवन

संतरा, नींबू, अमरूद जैसे फलों के साथ आयरन लें, इससे शरीर आयरन को जल्दी अवशोषित करता है.

डॉक्टर से नियमित जांच

अगर लगातार थकान, ठंड या सांस फूलने की समस्या है तो खून की जांच जरूर करवाएं.


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Written by: Taushif

08 Sep 2025  ·  Published: 12:38 IST

वजन घटाने से लेकर मजबूत मांसपेशियों तक, नटराजासन से पाएं कई लाभ

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Natarajasana Benefits: हमारे शरीर की हर गतिविधि चलना, उठना-बैठना, वजन उठाना या बैलेंस बनाए रखना, सब कुछ मांसपेशियों पर निर्भर करता है. इसलिए मांसपेशियों का मजबूत होना और उनका स्वस्थ रहना बेहद जरूरी है. योग में ऐसे कई आसन हैं जो रोजाना कुछ मिनटों के अभ्यास से मांसपेशियों को मजबूत, लचीला और एक्टिव रखते हैं. इन्हीं में से एक बेहद महत्वपूर्ण आसन है नटराजासन, जिसकी जानकारी मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ योगा भी देता है.

संस्कृत में "नट" का अर्थ है नर्तक और "राज" का अर्थ है राजा. यह आसन भगवान शिव के नटराज स्वरूप से प्रेरित है. शिव के इस रूप में शरीर एक पैर पर संतुलन बनाते हुए नृत्य की सुंदर मुद्रा में दिखाई देता है. नटराजासन भी इसी मुद्रा का अभ्यास है, जो शरीर को संतुलन, एकाग्रता और लचीलापन प्रदान करता है.

नटराजासन से शरीर के कई हिस्सों पर विशेष लाभ मिलता है. कूल्हे, जांघें, टखने, कंधे और रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है. यह आसन पेट की मांसपेशियों को टोन करता है और पूरे शरीर में खिंचाव लाकर ऊर्जा बढ़ाता है. नियमित अभ्यास से मन शांत होता है और तनाव में कमी आती है.

नटराजासन कैसे करें?
नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ योगा के अनुसार, इस आसन को करना आसान है.

सबसे पहले सीधे खड़े हो जाएं और संतुलन बनाएं.
पूरा भार बाएं पैर पर डालें.
दाएं पैर को घुटने से मोड़कर पीछे उठाएं.
दोनों हाथों को ऊपर ले जाकर पीछे की तरफ ले जाएं और दाएं पैर के टखने या पंजे को पकड़ें.
नजरें सामने किसी एक बिंदु पर स्थिर रखें और सामान्य सांस लेते रहें.
कुछ सेकंड रुककर धीरे-धीरे वापस आएं.
यही प्रक्रिया बाएं पैर से दोहराएं.

किन लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए?
योग विशेषज्ञों के अनुसार, गर्भवती महिलाएं, गंभीर कमर या घुटने के दर्द वाले व्यक्ति, हाई ब्लड प्रेशर के मरीज को ये आसान नहीं करना चाहिए.
 


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Written by: Taushif

26 Nov 2025  ·  Published: 10:16 IST

बालों के झड़ने और टूटने की समस्या से परेशान हैं? सरसों के तेल के ये 5 घरेलू नुस्खे देंगे मजबूत और घने बाल

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Mustard Oil For Hair Growth: एक समय था जब घरों में बालों की देखभाल के लिए सबसे पहला नाम सरसों के तेल का लिया जाता था. नानी-दादी के नुस्खों में यह गाढ़ा और तेज़ महक वाला तेल हमेशा शामिल होता था. सरसों का तेल सिर की त्वचा को हल्की गर्माहट देता है और बालों की जड़ों को मज़बूत बनाता है. यही वजह है कि सदियों से यह पतले और कमजोर बालों को जीवन देने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है.

आज भी अगर सरसों के तेल को रसोई में रखी कुछ दूसरी चीज़ों के साथ मिलाकर इस्तेमाल किया जाए तो इसका असर कई गुना बढ़ जाता है. हम आपको ऐसे ही 5 आसान और असरदार घरेलू नुस्खे बता रहे हैं, जिनकी मदद से बालों का झड़ना कम होगा, जड़ें मजबूत होंगी और नए बाल भी उगने लगेंगे.

1. प्याज का रस और सरसों का तेल
प्याज की तेज़ गंध भले ही सबको पसंद न आए, लेकिन बालों के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है. प्याज में मौजूद सल्फर कोलाजेन प्रोडक्शन को बढ़ाता है और बालों के फॉलिकल्स को सक्रिय करता है. इसके लिए प्याज का रस और हल्का गर्म सरसों का तेल बराबर मात्रा में मिलाएं. इस मिश्रण को सिर पर लगाकर 30-40 मिनट छोड़ दें और फिर धो लें. नियमित इस्तेमाल से बाल मजबूत होते हैं और नए बाल उगने लगते हैं.

2. मेथी के दाने और सरसों का तेल
मेथी में प्रोटीन और निकोटिनिक एसिड प्रचुर मात्रा में होता है, जो बालों की जड़ों को पोषण देता है. इसके लिए मेथी के दाने रातभर पानी में भिगोकर पेस्ट बना लें और उसमें सरसों का तेल मिलाकर सिर पर लगाएं. 45 मिनट बाद बाल धो लें. यह मास्क बालों के झड़ने को कम करता है और उन्हें मजबूत बनाता है.

3. एलोवेरा और सरसों का तेल
एलोवेरा सिर की स्किन को ठंडक और आराम देता है, जबकि सरसों का तेल गर्माहट और स्टिम्युलेशन प्रदान करता है. दोनों मिलकर सिर की त्वचा की इंफ्लेमेशन कम करते हैं, रूसी हटाते हैं और बालों के विकास में मदद करते हैं. ताजा एलोवेरा जेल सरसों के तेल में मिलाएं, हल्के हाथों से मालिश करें और 30 मिनट बाद धो लें.

4. करी पत्ता और सरसों का तेल
करी पत्ते एंटीऑक्सीडेंट्स और बीटा-कैरोटीन से भरपूर होते हैं. ये बालों के विकास को बढ़ावा देने के साथ सफेद बालों की समस्या को भी कम करते हैं. इसके लिए सरसों के तेल में करी पत्ते भूनकर तेल तैयार करें और हफ्ते में दो बार सिर पर मालिश करें. यह बालों को घना और मजबूत बनाएगा.

5. गुड़हल (हिबिस्कस) और सरसों का तेल
गुड़हल के फूल और पत्ते बालों के लिए बेहद फायदेमंद माने जाते हैं. यह बालों में केराटिन उत्पादन को बढ़ावा देते हैं, जिससे बाल घने और चमकदार बनते हैं. गुड़हल को पीसकर सरसों के तेल में मिलाएं और स्कैल्प पर लगाएं. 40-45 मिनट बाद धो लें. नियमित इस्तेमाल से बालों का झड़ना कम होगा और उनमें प्राकृतिक चमक लौट आएगी.


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Written by: Taushif

14 Sep 2025  ·  Published: 12:23 IST