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50 की उम्र के बाद भी फिटनेस की शुरुआत करें, सेहत में दिखेगा चमत्कारी फर्क

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Exercise After 50 for Women: अगर आपने 50 की उम्र से पहले एक्सरसाइज नहीं की है, तो घबराने की जरूरत नहीं है. विशेषज्ञों का मानना है कि आप 50 के बाद भी फिजिकल एक्टिविटी शुरू करें तो इसके फायदे तुरंत मिलने लगते हैं. महिलाओं के लिए यह और भी जरूरी हो जाता है, क्योंकि इस उम्र में मेनोपॉज के लक्षण दिखने लगते हैं, जैसे कि गर्मी लगना, नींद की परेशानी, मूड में बदलाव और जोड़ों का दर्द. ऐसे में एक्सरसाइज न सिर्फ इन लक्षणों को कम करती है बल्कि आपकी पूरी सेहत को बेहतर बनाती है.

क्यों जरूरी है एक्सरसाइज?
50 की उम्र के बाद हृदय रोग, डायबिटीज और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है लेकिन नियमित व्यायाम से इनका जोखिम काफी हद तक कम किया जा सकता है. एक्सरसाइज करने से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन अच्छा रहता है, वजन नियंत्रित रहता है और पेट की चर्बी भी घटती है. खास बात यह है कि फिट रहने से आपकी जैविक उम्र यानी बायोलॉजिकल एज कम हो जाती है. यानी 55 की उम्र में भी आप 35 जैसी एनर्जी महसूस कर सकती हैं.

कौन-कौन सी एक्सरसाइज करें?
एरोबिक एक्सरसाइज

जैसे तेज़ चलना (ब्रिस्क वॉक), जॉगिंग, तैराकी और डांस. ये व्यायाम आपके दिल को मजबूत बनाते हैं और वजन घटाने में मदद करते हैं.

स्ट्रेंथ ट्रेनिंग
हफ्ते में दो बार हल्के वेट उठाने या शरीर के वजन से व्यायाम करने से हड्डियाँ मजबूत होती हैं और मांसपेशियाँ टोन होती हैं.

स्ट्रेचिंग और योग
इससे जोड़ों में लचीलापन बढ़ता है और चोट लगने का खतरा कम होता है. योग और पिलेट्स इस उम्र में बहुत फायदेमंद होते हैं.

एक्सरसाइज शुरू करने से पहले…
अगर आपको ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, डायबिटीज या कोई अन्य पुरानी बीमारी है, तो किसी डॉक्टर से सलाह जरूर लें. उसके बाद ही किसी फिटनेस रूटीन की शुरुआत करें.


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Written by: Taushif

02 Aug 2025  ·  Published: 05:02 IST

पीठ, हाथ, पैर और पेट की मांसपेशियों को मजबूत करता है चक्रासन, जानें फायदे

पीठ, हाथ, पैर और पेट की मांसपेशियों को मजबूत करता है चक्रासन, जानें फायदे

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योग हमारे शरीर को स्वस्थ रखने के साथ-साथ मन को शांत और सक्रिय बनाने में भी मदद करता है. इन्हीं में से एक बेहद फायदेमंद आसन है चक्रासन. इसे व्हील पोज़ भी कहा जाता है, क्योंकि इस आसन में शरीर पहिए जैसा आकार बना लेता है. चक्रासन रीढ़, कमर, पेट, आंखों और पूरे शरीर के लिए लाभकारी माना जाता है.

चक्रासन कैसे करें?

  1. सबसे पहले पीठ के बल जमीन पर लेट जाएं.
  2. अब पैरों को घुटनों से मोड़ें और एड़ियों को कूल्हों के पास ले आएं.
  3. अपने दोनों हाथों को सिर के पास रखें—हथेलियां जमीन पर टिकाएं और उंगलियां कंधों की ओर हों.
  4. अब गहरी सांस लेते हुए हाथ और पैरों पर जोर दें और शरीर को ऊपर उठाएं.
  5. आपका शरीर पहिए जैसा गोल दिखाई देगा.
  6. सिर को आराम से पीछे की ओर छोड़ दें.
  7. 10 से 20 सेकंड तक इसी स्थिति में रुकें और सामान्य सांस लेते रहें.
  8. फिर धीरे-धीरे शरीर को नीचे लेकर वापस लेट जाएं.

