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Winter Throat Pain Remedies: सर्दियों का मौसम जहां ठंड और सुहावना एहसास देता है, वहीं इस मौसम में गले से जुड़ी समस्याएं भी तेजी से बढ़ जाती हैं. बार-बार तापमान बदलना और ठंडी, सूखी हवा गले की नमी छीन लेती है. आयुर्वेद के मुताबिक, इस मौसम में शरीर का वात और कफ असंतुलन में आ जाता है, जिससे गला सूखना, आवाज बैठना, खराश और दर्द जैसी परेशानियां बढ़ जाती हैं.
विज्ञान भी मानता है कि ठंडी हवा गले की म्यूकस लाइनिंग को कमजोर कर देती है, जिससे वायरस और बैक्टीरिया आसानी से संक्रमण फैला देते हैं. लेकिन राहत की बात यह है कि इन समस्याओं से बचाव के लिए महंगी दवाओं की जरूरत नहीं होती. हमारी रसोई में मौजूद कुछ घरेलू चीजें ही गले की परेशानी को जड़ से खत्म करने में मदद कर सकती हैं.
काली मिर्च और मिश्री का कमाल
काली मिर्च को आयुर्वेद में बलगम कम करने वाली औषधि माना गया है. इसमें मौजूद पाइपरीन तत्व गले में जमा कफ को कम करता है और आवाज को साफ करता है. जब काली मिर्च को मिश्री के साथ चबाया जाता है तो यह गले की सूजन, भारीपन और जलन को काफी हद तक कम कर देता है. वैज्ञानिक भी मानते हैं कि काली मिर्च का एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण गले की सूजन को कम करता है.
अदरक
अदरक का रस सर्दियों में गले के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. अदरक में मौजूद जिंजरॉल तत्व सूजन को कम करता है और दर्द से राहत देता है. नींबू और सेंधा नमक के साथ इसका सेवन करने से गले की सफाई होती है और इंफेक्शन तेजी से ठीक होता है.
मुलेठी
मुलेठी को गले के लिए एक प्राकृतिक टॉनिक माना जाता है. यह गले पर एक सुरक्षात्मक परत बनाती है, जिससे जलन और दर्द कम होता है. आंवला शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है और इंफेक्शन से लड़ने में मदद करता है. मिश्री इस मिश्रण को संतुलित करके गले को ठंडक और राहत देती है.
नोट:- डॉक्टरों का मानना है कि अगर इन घरेलू उपायों को सही तरीके से अपनाया जाए तो सर्दियों में गले की अधिकांश समस्याओं से बिना दवा के ही राहत मिल सकती है. हालांकि अगर दर्द ज्यादा समय तक बना रहे तो चिकित्सकीय सलाह जरूर लेनी चाहिए.
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Weight Loss Foods: आज के समय में मोटापा एक आम समस्या बन चुकी है, जो न सिर्फ हमारी पर्सनैलिटी को प्रभावित करता है बल्कि कई गंभीर बीमारियों की वजह भी बनता है. डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और थायराइड जैसी समस्याओं का सीधा संबंध बढ़ते वजन से जुड़ा होता है. ऐसे में अगर आप स्वस्थ और सक्रिय जीवन जीना चाहते हैं, तो वजन को संतुलित रखना बेहद जरूरी है.
वजन कम करने के लिए सबसे अहम भूमिका आपकी डाइट और लाइफस्टाइल की होती है. सही खान-पान और नियमित दिनचर्या से न सिर्फ वजन घटाया जा सकता है, बल्कि शरीर को संपूर्ण पोषण भी दिया जा सकता है. आज हम आपको कुछ ऐसे सुपरफूड्स के बारे में बता रहे हैं जो वजन कम करने में आपकी मदद कर सकते हैं. ये फूड्स कम कैलोरी वाले होते हैं लेकिन इनमें प्रोटीन, फाइबर और हेल्दी फैट्स की भरपूर मात्रा होती है, जिससे पेट ज्यादा देर तक भरा रहता है और बार-बार खाने की जरूरत महसूस नहीं होती.
