How to start Datacenter or Domain and hosting business ?
Top Digital Marketing Companies
Top Flutter App Development Companies
How to earn money Online ?
How to start Ecommerce business ?
इंसानी खोपड़ियों से बने बर्तन, मानव त्वचा की कुर्सियां; अमेरिका का सबसे खौफनाक सीरियल किलर
BBDS App Download
× Bindass Bol Home About News Contact Search

बुजुर्गों के लिए चेतावनी! ये 5 सीड्स सेहत के बजाय पहुंचा सकते हैं नुकसान

File

फाइल फोटो

Elderly Health: सीड्स यानी बीज देखने में छोटे जरूर होते हैं, लेकिन इनमें मौजूद पोषक तत्व शरीर के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं. इनमें विटामिन, मिनरल्स, हेल्दी फैट्स और प्लांट-बेस्ड प्रोटीन की भरपूर मात्रा होती है, जो दिल को हेल्दी रखते हैं, एनर्जी बढ़ाते हैं और डाइजेशन सुधारते हैं. लेकिन हर चीज की तरह सीड्स भी हर किसी के लिए फायदेमंद नहीं होते, खासकर बुजुर्गों के लिए.

उम्र बढ़ने के साथ पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है. ऐसे में कुछ बीज पेट फूलने, गैस या कब्ज जैसी दिक्कतें पैदा कर सकते हैं. कुछ छोटे और सख्त बीज गले में फंस सकते हैं या दम घुटने का खतरा बढ़ा सकते हैं. साथ ही, कई बीज ऐसी दवाओं के असर को भी कम कर देते हैं जो ब्लड प्रेशर, शुगर या कोलेस्ट्रॉल के लिए ली जाती हैं. इसलिए यह जानना जरूरी है कि कौन से सीड्स बुजुर्गों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकते हैं.

1. पॉपी सीड्स
खसखस केक या ब्रेड में स्वाद और क्रंच लाने के लिए डाली जाती है. लेकिन इनमें कुछ ऐसे प्राकृतिक तत्व होते हैं जो पेन किलर या ब्लड थिनर दवाओं के असर को प्रभावित कर सकते हैं. बुजुर्गों को इन्हें चबाना या निगलना भी मुश्किल होता है. इसलिए खसखस का इस्तेमाल बहुत सीमित मात्रा में और पका हुआ ही करें.

2. चिया सीड्स
चिया सीड्स फाइबर और ओमेगा-3 से भरपूर होते हैं, लेकिन इन्हें सूखा खाने से पेट में सूजन या कब्ज हो सकता है क्योंकि ये पानी के संपर्क में आने पर फूल जाते हैं. इन्हें खाने से पहले पानी या दूध में भिगोना जरूरी है. बुजुर्ग दिन में 1–2 चम्मच तक ही सुरक्षित रूप से खा सकते हैं.

3. अलसी के बीज
अलसी के बीज पाचन और हार्ट हेल्थ के लिए लाभदायक हैं, लेकिन अधिक मात्रा में खाने से गैस या दस्त की दिक्कत हो सकती है. साथ ही, ये कुछ दवाओं के असर को भी कम कर सकते हैं. इन्हें खाने से पहले पीसकर थोड़ी मात्रा में ही लें.

4. सूरजमुखी के बीज
सूरजमुखी के बीज हेल्दी स्नैक हैं, लेकिन मार्केट में मिलने वाले पैक्ड बीजों में नमक या चीनी मिलाई जाती है, जो ब्लड प्रेशर बढ़ा सकती है और किडनी पर असर डाल सकती है. हमेशा बिना नमक-चीनी वाले बीज चुनें और कम मात्रा में खाएं.

5. हेम्प सीड्स
भांग के बीज प्रोटीन और हेल्दी फैट से भरपूर हैं, लेकिन ज्यादा मात्रा में खाने से पेट खराब हो सकता है. साथ ही ये ब्लड थिनर दवाओं के असर को भी प्रभावित कर सकते हैं. इसलिए दिन में 1–2 बड़े चम्मच तक ही लें और अगर कोई दवा ले रहे हों तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें.


BBDS Logo

Bindass Bol Dil Se

Written by: Taushif

23 Oct 2025  ·  Published: 20:13 IST

अंडे खाने वाले हो जाए सावधान, वरना हो जाएंगे गंभीर बीमारी के शिकार; H5N1 बर्ड फ्लू का बढ़ा खतरा

File

फाइल फोटो

बर्ड फ्लू: उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले के एक पोल्ट्री फार्म में बर्ड फ्लू (H5N1 एवियन इन्फ्लूएंजा) के मामले सामने आने के बाद पूरे राज्य में स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी जिलों को एहतियात बरतने के निर्देश दिए हैं. बरसात के मौसम में डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों के साथ-साथ अब बर्ड फ्लू ने भी चिंता बढ़ा दी है.

