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Peanuts Health Benefits in Winter: सर्दियों में शरीर को गर्म रखने और इन्फेक्शन से बचाने के लिए गर्म और पोषक तत्वों से भरपूर खाना खाने की सलाह दी जाती है. सर्दियों में शरीर के लिए गर्मी, ताकत और अच्छी क्वालिटी का प्रोटीन ज़रूरी है और ये तीनों चीज़ें मूंगफली में पाई जाती हैं. मूंगफली एक सस्ती, आसान और बहुत ज़्यादा पौष्टिक सुपरफूड है जो सर्दियों में शरीर को फायदा पहुंचाती है. मूंगफली खाने से शरीर को अनगिनत फायदे होते हैं. जिस तरह से इन्हें खाया जाता है, उससे ये फायदे और भी बढ़ सकते हैं.
आयुर्वेद में मूंगफली को एक ऐसी दवा माना जाता है जो शरीर को बीमारियों से लड़ने के लिए तैयार करती है. मूंगफली वात दोष को बैलेंस करती है, हड्डियों और मांसपेशियों की मरम्मत में मदद करती है, दिल के लिए फायदेमंद है, कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करती है, सूजन कम करती है और पाचन को बेहतर बनाती है. कुल मिलाकर, मूंगफली में कई छिपे हुए गुण होते हैं जो शरीर को एनर्जी और पोषण देते हैं। ये प्रोटीन का एक अच्छा और सस्ता सोर्स भी हैं.
मूंगफली में विटामिन E और मोनोअनसैचुरेटेड फैट होते हैं, जो दिल को मज़बूत बनाते हैं और खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करते हैं. खराब कोलेस्ट्रॉल दिल में ब्लॉकेज पैदा कर सकता है. इसके अलावा, मूंगफली डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए भी अच्छी होती है. इनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, जो ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद करता है. इसलिए, डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए मूंगफली खाना फायदेमंद है.
मूंगफली वज़न बढ़ाने और घटाने दोनों में मददगार है. इनमें प्रोटीन और अच्छे फैट ज़्यादा होते हैं, जो वज़न बढ़ाने में मदद करते हैं, लेकिन अगर इन्हें सीमित मात्रा में और सही समय पर खाया जाए, तो ये वज़न कम करने में भी मदद कर सकते हैं. मूंगफली पेट भरने वाली होती है; थोड़ी सी मूंगफली खाने से आपको लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस हो सकता है.
इसके अलावा, ये त्वचा और दिमाग के लिए भी फायदेमंद हैं. मूंगफली में मौजूद विटामिन B-12 और अच्छे फैट दिमाग को पूरा पोषण देते हैं. अब सवाल यह उठता है कि मूंगफली खाने का सही समय क्या है? मूंगफली सुबह 10 से 11 बजे के बीच खाई जा सकती है. रात में मूंगफली खाने से बचें। गुड़ या शहद के साथ मूंगफली खाने से इसके फायदे दोगुने हो जाते हैं. इसके अलावा, आप मूंगफली से बनी मीठी डिश (चूरमा) बना सकते हैं, जिसमें आटा और तिल ज़रूर डालें.
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Long Distance Relationship Tips: आज के समय में रिश्तों की परिभाषा बदल रही है. पढ़ाई, नौकरी या करियर के कारण अक्सर कपल्स एक-दूसरे से दूर रहते हैं. ऐसे में कई लोग मानते हैं कि लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप को निभाना आसान नहीं होता, लेकिन सच्चाई यह है कि अगर रिश्ते में प्यार और भरोसा हो तो दूरी भी ज्यादा मायने नहीं रखती.
अगर आपको कोई ऐसा साथी मिल गया है जो आपके लिए परफेक्शन के करीब है और जिसके साथ आप अपना भविष्य देख सकते हैं, तो सिर्फ इस वजह से उसे खो देना कि आप दोनों एक जगह नहीं रहते, समझदारी नहीं है. बल्कि ज़रूरी यह है कि आप अपने रिश्ते को सहेजने के लिए कुछ खास कदम उठाएं. यहां हम आपको कुछ ऐसे टिप्स बता रहे हैं जिनकी मदद से आप अपने लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप को और मजबूत बना सकते हैं.