1. अवोकाडो (Avocado)
हालांकि अवोकाडो में कैलोरी थोड़ी ज्यादा होती है, लेकिन ये कैलोरीज़ हेल्दी फैट्स से आती हैं. इसमें मौजूद मोनोसैचुरेटेड फैट्स और फाइबर न सिर्फ पाचन को बेहतर बनाते हैं, बल्कि लंबे समय तक भूख भी नहीं लगने देते. यह पेट को भरा रखने के साथ-साथ दिल की सेहत के लिए भी फायदेमंद है.
2. बेरीज (Berries)
ब्लूबेरी, स्ट्रॉबेरी, रास्पबेरी जैसी बेरीज स्वाद में तो अच्छी होती ही हैं, साथ ही ये नेचुरल एंटीऑक्सीडेंट्स और फाइबर का बेहतरीन स्रोत भी होती हैं. इनमें कैलोरी कम होती है, जिससे वजन बढ़ने की संभावना कम होती है. साथ ही मीठा खाने की इच्छा होने पर ये एक हेल्दी विकल्प बनती हैं.
3. ओट्स (Oats)
ओट्स को वजन घटाने के लिए सुपरफूड कहा जाता है. इसमें सॉल्युबल फाइबर होता है जो पेट में जाकर पानी के साथ मिलकर जेल जैसा बन जाता है. इससे पेट लंबे समय तक भरा महसूस होता है और बार-बार भूख नहीं लगती. अगर आप दिन की शुरुआत ओट्स से करते हैं तो यह आपके मेटाबॉलिज्म को भी एक्टिव करता है.
4. बीन्स और दालें (Beans and Lentils)
राजमा, छोले, मसूर और मूंग जैसी दालें प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होती हैं. यह शरीर को लंबे समय तक एनर्जी देती हैं और ब्लड शुगर लेवल को स्थिर बनाए रखने में मदद करती हैं. इनके सेवन से पेट जल्दी नहीं खाली होता, जिससे आप अनहेल्दी स्नैक्स से बच जाते हैं.
5. अंडे (Eggs)
अंडे प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत हैं और वजन कम करने वालों के लिए यह बहुत फायदेमंद हैं. खासतौर पर अगर आप नाश्ते में अंडा शामिल करते हैं, तो दिनभर एनर्जी बनी रहती है और बार-बार खाने की जरूरत नहीं पड़ती. यह मांसपेशियों को मजबूत बनाते हैं और शरीर को पोषण देते हैं.
6. हरी पत्तेदार सब्जियां (Leafy Greens)
पालक, मेथी, केल, सरसों जैसी हरी सब्जियां फाइबर, विटामिन और मिनरल्स का खजाना हैं. इनकी खासियत यह है कि इनमें कैलोरी बहुत कम होती है, लेकिन पोषण भरपूर मिलता है. इन्हें सलाद, सूप या सब्जी के रूप में डाइट में शामिल किया जा सकता है.
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Daily Healthy Seeds: आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में गलत खान-पान और अनियमित दिनचर्या के कारण पेट से जुड़ी समस्याएं जैसे गैस, कब्ज, ब्लोटिंग और पाचन संबंधी परेशानियां बहुत आम हो गई हैं. लेकिन अच्छी बात यह है कि कुछ आसान बदलावों से इन दिक्कतों को काफी हद तक कम किया जा सकता है. अगर आप अपनी डाइट में फाइबर से भरपूर बीज (सीड्स) शामिल करें, तो यह न सिर्फ आपकी गट हेल्थ बल्कि ओवरऑल हेल्थ को भी बेहतर बना सकता है.
गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. सौरभ सेठी ने हाल ही में अपने इंस्टाग्राम पर चिया सीड्स, अलसी और तुलसी के बीज के फायदे बताए हैं. उन्होंने यह भी बताया कि इन्हें सही तरीके से खाने से पाचन से जुड़ी कई दिक्कतें दूर हो सकती हैं.
1. चिया सीड्स
डॉ. सेठी के मुताबिक, चिया सीड्स में भरपूर मात्रा में सॉल्यूबल फाइबर होता है. जब इन्हें पानी में भिगोया जाता है तो ये जेल जैसी बनावट ले लेते हैं, जो पेट में हेल्दी बैक्टीरिया को बढ़ाने में मदद करता है. इससे कब्ज की समस्या दूर रहती है और डाइजेशन बेहतर होता है. वहीं, चिया सीड्स को कभी सूखा न खाएं. इन्हें खाने से पहले कम से कम 20–30 मिनट तक पानी में भिगोकर रखें. चाहें तो इन्हें रातभर के लिए भिगो दें और सुबह स्मूदी, जूस या दही के साथ लें.
