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डायबिटीज से लेकर पाचन तक, हरे धनिये में छिपा है इन बड़ी बीमारियों का इलाज

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Health benefits of Coriander leaves: दाल और सब्जी धनिया के बिना अधूरी है, लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि हरा धनिया सिर्फ गार्निश नहीं है, यह हमारी थाली में एक नेचुरल दवा है. सर्दी हो या गर्मी, हर मौसम में धनिया खाने के अपने अलग फायदे हैं. आयुर्वेद इसे त्रिदोष बैलेंसर, पाचन बढ़ाने वाला और खून साफ ​​करने वाला मानता है. मॉडर्न साइंस इसे माइक्रोन्यूट्रिएंट्स और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर एक सुपर हर्ब कहता है.

धनिया का एक छोटा सा पत्ता विटामिन A, C, K, पोटैशियम, कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम और कई तरह के एंजाइम्स से भरा होता है. इसके अलावा, एक मुट्ठी धनिया एक सेब जितने एंटीऑक्सीडेंट्स देता है. यह शरीर को साफ करने और सेल्स को बचाने में बहुत असरदार है. इसलिए, भारतीय किचन में इसे थाली के लिए एक रिफ्रेशिंग टॉनिक माना जाता है.

अब सवाल यह है कि इसे हर दाल और सब्जी में क्यों डाला जाता है? इसका मुख्य कारण थर्मोरेगुलेशन है. पकी हुई सब्जियां शरीर में थोड़ी गर्मी पैदा करती हैं, जबकि धनिया ठंडा होता है. ये दोनों मिलकर डाइजेशन को आसान बनाते हैं, जिससे खाना भारी नहीं लगता.

इसके अलावा, धनिया शरीर से टॉक्सिन, हेवी मेटल और नुकसानदायक चीज़ों को निकालने में मदद करता है. इसे नैचुरल कीलेटिंग एजेंट माना जाता है. यह शरीर को साफ़ करने का एक आसान तरीका है. धनिए की खास खुशबू सिर्फ़ खुशबू नहीं है. इसे सूंघने से दिमाग में डाइजेस्टिव एंजाइम तुरंत एक्टिवेट हो जाते हैं, जिससे भूख बढ़ती है और डाइजेशन तेज़ होता है.

धनिए को लिवर का डिटॉक्स स्विच भी कहा जाता है. इसके एंजाइम लिवर की सफ़ाई की प्रक्रिया को तेज़ करते हैं. धनिए का जूस सिर्फ़ 15 मिनट में सीने की जलन या गैस से राहत देता है. यह उन लोगों के लिए खास तौर पर फ़ायदेमंद है जो ज़्यादा सोडियम लेते हैं या हाई ब्लड प्रेशर में हैं क्योंकि यह ब्लड सोडियम लेवल को कम करने में मदद करता है. तीन दोषों (वात, पित्त और कफ) को बैलेंस करने वाली खाने की चीज़ें बहुत कम मिलती हैं, लेकिन धनिया उनमें से एक है.

धनिए का पानी यूरिक एसिड और ज़्यादा नमक को बाहर निकालकर किडनी को काम करने में मदद करता है. इसलिए, बहुत से लोग इसे सुबह खाली पेट पीते हैं. लेकिन अगर सही तरीके से लिया जाए तो इसके फायदे दोगुने हो जाते हैं, जैसे कि धनिया के बीज पकाने के बाद डालें, न कि आंच बंद करने के बाद ताकि विटामिन C और उसके एसेंशियल ऑयल्स खराब न हों. नींबू के साथ यह और भी असरदार होता है, क्योंकि नींबू आयरन एब्जॉर्प्शन को बढ़ाता है.
 


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Written by: Taushif

03 Dec 2025  ·  Published: 01:27 IST

क्या ब्लैक एग्स सफेद अंडों से बेहतर हैं? जानिए एक्सपर्ट की राय

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आजकल लोग अपनी डाइट और फिटनेस को लेकर बहुत सजग हो गए हैं. इसी में अंडे सबसे ज़्यादा पसंद किए जाने वाले हेल्दी फूड्स में से एक हैं. अब सफेद और भूरे अंडों के साथ-साथ काले अंडे (ब्लैक एग्स) भी चर्चा में हैं. ये अंडे दिखने में अलग होते हैं. इनका छिलका काला होता है और अंदर का रंग भी थोड़ा गहरा.

काले अंडे क्या हैं?

