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सर्दियों में पाचन मजबूत कैसे रखें? आयुर्वेद से जानें आसान टिप्स

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फाइल फोटो

Winter Digestion Problems: सर्दियों का मौसम अपने साथ ठंडक, आलस और गरमागरम खाने का मजा जरूर लाता है, लेकिन इसी मौसम में पाचन से जुड़ी समस्याएं भी तेजी से बढ़ जाती हैं. डॉक्टरों और आयुर्वेद विशेषज्ञों के मुताबिक, ठंड के कारण शरीर की गतिविधियां धीमी हो जाती हैं, जिससे चयापचय (मेटाबॉलिज्म) प्रभावित होता है और पाचन अग्नि असंतुलित हो सकती है. इसका सीधा असर पेट पर पड़ता है और गैस, कब्ज, सीने में जलन, भारीपन और भूख न लगने जैसी परेशानियां आम हो जाती हैं.

आयुर्वेद का मानना है कि सर्दियों में शरीर की पाचन अग्नि वैसे तो तेज होती है, लेकिन अगर खानपान गलत हो जाए तो यही अग्नि कमजोर भी पड़ जाती है. विशेषज्ञ बताते हैं कि इस मौसम में वात और कफ दोनों दोष बढ़ जाते हैं. वात बढ़ने से गैस, पेट दर्द और कब्ज की समस्या होती है, जबकि कफ बढ़ने से पेट भारी रहना, अपच और सुस्ती बढ़ जाती है. अगर अग्नि मंद पड़ जाए, तो शरीर में ‘आमा’ बनने लगता है, जिससे थकान बढ़ती है और इम्युनिटी भी धीरे-धीरे कमजोर होने लगती है.

सर्दियों में पेट खराब होने के सामान्य लक्षणों में भूख कम लगना, खट्टी डकारें, पेट कड़ा महसूस होना, खाना खाने के बाद सुस्ती या नींद-सी आना शामिल हैं. ऐसे में खानपान को समझदारी से चुनना बेहद जरूरी हो जाता है. इस मौसम में हल्का, गरम और आसानी से पचने वाला भोजन सबसे ज्यादा फायदेमंद माना जाता है. अदरक, काली मिर्च, जीरा, अजवायन और हल्दी पाचन को मजबूत बनाते हैं और गैस की समस्या को कम करते हैं.

विशेषज्ञों की सलाह है कि ठंड के मौसम में ठंडा पानी, फ्रिज का खाना, रात में दही, बहुत मीठा या तला-भुना भोजन जितना हो सके कम करें. चाय-कॉफी की जगह गरम पानी या हर्बल टी पीना ज्यादा फायदेमंद रहता है. इससे पाचन तंत्र सक्रिय रहता है.

घरेलू उपायों पर भरोसा करने से भी काफी राहत मिलती है. सुबह खाली पेट अदरक और काली मिर्च वाला गुनगुना पानी पीना, भोजन के बाद सौंफ चबाना, अजवायन और काले नमक का पानी लेना गैस और अपच में तुरंत राहत देता है. अगर पेट में ज्यादा गैस बनती हो तो हिंग वाला गुनगुना पानी आराम पहुंचाता है.

इसके साथ ही योग और हल्की एक्सरसाइज को भी दिनचर्या में शामिल करने की सलाह दी जाती है. रोज सुबह कपालभाति और खाने के बाद 10 मिनट टहलना पाचन को मजबूत रखने का सबसे आसान और असरदार तरीका माना जाता है.
 


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Written by: Taushif

27 Nov 2025  ·  Published: 21:53 IST

पेट रहेगा स्वस्थ तो शरीर रहेगा तंदरुस्त, जानिए किन चीज़ों से मिलेगा फायदा

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Fermented Foods For Gut Health: अगर आप अपनी सेहत को लंबे समय तक अच्छा बनाए रखना चाहते हैं तो सबसे पहले अपने गट यानी पाचन तंत्र की सेहत का ध्यान रखना जरूरी है. एक हेल्दी गट न सिर्फ पोषक तत्वों के अवशोषण में मदद करता है, बल्कि यह हार्मोन बैलेंस, इम्युनिटी बढ़ाने और स्किन ग्लो तक में अहम भूमिका निभाता है. रिसर्च से यह भी साबित हो चुका है कि हेल्दी गट हमारे मूड और मानसिक स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाता है.