2. अलसी
अलसी छोटे बीज होते हैं, लेकिन पोषण के मामले में बेहद ताकतवर हैं. इनमें ओमेगा-3 फैटी एसिड (ALA) पाया जाता है जो शरीर में सूजन कम करता है, हार्मोन को संतुलित रखता है और हार्ट हेल्थ के लिए फायदेमंद है. इन्हें हमेशा पीसकर ही खाना चाहिए क्योंकि साबुत अलसी शरीर से बिना पचे निकल जाती है. पिसी हुई अलसी ब्लोटिंग और हार्मोनल असंतुलन को कम करती है और कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने में मदद करती है. डॉ. सेठी हफ्ते में 3–4 बार इसे खाने की सलाह देते हैं.
3. तुलसी के बीज
तुलसी के बीज दिखने में चिया जैसे होते हैं लेकिन स्वाद में हल्के मीठे और ज्यादा टेस्टी लगते हैं. ये बहुत जल्दी फूल जाते हैं और इनमें भी भरपूर सॉल्यूबल फाइबर होता है जो डाइजेशन को बेहतर बनाता है. डॉ. सेठी सलाह देते हैं कि इन्हें चिया सीड्स के साथ मिलाकर ओटमील, दही या बादाम दूध में डालकर खाया जाए. इससे न सिर्फ स्वाद बढ़ता है बल्कि पौष्टिकता भी दोगुनी हो जाती है.
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यूरोप के कई देशों में इन दिनों ‘स्लीप डिवोर्स’ का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है. यानी पति-पत्नी एक साथ नहीं, बल्कि अलग-अलग बिस्तर या कमरों में सोते हैं ताकि नींद बेहतर हो सके. स्वीडन, नॉर्वे जैसे नॉर्डिक देशों में यह तरीका काफी लोकप्रिय हो रहा है, क्योंकि लोग मानते हैं कि इससे खर्राटे, देर तक जागने या एक-दूसरे की नींद में खलल जैसी दिक्कतें कम होती हैं.
लेकिन ताइवान के वैज्ञानिकों की एक नई रिसर्च में इस ट्रेंड को लेकर चिंता जताई गई है. ‘बीएमसी पब्लिक हेल्थ’ जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, अलग सोने से कपल्स की मेंटल हेल्थ पर असर पड़ सकता है. इस रिसर्च में उत्तरी ताइवान के 860 जोड़ों पर सर्वे किया गया, जिसमें उनकी नींद की आदतों और मानसिक स्वास्थ्य का विश्लेषण किया गया. इसमें पाया गया कि जो कपल्स अलग-अलग कमरों में सोते हैं, खासकर बुजुर्ग जोड़े, उनकी मेंटल हेल्थ साथ सोने वालों की तुलना में कमजोर पाई गई.
वैज्ञानिकों का मानना है कि नींद की व्यवस्था सिर्फ एक फिजिकल फैक्टर नहीं है, बल्कि यह रिश्ते की इमोशनल बॉन्डिंग से भी जुड़ी होती है. यानी साथ सोने से भले नींद थोड़ी डिस्टर्ब हो, लेकिन मानसिक जुड़ाव मजबूत रहता है. अमेरिकी वैज्ञानिक वेंडी ट्रॉक्सेल, जो किताब ‘Sharing the Covers: Every Couple’s Guide to Better Sleep’ की लेखिका हैं, ने भी कहा कि अलग-अलग सोना कई बार रिश्ते में दूरी का संकेत हो सकता है.
हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि हर जोड़े की जरूरत अलग होती है, इसलिए नींद और रिश्ते के बीच सही संतुलन बनाना जरूरी है. अंत में शोधकर्ताओं का निष्कर्ष यह रहा कि अगर कपल्स चाहते हैं कि उनका रिश्ता और मानसिक स्वास्थ्य दोनों मजबूत रहें, तो उन्हें नींद की गुणवत्ता के साथ-साथ भावनात्मक नजदीकी पर भी ध्यान देना चाहिए.