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Premature White Hair: आजकल बहुत से लोग समय से पहले सफेद बालों की समस्या से जूझ रहे हैं। पहले जहाँ 40-45 की उम्र के बाद बाल सफेद होने लगते थे, वहीं अब यह समस्या 14 से 25 साल के युवाओं में भी देखने को मिल रही है। जब सिर पर पहली बार सफेद बाल आते हैं, तो व्यक्ति चिंतित हो जाता है। लेकिन घबराने की ज़रूरत नहीं है। अगर समय रहते कारणों को समझ लिया जाए और कुछ आसान उपाय अपनाए जाएँ, तो इस समस्या से बचा जा सकता है।
बालों का रंग एक खास तत्व 'मेलेनिन' के कारण होता है। यही तत्व त्वचा और बालों को रंग देता है। बाल एक चक्र में लगातार बढ़ते और गिरते रहते हैं। हर नए चक्र के शुरू होने पर मेलेनिन बनता है। लेकिन कभी-कभी 7-15 चक्रों के बाद यह मेलेनिन बनना बंद हो जाता है, जिससे बाल सफेद होने लगते हैं।
इसके अलावा, कई अन्य कारण भी हैं - जैसे गलत खान-पान, तनाव, नींद की कमी, धूम्रपान, शराब का सेवन, विटामिन बी12 की कमी, आनुवंशिक कारण आदि। शोध में सामने आया है कि धूम्रपान ऑक्सीडेटिव तनाव को बढ़ाता है, जिससे बालों की जड़ों को नुकसान पहुँचता है और मेलेनिन का उत्पादन कम हो जाता है।
सफ़ेद बालों को रोकने के लिए सबसे ज़रूरी है एक स्वस्थ जीवनशैली अपनाना। इसके लिए सबसे पहले आपको विटामिन, एंटीऑक्सीडेंट और मिनरल से भरपूर संतुलित आहार लेना चाहिए। हरी सब्ज़ियाँ, फल, मेवे और बीज जैसे खाद्य पदार्थ आपके बालों को पोषण देते हैं। साथ ही, रोज़ाना कम से कम 7-8 घंटे की नींद ज़रूर लें ताकि शरीर खुद को रिपेयर कर सके।
तनाव से दूर रहना, योग करना, प्राणायाम और ध्यान जैसी तकनीकें अपनाना भी मददगार होता है। साथ ही, धूम्रपान से पूरी तरह दूर रहें क्योंकि यह बालों के स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक है।
हालाँकि सफ़ेद बालों को पूरी तरह से रोकना संभव नहीं है, लेकिन सही खान-पान, जीवनशैली और देखभाल से इसे काफी हद तक रोका जा सकता है और बालों को लंबे समय तक स्वस्थ और काला रखा जा सकता है।
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Hair Fall Causes: आयुर्वेद में बालों की देखभाल को बहुत ज़रूरी माना जाता है. पुराने ज़माने से ही कहा जाता रहा है कि बाल न सिर्फ़ खूबसूरती बढ़ाते हैं बल्कि हमारी सेहत और लाइफस्टाइल का सेंटर भी हैं. आयुर्वेद के अनुसार, हर इंसान के शरीर का नेचर अलग होता है, और बालों को पोषण देने का तरीका वात, पित्त और कफ के हिसाब से अलग-अलग होता है.
सही तेल, सही मात्रा, सही टेम्परेचर और सही समय का इस्तेमाल करना, ये सभी ज़रूरी बातें हैं. आजकल लोग बालों में तेल तो लगाते हैं, लेकिन अक्सर छोटी-छोटी गलतियों की वजह से फ़ायदा नहीं मिल पाता और बाल कमज़ोर या रूखे दिखने लगते हैं. सबसे बड़ी गलती जो लोग करते हैं, वह है बहुत ज़्यादा तेल लगाना. लोगों को लगता है कि ज़्यादा तेल लगाने से बाल शाइन करेंगे और मज़बूत बनेंगे, लेकिन असल में ऐसा नहीं है. बालों में ज़्यादा तेल लगने से वे चिपचिपे हो जाते हैं और उन्हें धोना मुश्किल हो जाता है. आयुर्वेद में उतना ही तेल लगाने की सलाह दी जाती है, जितनी बालों और स्कैल्प को ज़रूरत हो.
