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Benefits of Isabgol: इसबगोल यानी प्लांटैगो ओवाटा के बीजों की भूसी को आयुर्वेद में बहुत फायदेमंद माना गया है. यह सिर्फ पाचन के लिए नहीं, बल्कि कई अन्य बीमारियों में भी उपयोगी है। इसबगोल में फाइबर की मात्रा अत्यधिक होती है, जो पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में मदद करता है. कब्ज से राहत पाने के लिए इसका नियमित सेवन बेहद प्रभावी है. यह मल त्याग को आसान बनाता है और पेट को पूरी तरह साफ करता है. अगर दस्त या डायरिया की समस्या हो, तो इसे दही या पानी में मिलाकर खाने से राहत मिलती है.
दिल के स्वास्थ्य की बात करें तो इसबगोल शरीर से खराब कोलेस्ट्रॉल को निकालने में मदद करता है, जिससे हार्ट डिजीज का खतरा कम होता है. डायबिटीज से जूझ रहे लोगों के लिए भी यह फायदेमंद है, क्योंकि यह ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में सहायक होता है.
वजन हो जाएगा कम
वजन घटाने की चाह रखने वालों के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है. सुबह खाली पेट इसबगोल को पानी या नींबू पानी के साथ लेने से भूख लंबे समय तक नहीं लगती, जिससे ओवरईटिंग से बचा जा सकता है। यह शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालता है, जिससे लिवर स्वस्थ रहता है और शरीर में हल्कापन महसूस होता है. इसबगोल का असर त्वचा और बालों पर भी दिखाई देता है. यह शरीर को अंदर से डिटॉक्स करता है, जिससे मुंहासे कम होते हैं और त्वचा पर नैचुरल ग्लो आता है. यह शरीर में नमी बनाए रखता है, जिससे रूसी और बाल झड़ने की समस्या में भी आराम मिलता है.
इन समस्याओं का रामबाण इलाज
बवासीर और गैस की समस्या में भी इसबगोल राहत देता है. यह मल को मुलायम बनाता है, जिससे दर्द और सूजन में कमी आती है. अगर एसिडिटी की शिकायत हो, तो दूध के साथ इसका सेवन करने से तुरंत आराम मिलता है. हालांकि, इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए. अत्यधिक सेवन से पेट फूलना, गैस या ऐंठन जैसी समस्या हो सकती है. अगर पर्याप्त पानी नहीं पिया गया तो यह आंतों में सूखकर कब्ज बढ़ा सकता है.
नोट: गर्भवती महिलाएं या जो किसी दवा का सेवन कर रही हैं, उन्हें डॉक्टर की सलाह लेकर ही इसका उपयोग करना चाहिए. इसबगोल सही तरीके से लिया जाए तो यह शरीर को अंदर से स्वस्थ और ऊर्जावान बनाता है.
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Ulcer Early Symptoms: अक्सर लोग पेट में जलन या खट्टी डकारों को साधारण एसिडिटी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यही लक्षण आगे चलकर अल्सर का कारण बन सकते हैं. बार-बार जलन, गैस, पेट दर्द, भूख कम लगना या वजन घटना जैसे संकेतों को हल्का नहीं लेना चाहिए. अल्सर शरीर के कई हिस्सों, जैसे मुंह, पेट या आंतों में बन सकता है, लेकिन सबसे ज्यादा इसके मामले आमाशय और आंतों में पाए जाते हैं.
जब पेट में बनने वाला तेज़ अम्ल पेट की भीतरी दीवारों को नुकसान पहुंचाने लगता है, तो वहां घाव बन जाता है। यह एसिड इतना प्रबल होता है कि लोहे की ब्लेड को भी गलाने की क्षमता रखता है, इसलिए यह पेट के ऊतकों पर गंभीर असर डाल सकता है.
अल्सर क्यों होता है?
