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इंसानी खोपड़ियों से बने बर्तन, मानव त्वचा की कुर्सियां; अमेरिका का सबसे खौफनाक सीरियल किलर
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सुस्ती और पेट से जुड़ी परेशानी का असली कारण है विरुद्धाहार, जानें दूध और दही के साथ क्या न खाएं

प्रतीकात्मक फोटो

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Viruddha Aahar meaning in Ayurveda: अक्सर हम स्वाद के लिए ऐसी चीज़ें खा लेते हैं जो शरीर के लिए नुकसानदायक होती हैं. कभी-कभी हमें पता नहीं चलता कि हम जो खा रहे हैं वह कोई उल्टा-पुल्टा खाना भी हो सकता है, जैसे दूध के साथ केला या दूध के साथ खट्टी चीज़ें, जैसे सलाद में नींबू, अचार या सिरका. ये सभी उल्टा-पुल्टा खाना शरीर की पाचन शक्ति को कमज़ोर करता है और सुस्ती पैदा करता है. आज हम जानेंगे कि दूध और दही के साथ क्या नहीं खाना चाहिए.

आयुर्वेद का मानना ​​है कि उल्टा-पुल्टा खाना खाने से पेट की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है और अगर लंबे समय तक ऐसा किया जाए तो यह गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है. आयुर्वेद कहता है कि उल्टा-पुल्टा खाना शरीर में वात, पित्त और कफ का असंतुलन पैदा करता है. दूध हमारी डाइट का एक ज़रूरी हिस्सा है. दूध को खट्टे फलों के साथ नहीं पीना चाहिए. 

खट्टे फलों में एसिड होता है, जबकि दूध में कैल्शियम और प्रोटीन होता है. ये दोनों खाने मिलकर पेट दर्द या गैस का कारण बन सकते हैं. दूध को मछली, पुदीने की पत्तियां, नमकीन खाना, मसालेदार तला हुआ खाना, लहसुन, प्याज और कटहल के साथ नहीं पीना चाहिए. कुछ लोगों को रात के खाने के साथ दूध पीने की आदत होती है। यह एक गलत आदत है. दूध हमेशा सोने से एक घंटा पहले पीना चाहिए.

अब बात करते हैं दही की. दही के साथ तली हुई चीज़ें खाने से बचें। ऐसा करने से पेट में सुस्ती और भारीपन हो सकता है. दही के साथ मछली खाने से पेट की पाचन शक्ति कमज़ोर होती है, दही के साथ चावल खाने से शरीर भारी लगता है, दही के साथ बीन्स खाने से पेट में गैस बन सकती है, दही के साथ खट्टे अचार पाचन की आग कम करते हैं, और दही को गर्म करना भी नुकसानदायक है.

अब बात करते हैं ठंडी और गर्म चीज़ों की. कोल्ड ड्रिंक के साथ पराठा खाना ज़हर खाने जैसा है; इससे पेट में टॉक्सिन बढ़ते हैं. खाने के साथ आइसक्रीम खाने से भी पाचन खराब होता है. जंक फ़ूड के साथ कोल्ड ड्रिंक पीने से आपको नींद आ सकती है. 

लंच के बाद ठंडी और मीठी चीज़ें खाने से सुस्ती बढ़ सकती है और नींद आ सकती है. ये खतरनाक कॉम्बिनेशन शरीर की पाचन शक्ति को कमज़ोर करते हैं और कब्ज़ का कारण बनते हैं. जितना हो सके हल्का और गुनगुना खाना खाएं. दही और दूध का सेवन करते समय ध्यान रखें कि इन्हें खट्टे या मसालेदार खाने के साथ न लें.
 


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Written by: Taushif

02 Dec 2025  ·  Published: 01:31 IST

‘साइलेंट किलर’ फूड्स से रहें सावधान, बढ़ा सकते हैं हार्ट अटैक का खतरा

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पिछले कुछ सालों में भारतीय युवाओं में हार्ट अटैक, कार्डियक अरेस्ट और दिल की बीमारियों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. डॉक्टरों का कहना है कि इसकी मुख्य वजह लोगों की लाइफस्टाइल और गलत खानपान की आदतें हैं. आजकल युवा न तो सही समय पर खाते हैं और न ही शरीर को एक्टिव रखते हैं. इसके अलावा तनाव, धूम्रपान और शराब का अत्यधिक सेवन भी दिल को कमजोर बना रहा है.