काले अंडे कड़कनाथ मुर्गी के होते हैं, जो भारत की एक खास नस्ल है. इसका मीट, पंख और अंडे सभी गहरे रंग के होते हैं. ये मुर्गियां ज़्यादातर मध्य प्रदेश के आदिवासी इलाकों में पाई जाती हैं. इनके अंडे स्वादिष्ट, लो-फैट और हाई-प्रोटीन माने जाते हैं, इसलिए फिटनेस लवर्स इन्हें खूब पसंद करते हैं.

पोषण तुलना (100 ग्राम में)

अंडे का प्रकार प्रोटीन फैट कोलेस्ट्रॉल
कड़कनाथ (काला) 15.6 ग्राम 1 ग्राम 180 मिलीग्राम
सामान्य (सफेद) 6.6 ग्राम 5.8 ग्राम 372 मिलीग्राम

कड़कनाथ अंडों में लगभग दोगुना प्रोटीन होता है, जबकि फैट और कोलेस्ट्रॉल बहुत कम होता है.

 सेहत के फायदे

  • इम्यूनिटी बढ़ाते हैं, जिससे बीमारियों से बचाव होता है.

  • मसल्स मजबूत करते हैं, खासकर जिम जाने वालों के लिए फायदेमंद हैं.

  • दिल के लिए अच्छे हैं, क्योंकि इनमें वसा और कोलेस्ट्रॉल कम है.

  • डाइजेशन सुधारते हैं, जिससे शरीर को पोषण आसानी से मिलता है.

  • इनमें मौजूद ग्लूटामिक एसिड स्वाद को और लाजवाब बनाता है.

कौन बेहतर है?

सफेद और काले दोनों अंडे फायदेमंद हैं, लेकिन पोषण के मामले में काले अंडे आगे हैं. इनमें ज़्यादा प्रोटीन, कम फैट और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं. हालांकि, ये महंगे होते हैं और हर जगह आसानी से नहीं मिलते, अगर आप रोजाना के लिए सस्ता और हेल्दी विकल्प चाहते हैं, तो सफेद अंडे भी बेहतरीन विकल्प हैं.


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Written by: Taushif

04 Nov 2025  ·  Published: 22:04 IST

सर्दियों में अश्वसंचालनासन बना रामबाण, जोड़ों के दर्द से लेकर तनाव तक में राहत

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Ashwa Sanchalanasana Benefits: सर्दियों का मौसम आते ही लोगों को जोड़ों में दर्द, पीठ में जकड़न, आलस और शरीर में ठंड लगने जैसी समस्याएं होने लगती हैं. ऐसे में योगासन शरीर और मन दोनों के लिए बेहद फायदेमंद साबित होते हैं. इन्हीं योगासनों में एक खास आसन है अश्वसंचालनासन, जिसे सर्दियों में बहुत लाभकारी माना जाता है.

योग विशेषज्ञों के मुताबिक, अश्वसंचालनासन को हाई लंग पोज भी कहा जाता है. इस आसन में शरीर आगे-पीछे घोड़े की तरह खिंचता है, इसलिए इसे अश्व (घोड़ा) संचालनासन कहा जाता है. सर्दियों में जब शरीर अकड़ जाता है, तब यह आसन मांसपेशियों को खोलने, शरीर में गर्माहट पैदा करने और ऊर्जा बढ़ाने में मदद करता है.

इस आसन के फायदों को Morarji Desai National Institute of Yoga भी मानता है. संस्थान के अनुसार, सर्दियों में रोजाना अश्वसंचालनासन करने से जोड़ों के दर्द, पीठ की जकड़न और मांसपेशियों की कमजोरी से काफी राहत मिलती है.

कैसे करें अश्वसंचालनासन?
अश्वसंचालनासन करने का तरीका काफी आसान है. सबसे पहले वज्रासन की मुद्रा में बैठ जाएं. अब दाहिना पैर आगे की ओर बढ़ाएं और घुटने को 90 डिग्री के कोण पर मोड़ लें. दोनों हाथ कमर पर रखें या नमस्ते की मुद्रा में सीने के पास जोड़ लें. पीठ बिल्कुल सीधी रखें और नजर सामने की ओर रखें. गहरी सांस लेते और छोड़ते हुए इस मुद्रा में 1 से 2 मिनट तक रहें. इसके बाद पैर बदलकर यही प्रक्रिया दोहराएं.

