फाइल फोटो
दिवाली का त्योहार आने वाला है और चारों तरफ रौनक दिखाई देने लगी है. बाजारों में मिठाइयों की खुशबू और घरों में बनने वाले पकवानों का दौर शुरू हो चुका है. ऐसे में फिटनेस लवर लोगों के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है. स्वादिष्ट पकवानों का मज़ा लेते हुए फिट रहना. अगर आप भी सोच रहे हैं कि दिवाली पर खाने-पीने का मजा भी लें और वजन भी न बढ़े, तो ये 5 आसान फिटनेस टिप्स आपके लिए हैं.
ध्यान से खाएं
त्योहार के दौरान सबसे जरूरी बात है. Mindful Eating. खाने के वक्त सिर्फ स्वाद पर ध्यान न दें, बल्कि यह भी सोचें कि आप कितना और क्या खा रहे हैं. ओवरईटिंग से बचें. जो भी खाएं, छोटे हिस्सों में खाएं और सिर्फ स्वाद के लिए, पेट भरने के लिए नहीं.
छेना वाली मिठाइयां चुनें
मावा या दूध से बनी भारी मिठाइयों के बजाय हल्की मिठाइयां चुनें जैसे छेना बेस्ड मिठाइयां, रसगुल्ला, छेना पायस या सैंडेश। इनमें कैलोरी कम होती है. अगर चाशनी ज्यादा लगे तो मिठाई से उसका सिरप निकाल दें. इससे मिठाई हल्की और सेहतमंद बन जाएगी.
पैदल चलने की आदत डालें
दिवाली की तैयारियों में खुद को फिजिकली एक्टिव रखें. बाजार या रिश्तेदारों के घर पैदल जाकर अपने कदम बढ़ाएं. घर की सफाई या सजावट में भी हाथ बटाएं, इससे कैलोरी बर्न होगी और आप एक्टिव बने रहेंगे.
ज्यादा पानी पिएं
कई बार हमें भूख नहीं बल्कि प्यास लगती है. इसलिए जब भी खाने का मन करे, पहले एक गिलास पानी पी लें. इससे आप ओवरईटिंग से बचेंगे और शरीर हाइड्रेट रहेगा. पानी पीने से मेटाबॉलिज्म भी अच्छा रहता है.
जिम या रनिंग न छोड़ें
त्योहारों के बीच वर्कआउट को नजरअंदाज न करें. अगर जिम नहीं जा पा रहे हैं तो सुबह की रनिंग या हल्की एक्सरसाइज जरूर करें. इससे आप अपने कैलोरी इनटेक को बैलेंस कर पाएंगे और त्योहार के मजे के साथ फिटनेस भी बनी रहेगी.
फाइल फोटो
हर बार स्वादिष्ट और परफेक्ट दाल बनाना एक कला है, लेकिन थोड़ी समझदारी और कुछ आसान टिप्स से यह काम बहुत आसान हो सकता है. अक्सर देखा गया है कि दाल बनाते समय कभी पानी ज़्यादा पड़ जाता है तो कभी दाल कच्ची रह जाती है. कई बार स्वाद भी फीका लगने लगता है लेकिन अगर आप कुछ बुनियादी बातें ध्यान में रखें, तो हर बार होटल जैसी टेस्टी और नरम दाल बना सकते हैं.
1. दाल का सही चुनाव करें
हर दाल की अपनी खासियत होती है. मूंग दाल हल्की होती है और जल्दी पक जाती है, तो वहीं चना दाल थोड़ी भारी और गाढ़ी होती है, जिसे पकने में समय लगता है. इसी तरह तुअर दाल (अरहर) या मसूर दाल को भी अलग-अलग तरह से पकाना पड़ता है. इसलिए सबसे पहले यह समझें कि आप कौन सी दाल बना रहे हैं और उसकी नेचर क्या है.
