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Healthy Foods Mistakes: आजकल लोग अपनी डाइट में हेल्दी फूड शामिल करने के लिए काफी सजग हो गए हैं. चिया सीड्स, चुकंदर, पालक, बादाम और ओट्स जैसे फूड्स रोज़ाना की थाली का हिस्सा बन चुके हैं. माना जाता है कि ये शरीर को जरूरी विटामिन, मिनरल्स और फाइबर देते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर इन हेल्दी फूड्स को गलत तरीके से खाया जाए तो ये फायदे के बजाय नुकसान ज्यादा पहुंचा सकते हैं?
दरअसल, कई बार लोग हेल्दी फूड तो खाते हैं लेकिन उन्हें खाने का सही तरीका नहीं जानते. नतीजा यह होता है कि शरीर को इनमें मौजूद जरूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते और पाचन संबंधी दिक्कतें भी शुरू हो जाती हैं. ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि कौन सा हेल्दी फूड कैसे खाना चाहिए ताकि उसका पूरा फायदा मिले.
चिया सीड्स
चिया सीड्स आज की हेल्दी डाइट का अहम हिस्सा बन चुके हैं. इन्हें वेट लॉस, डाइजेशन और हार्ट हेल्थ के लिए फायदेमंद माना जाता है लेकिन अगर इन्हें सूखा खा लिया जाए तो समस्या हो सकती है. दरअसल, चिया सीड्स पानी को सोखकर फूल जाते हैं. ऐसे में इन्हें बिना भिगोए खाने पर पेट फूलने, गैस या यहां तक कि दम घुटने तक की परेशानी हो सकती है.
सही तरीका: चिया सीड्स को हमेशा पानी या दूध में कम से कम 20–30 मिनट भिगोने के बाद ही खाएं. इससे ये न सिर्फ आसानी से पचते हैं बल्कि शरीर को भरपूर पोषण भी मिलता है.
चुकंदर
चुकंदर शरीर को आयरन और नाइट्रेट की अच्छी मात्रा देता है, जिससे ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है और खून की कमी भी दूर होती है लेकिन अगर इसे ज्यादा उबालकर या तलकर खाया जाए तो इसके नाइट्रेट और अन्य पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं.
सही तरीका: चुकंदर को भाप में पकाकर या जूस के तौर पर लेना सबसे फायदेमंद है. इससे इसके सारे पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं और शरीर को पूरा लाभ मिलता है.
पालक
हर कोई जानता है कि पालक आयरन और मिनरल्स से भरपूर है लेकिन रोजाना अधिक मात्रा में कच्चा पालक खाना आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है. इसमें मौजूद ऑक्सेलेट किडनी स्टोन का कारण बन सकते हैं और शरीर को जरूरी पोषक तत्व सही से अवशोषित नहीं होने देते.
सही तरीका: पालक को हमेशा हल्का पकाकर या भूनकर खाना चाहिए. पकाने से इसमें मौजूद ऑक्सेलेट की मात्रा कम हो जाती है और शरीर को ज्यादा पोषण मिलता है.
ब्रोकली
ब्रोकली को सुपरफूड कहा जाता है क्योंकि इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स और कैंसर से लड़ने वाले कंपाउंड्स पाए जाते हैं लेकिन कई लोग इसे ज्यादा उबालकर या माइक्रोवेव में पकाकर खाते हैं, जिससे इसके पोषक तत्व कम हो जाते हैं.
सही तरीका: ब्रोकली को भाप में हल्का पकाकर खाना सबसे सही होता है. इससे इसमें मौजूद सल्फोराफेन सुरक्षित रहता है और यह आसानी से पच भी जाती है.
बादाम
बादाम को दिमागी ताकत और सेहतमंद दिल के लिए बेहतरीन माना जाता है लेकिन अगर आप इन्हें बिना भिगोए या खाली पेट खा लेते हैं तो अपच की समस्या हो सकती है. साथ ही, कच्चे बादाम का छिलका टैनिन और फाइटिक एसिड से भरा होता है, जो पोषक तत्वों के अवशोषण को रोकता है.
सही तरीका: बादाम को रातभर पानी में भिगोकर और सुबह छिलका उतारकर खाना चाहिए. इससे इसके सभी पोषक तत्व शरीर में आसानी से अवशोषित हो जाते हैं.
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Superfoods for Women: आज के दौर में महिलाएं न सिर्फ घर और बाहर की जिम्मेदारियां संभालती हैं बल्कि उनका शरीर भी भीतर से कई अहम भूमिकाएं निभाता है. हार्मोन संतुलन बनाए रखना, हड्डियों को मजबूत करना, मानसिक शांति देना, मां बनने की तैयारी करना और उम्र के साथ होने वाले बदलावों को सहन करना. ये सब एक महिला का शरीर रोज़ करता है. इसके बावजूद कई महिलाएं थकान, तनाव, सूजन (इंफ्लेमेशन) और हार्मोनल असंतुलन जैसी समस्याओं से जूझती हैं. इसका मुख्य कारण कमजोरी नहीं, बल्कि पोषण की कमी है. जब शरीर की जड़ों तक सही पोषण नहीं पहुंचता, तो असंतुलन और परेशानी महसूस होने लगती है.
