फाइल फोटो
Gas Problem: गैस बनना या गैस छोड़ना (फ्लैट्युलेंस) आमतौर पर लोगों के लिए शर्मिंदगी का कारण बनता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये हमारी अच्छी पाचन सेहत का संकेत भी हो सकता है? एक सामान्य इंसान दिन में लगभग 5 से 15 बार गैस छोड़ता है. अगर यह प्रक्रिया बहुत अधिक या बदबूदार न हो, तो यह इस बात का संकेत हो सकता है कि आपका पाचन तंत्र सक्रिय है और आप ऐसे खाद्य पदार्थ खा रहे हैं जो आपकी सेहत के लिए अच्छे हैं.
क्यों बनती है गैस?
गैस बनने की सबसे आम वजह है कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट और फाइबर से भरपूर भोजन. ये खाद्य पदार्थ पूरी तरह पच नहीं पाते और आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया इन्हें तोड़ते हैं. इस प्रक्रिया में गैस बनती है. आइए जानते हैं कि कौन-कौन से खाद्य पदार्थ ज्यादा गैस बनाते हैं?
1. वसा युक्त और चर्बी वाला मीट
चिकनाई वाला भोजन पाचन को धीमा कर देता है। इससे आंतों में फर्मेंटेशन शुरू हो जाता है, जिससे बदबूदार गैस बन सकती है. खासतौर पर लाल मांस (रेड मीट) में मेथियोनीन नामक अमीनो एसिड पाया जाता है, जो सल्फर से भरपूर होता है. यह हाइड्रोजन सल्फाइड में बदलता है और गैस में सड़े अंडे जैसी बदबू लाता है.
2. बीन्स और दालें
राजमा, लोबिया, चना जैसी दालों में रेफिनोज़ नामक शुगर होती है जिसे शरीर पूरी तरह नहीं तोड़ पाता. यह आंतों में जाकर गैस पैदा करती है.
3. अंडा
अंडा सीधे तौर पर गैस नहीं बनाता, लेकिन इसमें भी मेथियोनीन होता है. अगर इसे बीन्स या मीट के साथ खाया जाए, तो बदबूदार गैस बनने की संभावना बढ़ जाती है.
4. प्याज, लहसुन, हरा प्याज
इनमें फ्रक्टेन नामक कार्बोहाइड्रेट होता है जो पेट फूलने और गैस बनाने का कारण बन सकता है.
5. दूध और डेयरी प्रोडक्ट
गाय और बकरी के दूध में लैक्टोज होता है. दुनिया की करीब 65% आबादी लैक्टोज इन्टॉलरेंट होती है, यानी उनका शरीर दूध की शुगर को नहीं पचा पाता, जिससे गैस और सूजन होती है.
6. गेहूं और साबुत अनाज
गेहूं, ओट्स और ब्रेड जैसे उत्पादों में फ्रक्टेन और ग्लूटेन पाए जाते हैं. जिन लोगों को ग्लूटेन इन्टॉलरेंस है, उन्हें इनसे गैस और पेट फूलने की दिक्कत हो सकती है.
7. ब्रोकोली, फूलगोभी और पत्तागोभी
ये सब्ज़ियां बहुत फाइबर युक्त होती हैं और इनमें सल्फर भी पाया जाता है. यह बदबूदार गैस बनने का एक और कारण है. हालांकि ये सब्जियां पोषक होती हैं, लेकिन इनका सेवन सीमित मात्रा में करें.
8. कुछ फल जैसे सेब, नाशपाती, आम
इन फलों में फ्रक्टोज़ और फाइबर की मात्रा अधिक होती है. कुछ लोगों का शरीर फ्रक्टोज़ को ठीक से पचा नहीं पाता, जिससे गैस बनती है. हालांकि, यह स्थिति लैक्टोज इन्टॉलरेंस की तुलना में कम आम है.