गट हेल्थ सुधारने में फर्मेंटेड फूड्स (Fermented Foods) की अहम भूमिका होती है. ये फूड्स प्रोबायोटिक्स, एंटीऑक्सिडेंट्स और विटामिन से भरपूर होते हैं, जो पाचन क्रिया को बेहतर बनाते हैं और शरीर में अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ावा देते हैं. आइए जानते हैं ऐसे कुछ बेहतरीन फर्मेंटेड फूड्स के बारे में जो आपके गट के लिए रामबाण की तरह काम कर सकते हैं.

1. घर का बना दही
दही भारतीय रसोई में रोज़मर्रा का हिस्सा है और यह सबसे लोकप्रिय प्रोबायोटिक फूड है. यह अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ावा देता है, सूजन कम करता है और पाचन शक्ति मजबूत बनाता है.

2. सॉरक्रॉट (Sauerkraut)
यह फर्मेंटेड पत्ता गोभी से बनाया जाता है. इसमें फाइबर, विटामिन C और प्रोबायोटिक्स भरपूर मात्रा में होते हैं. यह गट के बैक्टीरियल बैलेंस को सुधारने में मदद करता है.

3. इडली और डोसा
इडली और डोसा भी फर्मेंटेड फूड की श्रेणी में आते हैं. ये चावल और उड़द दाल को भिगोकर और फर्मेंट करके बनाए जाते हैं, जिससे पाचन में आसानी होती है.

4. कोम्बुचा
कोम्बुचा एक फर्मेंटेड चाय है जो प्रोबायोटिक्स और एंटीऑक्सिडेंट्स से भरपूर होती है। यह डाइजेशन, डिटॉक्स और एनर्जी बूस्ट के लिए बहुत लाभकारी मानी जाती है.

5. फर्मेंटेड चावल
बचे हुए चावल को रात भर पानी में भिगोकर सुबह छाछ या दही के साथ खाने से यह एक बेहतरीन प्रोबायोटिक फूड बन जाता है. यह शरीर को ठंडक देता है और गट हेल्थ को सपोर्ट करता है.

6. किमची और मिसो (वैकल्पिक विदेशी विकल्प)
कोरियन डिश किमची और जापानी मिसो भी बेहतरीन फर्मेंटेड फूड्स हैं. हालांकि ये हर जगह आसानी से नहीं मिलते, लेकिन जहां उपलब्ध हों वहां ये गट हेल्थ के लिए बहुत लाभकारी हैं.


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Written by: Taushif

31 Jul 2025  ·  Published: 05:05 IST

Liver Diet: डेली डाइट में शामिल करें ये 4 चीजें, लिवर रहेगा हमेशा फिट

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प्रतीकात्मक फोटो

Healthy Liver Diet: आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी और खराब खान-पान और बढ़ते तनाव का सीधा असर हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक, लिवर पर पड़ता है। लिवर न सिर्फ़ पाचन में मदद करता है, बल्कि शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने, पोषक तत्वों को संग्रहित करने और मेटाबॉलिज़्म को नियंत्रित करने में भी बेहद अहम है। अगर लिवर कमज़ोर हो जाए, तो शरीर कई बीमारियों का घर बन सकता है। इसलिए, लिवर को स्वस्थ रखने के लिए अपनी जीवनशैली में कुछ खास खान-पान की आदतों को शामिल करना बेहद ज़रूरी है।

1. हरी सब्ज़ियां और फाइबर युक्त आहार
ब्रोकोली, पालक, बीन्स और हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ फाइबर से भरपूर होती हैं जो लिवर को डिटॉक्सीफाई करने में मदद करती हैं। फाइबर शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालता है और लिवर पर भार कम करता है। क्रूसिफेरस सब्ज़ियाँ (ब्रोकोली, फूलगोभी) ख़ास तौर पर लिवर में एंजाइम्स को सक्रिय करती हैं जो विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने का काम करते हैं।

2. हल्दी और अदरक का सेवन
हल्दी में पाया जाने वाला करक्यूमिन लिवर की सूजन को कम करने में कारगर है। यह एक प्राकृतिक डिटॉक्सिफायर के रूप में काम करता है। रोज़ाना गुनगुने पानी में एक चुटकी हल्दी और थोड़ा सा अदरक मिलाकर पीने से लिवर की कार्यक्षमता में सुधार होता है।