1. नमक पर लगाम लगाएं
ज्यादा नमक खाने से शरीर में पानी जमा होने लगता है जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है. लगातार हाई बीपी रहने पर दिल पर दबाव बढ़ता है और धीरे-धीरे वह कमजोर हो जाता है.

2. प्रॉसेस्ड फूड से दूरी रखें
बर्गर, पिज़्ज़ा, चिप्स या पैकेट वाले फूड्स का ज्यादा सेवन धमनियों में चर्बी जमाता है. इससे ब्लड फ्लो रुकने लगता है और हार्ट अटैक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है.

3. ज्यादा चीनी से बचें
मीठा ज़रूरत से ज़्यादा खाने पर शरीर में इंसुलिन का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे मोटापा और डायबिटीज का खतरा बढ़ता है. यही आगे चलकर हृदय रोग की वजह बनता है.

4. आलस भरी दिनचर्या से बचें
लंबे समय तक बैठे रहना, एक्सरसाइज न करना और देर तक सोना दिल की मांसपेशियों को कमजोर करता है. रोजाना 30 मिनट की वॉक, योग या हल्की कसरत से हार्ट अटैक का खतरा काफी कम हो जाता है.

5. धूम्रपान और शराब से दूरी बनाएं
सिगरेट में मौजूद निकोटिन और शराब, दोनों ही दिल की नसों को नुकसान पहुंचाते हैं. ये खून में ऑक्सीजन की मात्रा घटाते हैं और ब्लड प्रेशर बढ़ाते हैं, जिससे दिल की गति रुकने तक की स्थिति बन सकती है.


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Written by: Taushif

13 Oct 2025  ·  Published: 10:23 IST

त्रिफला: आंवला, हरड़ और बहेड़ा से बना आयुर्वेद का चमत्कारी नुस्खा, पाचन और सेहत के लिए वरदान

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Triphala Health Henefits: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में गलत खानपान, जंक फूड, अनियमित दिनचर्या और तनाव हमारे पाचन तंत्र को सबसे ज्यादा प्रभावित करते हैं. ऐसे में आयुर्वेद में बताया गया त्रिफला, एक ऐसा प्राकृतिक उपाय है जो पेट की समस्याओं को दूर करके शरीर को भीतर से स्वस्थ बनाता है. त्रिफला तीन फलों, आंवला, हरड़ और बहेड़ा का मिश्रण है. इन तीनों फलों में ऐसे गुण हैं जो शरीर को साफ करने, सूजन कम करने और पाचन तंत्र को मजबूत बनाने का काम करते हैं.

1. विटामिन C का खजाना
आंवला एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन C से भरपूर होता है. यह इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है, पेट की सूजन कम करता है और शरीर को प्राकृतिक तरीके से डिटॉक्स करता है. त्रिफला में आंवला मिलाने से यह शरीर की सफाई में और भी असरदार हो जाता है.

2. हरड़
हरड़ स्वाद में भले कड़वी हो, लेकिन यह आंतों में जमा गंदगी, गैस और कब्ज को दूर करने में बेहद असरदार है. नियमित सेवन से पेट हल्का रहता है और पाचन बेहतर होता है.

3. बहेड़ा
बहेड़ा खट्टा-कड़वा होता है, लेकिन इसके एंटीबैक्टीरियल गुण आंतों में खराब बैक्टीरिया और हानिकारक सूक्ष्मजीवों को खत्म करते हैं. इससे पाचन सुधरता है और पेट के रोग दूर रहते हैं.

कैसे काम करता है त्रिफला?
वैज्ञानिक रिसर्च के अनुसार, त्रिफला में मौजूद फ्लावोनॉइड्स और एंटीऑक्सीडेंट्स, पेट की सूजन कम करते हैं. आंतों में अच्छे बैक्टीरिया बढ़ाते हैं. साथ ही शरीर से टॉक्सिन बाहर निकालते हैं. इसके अलावा, कब्ज, गैस और पेट दर्द को कम करते हैं. इसी कारण त्रिफला को आयुर्वेद में पेट और आंतों के लिए सबसे प्रभावी औषधि माना गया है.