2. भिगोना न भूलें
दाल पकाने से पहले उसे कम से कम 30 मिनट से 1 घंटे तक पानी में भिगो देना चाहिए. इससे दाल जल्दी पकती है और उसका टेक्सचर भी बेहतर होता है. साथ ही इसमें मौजूद स्टार्च टूट जाता है जिससे वह पचने में आसान हो जाती है.
3. प्रेशर कुकर का करें सही इस्तेमाल
दाल को तेज़ और अच्छी तरह से पकाने के लिए प्रेशर कुकर सबसे अच्छा विकल्प है. इससे न सिर्फ समय बचता है, बल्कि दाल मुलायम भी बनती है. हालांकि ध्यान रखें कि कुकर में कितनी सीटी लगानी है, यह दाल की किस्म पर निर्भर करता है.
4. नमक डालने का सही समय
दाल बनाते समय अक्सर लोग शुरुआत में ही नमक डाल देते हैं, लेकिन इससे दाल का टेक्सचर हार्ड हो सकता है. बेहतर यही है कि जब दाल पूरी तरह पक जाए, तभी नमक डालें. इससे दाल सॉफ्ट बनी रहती है और स्वाद भी बराबर बैठता है.
5. तड़का है स्वाद का राजा
सिंपल दाल को लाजवाब बनाने में तड़का बहुत अहम भूमिका निभाता है. थोड़ा घी या तेल गरम करें और उसमें राई, जीरा, लहसुन, अदरक, सूखी लाल मिर्च या करी पत्ता डालें. इसे दाल पर डालते ही उसकी खुशबू और स्वाद में चार चांद लग जाते हैं.
फाइल फोटो
Immunity Boosting Foods: आजकल बहुत से लोग बदलते मौसम में बार-बार बीमार पड़ जाते हैं. कभी सर्दी-जुकाम, कभी गले में खराश तो कभी बुखार जैसी परेशानियां उन्हें घेर लेती हैं. इसका सबसे बड़ा कारण होता है कमजोर इम्यून सिस्टम. जब शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमज़ोर हो जाती है, तो मामूली बदलाव भी हमें बीमार कर देते हैं. इसलिए जरूरी है कि हम अपनी डाइट और लाइफस्टाइल पर खास ध्यान दें.
संतुलित आहार है सबसे जरूरी
हमारा शरीर तभी मजबूत रह सकता है, जब हम उसे सही पोषण दें. इसके लिए हमें रोजाना संतुलित आहार का सेवन करना चाहिए. फलों, हरी सब्जियों, दालों, बीन्स, ड्राई फ्रूट्स, साबुत अनाज और लीन प्रोटीन को अपनी डाइट में शामिल करने से शरीर को सभी जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं.
साबुत अनाज जैसे ओट्स, चना, किनोआ और स्प्राउट्स में भरपूर मात्रा में फाइबर, मिनरल्स और विटामिन्स पाए जाते हैं. ये न केवल पेट को स्वस्थ रखते हैं, बल्कि लंबे समय तक एनर्जी भी देते हैं. इसके साथ ही ड्राई फ्रूट्स जैसे बादाम और अखरोट इम्युनिटी बूस्ट करने में काफी फायदेमंद होते हैं.
विटामिन सी वाले फल हैं सबसे असरदार
अगर आप अपनी इम्युनिटी को तेजी से बढ़ाना चाहते हैं तो विटामिन सी से भरपूर फलों का सेवन जरूर करें. संतरा, मौसंबी, नींबू, अमरूद और कीवी ऐसे फल हैं जिनमें विटामिन सी की मात्रा बहुत अधिक होती है. विटामिन सी शरीर में सफेद रक्त कोशिकाओं (WBCs) के उत्पादन को बढ़ाता है. ये कोशिकाएं संक्रमणों से लड़ने का काम करती हैं और शरीर को बीमारियों से बचाती हैं. इसके अलावा, खट्टे फलों में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट कोशिकाओं को नुकसान से बचाते हैं और हमें जल्दी थकान महसूस नहीं होने देते.