अश्वसंचालनासन के प्रमुख फायदे
यह आसन पीठ के निचले हिस्से और जांघों की मांसपेशियों को मजबूत करता है. घुटनों, टखनों और एड़ी की नस (अकिलिस टेंडन) में लचीलापन बढ़ाता है. सर्दियों में जम चुके जोड़ों को खोलता है और दर्द से राहत देता है. शरीर का संतुलन बेहतर करता है. रीढ़ की हड्डी लचीली बनती है और कमर दर्द में आराम मिलता है. यह स्वाधिष्ठान चक्र को सक्रिय करता है, जिससे शरीर में गर्मी और ऊर्जा बढ़ती है. मानसिक तनाव और थकान को भी कम करता है.

सावधानियां
योग एक्सपर्ट बताते हैं कि अश्वसंचालनासन का अभ्यास सुबह खाली पेट करना सबसे अच्छा होता है. इससे शरीर सर्दियों में गर्म रहता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है. हालांकि, गर्भवती महिलाएं और जिन लोगों को घुटनों या कमर में गंभीर समस्या है, उन्हें यह आसन करने से पहले डॉक्टर या योग प्रशिक्षक से सलाह जरूर लेनी चाहिए.


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Written by: Taushif

27 Nov 2025  ·  Published: 21:14 IST

जिम जाने का टाइम नहीं? घर बैठे करें ये 5 पिलाटे एक्सरसाइज, मिलेगी सेलेब जैसी फिटनेस

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Home Pilates Workout: आजकल लोग इतने व्यस्त हो गए हैं कि उनके पास जिम जाने का समय ही नहीं बचता. कभी ऑफिस की डेडलाइंस, कभी घर की जिम्मेदारियां और दिनभर का हंगामा जिम तक पहुंचना मुश्किल बना देता है. अगर आप भी ऐसी ही लाइफस्टाइल जी रहे हैं तो यह खबर आपके लिए है.

फिट रहने के लिए न तो महंगी जिम मेंबरशिप चाहिए और न भारी-भरकम मशीनें. दीपिका पादुकोण, आलिया भट्ट और कैटरीना कैफ जैसी सेलेब्स की ट्रेनर यास्मीन कराचीवाला ने हाल ही में 5 पिलाटे वर्कआउट शेयर किए हैं, जिन्हें आप घर पर सिर्फ 10 मिनट में कर सकते हैं और शरीर को फ्लेक्सिबल बना सकते हैं.

1. रोल डाउन टू प्लैंक
सीधे खड़े होकर धीरे-धीरे झुकें, हाथों को जमीन तक लाएं और आगे बढ़ाकर प्लैंक पोज में आएं. कुछ सेकंड रुकें और फिर धीरे-धीरे वापस खड़े हो जाएं.

फायदा: पेट, पीठ और कंधे मजबूत होते हैं और बैलेंस बेहतर होता है.

2. लेग पुल फ्रंट
प्लैंक पोज में आएं और एक-एक करके पैर को ऊपर उठाएं. कूल्हे और कमर स्थिर रखें.

फायदा: पेट, हिप्स और पैरों की मसल्स टोन होती हैं, बैलेंस सुधरता है.

3. सीटिंग स्पाइन ट्विस्ट
पैर फैलाकर सीधे बैठें, पंजे ऊपर की ओर रखें. दोनों हाथ कंधे की ऊंचाई पर फैलाएं और कमर से शरीर को एक तरफ घुमाएं, सांस छोड़ें. फिर दूसरी तरफ यही करें.

फायदा: रीढ़ की हड्डी लचीली होती है और साइड पेट की मसल्स मजबूत होती हैं.

4. स्विमिंग की हंड्रेड्स
पीठ के बल लेटें, पैर और कंधे मैट से ऊपर उठाएं. दोनों हाथ तेजी से ऊपर-नीचे करें. पांच बार सांस अंदर और पांच बार बाहर छोड़ें. 100 बीट्स तक करें.

फायदा: पेट की मसल्स एक्टिव होती हैं, ब्लड फ्लो और सांस बेहतर होती है.

5. गेंद की तरह लुढ़कना
घुटनों को छाती से लगाकर बैठें, पीठ को C-शेप में करें. सांस लें और पीछे की ओर कंधों तक लुढ़कें. सांस छोड़ते हुए बिना पैर या सिर जमीन पर टिकाए आगे आएं.

फायदा: रीढ़ की फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ती है, कोर मजबूत होता है और कोऑर्डिनेशन बेहतर होता है.

इन पांच पिलाटे एक्सरसाइज को रोज 10 मिनट करने से आप बिना जिम जाए भी फिट और फ्लेक्सिबल बॉडी पा सकते हैं.


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Written by: Taushif

24 Sep 2025  ·  Published: 11:38 IST