कैसे लें त्रिफला?
चूर्ण को गर्म पानी के साथ रात में दूध में घोलकर या गोलियों के रूप में दूध के साथ लेने पर इसके फायदे और भी बढ़ जाते हैं क्योंकि यह पाचन शक्ति को मजबूत करता है.

कौन ले सकता है त्रिफला?
बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक सभी उम्र के लोग इसका सेवन कर सकते हैं. आयुर्वेद मानता है कि त्रिफला शरीर के वात, पित्त और कफ तीनों दोषों को संतुलित करता है, जिससे संपूर्ण स्वास्थ्य बेहतर होता है.
 


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Written by: Taushif

20 Nov 2025  ·  Published: 11:55 IST

घर पर तैयार कर सकते हैं सोया बड़ी, हार्मोन बैलेंस से लेकर वजन कम करने में करती है मदद

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Soy Badi Recipe: भारतीय रसोई में बड़ियों का प्रचलन सदियों से चलता आ रहा है. पारंपरिक रूप से सब्जी और दालों की बड़ियां हमेशा थाली की शान रही हैं, लेकिन बीते काफी समय से सोया बड़ी का चलन बढ़ गया है. ये सस्ती और प्रोटीन से भरी होती है. सोया बड़ी उन लोगों के लिए बहुत फायदेमंद है जो शाकाहारी होते हैं. शाकाहारी थाली में हमेशा प्रोटीन की कमी देखी गई है.

आयुर्वेद में सोया बड़ी को पौष्टिक आहार की श्रेणी में रखा गया है. आयुर्वेद में सोया बड़ी को भारी, कम तेलीय और शरीर को ऊर्जा प्रदान करने वाला कहा गया है. ये शरीर में वात को बैलेंस करता है, लेकिन अगर ज्यादा मात्रा में इसका सेवन किया जाए तो ये शरीर में पित्त की प्रवृत्ति को बढ़ा देता है. ऐसे में सबसे पहले जानते हैं कि घर पर ही सोया बड़ी कैसे बनाई जा सकती है और इसके सेवन के क्या लाभ हैं.

सोया बड़ी बनाने के लिए सोयाबीन के बने आटे की जरूरत होती है. पहले सोयाबीन से तेल को अलग किया जाता है और फिर बचे हुए डी-ऑयल्ड सोया फ्लोर को पकाया जाता है, जिसके बाद स्वादानुसार आटे से छोटी-छोटी बड़ियां बनाई जाती हैं और धूप में सूखाकर लंबे समय तक स्टोर किया जाता है. 

सोयाबीन में कम वसा और अधिक प्रोटीन होता है, जो इसे दूसरी सब्जियों वाली बड़ियों से अलग बनाती हैं. इसमें 52 फीसदी प्रोटीन है, जो मांसपेशियों और हड्डियों को मजबूत करता है और उन्हें अच्छे से बढ़ने में मदद करता है. अगर शरीर में प्रोटीन की कमी है, तो हर दूसरे दिन सीमित मात्रा में सोया बड़ी का सेवन किया जा सकता है. सोया बड़ी हार्मोन को संतुलित करने में भी सहायक है. महिलाओं में मासिक धर्म के समय होने वाले हार्मोनल बदलावों में काफी हद तक सोया बड़ी का सेवन लाभकारी होता है.

इसके अलावा, सोया बड़ी दिल का भी अच्छे से ख्याल रखती है। सोया बड़ी में वसा का स्तर कम होता है, जिस वजह से इसे सीमित मात्रा में दिल से समस्या से जुड़े मरीज भी डॉक्टर की सलाह पर खा सकते हैं. अगर वजन अनियंत्रित तरीके से बढ़ रहा है, तब भी भोजन में सोया बड़ी का सेवन किया जा सकता है. सोया बड़ी में भरपूर मात्रा में प्रोटीन है, जिससे पेट लंबे समय तक भरा रहता है और ज्यादा भूख नहीं लगती.
 


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Written by: Taushif

21 Nov 2025  ·  Published: 22:09 IST