हल्का तेल, जो उंगलियों से आसानी से स्कैल्प तक पहुंच जाए, काफ़ी है. यह बालों की जड़ों को पोषण देता है और उन्हें मज़बूत बनाता है. एक और आम गलती है बहुत ज़्यादा गर्म तेल का इस्तेमाल करना. बहुत ज़्यादा गर्म तेल बालों और स्कैल्प दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है. यह बालों की नमी छीन लेता है और उन्हें टूटने का कारण बनता है. इसलिए, तेल थोड़ा गर्म होना चाहिए ताकि यह बालों और स्कैल्प को नुकसान पहुंचाए बिना बालों की जड़ों को पोषण दे सके. हल्का गर्म तेल लगाने से न सिर्फ़ बाल मज़बूत होते हैं बल्कि उनकी चमक भी बढ़ती है.
रात भर तेल लगाकर सोना भी सही तरीका नहीं है. पहले लोग रात भर तेल लगाकर सोते थे, लेकिन आजकल हवा में धूल और गंदगी ज़्यादा है. रात भर तेल लगा रहने से स्कैल्प पर धूल जम सकती है और खुजली या इंफेक्शन हो सकता है. इसलिए, तेल लगाने के बाद, लगभग आधे घंटे तक बालों की हल्के हाथों से मालिश करना और फिर धो लेना सबसे अच्छा है. इससे बालों को ज़रूरी पोषण मिलता है और स्कैल्प साफ़ रहता है. लोग अक्सर रोज़ तेल लगाते हैं, लेकिन यह तरीका हेल्दी नहीं है. रोज़ तेल लगाने से बाल ज़्यादा चिपचिपे हो जाते हैं और स्कैल्प की खुद तेल बनाने की क्षमता कम हो जाती है.
आयुर्वेद के अनुसार, हफ़्ते में दो या तीन बार तेल लगाना काफ़ी है. इससे बाल मज़बूत होते हैं, उनकी चमक बनी रहती है और जड़ों तक सही पोषण पहुंचता है. सही तेल चुनना भी बहुत ज़रूरी है. हर किसी के बालों की ज़रूरतें अलग-अलग होती हैं. अगर बाल रूखे, कमज़ोर हैं, या बाल झड़ने की समस्या है, तो नारियल, बादाम, या आंवला का तेल सबसे अच्छा है. ये नमी बनाए रखते हैं और जड़ों को मज़बूत करते हैं. अगर बाल जल्दी ऑयली हो जाते हैं या बहुत ज़्यादा चिपचिपे लगते हैं, तो जैतून या अरंडी का तेल इस्तेमाल करना चाहिए. ये बालों को मज़बूत करते हैं और स्कैल्प को बैलेंस करते हैं. गलत तेल चुनने से बाल खराब भी हो सकते हैं और उनकी चमक भी कम हो सकती है.
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Gluten Allergy Diet Options: आजकल लोगों की लाइफस्टाइल और खाने-पीने की आदतों में तेजी से बदलाव आया है. बाहर का खाना, पैक्ड फूड और फास्ट फूड रोज़मर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गए हैं. यही कारण है कि अलग-अलग तरह की हेल्थ प्रॉब्लम बढ़ने लगी हैं. इनमें से एक आम समस्या है ग्लूटेन एलर्जी. ग्लूटेन एक तरह का प्रोटीन है, जो गेहूं, जौ और राई जैसे अनाजों में पाया जाता है. जिन लोगों को ग्लूटेन से एलर्जी होती है, उनके शरीर में इसे पचाने की क्षमता कम हो जाती है. ऐसे लोग जब गेहूं या जौ से बनी चीजें खाते हैं तो उन्हें पाचन संबंधी दिक्कतें, थकान, कमजोरी, पेट फूलना या स्किन रैश जैसी परेशानियां हो सकती हैं.
