प्रतीकात्मक फोटो
Vitamin B12 Deficiency Symptoms: विटामिन बी12 हमारे शरीर के लिए एक बेहद ज़रूरी पोषक तत्व है, जो रक्त निर्माण, मस्तिष्क स्वास्थ्य को बनाए रखने और तंत्रिकाओं को मज़बूत बनाने में अहम भूमिका निभाता है। लेकिन जब इसकी कमी हो जाती है, तो धीरे-धीरे शरीर में कई तरह की समस्याएँ शुरू हो जाती हैं, जैसे थकान, चक्कर आना, भूलने की बीमारी या हाथ-पैरों में झुनझुनी। अगर समय रहते इसकी पहचान और इलाज न किया जाए, तो ये सामान्य लक्षण गंभीर बीमारियों का रूप ले सकते हैं। आइए जानते हैं बी12 की कमी से होने वाली 10 मुख्य बीमारियाँ।
मेगालोब्लास्टिक एनीमिया
B12 की कमी से शरीर में लाल रक्त कोशिकाएँ असामान्य रूप से बड़ी और अपरिपक्व हो जाती हैं, जिससे मेगालोब्लास्टिक एनीमिया हो जाता है। इससे शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति कम हो जाती है, जिससे थकान, साँस लेने में तकलीफ, त्वचा का पीला पड़ना और तेज़ दिल की धड़कन जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। समय पर इलाज न होने पर यह स्थिति गंभीर हो सकती है।
न्यूरोपैथी
B12 न्यूरॉन्स के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इसकी कमी से झुनझुनी, सुन्नता, हाथों और पैरों में तेज चुभन, संतुलन बिगड़ना और चलने में कठिनाई जैसी समस्याएं होती हैं। इस स्थिति को 'न्यूरोपैथी' कहा जाता है और लंबे समय तक B12 की कमी से स्थायी तंत्रिका क्षति हो सकती है। यह विशेष रूप से बुजुर्गों में आम है।
कमजोर याददाश्त
B12 की कमी से मस्तिष्क में न्यूरोट्रांसमीटर का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे याददाश्त कमजोर हो जाती है। व्यक्ति चीजें भूलने लगता है, भ्रमित हो जाता है और निर्णय लेने में परेशानी होती है। लंबे समय में, यह स्थिति, खासकर बुजुर्गों में, डिमेंशिया जैसी गंभीर मानसिक समस्याओं का रूप ले सकती है।
अवसाद
विटामिन बी12 मस्तिष्क में सेरोटोनिन और डोपामाइन जैसे "खुशी के हार्मोन" के उत्पादन में मदद करता है। इसकी कमी से व्यक्ति उदास रहने लगता है, मनोदशा में उतार-चढ़ाव आते हैं और अवसाद की स्थिति विकसित हो सकती है। अनिद्रा, चिंता और मन में निराशा जैसे लक्षण आम हो जाते हैं।
अत्यधिक थकान और कमजोरी
विटामिन बी12 की कमी से शरीर की कोशिकाओं को ऊर्जा नहीं मिल पाती, जिससे लगातार थकान बनी रहती है। बिना मेहनत किए भी शरीर भारी लगता है, छोटी-छोटी गतिविधियाँ भी मुश्किल हो जाती हैं। मांसपेशियों में कमजोरी, चक्कर आना और सिरदर्द जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।
सांस फूलना और चक्कर आना
विटामिन बी12 की कमी से ऑक्सीजन की आपूर्ति कम हो जाती है, जिससे सांस लेने में तकलीफ होती है। सांस फूलना खासकर सीढ़ियाँ चढ़ते या हल्का शारीरिक श्रम करते समय होता है। चक्कर आना, सिर चकराना और बेहोशी जैसा महसूस होना इसके साथ आम है।
मुँह और जीभ की समस्याएँ
विटामिन B12 की कमी से मुँह के छाले, जीभ में सूजन, जलन और लालिमा हो सकती है। इस स्थिति को "ग्लोसाइटिस" कहते हैं। जीभ अपनी चिकनाई खो देती है और स्वाद की अनुभूति कम हो जाती है। मुँह के कोनों में दरार पड़ना और खाने-पीने में भी कठिनाई हो सकती है।
दृष्टि संबंधी समस्याएँ
विटामिन B12 की कमी से ऑप्टिक तंत्रिका प्रभावित हो सकती है, जिससे धुंधली दृष्टि, दोहरी छवि या आँखों में जलन जैसी समस्याएँ हो सकती हैं। इसे "ऑप्टिक न्यूरोपैथी" कहते हैं। अगर समय पर इलाज न किया जाए, तो यह स्थिति अंधेपन का कारण बन सकती है।
