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Vitamin D Benefits: शरीर को स्वस्थ रखने के लिए जितना जरूरी विटामिन A, B12 और E है, उतना ही जरूरी है विटामिन D, जिसे अक्सर सनशाइन विटामिन कहा जाता है. यह न सिर्फ हड्डियों को मजबूत बनाता है, बल्कि दिल, दिमाग और इम्यूनिटी पर भी गहरा असर डालता है. एम्स, हार्वर्ड और स्टैनफोर्ड से ट्रेनिंग ले चुके गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. सौरभ सेठी ने हाल ही में अपने इंस्टाग्राम पर विटामिन D से जुड़े 5 दिलचस्प तथ्य साझा किए. आइए जानते हैं.
1. विटामिन D है हार्मोन भी
डॉ. सेठी के अनुसार, विटामिन D सिर्फ विटामिन नहीं बल्कि एक तरह का हार्मोन भी है. यह शरीर के 200 से ज्यादा जींस (genes) को नियंत्रित करता है और कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं पर असर डालता है.
2. खाने से नहीं मिलता पर्याप्त विटामिन D
हम सोचते हैं कि मछली, अंडा या मशरूम खाने से विटामिन D पूरा हो जाएगा. लेकिन सच्चाई यह है कि सिर्फ 15 मिनट की धूप उतना विटामिन D बना सकती है जितना इन चीजों से मुश्किल से मिलता है.
3. कमी का तुरंत पता नहीं चलता
विटामिन D की कमी हमेशा साफ नजर नहीं आती. कई लोग सालों तक इसकी कमी से जूझते हैं बिना जाने. इसके लक्षण थकान, चिड़चिड़ापन, जल्दी बीमार पड़ना या मांसपेशियों में दर्द हो सकते हैं.
4. ज्यादा सप्लीमेंट्स खतरनाक हो सकते हैं
जरूरत से ज्यादा विटामिन D सप्लीमेंट लेना किडनी और दिल के लिए हानिकारक हो सकता है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ज्यादातर वयस्कों को रोजाना 600–800 IU की ही जरूरत होती है. इसलिए सप्लीमेंट शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.
5. सूरज की रोशनी है बेस्ट सोर्स
विटामिन D का सबसे अच्छा स्रोत है सूरज की रोशनी. दिन में 10–30 मिनट धूप लेने से शरीर खुद ब खुद 1,000–2,000 IU तक विटामिन D बना लेता है.
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Causes of Wrinkles: जब भी झुर्रियों की बात होती है तो अक्सर हम उम्र बढ़ने, धूप में ज्यादा समय बिताने या स्किन के सूखने को जिम्मेदार मानते हैं लेकिन अमेरिका की बिंगहैमटन यूनिवर्सिटी की एक नई रिसर्च इस धारणा को पूरी तरह बदल सकती है. इस रिसर्च के अनुसार, झुर्रियों का मुख्य कारण स्किन की भौतिक (फिजिकल) स्थिति में आने वाला तनाव और खिंचाव है, न कि सिर्फ उम्र या सूरज की किरणें.
क्या है रिसर्च की खास बात?
रिसर्चर्स ने 16 से 91 साल के लोगों के स्किन सैंपल लेकर एक विशेष मशीन ‘टेंसोमीटर’ में उनकी टेस्टिंग की. यह मशीन बताती है कि स्किन कैसे खिंचती और सिकुड़ती है. नतीजों में सामने आया कि जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, स्किन में इलास्टिसिटी (लचीलापन) कम होती जाती है. स्किन अब पहले की तरह सीधी और बराबर नहीं सिकुड़ती, बल्कि किनारों की तरफ ज्यादा खिंचती है और जब ये खिंचाव संतुलित नहीं होता तो झुर्रियां बन जाती हैं.
वैज्ञानिकों ने इस प्रोसेस को “बकलिंग” कहा है कि एक ऐसा फिजिकल रिएक्शन जिसमें सतह (जैसे स्किन) अंदर की ओर मुड़ जाती है, ठीक वैसे ही जैसे कागज को मोड़ने पर सिलवटें पड़ती हैं.
धूप और उम्र कैसे असर डालते हैं?
हालांकि रिसर्च कहती है कि फिजिक्स मुख्य कारण है, लेकिन उम्र बढ़ने और धूप से कोलेजन और इलास्टिन फाइबर पर पड़ने वाला असर इस प्रक्रिया को और तेज कर देता है. सूरज की UV किरणें स्किन के इन संरचनात्मक प्रोटीन को नुकसान पहुंचाती हैं, जिससे स्किन कमजोर और कम लचीली हो जाती है.
झुर्रियों के इलाज के नए रास्ते
यह स्टडी अब स्किनकेयर के क्षेत्र में भी नए बदलाव ला सकती है. परंपरागत क्रीम और लोशन केवल कोलेजन बढ़ाने या स्किन को हाइड्रेटेड रखने पर ध्यान देते हैं, लेकिन इस रिसर्च के बाद वैज्ञानिक माइक्रोमेश पैच और पेप्टाइड्स पर काम कर रहे हैं.
माइक्रोमेश पैच स्किन के तनाव को बराबर करने में मदद कर सकते हैं, जबकि कुछ विशेष पेप्टाइड्स स्किन सेल्स को फिर से संगठित करते हैं ताकि इलास्टिसिटी और मजबूती लौटाई जा सके.