3. कॉफ़ी (संतुलित मात्रा में)
शोध से पता चला है कि कॉफ़ी लिवर के लिए फायदेमंद हो सकती है, बशर्ते इसे सीमित मात्रा में (दिन में 1-2 कप) पिया जाए। यह लिवर में जमा वसा और सूजन को कम करने में मदद करती है और लिवर सिरोसिस जैसी बीमारियों से बचाती है।

4. एवोकाडो, मेवे और स्वस्थ वसा
एवोकाडो, अखरोट, बादाम जैसे खाद्य पदार्थों में मौजूद स्वस्थ फैटी एसिड लिवर की सूजन को कम करते हैं और अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाते हैं। ये लिवर की कोशिकाओं की मरम्मत और उन्हें मज़बूत बनाने में मददगार होते हैं।
 


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Written by: Taushif

23 Jul 2025  ·  Published: 14:26 IST

यूरिन में झाग दिखे तो न करें नजरअंदाज, हो सकता है किडनी डैमेज का शुरुआती संकेत

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फाइल फोटो

Kidney Health: हमारे शरीर से निकलने वाला यूरिन आमतौर पर हल्के पीले से लेकर गहरे पीले या अंबर रंग का होता है. लेकिन कई बार लोग देखते हैं कि यूरिन झागदार दिख रहा है. ज़्यादातर मामलों में ऐसा तब होता है जब ब्लैडर (मूत्राशय) बहुत भरा होता है और पेशाब तेज़ी से निकलने पर पानी में हलचल पैदा होती है. हालांकि, अगर झाग बार-बार और लगातार बने रहते हैं तो ये किडनी से जुड़ी समस्या का संकेत भी हो सकता है.

क्यों बनता है यूरिन में झाग?
महाराष्ट्र के ठाणे स्थित KIMS अस्पताल के यूरोलॉजिस्ट डॉ. अजीत गुजेला के मुताबिक, झागदार पेशाब हमेशा खराब किडनी का लक्षण नहीं होता. यह कभी-कभी तेज़ पेशाब, शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) या टॉयलेट में बचे साबुन के अवशेषों की वजह से भी हो सकता है. लेकिन अगर यूरिन में लगातार झाग बन रहे हैं और जल्दी गायब नहीं हो रहे, तो यह प्रोटीन्यूरिया का संकेत हो सकता है. इसका मतलब है कि यूरिन में प्रोटीन की मात्रा बढ़ रही है, जो दर्शाता है कि किडनी ठीक से फ़िल्टरिंग नहीं कर रही है.

किडनी डैमेज के शुरुआती संकेत
अगर यूरिन बार-बार झागदार आ रहा है और लंबे समय तक झाग बना रहता है, तो यह किडनी डैमेज या किडनी डिजीज़ का शुरुआती लक्षण हो सकता है. ऐसा इसलिए क्योंकि स्वस्थ किडनी खून से प्रोटीन को फ़िल्टर नहीं होने देती, लेकिन जब किडनी के फ़िल्टर (ग्लोमेरुलस) खराब होने लगते हैं तो प्रोटीन मूत्र में आने लगता है.

इन लक्षणों पर भी रखें ध्यान
अगर झागदार यूरिन के साथ नीचे दिए लक्षण नज़र आएं, तो डॉक्टर से ज़रूर मिलें. 

हाथ, पैर, चेहरा या पेट में सूजन (फ्लूइड जमा होना)
लगातार थकान रहना
भूख न लगना
मतली या उल्टी 
नींद की समस्या
यूरिन की मात्रा में बदलाव
पेशाब का बहुत हल्का या बहुत गहरा रंग

क्या करें?
अगर झागदार पेशाब कभी-कभी आता है तो ज़्यादा चिंता की बात नहीं, लेकिन अगर यह लगातार दिख रहा है या साथ में अन्य लक्षण भी हैं, तो नेफ्रोलॉजिस्ट (किडनी विशेषज्ञ) से तुरंत जांच कराएं. समय रहते ध्यान देने पर किडनी रोग को शुरुआती स्टेज में ही कंट्रोल किया जा सकता है.

नोट: यह जानकारी जागरूकता के उद्देश्य से है. किसी भी लक्षण पर डॉक्टर से सलाह लेना ज़रूरी है.


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Written by: Taushif

30 Oct 2025  ·  Published: 10:26 IST