बांझपन
लंबे समय तक विटामिन B12 की कमी पुरुषों और महिलाओं दोनों की प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकती है। महिलाओं को अनियमित मासिक धर्म और गर्भधारण में कठिनाई हो सकती है, जबकि पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या कम हो सकती है। समय पर इलाज करने पर यह प्रभाव कभी-कभी ठीक हो जाता है।
हृदय रोग
विटामिन B12 की कमी से शरीर में होमोसिस्टीन नामक अमीनो एसिड का स्तर बढ़ जाता है, जो रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुँचाता है। इससे हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। विटामिन बी12 हृदय स्वास्थ्य के लिए एक आवश्यक विटामिन है, जो हृदय को मजबूत और धमनियों को साफ रखता है।
फाइल फोटो
दिवाली के बाद से दिल्ली-NCR और आसपास के इलाकों में हवा की गुणवत्ता लगातार गिरती जा रही है. पराली जलाने, धूल, धुआं और मौसम में ठहराव के कारण प्रदूषण का स्तर बेहद बढ़ गया है. हवा में मौजूद जहरीले कणों से सांस लेने में दिक्कत, खांसी, एलर्जी और सीने में जलन जैसी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं. अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है.
क्या अब सुबह की सैर बंद करनी चाहिए?
डॉक्टरों का कहना है कि इस समय दिल्ली-NCR की हवा बेहद खराब है, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और दिल या फेफड़े के मरीजों के लिए. ऐसे में सुबह-सुबह टहलने जाना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है. दरअसल, सुबह के वक्त हवा में नमी और ठंडक ज्यादा होती है, जिससे प्रदूषण के कण नीचे जमा रहते हैं. ऐसे में जो लोग ताजी हवा समझकर मॉर्निंग वॉक पर निकलते हैं, वे वास्तव में प्रदूषित हवा में सांस ले रहे होते हैं.
क्या रात में टहलना सुरक्षित है?
शाम या रात के समय भी टहलना बहुत सुरक्षित नहीं है. रात को तापमान गिरने से धुंध बनती है और हवा में मौजूद धूल व प्रदूषक तत्व नीचे आ जाते हैं. इससे सांस की परेशानी बढ़ सकती है. डॉक्टर सलाह देते हैं कि इस दौरान सुबह और शाम के वक्त बाहर निकलने से बचें और घर के दरवाजे-खिड़कियां बंद रखें.
वॉक का सही समय क्या है?
अगर आप अपने वॉक का रूटीन नहीं छोड़ सकते, तो कोशिश करें कि लेट मॉर्निंग यानी सुबह 8-9 बजे के बाद टहलने जाएं. इस समय सूरज की रोशनी प्रदूषण को थोड़ा कम करती है और हवा कुछ साफ हो जाती है. बाहर निकलते समय N95 या FFP2 मास्क जरूर पहनें ताकि हानिकारक कणों से फेफड़े सुरक्षित रहें.
सेहत के लिए अपनाएं ये उपाय
सुबह और शाम खिड़कियां बंद रखें
घर में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें
घर के अंदर योग या हल्की एक्सरसाइज करें
गले में जलन, सीने में जकड़न या थकान महसूस होने पर डॉक्टर से तुरंत सलाह लें
वायु प्रदूषण का असर सिर्फ बाहर नहीं, बल्कि शरीर के अंदर भी होता है. इसलिए इस मौसम में अपनी सेहत को लेकर ज्यादा सतर्क रहें.
फाइल फोटो
Navratri Vrat Recipe: शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व आज से शुरू हो चुका है. नौ दिनों तक देवी दुर्गा की पूजा-अर्चना की जाती है और भक्त व्रत रखते हैं. व्रत के दौरान हल्के और हेल्दी स्नैक्स की तलाश हर किसी को रहती है. ऐसा ही एक नाश्ता है कच्चे केले के कटलेट, जो स्वादिष्ट होने के साथ-साथ सेहतमंद भी है.