फाइल फोटो
Glowing Skin Tips: हर कोई चाहता है कि उसका चेहरा हमेशा चमकता रहे और स्किन हेल्दी दिखे. इसके लिए महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स की नहीं, बल्कि रोजमर्रा की कुछ आसान आदतों की जरूरत होती है. आइए जानें वे देसी नुस्खे जो आपकी स्किन, बालों और हेल्थ, तीनों का ख्याल रखते हैं.
1. सुबह नींबू पानी जरूर पिएं
दिन की शुरुआत गर्म पानी में नींबू डालकर करने से शरीर से टॉक्सिन्स निकलते हैं. यह डाइजेशन को बेहतर बनाता है और मेटाबॉलिज्म तेज करता है. नींबू में मौजूद विटामिन C स्किन को चमकदार बनाता है और झुर्रियों से बचाता है. हल्का मीठा स्वाद पाने के लिए थोड़ा शहद भी मिला सकते हैं.
2. हफ्ते में दो बार बालों में तेल लगाएं
नारियल, बादाम या सरसों का तेल बालों के लिए सबसे फायदेमंद माना जाता है. यह स्कैल्प को पोषण देता है, बाल झड़ने से रोकता है और उन्हें नेचुरल शाइन देता है. नियमित तेल लगाने से बाल मजबूत और घने बनते हैं.
3. खाएं हेल्दी सुपरफूड्स
हल्दी, आंवला, बादाम और अखरोट जैसे फूड्स स्किन और बालों दोनों के लिए फायदेमंद हैं. हल्दी में एंटीऑक्सिडेंट्स होते हैं जो एजिंग को धीमा करते हैं, जबकि आंवला विटामिन C से भरपूर होता है और स्किन को ग्लो देता है.
4. एक्सरसाइज और योग करें
रोजाना हल्की एक्सरसाइज या योग करने से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और चेहरा नैचुरली चमकने लगता है. वॉक, सूर्य नमस्कार या स्ट्रेचिंग से स्ट्रेस कम होता है, जिससे स्किन पर नेचुरल ग्लो आता है.
5. पूरी नींद लें
रात की अच्छी नींद स्किन के लिए बेस्ट ट्रीटमेंट है. 7-8 घंटे की नींद से स्किन रिपेयर होती है और डार्क सर्कल्स दूर रहते हैं. सोने से पहले दूध में हल्दी या इलायची डालकर पीना फायदेमंद है.
6. मुस्कुराना न भूलें
सच्ची मुस्कान किसी भी मेकअप से ज्यादा खूबसूरत लगती है. मुस्कुराने से मन हल्का होता है, स्ट्रेस कम होता है और स्किन खुद-ब-खुद फ्रेश दिखने लगती है. छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करके आप बिना किसी खर्च के खुद को हेल्दी, फिट और ग्लोइंग बनाए रख सकते हैं.
फाइल फोटो
Aging after 50: समय तो निरंतर आगे बढ़ता रहता है, लेकिन उम्र बढ़ने की प्रक्रिया हर इंसान के लिए समान नहीं होती। बचपन में शरीर तेजी से बढ़ता है, युवावस्था में स्थिरता रहती है, लेकिन जैसे-जैसे उम्र आगे बढ़ती है, शरीर में कमजोरी झलकने लगती है। हाल ही में चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज द्वारा की गई एक स्टडी में पाया गया है कि यह बुढ़ापा 50 की उम्र के बाद अचानक तेज़ी से बढ़ने लगता है।
इस शोध में 14 से 68 साल की उम्र के 76 लोगों के अंगों का विश्लेषण किया गया, जिनकी मृत्यु सिर में चोट लगने से हुई थी. वैज्ञानिकों ने हार्ट, लिवर, स्किन, मसल्स और खून जैसे अंगों के सैंपल लिए और बारीकी से यह समझने की कोशिश की कि शरीर के कौन से हिस्से कब सबसे अधिक प्रभावित होते हैं.
शोध के अनुसार, 45 से 55 साल की उम्र के बीच शरीर में सबसे अधिक जैविक परिवर्तन देखे गए. खासकर एओर्टा यानी शरीर की मुख्य रक्त वाहिका में उम्र का असर सबसे तीव्र देखा गया. इसके अलावा प्लीहा और पैंक्रियास में भी उम्र के साथ बदलाव स्पष्ट रूप से देखे गए.