गलत खानपान अल्सर का सबसे बड़ा कारण माना जाता है. ज्यादा चाय-कॉफी, तला-भुना और मसालेदार खाना, शराब, खट्टे खाद्य पदार्थ और तनाव, गुस्सा व चिंता शरीर में अम्ल बढ़ाते हैं. जब पेट में एसिड आवश्यकता से अधिक बनने लगता है, तो यह पेट की दीवारों को नुकसान पहुँचाकर अल्सर बना देता है. शुरुआती चरण में पेट में जलन, गैस, खट्टी डकारें और दर्द दिखाई देता है. स्थिति बिगड़ने पर छाती में जलन, उल्टी, पाचन गड़बड़ होना और कई बार मल में खून आने तक की समस्या हो सकती है. समय पर ध्यान न दिया जाए तो रोग गंभीर हो सकता है.
कैसे करें अल्सर से राहत?
अल्सर सही आहार और जीवनशैली अपनाने से काफी हद तक ठीक हो सकता है. कुछ प्राकृतिक उपाय पेट की जलन और घाव भरने में बेहद कारगर हैं. पत्ता गोभी और गाजर का जूस पेट की सूजन कम करता है, जबकि गाय का दूध और घी अम्लता को शांत करते हैं. हल्दी वाला दूध, बादाम का दूध और नारियल पानी पेट को आराम देते हैं. मुलेठी पेट की परत की सुरक्षा और हीलिंग में मदद करती है. अल्सर में छाछ, हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन, कच्चे केले की सब्जी, पालक और जवारों का रस बेहद लाभकारी है. इन्हें नियमित आहार में शामिल करना फायदेमंद रहता है.
इन चीजों से बचें
अल्सर से बचने और उसे नियंत्रित करने के लिए कुछ चीजों से दूर रहना बेहद जरूरी है. मैदा, जंक फूड, चाय-कॉफी, सोडा और शराब पेट में अम्ल बढ़ाते हैं और अल्सर को और खराब कर सकते हैं. इनका सेवन पूरी तरह से सीमित या बंद करना चाहिए. बेहतर पाचन के लिए हर दो घंटे में थोड़ा-थोड़ा खाना फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि इससे पेट पर दबाव कम पड़ता है. इसके साथ ही तनाव कम करना, समय पर भोजन लेना और पूरी नींद लेना अल्सर के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. सही दिनचर्या अपनाने से पेट की सेहत तेजी से सुधरती है.
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मानसून का मौसम हरियाली, ठंडक और सुकून का एहसास लेकर आता है. यह मौसम जहाँ मन को सुकून देता है, वहीं आपकी त्वचा के लिए कई समस्याएँ भी पैदा कर सकता है. इस मौसम में हवा में नमी बढ़ जाती है, जिससे त्वचा तैलीय हो जाती है और रोमछिद्र बंद हो सकते हैं. इससे मुहांसे, फंगल इन्फेक्शन, खुजली और त्वचा में जलन जैसी समस्याएँ होती हैं.
ऐसे में मानसून में त्वचा का ध्यान रखना बेहद ज़रूरी है. यहाँ कुछ आसान और असरदार स्किनकेयर टिप्स दिए गए हैं जो मानसून के मौसम में भी आपकी त्वचा को स्वस्थ और तरोताज़ा रखेंगे.
हाइड्रेटेड रहें
बारिश के मौसम में प्यास कम लगती है, लेकिन शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए पर्याप्त पानी पीना ज़रूरी है. रोज़ाना कम से कम 8-10 गिलास पानी पिएँ. यह न सिर्फ़ शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है, बल्कि त्वचा को अंदर से चमकदार भी बनाता है.
त्वचा की सफ़ाई का ध्यान रखें
मानसून के दौरान त्वचा पर गंदगी, पसीना और बैक्टीरिया जल्दी जमा हो जाते हैं. ऐसे में दिन में दो बार माइल्ड फेसवॉश से चेहरा साफ़ करें. नहाने के बाद, फंगल इन्फेक्शन से बचने के लिए अंडरआर्म्स, पैर की उंगलियों और घुटनों को अच्छी तरह सुखाना न भूलें.
हल्के और सूती कपड़े पहनें
मौसम में नमी के कारण, टाइट और सिंथेटिक कपड़े पहनने से त्वचा पर रैशेज़ और जलन हो सकती है। हमेशा हल्के, ढीले और सूती कपड़े पहनें जो पसीना सोख लें और त्वचा को सांस लेने दें.