कच्चे केले के कटलेट बनाने के लिए सामग्री
3-4 कच्चे केले
2-3 उबले आलू
स्वादानुसार नमक और काली मिर्च
2 बड़े चम्मच कटा हुआ ताजा हरा धनिया
2 हरी मिर्च (बारीक कटी)
तेल (ग्रीस करने और तलने के लिए)
बनाने का तरीका
सबसे पहले आलू को अच्छी तरह उबालकर छील लें और मैश करें. इसमें नमक, काली मिर्च, हरी मिर्च और हरा धनिया मिलाकर मसालेदार मिक्स तैयार कर लें. अब कच्चे केलों को उबालें. उबलने के बाद छीलकर मैश करें और स्वादानुसार नमक, काली मिर्च डालें. तेल लगे हाथों से आलू के मिक्स की छोटी-छोटी गोलियां बना लें.
मैश किए हुए केले का थोड़ा हिस्सा लें, उसे हल्का चपटा करें. बीच में आलू की गोली रखकर किनारे बंद कर टिक्की जैसा आकार दें. कड़ाही में तेल गरम करें और कटलेट को दोनों तरफ से गोल्डन और क्रिस्पी होने तक तलें. फिर एक्स्ट्रा तेल सोखने के लिए पेपर टॉवल पर रख दें. इन कटलेट्स को आप दही या हरी चटनी के साथ सर्व कर सकते हैं. व्रत में यह एक स्वादिष्ट और हेल्दी स्नैक है, जिसे बनाना बेहद आसान है.
फाइल फोटो
Winter Digestion Problems: सर्दियों का मौसम अपने साथ ठंडक, आलस और गरमागरम खाने का मजा जरूर लाता है, लेकिन इसी मौसम में पाचन से जुड़ी समस्याएं भी तेजी से बढ़ जाती हैं. डॉक्टरों और आयुर्वेद विशेषज्ञों के मुताबिक, ठंड के कारण शरीर की गतिविधियां धीमी हो जाती हैं, जिससे चयापचय (मेटाबॉलिज्म) प्रभावित होता है और पाचन अग्नि असंतुलित हो सकती है. इसका सीधा असर पेट पर पड़ता है और गैस, कब्ज, सीने में जलन, भारीपन और भूख न लगने जैसी परेशानियां आम हो जाती हैं.
आयुर्वेद का मानना है कि सर्दियों में शरीर की पाचन अग्नि वैसे तो तेज होती है, लेकिन अगर खानपान गलत हो जाए तो यही अग्नि कमजोर भी पड़ जाती है. विशेषज्ञ बताते हैं कि इस मौसम में वात और कफ दोनों दोष बढ़ जाते हैं. वात बढ़ने से गैस, पेट दर्द और कब्ज की समस्या होती है, जबकि कफ बढ़ने से पेट भारी रहना, अपच और सुस्ती बढ़ जाती है. अगर अग्नि मंद पड़ जाए, तो शरीर में ‘आमा’ बनने लगता है, जिससे थकान बढ़ती है और इम्युनिटी भी धीरे-धीरे कमजोर होने लगती है.
सर्दियों में पेट खराब होने के सामान्य लक्षणों में भूख कम लगना, खट्टी डकारें, पेट कड़ा महसूस होना, खाना खाने के बाद सुस्ती या नींद-सी आना शामिल हैं. ऐसे में खानपान को समझदारी से चुनना बेहद जरूरी हो जाता है. इस मौसम में हल्का, गरम और आसानी से पचने वाला भोजन सबसे ज्यादा फायदेमंद माना जाता है. अदरक, काली मिर्च, जीरा, अजवायन और हल्दी पाचन को मजबूत बनाते हैं और गैस की समस्या को कम करते हैं.
विशेषज्ञों की सलाह है कि ठंड के मौसम में ठंडा पानी, फ्रिज का खाना, रात में दही, बहुत मीठा या तला-भुना भोजन जितना हो सके कम करें. चाय-कॉफी की जगह गरम पानी या हर्बल टी पीना ज्यादा फायदेमंद रहता है. इससे पाचन तंत्र सक्रिय रहता है.
घरेलू उपायों पर भरोसा करने से भी काफी राहत मिलती है. सुबह खाली पेट अदरक और काली मिर्च वाला गुनगुना पानी पीना, भोजन के बाद सौंफ चबाना, अजवायन और काले नमक का पानी लेना गैस और अपच में तुरंत राहत देता है. अगर पेट में ज्यादा गैस बनती हो तो हिंग वाला गुनगुना पानी आराम पहुंचाता है.
इसके साथ ही योग और हल्की एक्सरसाइज को भी दिनचर्या में शामिल करने की सलाह दी जाती है. रोज सुबह कपालभाति और खाने के बाद 10 मिनट टहलना पाचन को मजबूत रखने का सबसे आसान और असरदार तरीका माना जाता है.