वैज्ञानिकों ने यह भी पाया कि जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, शरीर में 48 ऐसे प्रोटीन बनने लगते हैं जो हृदय रोग, फैटी लिवर, फाइब्रोसिस और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से जुड़े होते हैं. ये परिवर्तन कुछ अंगों में सामान्य रूप से दिखाई देते हैं जबकि कुछ में विशिष्ट बदलाव होते हैं.
इस शोध का उद्देश्य केवल उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को समझना नहीं, बल्कि इस आधार पर ऐसी दवाएं विकसित करना है जो इस प्रक्रिया को धीमा कर सकें या उससे जुड़ी बीमारियों को रोका जा सके. शोधकर्ताओं ने अब तक 50 की उम्र के बाद के प्रोटीन परिवर्तनों का विस्तृत डाटा तैयार कर लिया है, जिससे शरीर के अंगों में उम्र के साथ होने वाले असंतुलन को समझा जा सके.
यह रिसर्च उम्र बढ़ने से जुड़ी जटिलताओं को समझने और उन्हें नियंत्रित करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है. भविष्य में इसके जरिए बुढ़ापे को न केवल सहज बनाया जा सकेगा, बल्कि उससे जुड़ी बीमारियों को समय रहते रोका भी जा सकेगा.
फाइल फोटो
World Heart Day 2025: हर साल 29 सितंबर को दुनिया भर में वर्ल्ड हार्ट डे मनाया जाता है. इस दिन का मुख्य उद्देश्य लोगों को दिल की बीमारियों के बारे में जागरूक करना और उनकी रोकथाम के उपाय बताना है. आजकल हार्ट अटैक और स्ट्रोक के मामले बढ़ते जा रहे हैं. ऐसे में अपने दिल का खास ख्याल रखना और समय रहते सही कदम उठाना बेहद जरूरी हो गया है.
दिल को स्वस्थ रखने के लिए सबसे अहम भूमिका हमारी डाइट निभाती है. अगर हम रोजाना खाने में सही चीजें शामिल करें तो दिल की बीमारियों के खतरे को कम किया जा सकता है. डेनवर स्थित नेशनल ज्यूइश हेल्थ के हार्ट स्पेशलिस्ट डॉ. एंड्रयू फ्रीमैन का कहना है कि जो लोग ज्यादा फल और सब्जियां खाते हैं, उन्हें हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा काफी हद तक कम होता है. फलों में मौजूद फोलेट, पोटैशियम और विटामिन C स्ट्रोक और दिल की बीमारियों से बचाव करते हैं. इनके एंटीऑक्सीडेंट भी दिल को मजबूत बनाते हैं.
हर दिन फल खाने से शरीर को सभी जरूरी विटामिन, मिनरल और फाइटोकैमिकल्स मिलते हैं, जो दिल के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं. अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) भी रोजाना चार खास फलों को डाइट में शामिल करने की सलाह देता है, जिनमें से हर एक का अपना महत्व है.
सेब (Apple): इसमें फाइबर, विटामिन C और पॉलीफेनॉल्स होते हैं. यह कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करता है और दिल की बीमारियों का खतरा घटाता है.
अंगूर (Grapes): इसमें रिस्वेराट्रोल और एंथोसायनिन पाए जाते हैं, जो ट्राइग्लिसराइड और कोलेस्ट्रॉल घटाकर ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखते हैं.
एवोकाडो (Avocado): इसमें हेल्दी फैट और फाइबर होता है, जो खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) घटाता और अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) को बढ़ाता है.
ब्लूबेरी और स्ट्रॉबेरी: ये एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर फल हैं, जो धमनियों में प्लाक बनने की प्रक्रिया को धीमा करते हैं और हार्ट प्रॉब्लम व टाइप 2 डायबिटीज के खतरे को कम करते हैं.
इन फलों को रोजाना अपनी डाइट में शामिल करने से दिल की सेहत मजबूत रहती है और बीमारियों का खतरा कम हो जाता है.