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Detox Herbs: शरीर में जब गंदगी जमा होती है तो उसका असर सीधे डाइजेशन, स्किन और एनर्जी लेवल पर दिखने लगता है. थकान, मुंहासे , पेट में भारीपन या सुस्ती, ये सब इसी की निशानी हैं. डिटॉक्स के लिए लोग महंगे ग्रीन जूस या सप्लीमेंट्स लेते हैं, लेकिन असली सफाई तभी होती है जब आंतें और लिवर ठीक से काम करें. इसका आसान उपाय आपके किचन में ही छिपा है. चार ऐसे पत्तों में, जो शरीर को भीतर से साफ कर देते हैं. आइए जानते हैं कौन से हैं ये 4 पत्ते और इस्तेमाल कैसे करें.
1. सेना पत्ता (Senna Leaf)
सेना पत्ता सबसे असरदार डिटॉक्स माना जाता है. यह आंतों की मसल्स को एक्टिव करता है और पुरानी जमा गंदगी को बाहर निकालता है. कब्ज या सख्त स्टूल की समस्या वाले लोगों के लिए यह बेहद फायदेमंद है. सबसे पहले आधा चम्मच सेना पाउडर में थोड़ा काला नमक मिलाकर रात को गर्म पानी के साथ लें. साथ ही इसका सेवन हफ्ते में 1-2 बार ही करें, क्योंकि ज्यादा लेने से आदत बन सकती है.
2. नीम की पत्तियां (Neem Leaves)
नीम की पत्तियां शरीर से बैक्टीरिया और टॉक्सिन्स को बाहर करती हैं. यह पेट में संक्रमण, माउथ अल्सर, फूड पॉइजनिंग और स्किन प्रॉब्लम्स में मददगार है. सबसे पहले सुबह खाली पेट कुछ नीम की पत्तियां चबाएं या नीम कैप्सूल लें. इसके बाद पेट की सफाई के साथ-साथ त्वचा भी साफ और चमकदार रहती है.
3. करी पत्ता (Curry Leaves)
करी पत्ता लिवर को एक्टिव करता है और बाइल प्रोडक्शन बढ़ाता है, जिससे पाचन बेहतर होता है. यह फैटी लिवर और पेट के आसपास जमा फैट को घटाने में मदद करता है. करी पत्ते को चबाकर या उसका पाउडर गर्म पानी के साथ रात को सोने से पहले लें.
4. पुदीना (Mint Leaves)
पुदीना पेट की मसल्स को रिलैक्स करता है, गैस और ब्लोटिंग को कम करता है और पेट की जलन को शांत करता है. यह इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (IBS) जैसी समस्याओं में भी असरदार है. सबसे पहले रात को सोने से पहले पुदीने की चाय पीएं. इसके बाद पेट ठंडा रहता है और नींद भी अच्छी आती है.
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Natarajasana Benefits: हमारे शरीर की हर गतिविधि चलना, उठना-बैठना, वजन उठाना या बैलेंस बनाए रखना, सब कुछ मांसपेशियों पर निर्भर करता है. इसलिए मांसपेशियों का मजबूत होना और उनका स्वस्थ रहना बेहद जरूरी है. योग में ऐसे कई आसन हैं जो रोजाना कुछ मिनटों के अभ्यास से मांसपेशियों को मजबूत, लचीला और एक्टिव रखते हैं. इन्हीं में से एक बेहद महत्वपूर्ण आसन है नटराजासन, जिसकी जानकारी मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ योगा भी देता है.
संस्कृत में "नट" का अर्थ है नर्तक और "राज" का अर्थ है राजा. यह आसन भगवान शिव के नटराज स्वरूप से प्रेरित है. शिव के इस रूप में शरीर एक पैर पर संतुलन बनाते हुए नृत्य की सुंदर मुद्रा में दिखाई देता है. नटराजासन भी इसी मुद्रा का अभ्यास है, जो शरीर को संतुलन, एकाग्रता और लचीलापन प्रदान करता है.
नटराजासन से शरीर के कई हिस्सों पर विशेष लाभ मिलता है. कूल्हे, जांघें, टखने, कंधे और रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है. यह आसन पेट की मांसपेशियों को टोन करता है और पूरे शरीर में खिंचाव लाकर ऊर्जा बढ़ाता है. नियमित अभ्यास से मन शांत होता है और तनाव में कमी आती है.
नटराजासन कैसे करें?
नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ योगा के अनुसार, इस आसन को करना आसान है.
सबसे पहले सीधे खड़े हो जाएं और संतुलन बनाएं.
पूरा भार बाएं पैर पर डालें.
दाएं पैर को घुटने से मोड़कर पीछे उठाएं.
दोनों हाथों को ऊपर ले जाकर पीछे की तरफ ले जाएं और दाएं पैर के टखने या पंजे को पकड़ें.
नजरें सामने किसी एक बिंदु पर स्थिर रखें और सामान्य सांस लेते रहें.
कुछ सेकंड रुककर धीरे-धीरे वापस आएं.
यही प्रक्रिया बाएं पैर से दोहराएं.
किन लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए?
योग विशेषज्ञों के अनुसार, गर्भवती महिलाएं, गंभीर कमर या घुटने के दर्द वाले व्यक्ति, हाई ब्लड प्रेशर के मरीज को ये आसान नहीं करना चाहिए.