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What is Hing: हींग भारतीय रसोई का ऐसा मसाला है जो किसी भी खाने में बस एक चुटकी डालते ही उसका स्वाद और खुशबू कई गुना बढ़ा देता है. दाल, सब्जी या खिचड़ी कहीं भी हींग डाल दी जाए, तो उसका स्वाद और सुगंध तुरंत निखर जाती है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि हींग बनती कैसे है और यह हमारे शरीर के लिए कितनी फायदेमंद है.
हींग क्या है और कहां से आती है?
हींग किसी पेड़ से मिलने वाला साधारण मसाला नहीं है, बल्कि यह एक जंगली पौधे की जड़ों से निकलने वाला गोंद (रस) है. इसकी खुशबू बेहद तीखी और तेज होती है. पुराने समय में इसका उत्पादन खुरासान और मुल्तान (आज के ईरान-अफगानिस्तान क्षेत्र) में होता था, इसलिए इसे बाल्हीक भी कहा जाता है. माना जाता है कि बौद्ध भिक्षुओं के माध्यम से ही यह भारत तक पहुंची.
आज इस्तेमाल होने वाली हींग कैसे बनती है?
भारत में जो हींग इस्तेमाल होती है, वह कंपाउंडेड हींग कहलाती है. इसमें शुद्ध हींग सिर्फ 30% या उससे भी कम होती है. बाकी में मैदा, आटा, गोंद और अन्य चीजें मिलाई जाती हैं, ताकि इसकी तीखी गंध थोड़ी हल्की हो जाए और खाना बनाने में आसानी से इस्तेमाल हो सके. बाजार में मिलने वाली हींग की खुशबू इसी पर निर्भर करती है कि उसमें मिलावट कितनी है. कम मिलावट मतलब गंध ज्यादा तेज.
भारत में हींग की खपत और इतिहास
भारत दुनिया में हींग का सबसे बड़ा उपभोक्ता है, लेकिन लंबे समय तक इसका उत्पादन भारत में नहीं होता था. कच्ची हींग अफगानिस्तान, ईरान और मध्य एशिया से आयात की जाती थी. मुगल काल में आगरा हींग व्यापार का बड़ा केंद्र था. अफगानिस्तान से हींग भेड़ों की खाल में भरकर लाई जाती थी. आगरा पहुंचने के बाद ही हींग और चमड़े का अलग-अलग व्यापार होता था. यहीं से आगरा का जूते का उद्योग भी आगे बढ़ा. आज भारत में हाथरस हींग शोधन का सबसे बड़ा केंद्र है. भारत में हींग की खेती भी शुरू हो चुकी है, जिसके लिए 2016–17 में ईरान से इसके बीज लाए गए थे.
हींग के घरेलू और सेहत संबंधी फायदे
हींग सिर्फ रसोई का मसाला नहीं, बल्कि एक घरेलू दवा भी है. पेट में गैस हो तो हींग को पानी में घोलकर नाभि पर लगाने से तुरंत आराम मिलता है. छोटे बच्चों के पेट दर्द में भी यह उपाय बहुत कारगर है. हींग पाचन सुधारती है, गैस दूर करती है और शरीर की सूजन कम करने में मदद करती है. इसी कारण हींग भारतीय भोजन का जरूरी हिस्सा बन चुकी है. सिर्फ स्वाद के लिए ही नहीं, बल्कि सेहत के लिए भी.
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Ayurvedic Kadha for Cold and Cough: सर्दियों के मौसम में खांसी और जुकाम की वजह से शरीर पूरे दिन थका हुआ और एनर्जी की कमी महसूस करता है. नाक बहना, गले में खराश और हल्का बुखार जैसे लक्षण आम हैं. ऐसे मामलों में आयुर्वेदिक काढ़ा बहुत मददगार हो सकता है. ये शरीर को अंदर से गर्म रखते हैं, इम्यूनिटी बढ़ाते हैं और वायरस से लड़ने की ताकत देते हैं.