अक्सर लोग सोचते हैं कि ग्लूटेन एलर्जी होने के बाद उनकी डाइट बोरिंग और बहुत सीमित हो जाएगी. उन्हें लगेगा कि अब स्वादिष्ट खाना उनके लिए मना हो गया है. लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट है. सही जानकारी और थोड़ी-सी क्रिएटिविटी के साथ आप भी टेस्टी और हेल्दी ग्लूटेन-फ्री फूड खा सकते हैं.
दिल्ली के धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट (इंटरनल मेडिसिन) डॉ. गौरव जैन के मुताबिक, “अगर लोग सही फूड्स के बारे में जान लें तो उन्हें पता चलेगा कि ग्लूटेन-फ्री डाइट भी स्वादिष्ट और पौष्टिक हो सकती है.” डॉ. जैन ने कुछ ऐसे फूड्स बताए हैं जो न सिर्फ ग्लूटेन-फ्री डाइट को आसान बनाते हैं, बल्कि शरीर को जरूरी पोषण भी देते हैं.
1. ब्राउन राइस
ग्लूटेन एलर्जी वाले लोगों के लिए ब्राउन राइस एक बेहतरीन विकल्प है. यह कार्बोहाइड्रेट का अच्छा स्रोत है और सफेद चावल की तुलना में ज्यादा फाइबर देता है. ब्राउन राइस जल्दी डाइजेस्ट होते हैं और लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराते हैं. इसे आप दाल, सब्जी या सूप के साथ खा सकते हैं.
2. क्विनोआ
क्विनोआ आजकल सुपरफूड के तौर पर काफी लोकप्रिय है. यह ग्लूटेन-फ्री होने के साथ-साथ प्रोटीन और जरूरी अमीनो एसिड से भरपूर है. इसमें मौजूद मिनरल्स हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत बनाते हैं. क्विनोआ से आप सलाद, खिचड़ी, पुलाव या यहां तक कि स्नैक भी तैयार कर सकते हैं.
3. अंडे
ग्लूटेन-फ्री डाइट में प्रोटीन के लिए अंडे बेहतरीन विकल्प हैं. यह न सिर्फ सस्ते हैं, बल्कि इन्हें बनाना भी आसान है. अंडों में प्रोटीन के साथ विटामिन D, B6, B12 और कई जरूरी मिनरल्स भी पाए जाते हैं, जो शरीर को ताकत और इम्यूनिटी देने में मदद करते हैं.
4. नट्स और सीड्स
बादाम, अखरोट, काजू, अलसी के बीज, चिया सीड्स और सूरजमुखी के बीज जैसे नट्स और सीड्स प्रोटीन, हेल्दी फैट्स और फाइबर का शानदार स्रोत हैं. ये दिमाग की सेहत, एनर्जी और इम्यून सिस्टम के लिए भी फायदेमंद हैं. इन्हें आप सुबह के नाश्ते में, स्मूदी में या शाम के स्नैक के तौर पर खा सकते हैं.
5. शकरकंद
शकरकंद फाइबर, विटामिन और मिनरल्स से भरपूर होता है. यह ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने के साथ पाचन में भी मदद करता है. आप इसे उबालकर, रोस्ट करके या स्नैक की तरह खा सकते हैं. खासतौर पर सर्दियों के मौसम में शकरकंद बेहद हेल्दी और स्वादिष्ट विकल्प है.
ग्लूटेन-फ्री डाइट को मजेदार बनाने के टिप्स
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How to Look Younger Naturally: आपने अक्सर देखा होगा कि कुछ लोग अपनी असली उम्र से छोटे और जवान दिखाई देते हैं, जबकि कई लोग उम्र से पहले ही बूढ़े दिखने लगते हैं. असल में यह सब हमारी जीवनशैली और आदतों पर निर्भर करता है. अगर आप चाहते हैं कि आपकी त्वचा लंबे समय तक जवान और सुंदर बनी रहे, तो आपको अपने खानपान, दिनचर्या और देखभाल पर ध्यान देना होगा. केवल क्रीम और कॉस्मेटिक चीज़ें ही नहीं, बल्कि आपकी रोज़मर्रा की आदतें भी आपकी उम्र को प्रभावित करती हैं.
