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Fennel Water Benefits: सुबह का दिन अगर हेल्दी शुरुआत के साथ हो, तो पूरे दिन शरीर और दिमाग बेहतर महसूस करता है. आयुर्वेद में एक आसान लेकिन असरदार आदत बताई गई है. सुबह खाली पेट सौंफ का पानी पीना. यह न सिर्फ पाचन और मेटाबॉलिज्म को दुरुस्त करता है, बल्कि शरीर से टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में भी मदद करता है, जैसे शरीर खुद को डिटॉक्स कर रहा हो.
ज़्यादातर लोग सौंफ को ठंडी तासीर वाली मानते हैं, लेकिन आयुर्वेद के मुताबिक इसकी तासीर गर्म होती है. इसका मतलब यह पाचन अग्नि (डाइजेस्टिव फायर) को बढ़ाती है, जबकि शरीर के बाहरी हिस्से को ठंडक देती है. यही वजह है कि लोग इसे ठंडा मान लेते हैं, लेकिन वास्तव में यह पाचन सुधारने और डिटॉक्सिफिकेशन में मदद करती है.
सौंफ गैस, ब्लोटिंग, एसिडिटी और कब्ज के लिए रामबाण है. इसे खाने के बाद चबाने या सुबह खाली पेट पानी के रूप में पीने से पाचन तंत्र मजबूत होता है और शरीर से हानिकारक तत्व (टॉक्सिन्स) बाहर निकलते हैं.
आयुर्वेद के मुताबिक सौंफ वजन कम करने में भी फायदेमंद है. यह मेटाबॉलिज्म को तेज करती है, भूख पर कंट्रोल रखती है और ब्लोटिंग कम करती है. अगर आप इसे रोजाना लें, तो 2-3 हफ्तों में असर दिख सकता है.
सौंफ महिलाओं के लिए भी बेहद फायदेमंद है. यह ब्रेस्ट मिल्क बढ़ाने, पीरियड्स के दर्द में राहत देने और हार्मोन बैलेंस बनाए रखने में मदद करती है. इसे त्रिदोषिक हर्ब कहा जाता है, यानी यह शरीर के तीनों दोष, वात, पित्त और कफ को संतुलित रखती है.
वैज्ञानिक शोध भी सौंफ के फायदे मानते हैं. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर में ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस को कम करते हैं, जिससे कोशिकाओं को नुकसान से बचाया जा सकता है. इससे डायबिटीज, हार्ट डिजीज और यहां तक कि कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा भी घटता है. यह आईबीएस (इर्रेगुलर बाउल सिंड्रोम) के मरीजों के लिए भी राहतदायक है.
भिगोकर पीना – रात में 1-2 चम्मच सौंफ पानी में भिगो दें और सुबह खाली पेट पिएं.
उबालकर पीना – सौंफ को हल्का कूटकर 2 कप पानी में उबालें, आधा रह जाने पर छानकर गर्म पी लें.
सुबह खाली पेट पीना सबसे बेहतर है, क्योंकि यह हाइड्रेशन बढ़ाता है, पाचन अग्नि को तेज करता है और टॉक्सिन्स निकालता है.
इन स्थितियों में सौंफ का पानी पीने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.
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Beetroot Idli Recipe: इडली एक पारंपरिक साउथ इंडियन डिश है, जिसे आमतौर पर चावल और उड़द दाल के घोल को खमीर उठाकर बनाया जाता है. यह डिश हल्की, सुपाच्य और बहुत ही पौष्टिक मानी जाती है. अगर आप रोज़ की सिंपल इडली में थोड़ा बदलाव लाकर उसे और अधिक हेल्दी और रंगीन बनाना चाहते हैं, तो चुकंदर इडली आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प है.
चुकंदर क्यों है फायदेमंद?
चुकंदर में आयरन, फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं. यह शरीर की इम्युनिटी बढ़ाने, पाचन सुधारने और खून की कमी को दूर करने में मदद करता है. साथ ही, इसका नेचुरल गुलाबी-लाल रंग खाने को आकर्षक भी बनाता है. जब इसे इडली जैसे नाश्ते में मिलाया जाए, तो यह स्वाद और सेहत दोनों में चार चांद लगा देता है.
