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हर बार स्वादिष्ट और परफेक्ट दाल बनाना एक कला है, लेकिन थोड़ी समझदारी और कुछ आसान टिप्स से यह काम बहुत आसान हो सकता है. अक्सर देखा गया है कि दाल बनाते समय कभी पानी ज़्यादा पड़ जाता है तो कभी दाल कच्ची रह जाती है. कई बार स्वाद भी फीका लगने लगता है लेकिन अगर आप कुछ बुनियादी बातें ध्यान में रखें, तो हर बार होटल जैसी टेस्टी और नरम दाल बना सकते हैं.
1. दाल का सही चुनाव करें
हर दाल की अपनी खासियत होती है. मूंग दाल हल्की होती है और जल्दी पक जाती है, तो वहीं चना दाल थोड़ी भारी और गाढ़ी होती है, जिसे पकने में समय लगता है. इसी तरह तुअर दाल (अरहर) या मसूर दाल को भी अलग-अलग तरह से पकाना पड़ता है. इसलिए सबसे पहले यह समझें कि आप कौन सी दाल बना रहे हैं और उसकी नेचर क्या है.
2. भिगोना न भूलें
दाल पकाने से पहले उसे कम से कम 30 मिनट से 1 घंटे तक पानी में भिगो देना चाहिए. इससे दाल जल्दी पकती है और उसका टेक्सचर भी बेहतर होता है. साथ ही इसमें मौजूद स्टार्च टूट जाता है जिससे वह पचने में आसान हो जाती है.
3. प्रेशर कुकर का करें सही इस्तेमाल
दाल को तेज़ और अच्छी तरह से पकाने के लिए प्रेशर कुकर सबसे अच्छा विकल्प है. इससे न सिर्फ समय बचता है, बल्कि दाल मुलायम भी बनती है. हालांकि ध्यान रखें कि कुकर में कितनी सीटी लगानी है, यह दाल की किस्म पर निर्भर करता है.
4. नमक डालने का सही समय
दाल बनाते समय अक्सर लोग शुरुआत में ही नमक डाल देते हैं, लेकिन इससे दाल का टेक्सचर हार्ड हो सकता है. बेहतर यही है कि जब दाल पूरी तरह पक जाए, तभी नमक डालें. इससे दाल सॉफ्ट बनी रहती है और स्वाद भी बराबर बैठता है.
5. तड़का है स्वाद का राजा
सिंपल दाल को लाजवाब बनाने में तड़का बहुत अहम भूमिका निभाता है. थोड़ा घी या तेल गरम करें और उसमें राई, जीरा, लहसुन, अदरक, सूखी लाल मिर्च या करी पत्ता डालें. इसे दाल पर डालते ही उसकी खुशबू और स्वाद में चार चांद लग जाते हैं.
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Kidney Disease Symptoms: किडनी हमारे शरीर का एक बहुत जरूरी अंग है, जो शरीर से वेस्ट मटेरियल और टॉक्सिन्स को बाहर निकालने का काम करती है. यह इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बनाए रखती है और शरीर के मेटाबॉलिज्म को सपोर्ट करती है. लेकिन जब किडनी कमजोर होने लगती है, तो इसका असर सिर्फ शरीर के अंदर ही नहीं बल्कि बाहर भी दिखाई देता है. जैसे कि बालों का झड़ना, पतलापन या गंजापन.
किडनी खराब होने पर क्यों झड़ते हैं बाल
किडनी की खराबी से शरीर में यूरिया और क्रिएटिनिन जैसे अपशिष्ट पदार्थ खून में बढ़ जाते हैं. यह टॉक्सिन्स बालों की जड़ों यानी हेयर फॉलिकल्स को कमजोर कर देते हैं. जब पोषक तत्वों का संतुलन बिगड़ता है, तो बालों को जरूरी विटामिन और मिनरल नहीं मिल पाते, जिससे हेयर ग्रोथ रुक जाती है और बाल झड़ने लगते हैं.