क्या अंडे खाना बर्ड फ्लू में सुरक्षित है?
बर्ड फ्लू मुख्य रूप से पक्षियों को प्रभावित करने वाला वायरस है, लेकिन कभी-कभी यह इंसानों को भी संक्रमित कर सकता है. हैदराबाद के मेडिकल एडवाइजर और टेलीमेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. मुरली भास्कर एम (MBBS, FDM) के मुताबिक, संक्रमित मुर्गियों के अंडों में भी यह वायरस मौजूद हो सकता है, लेकिन इसकी संभावना बहुत कम होती है. डॉ. भास्कर का कहना है कि अगर अंडों को सही तरीके से पकाया जाए, तो वायरस पूरी तरह नष्ट हो जाता है और उन्हें खाना सुरक्षित हो जाता है.

अंडे को सुरक्षित तरीके से पकाने के टिप्स
1.    अंडे अच्छी तरह पकाएं – अंडे का योक (पीला हिस्सा) लिक्विड नहीं, बल्कि पूरी तरह सॉलिड होना चाहिए। वायरस और बैक्टीरिया को मारने के लिए तापमान कम से कम 74°C (165°F) होना चाहिए.
2.    हाथ धोएं – कच्चे अंडे को छूने के बाद कम से कम 20 सेकंड तक साबुन और पानी से हाथ धोएं.
3.    बर्तनों की सफाई करें – जिन बर्तनों, चम्मच या सतह पर कच्चे अंडे रखे गए हों, उन्हें तुरंत गर्म पानी और साबुन से साफ करें.
4.    अलग रखें – कच्चे अंडों को फलों, सब्जियों और पके हुए खाने से अलग रखें ताकि संक्रमण का खतरा न हो.
5.    अलग बर्तन इस्तेमाल करें – चिकन और अंडों के लिए अलग कटिंग बोर्ड और चाकू का इस्तेमाल करें.

रिसर्च में सामने आया नया खतरा
इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस (IISc) के बायोकेमिस्ट्री विभाग के डॉ. केशवर्धन सन्नुला की टीम ने H5N1 वायरस के 2.3.4.4b क्लेड पर अध्ययन किया है. यह स्ट्रेन वर्तमान में दुनिया के कई देशों में फैल रहा है और पक्षियों की कई प्रजातियों को संक्रमित कर चुका है. रिसर्च में पाया गया कि इस स्ट्रेन में ऐसे जेनेटिक म्यूटेशन हैं, जो पहले महामारी फैला चुके फ्लू वायरसों में देखे गए थे. इन बदलावों के कारण यह वायरस इंसानों को अधिक आसानी से संक्रमित कर सकता है.

बर्ड फ्लू से बचाव के उपाय
1.    पोल्ट्री फार्म या पक्षियों के संपर्क से बचें, खासकर बर्ड फ्लू प्रभावित इलाकों में.
2.    कच्चा या अधपका मांस और अंडे न खाएं.
3.    रसोई में साफ-सफाई का खास ध्यान रखें.
4.    बुखार, खांसी, सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.


BBDS Logo

Bindass Bol Dil Se

Written by: Taushif

15 Aug 2025  ·  Published: 16:35 IST

तन-मन की थकान से कैफीन नहीं, ये हर्बल-टी दिलाएगी आराम, याददाश्त बढ़ाने में भी करेगी मदद

File

फाइल फोटो

Herbal Tea Benefits: जब शरीर और दिमाग थक जाते हैं, तो लोग अक्सर चाय या कॉफ़ी पीते हैं. आमतौर पर माना जाता है कि चाय और कॉफ़ी थकान दूर करते हैं और दिमाग को ध्यान लगाने में मदद करते हैं, लेकिन इनका गलत समय पर और ज़्यादा सेवन पूरे शरीर की सेहत पर असर डालता है. ऐसे में, आयुर्वेद एक ऐसा उपाय बताता है जो कैफीन के स्वाद से बेहतर है और शरीर के लिए फायदेमंद भी है.

आयुर्वेद में थकान और तनाव को नर्वस सिस्टम से जोड़ा जाता है. जब नसें थक जाती हैं, तो आँखें बंद होने लगती हैं, नींद आने लगती है, काम करने का मन नहीं करता, और पूरा शरीर अपना संतुलन खो देता है. सिर से पैर तक, शरीर को सिर्फ़ आराम चाहिए होता है. इस स्थिति में, हर्बल चाय बहुत फायदेमंद होती है, क्योंकि यह शरीर को किसी भी तरह से नुकसान नहीं पहुँचाती और याददाश्त बेहतर बनाने में मदद करती है.