1. फोन उठाएं, बातचीत को बनाएं आधार
रिश्ते को बनाए रखने का सबसे आसान और मजबूत तरीका है बातचीत. अक्सर लोग सिर्फ चैट पर निर्भर रह जाते हैं और सोचते हैं कि मैसेज ही काफी है लेकिन सच यह है कि टेक्स्ट मैसेज में बहुत सारी बातें अधूरी रह जाती हैं. फोन पर लंबी बातचीत करना या वीडियो कॉल करना बेहद ज़रूरी है. एक-दूसरे की आवाज़ और चेहरा सुनने-देखने से भावनात्मक जुड़ाव गहरा होता है. कोशिश करें कि रोज़ कम से कम कुछ समय निकालकर एक-दूसरे से बात करें.
2. सुबह और रात को जरूर कनेक्ट हों
दिन की शुरुआत और अंत, दोनों ही रिश्ते को मज़बूत करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं. अगर आप सुबह उठते ही अपने पार्टनर से बात करते हैं और रात को सोने से पहले कनेक्ट होते हैं, तो यह रिश्ते में मिठास लाता है. इससे आपको महसूस होगा कि भले ही आप मीलों दूर हों, लेकिन एक-दूसरे के दिन का हिस्सा हैं. यह तरीका रिश्ते में भरोसा और अपनापन दोनों बढ़ाता है.
3. नियमित मुलाकात ज़रूरी है
चाहे रिश्ता कितना भी मजबूत क्यों न हो, मुलाकात का कोई विकल्प नहीं होता. लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप में यह थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन जरूरी है कि आप मिलने की योजना बनाएं. कम से कम हर तीन महीने में एक बार मिलने का लक्ष्य जरूर तय करें. अगर संभव हो तो हर महीने मिलने की कोशिश करें. मुलाकातें रिश्ते को और गहरा बनाती हैं और आपको साथ बिताए पलों की यादें देती हैं, जो अगली मुलाकात तक रिश्ते को जीवित रखती हैं.
4. ट्रिप और मुलाकात की योजना पहले से बनाएं
लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप में सबसे अहम होता है ‘उम्मीद’. यह जानना कि आप अगली बार कब मिलेंगे, रिश्ते में उत्साह बनाए रखता है. अगर आपके पास कोई निश्चित तारीख है तो यह दोनों के लिए खुशी और भरोसे का कारण बनती है. जब आपको पता होता है कि अगले महीने या अगले सीज़न में मुलाकात होगी, तो दूरी का एहसास कम हो जाता है.
5. जहां रहते हैं वहां मिलना भी है जरूरी
अक्सर कपल्स सोचते हैं कि लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप में मिलना हो तो किसी नई जगह ट्रिप प्लान करें. यह रोमांचक तो है, लेकिन जरूरी है कि आप एक-दूसरे की असल जिंदगी को भी समझें. कम से कम कुछ बार अपने-अपने शहर या रहने की जगह पर भी मिलें. इससे आपको यह जानने का मौका मिलेगा कि आपके पार्टनर का दैनिक जीवन कैसा है, उनका रूटीन, दोस्तों का दायरा और कामकाज का माहौल कैसा है. यह गहरी समझ रिश्ते को और पुख्ता बनाती है.
6. भरोसा और धैर्य रखें
लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप की सबसे बड़ी परीक्षा होती है भरोसा. हर रिश्ते में उतार-चढ़ाव आते हैं लेकिन जब आप दूर हों तो शक और असुरक्षा की भावना रिश्ते को कमजोर कर सकती है. ऐसे में एक-दूसरे पर विश्वास करना और धैर्य बनाए रखना सबसे अहम है. याद रखें कि लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप तभी सफल होता है जब आप अपने पार्टनर पर भरोसा करते हैं.