चक्रासन के फायदे
आयुष मंत्रालय और योग एक्सपर्ट के मुताबिक, नियमित चक्रासन करने से शरीर को कई लाभ मिलते हैं. रीढ़ और कमर मजबूत होती है, शरीर में लचीलापन बढ़ता है, पेट की मांसपेशियां टोन होती हैं, पाचन सुधरता है, कब्ज की समस्या में राहत मिलती है, हाथ, पैर और कंधे मजबूत होते हैं,  मुद्रा (पोश्चर) में सुधार होता है, तनाव, चिंता और मानसिक थकान कम होती है और ऊर्जा और सक्रियता बढ़ती है. चक्रासन पूरे शरीर पर काम करता है, इसलिए इसे रोज़ाना करने से शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से फायदा मिलता है.

किन लोगों को चक्रासन नहीं करना चाहिए?
चक्रासन बहुत लाभदायक है, लेकिन कुछ लोगों को इससे बचना चाहिए.

  • गर्भवती महिलाएं
  • हाई ब्लड प्रेशर के मरीज
  • हृदय रोग से पीड़ित लोग
  • कमर या रीढ़ की गंभीर समस्या वाले लोग
  • लगातार होने वाले क्रोनिक दर्द वाले लोग

इसके अलावा, चक्रासन खाली पेट करना चाहिए और शुरुआत में योग प्रशिक्षक की निगरानी में करना बेहतर होता है. चक्रासन सही तरीके से और नियमित रूप से करने पर न केवल शरीर मजबूत होता है, बल्कि मन भी शांत और संतुलित रहता है. यह आसन वास्तव में पूरे स्वास्थ्य को बेहतर बनाने वाला एक संपूर्ण योग अभ्यास है.
 


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Written by: Taushif

26 Nov 2025  ·  Published: 23:33 IST

घर पर तैयार कर सकते हैं सोया बड़ी, हार्मोन बैलेंस से लेकर वजन कम करने में करती है मदद

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Soy Badi Recipe: भारतीय रसोई में बड़ियों का प्रचलन सदियों से चलता आ रहा है. पारंपरिक रूप से सब्जी और दालों की बड़ियां हमेशा थाली की शान रही हैं, लेकिन बीते काफी समय से सोया बड़ी का चलन बढ़ गया है. ये सस्ती और प्रोटीन से भरी होती है. सोया बड़ी उन लोगों के लिए बहुत फायदेमंद है जो शाकाहारी होते हैं. शाकाहारी थाली में हमेशा प्रोटीन की कमी देखी गई है.

आयुर्वेद में सोया बड़ी को पौष्टिक आहार की श्रेणी में रखा गया है. आयुर्वेद में सोया बड़ी को भारी, कम तेलीय और शरीर को ऊर्जा प्रदान करने वाला कहा गया है. ये शरीर में वात को बैलेंस करता है, लेकिन अगर ज्यादा मात्रा में इसका सेवन किया जाए तो ये शरीर में पित्त की प्रवृत्ति को बढ़ा देता है. ऐसे में सबसे पहले जानते हैं कि घर पर ही सोया बड़ी कैसे बनाई जा सकती है और इसके सेवन के क्या लाभ हैं.

सोया बड़ी बनाने के लिए सोयाबीन के बने आटे की जरूरत होती है. पहले सोयाबीन से तेल को अलग किया जाता है और फिर बचे हुए डी-ऑयल्ड सोया फ्लोर को पकाया जाता है, जिसके बाद स्वादानुसार आटे से छोटी-छोटी बड़ियां बनाई जाती हैं और धूप में सूखाकर लंबे समय तक स्टोर किया जाता है. 

सोयाबीन में कम वसा और अधिक प्रोटीन होता है, जो इसे दूसरी सब्जियों वाली बड़ियों से अलग बनाती हैं. इसमें 52 फीसदी प्रोटीन है, जो मांसपेशियों और हड्डियों को मजबूत करता है और उन्हें अच्छे से बढ़ने में मदद करता है. अगर शरीर में प्रोटीन की कमी है, तो हर दूसरे दिन सीमित मात्रा में सोया बड़ी का सेवन किया जा सकता है. सोया बड़ी हार्मोन को संतुलित करने में भी सहायक है. महिलाओं में मासिक धर्म के समय होने वाले हार्मोनल बदलावों में काफी हद तक सोया बड़ी का सेवन लाभकारी होता है.