1. फलों का सेवन बढ़ाएं
अगर आपको लगता है कि आपकी स्किन ढीली हो रही है या चेहरे पर झुर्रियां और फाइन लाइन्स दिखने लगी हैं, तो सबसे पहले अपनी डाइट पर ध्यान दें. फलों का सेवन बढ़ाना बेहद ज़रूरी है. फल विटामिन्स, मिनरल्स और एंटीऑक्सिडेंट्स से भरपूर होते हैं, जो स्किन को पोषण देते हैं. ये त्वचा की इलास्टिसिटी यानी खिंचाव बनाए रखने में मदद करते हैं और स्किन को हेल्दी ग्लो देते हैं. खासकर संतरा, पपीता, सेब, बेरीज़ और अमरूद जैसे फल खाने से शरीर को भरपूर विटामिन सी मिलता है, जो कोलेजन बनाने में मदद करता है.
2. हरी सब्जियां खाएं
हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करने से शरीर को विटामिन ए, सी, के और फोलेट मिलता है. पालक, मेथी, सरसों और ब्रोकली जैसी सब्जियां त्वचा को डिटॉक्स करती हैं और उसे जवान बनाए रखती हैं. इनमें मौजूद पोषक तत्व स्किन सेल्स को रिपेयर करते हैं और चेहरे पर नेचुरल चमक लाते हैं.
3. सूरज की हानिकारक किरणों से बचें
धूप से निकलने वाली पराबैंगनी (UV) किरणें त्वचा की सबसे बड़ी दुश्मन होती हैं. ये किरणें त्वचा पर समय से पहले बुढ़ापा लाने का मुख्य कारण मानी जाती हैं. अगर आप ज्यादा देर धूप में रहते हैं, तो झुर्रियां, डार्क स्पॉट्स और पिगमेंटेशन की समस्या जल्दी आने लगती है. इससे बचने के लिए बाहर निकलते समय स्किन को ढककर रखें और रोज़ाना सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें. SPF 30 या उससे ज्यादा वाला सनस्क्रीन आपकी स्किन को लंबे समय तक सुरक्षित रख सकता है.
4. शरीर को हाइड्रेटेड रखें
पानी पीना न केवल शरीर बल्कि त्वचा के लिए भी बेहद ज़रूरी है. पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से स्किन कोमल और मुलायम रहती है. डिहाइड्रेशन यानी पानी की कमी से त्वचा रूखी और बेजान हो जाती है. इसलिए दिनभर में कम से कम 8–10 गिलास पानी ज़रूर पिएं. नारियल पानी, नींबू पानी और फ्रूट जूस भी शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करते हैं.
5. तनाव से दूरी बनाएं
तनाव यानी स्ट्रेस आपकी त्वचा पर जल्दी असर डालता है. लगातार तनाव में रहने से चेहरे पर थकान, डार्क सर्कल्स और झुर्रियां आने लगती हैं. तनाव को कम करने के लिए मेडिटेशन, योग और प्राणायाम बेहद फायदेमंद हैं. इसके अलावा, अपनी हॉबीज़ और पसंदीदा गतिविधियों के लिए समय निकालें, जिससे मानसिक शांति मिले और त्वचा पर सकारात्मक असर दिखे.
6. भरपूर नींद लें
नींद आपकी त्वचा की सबसे अच्छी दोस्त है. जब आप सोते हैं तो आपका शरीर और त्वचा खुद को रिपेयर करते हैं. नींद की कमी से चेहरा थका हुआ और बूढ़ा दिखने लगता है. रोजाना कम से कम 7–8 घंटे की गहरी नींद लेना बहुत जरूरी है. नींद पूरी होने पर चेहरे पर नेचुरल ग्लो आता है और आंखों के नीचे काले घेरे भी नहीं पड़ते.
7. संतुलित जीवनशैली अपनाएं
फास्ट फूड, तैलीय और जंक फूड से दूरी बनाएं. ये चीजें स्किन पर मुंहासे और ऑयलीनेस लाती हैं. इसकी जगह पौष्टिक आहार, ताजे फल-सब्जियां और पर्याप्त प्रोटीन का सेवन करें. साथ ही रोज़ाना हल्का व्यायाम करें. वॉकिंग, योग या जॉगिंग से खून का संचार बेहतर होता है और चेहरा ताजा दिखाई देता है.