इस हर्बल चाय को बनाने के लिए आपको जटामांसी, ब्राह्मी और कैमोमाइल की ज़रूरत होगी. ये तीनों चीज़ें बाज़ार में आसानी से मिल जाती हैं. जटामांसी और ब्राह्मी जड़ी-बूटियाँ हैं, और कैमोमाइल एक औषधीय फूल है. इन तीनों को एक साथ पानी में उबालकर काढ़ा बना लें. इस मिश्रण को छान लें और गुनगुना होने पर पी लें. इससे शरीर एक्टिव और स्वस्थ रहेगा. ये तीनों चीज़ें मिलकर थकान कम करती हैं और नसों को आराम देती हैं, जिससे अच्छी नींद आती है.

जटामांसी दिल और चेतना को स्थिर करती है और दिमाग को संतुलित रखती है. यह घबराहट और बेचैनी से राहत देती है. इसमें मौजूद न्यूरो-रिलैक्सेंट कंपाउंड नर्वस सिस्टम को शांत करते हैं, और धीरे-धीरे शरीर में थकान कम महसूस होती है. दूसरी ओर, ब्राह्मी दिमाग में स्पष्टता और एकाग्रता लाती है. यह शरीर में तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन कोर्टिसोल और एड्रेनालाईन को भी संतुलित करती है. ये दोनों हार्मोन शरीर में चिंता और तनाव बढ़ाते हैं.

इसके अलावा, कैमोमाइल में ऐसे गुण होते हैं जो नींद लाने में मदद करते हैं. दिमाग को शांत करने के साथ-साथ, यह गहरी नींद लाने में भी मदद करता है. हर्बल चाय पीने का सबसे अच्छा समय जानना भी ज़रूरी है. इसे रात को सोने से पहले, या लंबे समय तक तनाव रहने पर पीना सबसे अच्छा होता है. आप काम करते समय एकाग्रता बढ़ाने के लिए भी इसे पी सकते हैं. रेगुलर चाय की तरह, इसकी लत नहीं लगती और यह पूरी तरह से सुरक्षित है.
 


BBDS Logo

Bindass Bol Dil Se

Written by: Taushif

08 Dec 2025  ·  Published: 21:12 IST

सर्दी-जुकाम, कमजोरी और थकान को कहें अलविदा, रोजाना लें एक चम्मच च्यवनप्राश

File

फाइल फोटो

Chyawanprash Benefits: च्यवनप्राश भारत में सदियों से इस्तेमाल किया जा रहा एक पारंपरिक आयुर्वेदिक फॉर्मूला है. इसका नाम ऋषि च्यवन के नाम पर रखा गया, जिनके बारे में माना जाता है कि उन्होंने अपनी उम्र, ताकत और स्वास्थ्य सुधारने के लिए इस औषधीय मिश्रण का उपयोग किया था. आज भी कई लोग इसे रोज़ाना लेते हैं, क्योंकि यह शरीर की ताकत, ऊर्जा और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है.

च्यवनप्राश का सबसे बड़ा लाभ यह माना जाता है कि यह इम्युनिटी मजबूत करता है. विशेषकर सर्दियों में लोग इसे ठंड, खांसी और जुकाम जैसी छोटी लेकिन परेशान करने वाली समस्याओं से बचने के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह अपनाते हैं. इसका मुख्य घटक आंवला है, जो विटामिन-सी का समृद्ध स्रोत माना जाता है. यह शरीर में एंटीऑक्सीडेंट बढ़ाकर ऊर्जा, त्वचा और पाचन के लिए भी लाभकारी होता है.

च्यवनप्राश में शामिल ब्रह्मी और शंखपुष्पी मस्तिष्क को शांत रखने और याददाश्त सुधारने के लिए जानी जाती हैं. वहीं गिलोय और पिप्पली जैसी जड़ी-बूटियां फेफड़ों और श्वसन तंत्र को मजबूत करने में मदद करती हैं और कफ को संतुलित करती हैं. इसके अलावा, इसमें मौजूद अश्वगंधा और विदारीकंद शरीर में ताकत और स्टैमिना बढ़ाने में मदद करते हैं. इन्हें अक्सर थकान, कमजोरी और उम्र से जुड़े बदलावों को धीमा करने में सहायक माना जाता है.

नियमित सेवन से लोग अक्सर त्वचा में निखार, बालों में मजबूती और सेहत में सुधार महसूस होने की बात कहते हैं. आमतौर पर इसे सुबह खाली पेट या दूध के साथ 1–2 चम्मच लिया जाता है, जबकि बच्चों के लिए आधा चम्मच पर्याप्त माना जाता है. हालांकि, डायबिटीज वाले लोग च्यवनप्राश का शुगर-फ्री या शहद रहित विकल्प चुनें. साथ ही, किसी भी आयुर्वेदिक दवा को अपनी दिनचर्या में शामिल करने से पहले डॉक्टर या विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर होता है.


BBDS Logo

Bindass Bol Dil Se

Written by: Taushif

24 Nov 2025  ·  Published: 11:48 IST