आयुर्वेद में महिलाओं के शरीर को बेहद पवित्र और शक्तिशाली माना गया है. यही वजह है कि आयुर्वेद रोजाना पोषण और संतुलन पर ज़ोर देता है. अगर महिलाएं अपनी डाइट में कुछ विशेष सुपरफूड शामिल करें तो उनका स्वास्थ्य लंबे समय तक बेहतर रह सकता है. आइए जानते हैं ऐसे ही पांच सुपरफूड के बारे में...
1. शतावरी
शतावरी को आयुर्वेद में महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए सबसे खास माना गया है. यह न केवल प्रजनन स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है, बल्कि मानसिक शांति और हार्मोन संतुलन में भी मदद करता है. शतावरी शरीर को ठंडक देती है, जिससे पीरियड्स में ज्यादा रक्तस्राव, पेट में जलन या चिड़चिड़ापन जैसी समस्याओं से राहत मिलती है. इसे रात में गर्म दूध के साथ लेने से शरीर को गहरी नींद भी आती है और मन शांत रहता है.
2. काला तिल
काले तिल कैल्शियम, आयरन और हेल्दी फैट्स से भरपूर होते हैं. यह हड्डियों को मज़बूती देने के साथ-साथ हार्मोन को संतुलित करने में भी अहम भूमिका निभाते हैं. खासकर डिलीवरी के बाद और मेनोपॉज़ के समय यह महिलाओं के लिए बेहद फायदेमंद हैं. इन्हें सब्ज़ियों या चावल में भूनकर मसाले की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। नियमित सेवन से यह न केवल शरीर को ताकत देते हैं बल्कि बालों और त्वचा की सेहत भी बनाए रखते हैं.
3. आंवला
आंवला विटामिन C का सबसे अच्छा प्राकृतिक स्रोत माना जाता है. यह बाल, त्वचा, इम्यून सिस्टम और पाचन तंत्र के लिए वरदान है. एक्ने की समस्या हो या बालों का झड़ना, आंवला हर तरह से मदद करता है. सुबह आंवला जूस पीने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और स्किन ग्लो करने लगती है. आंवले को अचार, चटनी या मुरब्बे के रूप में भी डाइट में शामिल किया जा सकता है.
4. रागी
रागी को ‘कैल्शियम का पावरहाउस’ कहा जाता है. इसमें आयरन और अमीनो एसिड भी भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. यह न केवल हड्डियों की मज़बूती के लिए जरूरी है बल्कि नींद की गुणवत्ता को भी बेहतर बनाता है. मेनोपॉज़ के बाद जब महिलाओं की हड्डियां कमजोर होने लगती हैं, उस समय रागी बेहद लाभकारी होती है. इसे खिचड़ी, रोटी या दलिया बनाकर आसानी से खाया जा सकता है.
5. घी
घी भारतीय खानपान का अहम हिस्सा है और आयुर्वेद में इसे अमृत समान माना गया है. यह शरीर के ऊतकों को पोषण देता है, तनाव कम करता है और पाचन को मजबूत बनाता है. ड्राई स्किन की समस्या हो या नींद की कमी, घी दोनों में मदद करता है. रात को दूध में थोड़ा सा जायफल और घी मिलाकर पीने से नींद गहरी आती है और मन शांत रहता है.
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Benefits of Figs: आज की तेज़ रफ्तार और व्यस्त जिंदगी में स्वस्थ रहना सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है. ऐसे समय में कुछ प्राकृतिक खाद्य पदार्थ हमारी दिनचर्या को आसान बनाते हैं, जिनमें से एक अंजीर है. आकार में छोटा दिखने वाला यह फल पोषक तत्वों का खजाना है. मध्य प्रदेश का आयुष विभाग भी अंजीर को मिठास के साथ सेहत का बेहतरीन स्रोत मानता है, जिसमें विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं.
अंजीर शरीर को प्राकृतिक रूप से ऊर्जा प्रदान करता है और कई बीमारियों से सुरक्षा देता है. इसका सबसे बड़ा लाभ है लिवर और किडनी का डिटॉक्स, यानी इन अंगों की सफाई. नियमित रूप से अंजीर खाने से शरीर में जमा टॉक्सिन बाहर निकलते हैं और पाचन तंत्र बेहतर तरीके से काम करता है. इसमें मौजूद कैल्शियम, मैग्नीशियम और फॉस्फोरस हड्डियों को मजबूत बनाते हैं, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याओं का खतरा कम होता है.