7. छोटे-छोटे सरप्राइज दें
कभी-कभी रिश्ते को खास बनाने के लिए सरप्राइज बेहद कारगर साबित होते हैं. यह जरूरी नहीं कि सरप्राइज महंगे हों. आप अचानक कोई प्यारा सा गिफ्ट भेज सकते हैं, हस्तलिखित पत्र भेज सकते हैं या उनके किसी खास दिन पर उनके पास पहुंच सकते हैं. यह छोटे-छोटे प्रयास रिश्ते को जीवित और ताज़ा बनाए रखते हैं.
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चुकंदर को हेल्थ और स्किन दोनों के लिए सुपरफूड माना जाता है. यही वजह है कि आजकल कई लोग सुबह खाली पेट Beetroot Juice पीकर दिन की शुरुआत करना पसंद करते हैं. कहा जाता है कि इससे स्टैमिना बढ़ता है, ब्लड फ्लो बेहतर होता है और स्किन पर नैचुरल ग्लो आता है. लेकिन क्या खाली पेट इसे पीना सभी के लिए फायदेमंद है? इस सवाल का जवाब न्यूट्रिशनिस्ट राशी चहल ने एक इंटरव्यू में दिया.
खाली पेट चुकंदर का जूस पीने के फायदे
न्यूट्रिशनिस्ट के मुताबिक, अगर आपका पाचन ठीक है तो खाली पेट चुकंदर का जूस पीना बेहद फायदेमंद हो सकता है.
आयरन और विटामिन का बेहतर अवशोषण: खाली पेट पीने पर शरीर बीटरूट में मौजूद आयरन, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट्स को जल्दी और बेहतर तरीके से अवशोषित करता है.
न्यूट्रिशनिस्ट का सुझाव है कि इसे सुबह नाश्ते से करीब 30 मिनट पहले या वर्कआउट से पहले नींबू का रस मिलाकर पिएं, इससे असर दोगुना हो जाता है.
किन लोगों को सावधानी रखनी चाहिए?
चुकंदर का जूस हर किसी के लिए सुरक्षित नहीं है, खासकर जिन लोगों को पेट से जुड़ी कोई समस्या है, उन्हें इसे खाली पेट नहीं पीना चाहिए.
न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह
राशी चहल कहती हैं कि खाली पेट बीटरूट जूस पीना फायदेमंद है, लेकिन सीमित मात्रा में. अगर आपको लो ब्लड प्रेशर, किडनी स्टोन या पेट की समस्या है, तो इसे डॉक्टर की सलाह के बिना न पिएं. ऐसे लोगों के लिए बेहतर है कि चुकंदर का जूस अन्य फूड्स के साथ मिलाकर पिया जाए.
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सुबह का नाश्ता दिन की शुरुआत को तय करता है. अक्सर लोग जल्दीबाज़ी में ऐसे खाने की तलाश करते हैं जो झटपट तैयार हो जाए, पेट भी भर दे और शरीर को पोषण भी मिले. ऐसे में अंडे और टोस्ट नाश्ते का सबसे आसान और लोकप्रिय विकल्प माने जाते हैं. चाहे दफ्तर के लिए देर हो रही हो, बच्चे स्कूल जा रहे हों या फिर खाना बनाने का ज्यादा वक्त न हो, अंडा और टोस्ट तुरंत तैयार हो जाता है लेकिन सवाल यह है कि क्या यह कॉम्बिनेशन सिर्फ पेट भरने तक ही सीमित है या फिर सेहत, खासकर ब्लड शुगर कंट्रोल करने के लिए भी अच्छा है?
अंडे खाने से क्या फायदे होते हैं?
हैदराबाद स्थित केयर हॉस्पिटल्स की क्लिनिकल डाइटीशियन जी. सुषमा के अनुसार, अंडा-टोस्ट नाश्ते का क्लासिक कॉम्बिनेशन है. अंडे में प्रोटीन की मात्रा काफी ज्यादा होती है जो शरीर की मांसपेशियों की मरम्मत और विकास में मदद करता है. यही कारण है कि रोज़ाना फिजिकल एक्टिविटी करने वाले लोग अक्सर इसे नाश्ते में शामिल करते हैं.