आयुर्वेद के मुताबिक, सर्दी और खांसी मुख्य रूप से कफ दोष बढ़ने के कारण होती है. इसलिए, गर्म, तीखे और हल्के सूखने वाले गुणों वाले काढ़े कफ को कम करते हैं और तुरंत आराम देते हैं. अदरक, दालचीनी, काली मिर्च और तुलसी कफ को बैलेंस करते हैं, जबकि गिलोय और हल्दी शरीर की इम्यूनिटी को मजबूत करते हैं.
पहला असरदार काढ़ा है अदरक-तुलसी का काढ़ा
अदरक शरीर की अकड़न और सूजन को कम करता है और तुलसी इम्यूनिटी बढ़ाती है. इसे बनाने के लिए एक इंच अदरक का टुकड़ा और 10-12 तुलसी के पत्ते दो कप पानी में उबालें. स्वाद के लिए शहद मिला सकते हैं. इसे दिन में 1-2 बार पीना काफी है.
दूसरा काढ़ा है काली मिर्च-लौंग-दालचीनी का काढ़ा
इसका बहुत गर्म असर होता है, जो बलगम को पतला करके बाहर निकालने में मदद करता है. काली मिर्च वायरल एक्टिविटी को कम करती है, लौंग गले की खराश से राहत देती है, और दालचीनी शरीर को गर्म रखती है.
तीसरा है गिलोय-अदरक का काढ़ा
गिलोय को आयुर्वेद में अमृत माना जाता है और जब इसे अदरक के साथ लिया जाता है, तो यह इन्फेक्शन को जल्दी कम करने में मदद करता है. चौथा है हल्दी वाला दूध (गोल्डन मिल्क) हल्दी एंटीवायरल और एंटी-इंफ्लेमेटरी है और दूध शरीर को आराम देता है और गले की खराश से तुरंत राहत देता है.
पांचवां है मुलेठी-तुलसी का काढ़ा
मुलेठी गले की जलन को शांत करती है और तुलसी इम्यूनिटी बढ़ाती है. हालांकि, याद रखें कि बहुत गर्म काढ़े ज़्यादा मात्रा में न पिएं. काढ़ा दवा का विकल्प नहीं है, लेकिन ये राहत देने और इम्यूनिटी बढ़ाने में बहुत मददगार होते हैं.
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फिटनेस और हेल्दी डाइट को लेकर जागरूक लोगों के बीच चिया सीड्स काफी लोकप्रिय हो गए हैं. छोटे दिखने वाले ये बीज फाइबर, प्रोटीन और ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर होते हैं, जो पाचन और गट हेल्थ के लिए बेहद फायदेमंद हैं. जब इन्हें भिगोकर पुडिंग बनाया जाता है, तो यह नाश्ते के लिए एक स्वादिष्ट और पौष्टिक विकल्प बन जाता है.
फ्लोरिडा के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट और हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. जोसेफ सलहब ने हाल ही में अपने इंस्टाग्राम पर कुछ हेल्दी चिया पुडिंग रेसिपी शेयर की हैं. ये रेसिपी दिखने में तो डेजर्ट जैसी लगती हैं, लेकिन सेहत के लिए बेहद फायदेमंद हैं. आइए जानें कि इन्हें घर पर कैसे बनाया जा सकता है.
1. कोकोनट मैंगो चिया पुडिंग
दो लोगों के लिए ½ कप लाइट कोकोनट मिल्क, ¼ कप ग्रीक योगर्ट, 4 चम्मच चिया सीड्स, 1 चम्मच कद्दूकस किया नारियल और ¾ कप आम लें. सबको अच्छी तरह मिलाकर रात भर फ्रिज में रखें. सुबह ताजे आम के टुकड़ों के साथ सर्व करें. यह रेसिपी गर्मियों के लिए परफेक्ट है.
2. ब्लूबेरी चिया पुडिंग
एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर इस रेसिपी के लिए ½ कप ब्लूबेरी, ¾ कप ग्रीक योगर्ट, 2 चम्मच मेपल सिरप और 3 चम्मच चिया सीड्स लें. ब्लूबेरी, योगर्ट और सिरप को ब्लेंड करें, फिर उसमें चिया मिलाकर फ्रिज में रख दें. सुबह ऊपर से ब्लूबेरी या डार्क चॉकलेट डालकर खाएं.