पाचन सुधारने में अंजीर है कारगर
अंजीर पाचन सुधारने में भी बेहद कारगर है. अगर किसी को कब्ज की पुरानी समस्या है, तो रात में भिगोए गए अंजीर सुबह खाली पेट खाने से काफी आराम मिलता है. वजन कम करने की चाह रखने वाले लोगों के लिए यह फल प्राकृतिक उपाय है, क्योंकि इसमें फाइबर अधिक और कैलोरी कम होती है. इससे पेट देर तक भरा रहता है और ओवरईटिंग घटती है.
दिल के लिए होता फायदेमंद
दिल की सेहत के लिए भी अंजीर फायदेमंद माना जाता है. यह ब्लड प्रेशर को संतुलित रखता है और आयरन की अधिक मात्रा शरीर में खून की कमी को दूर करती है. नियमित सेवन से त्वचा चमकदार होती है, बाल मजबूत होते हैं और इम्यून सिस्टम भी बेहतर होता है. हेल्थ एक्सपर्ट मानते हैं कि अंजीर का सबसे अच्छा सेवन तरीका है. इसे रात में पानी में भिगोकर सुबह खाली पेट खाना.
ताजा अंजीर का करें सेवन
भिगोया हुआ अंजीर अधिक नरम होता है और इसके पोषक तत्व जल्दी अवशोषित होते हैं. सर्दियों में ताज़ा अंजीर खाना और भी फायदेमंद माना जाता है. हालांकि, कुछ लोगों को सावधानी रखनी चाहिए. जिन्हें अंजीर से एलर्जी है, उन्हें खुजली, चकत्ते या जलन हो सकती है. ऐसी स्थिति में इसका सेवन न करें. वहीं डायबिटीज के मरीज इसे डॉक्टर की सलाह पर ही खाएं.
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Ayurvedic Kadha for Cold and Cough: सर्दियों के मौसम में खांसी और जुकाम की वजह से शरीर पूरे दिन थका हुआ और एनर्जी की कमी महसूस करता है. नाक बहना, गले में खराश और हल्का बुखार जैसे लक्षण आम हैं. ऐसे मामलों में आयुर्वेदिक काढ़ा बहुत मददगार हो सकता है. ये शरीर को अंदर से गर्म रखते हैं, इम्यूनिटी बढ़ाते हैं और वायरस से लड़ने की ताकत देते हैं.
आयुर्वेद के मुताबिक, सर्दी और खांसी मुख्य रूप से कफ दोष बढ़ने के कारण होती है. इसलिए, गर्म, तीखे और हल्के सूखने वाले गुणों वाले काढ़े कफ को कम करते हैं और तुरंत आराम देते हैं. अदरक, दालचीनी, काली मिर्च और तुलसी कफ को बैलेंस करते हैं, जबकि गिलोय और हल्दी शरीर की इम्यूनिटी को मजबूत करते हैं.
पहला असरदार काढ़ा है अदरक-तुलसी का काढ़ा
अदरक शरीर की अकड़न और सूजन को कम करता है और तुलसी इम्यूनिटी बढ़ाती है. इसे बनाने के लिए एक इंच अदरक का टुकड़ा और 10-12 तुलसी के पत्ते दो कप पानी में उबालें. स्वाद के लिए शहद मिला सकते हैं. इसे दिन में 1-2 बार पीना काफी है.
दूसरा काढ़ा है काली मिर्च-लौंग-दालचीनी का काढ़ा
इसका बहुत गर्म असर होता है, जो बलगम को पतला करके बाहर निकालने में मदद करता है. काली मिर्च वायरल एक्टिविटी को कम करती है, लौंग गले की खराश से राहत देती है, और दालचीनी शरीर को गर्म रखती है.
तीसरा है गिलोय-अदरक का काढ़ा
गिलोय को आयुर्वेद में अमृत माना जाता है और जब इसे अदरक के साथ लिया जाता है, तो यह इन्फेक्शन को जल्दी कम करने में मदद करता है. चौथा है हल्दी वाला दूध (गोल्डन मिल्क) हल्दी एंटीवायरल और एंटी-इंफ्लेमेटरी है और दूध शरीर को आराम देता है और गले की खराश से तुरंत राहत देता है.
पांचवां है मुलेठी-तुलसी का काढ़ा
मुलेठी गले की जलन को शांत करती है और तुलसी इम्यूनिटी बढ़ाती है. हालांकि, याद रखें कि बहुत गर्म काढ़े ज़्यादा मात्रा में न पिएं. काढ़ा दवा का विकल्प नहीं है, लेकिन ये राहत देने और इम्यूनिटी बढ़ाने में बहुत मददगार होते हैं.