अंडे में कई ज़रूरी विटामिन और मिनरल्स मौजूद होते हैं, जैसे – विटामिन A, D, E और B12 – आंखों, हड्डियों और इम्यूनिटी के लिए ज़रूरी. आयरन और जिंक – खून और मेटाबॉलिक हेल्थ के लिए ज़रूरी. कोलीन – दिमाग़ की हेल्थ और याददाश्त को दुरुस्त रखने में मददगार. अंडे खाने से लंबे समय तक भूख नहीं लगती, यानी बार-बार स्नैक्स खाने की आदत भी कम हो जाती है. अगर इसे साबुत अनाज (Whole Grain) ब्रेड या खमीर (Sourdough) वाली ब्रेड के साथ खाया जाए तो इसके फायदे और भी बढ़ जाते हैं. साबुत अनाज वाली ब्रेड में फाइबर होता है, जो पाचन में मदद करता है और दिल की सेहत के लिए अच्छा माना जाता है.
ब्लड शुगर कंट्रोल के लिए अंडा और टोस्ट कितना बेहतर?
यहां बात आती है ब्लड शुगर यानी शुगर लेवल पर इसके असर की. आमतौर पर सफेद ब्रेड (White Bread) जल्दी से ग्लूकोज में बदल जाती है. इसका मतलब है कि इसे खाने के बाद शुगर लेवल तेजी से बढ़ता है और फिर थोड़ी देर बाद अचानक गिर भी जाता है. यही वजह है कि डायबिटीज़ के मरीजों या ब्लड शुगर पर नज़र रखने वालों को सफेद ब्रेड से परहेज़ करने की सलाह दी जाती है. दूसरी तरफ, अंडों में कार्बोहाइड्रेट बहुत कम होता है और ये प्रोटीन और हेल्दी फैट्स से भरपूर होते हैं. यही कारण है कि अंडा खाने से शरीर को लगातार ऊर्जा मिलती रहती है और शुगर लेवल अचानक से बढ़ता या घटता नहीं है. अगर सफेद टोस्ट की जगह साबुत अनाज या खमीर वाला टोस्ट लिया जाए और उसके साथ अंडा खाया जाए तो ब्लड शुगर पर इसका असर काफी स्थिर रहता है.
डायबिटीज़ और इंसुलिन रेसिस्टेंस वालों के लिए सलाह
अगर आप प्री-डायबिटिक हैं, डायबिटीज़ के मरीज हैं या फिर इंसुलिन रेसिस्टेंस से जूझ रहे हैं, तो नाश्ते में सिर्फ सफेद टोस्ट खाना आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है. इससे ब्लड शुगर तुरंत बढ़ जाता है और थोड़ी ही देर में गिरने लगता है, जिससे थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है. ऐसे लोगों के लिए बेहतर है कि अंडे को अपने नाश्ते में शामिल करें और टोस्ट चुनते समय साबुत अनाज या खमीर वाली ब्रेड का इस्तेमाल करें.
अंडा-टोस्ट को और हेल्दी कैसे बनाएं?
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर आप अपने नाश्ते को और ज़्यादा पौष्टिक बनाना चाहते हैं तो कुछ चीज़ें अंडे और टोस्ट के साथ जोड़ सकते हैं.
हरी सब्जियां – जैसे पालक, शिमला मिर्च, टमाटर.
एवोकाडो – हेल्दी फैट्स और फाइबर का बेहतरीन स्रोत.
अलसी (Flax Seeds) – ओमेगा-3 फैटी एसिड्स से भरपूर.
मक्खन या पीनट बटर – अतिरिक्त ऊर्जा और स्वाद के लिए.
इन सबको अंडे और टोस्ट के साथ खाने से ब्लड शुगर स्थिर रहता है और शरीर को लंबे समय तक एनर्जी मिलती है.