3. माचा लाटे चिया पुडिंग
माचा फ्लेवर पसंद करने वालों के लिए यह बढ़िया ऑप्शन है. 1 कप ओट मिल्क, 2 चम्मच माचा पाउडर, ¼ कप चिया सीड्स और थोड़ा मेपल सिरप मिलाकर रात भर ठंडा करें. सुबह रास्पबेरी और बादाम से सजाकर खाएं.
4. रास्पबेरी चिया पुडिंग
½ कप रास्पबेरी, ½ कप दूध, ¼ कप योगर्ट, 3 चम्मच चिया सीड्स, 1 चम्मच नींबू रस और थोड़ा मेपल सिरप मिलाएं. रात भर ठंडा करें और सुबह ग्रेनोला या रास्पबेरी से गार्निश करें.
5. मैंगो चिया पुडिंग
1 बड़ा आम, ¾ कप योगर्ट, 2 चम्मच मेपल सिरप, एक चुटकी नमक और ½ कप चिया सीड्स मिलाकर रात भर रखें. सुबह ऊपर से आम के टुकड़े डालें और परोसें.
क्यों फायदेमंद है
चिया सीड्स में मौजूद फाइबर पेट को लंबे समय तक भरा रखता है, जिससे ओवरईटिंग नहीं होती. ये पाचन को सुधारते हैं और एनर्जी लेवल बनाए रखते हैं. इसलिए अगर आप हेल्दी, आसान और टेस्टी ब्रेकफास्ट की तलाश में हैं, तो चिया पुडिंग एक परफेक्ट चॉइस हो सकती है.
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Benefits of Figs: अंजीर एक खास और पौष्टिक ड्राई फ्रूट है, जो सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इसमें विटामिन, मिनरल्स, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। अंजीर का रोजाना सेवन करने से शरीर को कई बीमारियों से लड़ने की ताकत मिलती है। यह त्वचा को चमकदार और स्वस्थ बनाता है, पाचन क्रिया को बेहतर करता है और शरीर की इम्यूनिटी को भी मजबूत बनाता है।
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने भी अंजीर को ‘सुपरफ्रूट’ बताया है। मंत्रालय के अनुसार अंजीर रोज खाने से गठिया, लकवा और पेशाब में जलन जैसी समस्याओं में राहत मिलती है। यह शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है और ताकत बढ़ाता है।
अंजीर में पोटेशियम, कैल्शियम, फॉस्फोरस और मैग्नीशियम जैसे खनिज होते हैं जो हड्डियों को मजबूत बनाते हैं और दिल को स्वस्थ रखते हैं। पोटेशियम ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करता है जबकि कैल्शियम हड्डियों के लिए फायदेमंद होता है।
हेल्थ एक्सपर्ट्स बताते हैं कि अंजीर को रात में पानी में भिगोकर सुबह खाली पेट खाना सबसे अच्छा तरीका है। इससे पाचन तंत्र मजबूत होता है, मेटाबॉलिज्म बढ़ता है और वजन घटाने में भी मदद मिलती है। अंजीर का पानी पीना भी लाभकारी होता है क्योंकि यह शरीर की चर्बी कम करने की प्रक्रिया को तेज करता है।
इसमें मौजूद फाइबर पेट की समस्याओं जैसे कब्ज या गैस में राहत देता है। साथ ही यह लंबे समय तक पेट भरा हुआ रखने में मदद करता है, जिससे अधिक खाने की इच्छा नहीं होती और वजन भी नियंत्रित रहता है।
अंजीर में विटामिन सी होता है, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। इसमें कार्बोहाइड्रेट और नेचुरल शुगर भी होता है, जो शरीर को ऊर्जा देता है। हालांकि, डायबिटीज के मरीजों को अंजीर का सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए क्योंकि इसमें नैचुरल शुगर होती है।
कुल मिलाकर, अंजीर एक स्वादिष्ट और सेहतमंद फल है जिसे नियमित रूप से खाने से शरीर को कई तरह के फायदे मिलते हैं। यह एक आसान, सस्ता और असरदार तरीका है अपने स्वास्थ्य को बेहतर बनाने का।