एनीमिया और हार्मोनल असंतुलन भी वजह
किडनी की बीमारी से शरीर में एनीमिया (खून की कमी) हो जाती है, जिससे ऑक्सीजन की सप्लाई बालों की जड़ों तक नहीं पहुंच पाती. इसके अलावा, विटामिन D, जिंक और पैराथाइरॉइड हार्मोन के स्तर में असंतुलन भी बालों को कमजोर कर देता है. कई बार क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) से पीड़ित मरीजों को बालों के रूखेपन, टूटने या गंजेपन जैसी समस्याएं भी होती हैं.
डायलिसिस और दवाएं बढ़ा सकती हैं दिक्कत
किडनी रोगियों को दी जाने वाली कुछ दवाएं या डायलिसिस ट्रीटमेंट भी हेयर लॉस बढ़ा सकते हैं. डॉक्टर आमतौर पर ऐसे मरीजों को पोषक तत्वों की निगरानी और सॉफ्ट हेयर केयर रूटीन अपनाने की सलाह देते हैं.
टेलोजन एफ्लुवियम का खतरा
किडनी की बीमारी से शरीर पर पड़ने वाला तनाव एक और स्थिति टेलोजन एफ्लुवियम (Telogen Effluvium) को जन्म दे सकता है. इसमें बालों का एक बड़ा हिस्सा ग्रोथ साइकिल से बाहर हो जाता है, जिससे अचानक हेयरफॉल बढ़ जाता है.
बाल झड़ना हो सकता है बीमारी का संकेत
अगर किसी व्यक्ति के बाल अचानक बहुत झड़ने लगें, तो इसे केवल सामान्य हेयरफॉल समझकर अनदेखा नहीं करना चाहिए. यह किडनी या अन्य गंभीर बीमारियों का संकेत भी हो सकता है. ऐसे में तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.
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Benefits of Figs: अंजीर एक खास और पौष्टिक ड्राई फ्रूट है, जो सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इसमें विटामिन, मिनरल्स, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। अंजीर का रोजाना सेवन करने से शरीर को कई बीमारियों से लड़ने की ताकत मिलती है। यह त्वचा को चमकदार और स्वस्थ बनाता है, पाचन क्रिया को बेहतर करता है और शरीर की इम्यूनिटी को भी मजबूत बनाता है।
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने भी अंजीर को ‘सुपरफ्रूट’ बताया है। मंत्रालय के अनुसार अंजीर रोज खाने से गठिया, लकवा और पेशाब में जलन जैसी समस्याओं में राहत मिलती है। यह शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है और ताकत बढ़ाता है।
अंजीर में पोटेशियम, कैल्शियम, फॉस्फोरस और मैग्नीशियम जैसे खनिज होते हैं जो हड्डियों को मजबूत बनाते हैं और दिल को स्वस्थ रखते हैं। पोटेशियम ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करता है जबकि कैल्शियम हड्डियों के लिए फायदेमंद होता है।
हेल्थ एक्सपर्ट्स बताते हैं कि अंजीर को रात में पानी में भिगोकर सुबह खाली पेट खाना सबसे अच्छा तरीका है। इससे पाचन तंत्र मजबूत होता है, मेटाबॉलिज्म बढ़ता है और वजन घटाने में भी मदद मिलती है। अंजीर का पानी पीना भी लाभकारी होता है क्योंकि यह शरीर की चर्बी कम करने की प्रक्रिया को तेज करता है।
इसमें मौजूद फाइबर पेट की समस्याओं जैसे कब्ज या गैस में राहत देता है। साथ ही यह लंबे समय तक पेट भरा हुआ रखने में मदद करता है, जिससे अधिक खाने की इच्छा नहीं होती और वजन भी नियंत्रित रहता है।
अंजीर में विटामिन सी होता है, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। इसमें कार्बोहाइड्रेट और नेचुरल शुगर भी होता है, जो शरीर को ऊर्जा देता है। हालांकि, डायबिटीज के मरीजों को अंजीर का सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए क्योंकि इसमें नैचुरल शुगर होती है।
कुल मिलाकर, अंजीर एक स्वादिष्ट और सेहतमंद फल है जिसे नियमित रूप से खाने से शरीर को कई तरह के फायदे मिलते हैं। यह एक आसान, सस्ता और असरदार तरीका है अपने स्वास्थ्य को बेहतर बनाने का।
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What is Hing: हींग भारतीय रसोई का ऐसा मसाला है जो किसी भी खाने में बस एक चुटकी डालते ही उसका स्वाद और खुशबू कई गुना बढ़ा देता है. दाल, सब्जी या खिचड़ी कहीं भी हींग डाल दी जाए, तो उसका स्वाद और सुगंध तुरंत निखर जाती है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि हींग बनती कैसे है और यह हमारे शरीर के लिए कितनी फायदेमंद है.