इसके अलावा, सोया बड़ी दिल का भी अच्छे से ख्याल रखती है। सोया बड़ी में वसा का स्तर कम होता है, जिस वजह से इसे सीमित मात्रा में दिल से समस्या से जुड़े मरीज भी डॉक्टर की सलाह पर खा सकते हैं. अगर वजन अनियंत्रित तरीके से बढ़ रहा है, तब भी भोजन में सोया बड़ी का सेवन किया जा सकता है. सोया बड़ी में भरपूर मात्रा में प्रोटीन है, जिससे पेट लंबे समय तक भरा रहता है और ज्यादा भूख नहीं लगती.
 


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Written by: Taushif

21 Nov 2025  ·  Published: 22:09 IST

रात में क्यों बढ़ जाती है खांसी? कफ सिरप नहीं, अपनाएं ये 5 घरेलू नुस्खे

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राजस्थान और मध्यप्रदेश से हाल ही में आई खबरों ने पूरे देश को झकझोर दिया है. दोनों राज्यों में कफ सिरप पीने के बाद कई बच्चों की मौत के मामले सामने आए हैं. इस घटना के बाद से लोगों में डर और गुस्सा दोनों है. जिस कंपनी का ये सिरप था, उस पर जांच चल रही है कि आखिर इन मौतों की असली वजह क्या थी.

कफ सिरप हर घर में आम दवा मानी जाती है. लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि हर खांसी में सिरप पीना जरूरी नहीं होता, बल्कि गलत तरीके से लिया गया सिरप नुकसान भी पहुंचा सकता है. आइए जानते हैं कि खांसी के कितने प्रकार होते हैं और कब कफ सिरप से परहेज करना चाहिए.

खांसी क्यों होती है?
खांसी हमारे शरीर की एक प्राकृतिक रक्षा प्रणाली (Natural Defense System) है. जब गले या फेफड़ों में धूल, गंदगी या कोई बाहरी चीज जाती है, तो शरीर उसे बाहर निकालने के लिए खांसी करता है. यानी खांसी हमेशा बुरी नहीं होती यह शरीर को साफ रखने का तरीका भी है.

खांसी के प्रकार

  1. गीली खांसी (Wet Cough): इसमें कफ या बलगम निकलता है. यह फेफड़ों की सफाई में मदद करती है.
  2. सूखी खांसी (Dry Cough): इसमें बलगम नहीं होता, लेकिन गले में जलन होती है.
  3. क्रूप खांसी: बच्चों में पाई जाने वाली वायरल खांसी जिसमें आवाज भारी या भौंकने जैसी हो जाती है.
  4. पुरानी खांसी: जो कई हफ्तों तक बनी रहती है और किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकती है.

कफ सिरप हर बार क्यों नहीं पीना चाहिए?
गलत सिरप नुकसानदायक होता है. हर सिरप अलग तरह की खांसी के लिए बनाया जाता है. गलत सिरप असर नहीं करता, बल्कि साइड इफेक्ट दे सकता है.

गीली खांसी में नुकसान: जब शरीर बलगम निकालने की कोशिश करता है, तब सिरप खांसी को दबा देता है, जिससे बलगम अंदर रह जाता है.

बच्चों के लिए खतरा: कई सिरप में अल्कोहल या स्लीपिंग एजेंट होते हैं, जो बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं.

बार-बार सिरप पीने से शरीर की नैचुरल सफाई प्रक्रिया कमजोर हो जाती है.

खांसी में क्या करें?
गुनगुना पानी या तुलसी-अदरक वाला काढ़ा पिएं.

नमक वाले गुनगुने पानी से गरारे करें.

भाप लें और हवा में नमी बनाए रखें.

सिर थोड़ा ऊंचा रखकर सोएं ताकि सांस लेने में दिक्कत न हो.

डॉक्टर के पास कब जाएं?
अगर खांसते समय खून आ रहा है, सांस लेने में तकलीफ हो रही है, खांसी तीन हफ्ते से ज्यादा चल रही है या सीने में दर्द है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.


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Written by: Taushif

07 Oct 2025  ·  Published: 14:28 IST