त्वचा के अनुकूल मॉइस्चराइज़र लगाएँ
मानसून में तैलीय त्वचा के लिए तेल-मुक्त और पानी-आधारित मॉइस्चराइज़र का प्रयोग करें. इससे त्वचा मुलायम रहेगी और मुहांसे भी नहीं निकलेंगे.
स्वस्थ और संतुलित आहार लें
मानसून में तले हुए, मसालेदार और किण्वित खाद्य पदार्थों से बचें. इसके बजाय, मौसमी फलों और सब्जियों का सेवन बढ़ाएँ, जो त्वचा को पोषण देते हैं और शरीर की आंतरिक प्रणाली को भी संतुलित रखते हैं.
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Questions to Ask Before Marriage: शादी जिंदगी का सबसे अहम फैसला होता है. यह केवल दो लोगों का नहीं, बल्कि दो परिवारों का भी रिश्ता होता है. इसलिए शादी से पहले एक-दूसरे को समझना और जरूरी मुद्दों पर खुलकर बात करना बेहद जरूरी है. इससे रिश्ते में पारदर्शिता आती है और आगे चलकर अनबन या गलतफहमी से बचा जा सकता है. आइए जानते हैं ऐसे 10 जरूरी सवाल जो आपको अपने होने वाले लाइफ पार्टनर से शादी से पहले ज़रूर पूछने चाहिए.
1. पैसों को लेकर सोच क्या है?
शादी के बाद वित्तीय मामलों को लेकर अक्सर तकरार होती है. इसलिए पहले ही यह जान लेना जरूरी है कि पार्टनर की सेविंग्स, खर्च, निवेश और लोन को लेकर क्या सोच है. इससे भविष्य की प्लानिंग बेहतर होगी.
2. बच्चों को लेकर विचार क्या हैं?
क्या पार्टनर बच्चे चाहते हैं? अगर हां, तो कितने और कब? उनकी परवरिश को लेकर सोच क्या है? इन बातों पर साफ बातचीत ज़रूरी है ताकि बाद में कोई भ्रम न रहे.
3. झगड़े को कैसे संभालते हैं?
हर रिश्ते में मतभेद होते हैं, लेकिन उन्हें सुलझाने का तरीका सबसे अहम होता है. क्या पार्टनर तुरंत बात करके सुलझाना पसंद करते हैं या थोड़ी दूरी बनाकर?
4. परिवार से रिश्ता कैसा है?
उनका अपने परिवार से रिश्ता कैसा है? वे माता-पिता के साथ कितना समय बिताना चाहते हैं? इन सवालों से आप रिश्तों की प्राथमिकता समझ सकते हैं.
5. घर की जिम्मेदारियों का बंटवारा कैसे होगा?
अगर दोनों वर्किंग हैं, तो घर के काम कैसे बांटे जाएंगे? कौन खाना बनाएगा, कौन बाजार जाएगा? ये बातें पहले ही तय हो जाएं तो रिश्ते में संतुलन बना रहता है.
6. करियर को लेकर क्या प्लान है?
क्या वे नौकरी बदलना चाहते हैं या बिजनेस करना चाहते हैं? इससे आप उन्हें सपोर्ट कर पाएंगे और आगे की प्लानिंग कर पाएंगे.
7. जीवनशैली कैसी है?
क्या पार्टनर को शांति पसंद है या पार्टी करना? जल्दी सोना पसंद है या देर रात तक जागना? ये बातें जानकर आप तालमेल बना सकते हैं.
8. फुर्सत के वक्त क्या करना पसंद है?
क्या पार्टनर अकेले समय बिताना पसंद करते हैं या आपके साथ रहना पसंद करेंगे? इससे आप उन्हें स्पेस देने या साथ समय बिताने में संतुलन रख सकते हैं.
9. बड़े फैसलों में कैसे प्रतिक्रिया देते हैं?
जैसे नौकरी छोड़ना, घर बदलना या परिवार की ज़िम्मेदारी उठाना – इन मुद्दों पर उनकी सोच क्या है? यह जानना बहुत जरूरी है.
10. भविष्य के सपने और लक्ष्य क्या हैं?
उनका ड्रीम क्या है? लाइफ से क्या चाहते हैं? क्या आप दोनों के लक्ष्य मिलते-जुलते हैं?