हींग क्या है और कहां से आती है?
हींग किसी पेड़ से मिलने वाला साधारण मसाला नहीं है, बल्कि यह एक जंगली पौधे की जड़ों से निकलने वाला गोंद (रस) है. इसकी खुशबू बेहद तीखी और तेज होती है. पुराने समय में इसका उत्पादन खुरासान और मुल्तान (आज के ईरान-अफगानिस्तान क्षेत्र) में होता था, इसलिए इसे बाल्हीक भी कहा जाता है. माना जाता है कि बौद्ध भिक्षुओं के माध्यम से ही यह भारत तक पहुंची.
आज इस्तेमाल होने वाली हींग कैसे बनती है?
भारत में जो हींग इस्तेमाल होती है, वह कंपाउंडेड हींग कहलाती है. इसमें शुद्ध हींग सिर्फ 30% या उससे भी कम होती है. बाकी में मैदा, आटा, गोंद और अन्य चीजें मिलाई जाती हैं, ताकि इसकी तीखी गंध थोड़ी हल्की हो जाए और खाना बनाने में आसानी से इस्तेमाल हो सके. बाजार में मिलने वाली हींग की खुशबू इसी पर निर्भर करती है कि उसमें मिलावट कितनी है. कम मिलावट मतलब गंध ज्यादा तेज.
भारत में हींग की खपत और इतिहास
भारत दुनिया में हींग का सबसे बड़ा उपभोक्ता है, लेकिन लंबे समय तक इसका उत्पादन भारत में नहीं होता था. कच्ची हींग अफगानिस्तान, ईरान और मध्य एशिया से आयात की जाती थी. मुगल काल में आगरा हींग व्यापार का बड़ा केंद्र था. अफगानिस्तान से हींग भेड़ों की खाल में भरकर लाई जाती थी. आगरा पहुंचने के बाद ही हींग और चमड़े का अलग-अलग व्यापार होता था. यहीं से आगरा का जूते का उद्योग भी आगे बढ़ा. आज भारत में हाथरस हींग शोधन का सबसे बड़ा केंद्र है. भारत में हींग की खेती भी शुरू हो चुकी है, जिसके लिए 2016–17 में ईरान से इसके बीज लाए गए थे.
हींग के घरेलू और सेहत संबंधी फायदे
हींग सिर्फ रसोई का मसाला नहीं, बल्कि एक घरेलू दवा भी है. पेट में गैस हो तो हींग को पानी में घोलकर नाभि पर लगाने से तुरंत आराम मिलता है. छोटे बच्चों के पेट दर्द में भी यह उपाय बहुत कारगर है. हींग पाचन सुधारती है, गैस दूर करती है और शरीर की सूजन कम करने में मदद करती है. इसी कारण हींग भारतीय भोजन का जरूरी हिस्सा बन चुकी है. सिर्फ स्वाद के लिए ही नहीं, बल्कि सेहत के लिए भी.