1. इडली का तैयार घोल – 2 कप (खमीर उठा हुआ चावल और उड़द दाल का मिश्रण)
2. चुकंदर – 1 मीडियम आकार का (कद्दूकस किया हुआ)
3. अदरक – 1 छोटा चम्मच (कद्दूकस किया हुआ)
4. हरी मिर्च – 1-2 बारीक कटी हुई (इच्छा अनुसार)
5. नमक – स्वादानुसार
6. तेल या घी – मोल्ड ग्रीस करने के लिए
7. हरा धनिया – सजावट के लिए
बनाने की विधि (Steps)
1. चुकंदर की तैयारी
चुकंदर को अच्छी तरह धोकर छील लें और फिर कद्दूकस करें. एक पैन में थोड़ा तेल गर्म करें, उसमें कद्दूकस किया चुकंदर डालें और 2-3 मिनट तक हल्का भूनें ताकि उसका कच्चापन कम हो जाए. इसमें एक चुटकी नमक डालें ताकि स्वाद और नमी संतुलित रहे.
2. इडली घोल में मिलाना
भुने हुए चुकंदर को इडली के तैयार घोल में डालें. घोल को अच्छे से मिलाएं ताकि उसमें गुलाबी-लाल रंग आ जाए. अगर घोल ज्यादा गाढ़ा लगे तो थोड़ा पानी डालकर उसे सही टेक्सचर में लाएं.
3. स्टीमिंग की प्रक्रिया
इडली के मोल्ड्स को तेल या घी से अच्छी तरह ग्रीस करें. फिर हर मोल्ड में घोल को सावधानी से भरें. अब इन मोल्ड्स को इडली स्टीमर में रखें और मीडियम आंच पर 10-12 मिनट तक भाप में पकाएं.
4. पकने की जांच
इडली के पकने की जांच के लिए एक टूथपिक डालें. अगर वह साफ बाहर निकलती है तो समझिए इडली तैयार है.
5. परोसने का तरीका
इडली को मोल्ड से निकालें और ऊपर से हरे धनिए से सजाएं. इसे नारियल की चटनी, टमाटर की चटनी या गरमागरम सांबर के साथ परोसें.
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इस साल नवंबर में घर पर बने शाकाहारी और मांसाहारी खाने की कीमत में पिछले साल के मुकाबले 13 प्रतिशत की गिरावट आई, जिसका कारण सब्जियों और दालों की कीमतों में कमी थी. CRISIL इंटेलिजेंस की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि ज़्यादा सप्लाई के कारण टमाटर की कीमतों में पिछले साल के मुकाबले 17 प्रतिशत की गिरावट आई, और हाई बेस इफ़ेक्ट के कारण आलू की कीमतों में 29 प्रतिशत की गिरावट आई. हालांकि, पिछले सीज़न के रबी स्टॉक में बढ़ोतरी और कम एक्सपोर्ट के कारण प्याज की कीमतों में 53 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी हुई.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि स्टॉक में बढ़ोतरी और चना, पीली मटर और उड़द दाल के भारी इंपोर्ट के कारण दालों की कीमतों में 17 प्रतिशत की गिरावट आई. हालांकि, शाकाहारी थाली की कीमत में महीने के आधार पर 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि इसके उलट, नवंबर में मांसाहारी थाली की कीमत में 1 प्रतिशत की गिरावट आई.
CRISIL इंटेलिजेंस के डायरेक्टर, पुष्पन शर्मा ने कहा, "मीडियम टर्म में, खरीफ फसल की कटाई में देरी और कम पैदावार के कारण प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी होने की उम्मीद है. हालांकि, कोल्ड स्टोरेज का स्टॉक बाज़ार में आने से आलू की कीमतों में गिरावट देखी जा सकती है." शर्मा ने आगे कहा, "फर्म का अनुमान है कि पीली मटर पर 30 प्रतिशत इंपोर्ट ड्यूटी के कारण आने वाले समय में दालों की कीमतें एक सीमित दायरे में रहेंगी. इसके अलावा, उड़द दाल के बिना किसी रोक-टोक के इंपोर्ट से भी दालों की कीमतें कंट्रोल में रहेंगी."