नींद और व्यायाम भी है जरूरी
सिर्फ खानपान ही नहीं, बल्कि जीवनशैली भी इम्युनिटी को प्रभावित करती है. रोजाना पर्याप्त नींद लेना, नियमित रूप से फिजिकल एक्टिविटी करना और तनाव को कम करना उतना ही जरूरी है जितना अच्छा आहार लेना. अगर आप देर रात तक जागते हैं और नींद पूरी नहीं करते, तो शरीर कमजोर हो सकता है और बीमारियां जल्दी घेर सकती हैं.
खट्टे फलों के फायदे
खट्टे फल न सिर्फ इम्यून सिस्टम को मजबूत करते हैं बल्कि इनके और भी कई फायदे हैं. इनमें मौजूद फ्लेवोनोइड्स दिल को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं. वहीं, इनमें पाया जाने वाला फाइबर पाचन को दुरुस्त करता है और वजन को नियंत्रित रखता है. यही वजह है कि इन फलों को रोजाना की डाइट में शामिल करने की सलाह दी जाती है.
फाइल फोटो
Navel Displacement Symptoms: पेट से जुड़ी ज्यादातर समस्या पाचन या गलत खानपान की वजह से होती है, जिसका पता आसानी से लगाया जा सकता है, लेकिन कई बार नाभि खिसकने की वजह से कई बार असहनीय दर्द का सामना करना पड़ता है. ज्यादातर लोग इसके लक्षणों को पहचान नहीं पाते हैं, लेकिन कुछ आसनों से इसमें राहत मिल सकती है.
आयुर्वेद में नाभि को बहुत जरूरी माना गया है, जो शरीर की 72,000 नाड़ियों से जुड़ी होती है. इसके खिसक जाने पर शरीर में कई तरह की परेशानियां होती हैं. यह समस्या किसी भी उम्र में हो सकती है. ये अचानक ज्यादा भार उठाने की वजह से, चलते-चलते पैर मुड़ जाने की वजह से, सोते समय गलत करवट लेने से (जैसे पेट के बल सोना), पेट की मांसपेशियों के कमजोर होने से या गिर जाने या चोट लग जाने की वजह से हो सकती है.
नाभि खिसकने से पेट फूलने, खाना खाने के तुरंत बाद भी वॉशरूम जाने, हर समय पेट में हल्का-हल्का दर्द और कमर में दर्द की समस्याएं सामने आ सकती हैं. ऐसी स्थिति में योगासन और कुछ एक्सरसाइज से नाभि को ठीक किया जा सकता है. हालांकि, ज्यादा दर्द है तो इसके लिए किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह ली जाती है.
मंडूकासन, सेतुबंधासन, पवनमुक्तासन, नौकासन और कपालभाति प्राणायाम और अनुलोम-विलोम करने से राहत मिल सकती है. ये सभी आसन पेट से जुड़े हैं और पाचन संबंधी समस्याओं को ठीक करने में मदद करते हैं. इसके अलावा, किसी भी तेल को गर्म करके नाभि के आसपास मालिश की जा सकती है। हल्के हाथ से मालिश करें, अगर मालिश करते वक्त भी ज्यादा दर्द हो रहा है, तो तुरंत आयुर्वेदिक चिकित्सक को दिखाएं.
नाभि खिसकने की समस्या होने पर पैरों के तलवे और पिंडलियों की मालिश करें. माना जाता है कि ऐसा करने से दर्द में आराम मिलता है. साथ ही नाभि में हल्के गर्म सरसों के तेल की बूंदें भी डाली जा सकती हैं. त्रिफला चूर्ण भी नाभि खिसकने में होने वाले दर्द में राहत देता है. ऐसे में सुबह और शाम आधा चम्मच त्रिफला चूर्ण हल्के गुनगुने पानी के साथ लें. इससे पेट में होने वाले दर्द से राहत मिलेगी.