उन्होंने आगे कहा कि कोई भी पॉलिसी दखल, जैसे कि इंपोर्ट ड्यूटी में बढ़ोतरी, दालों की कीमतों पर ऊपर की ओर दबाव डाल सकती है. त्योहारी सीज़न के दौरान ज़्यादा मांग के कारण वनस्पति तेल की कीमतों में पिछले साल के मुकाबले 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई. इसके अलावा, LPG गैस सिलेंडर की कीमत में पिछले साल के मुकाबले 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी ने थाली की कीमत में कुल गिरावट को सीमित कर दिया.
दूसरी ओर, मांसाहारी थाली की कीमत में गिरावट का कारण ब्रॉयलर चिकन की कम कीमतें थीं. ब्रॉयलर चिकन की कीमतों में पिछले साल के मुकाबले 12 प्रतिशत की गिरावट आई, जो मांसाहारी थाली की कीमत का 50 प्रतिशत है. घर पर खाना बनाने की औसत लागत की गणना उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम भारत में मौजूदा इनपुट कीमतों के आधार पर की जाती है. इन कीमतों में मासिक बदलाव आम आदमी के खर्चों पर पड़ने वाले असर को दिखाते हैं.
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Nagalinga Fruit Benefits: कुदरत ने हमें कई कीमती दवाइयां दी हैं जो सेहतमंद ज़िंदगी जीने में मदद कर सकती हैं. ऐसी ही एक चीज़ है नागलिंग, जिसका फल तोप के गोले जैसा दिखता है. आयुर्वेद में नागलिंग के पेड़ को वरदान माना जाता है. भारत सरकार का आयुष मंत्रालय नागलिंग को अमृत जैसा बताता है और इसके गुणों के बारे में बताता है.
नागलिंग के पेड़ का साइंटिफिक नाम कौरौपिटा गुआनेंसिस है. इसे कैननबॉल ट्री के नाम से भी जाना जाता है. इस पेड़ की सबसे खास बातें इसके फूल और फल हैं. फूल इतने अनोखे होते हैं कि वे शिवलिंग पर अपना फन फैलाए सांप जैसे लगते हैं. इसी सुंदरता और आकार की वजह से इसे "नागलिंग" नाम मिला है. इसके फल गोल और भारी होते हैं, तोप के गोले जैसे. फूलों से बहुत तेज़ खुशबू आती है जो दूर-दूर तक फैलती है.
मंत्रालय के मुताबिक, नागलिंग का पेड़ कुदरत का दिया एक अनोखा तोहफा है. इसका हर हिस्सा दवाइयों के गुणों से भरा है. इसकी पत्तियों, छाल, फूलों और फलों से मिलने वाले अर्क में विटामिन E, स्टेरोल्स और ज़रूरी फैटी एसिड भरपूर होते हैं. साइंटिफिक रिसर्च से पता चलता है कि इसमें एंटीऑक्सीडेंट, एंटीफंगल, एंटीकैंसर और एंटीमलेरियल गुण होते हैं. आयुर्वेद में नागलिंग खाने के खास फायदे बताए गए हैं. यह हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करता है और दर्द और सूजन से राहत देता है.
यह सर्दी, खांसी और पेट दर्द से राहत देता है. यह घाव भरने में मदद करता है और हेल्दी स्किन को बढ़ावा देता है. यह मलेरिया और दांत दर्द में भी बहुत असरदार है. इसके एंटीमाइक्रोबियल गुण इन्फेक्शन से बचाते हैं. नागलिंग पेड़ का हर हिस्सा सेहत का खजाना माना जाता है. इसका इस्तेमाल सदियों से पारंपरिक दवा में किया जाता रहा है, और मॉडर्न रिसर्च भी इसके फायदों को कन्फर्म कर रही है.