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प्रेग्नेंसी में महिलाओं के लिए वरदान हैं ये योगासन, मां और बच्चे दोनों को रखें हेल्दी!

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फाइल फोटो

Pregnancy Yoga Benefits: कहते हैं कि बच्चे को जन्म देने के समय माताओं को 206 हड्डियों के टूटने जैसा दर्द होता है. हालांकि, उसके पहले का भी सफर आसान नहीं होता है क्योंकि गर्भावस्था में महिलाओं को कई शारीरिक परेशानियां झेलनी पड़ती हैं, लेकिन योगासन इसमें बड़ा सहारा बन सकता है. ऐसे ही एक योगासन के बारे में भारत सरकार का आयुष मंत्रालय जानकारी देता है और भद्रासन महिलाओं के लिए विशेष रूप से लाभकारी है.

'भद्र' शब्द का अर्थ 'दृढ़,' 'सज्जन,' या 'सौभाग्यशाली' होता है. यह आसन शरीर को मजबूत बनाता है और मस्तिष्क को स्थिरता प्रदान करता है. खासकर गर्भवती महिलाओं और मासिक धर्म के दौरान पेट दर्द से जूझ रही महिलाओं के लिए यह वरदान से कम नहीं है. 

आयुष मंत्रालय के मुताबिक, भद्रासन का नियमित अभ्यास गर्भावस्था के समय को आसान बनाता है, जिससे प्रसव आसान हो सकता है. यह आसन महिलाओं को मासिक धर्म के समय होने वाले असहनीय पेट दर्द, ऐंठन से भी राहत दिलाता है. साथ ही, यह शरीर को मजबूती भी देता है और मन को शांत रखता है. गर्भावस्था में होने वाली कमर दर्द, थकान और तनाव जैसी समस्याओं में भी यह प्रभावी साबित होता है.

योग एक्सपर्ट भद्रासन का अभ्यास कैसे करें? इस विषय में विस्तार से जानकारी देते हैं. भद्रासन करने के लिए सबसे पहले जमीन पर चटाई बिछाकर बैठें. दोनों पैरों को सामने की ओर फैलाएं. अब घुटनों को मोड़कर पैरों के तलुए को आपस में जोड़ें. एड़ियां पेट के पास लाएं और हाथों से पैरों को पकड़कर रखें. इस दौरान पीठ और गर्दन को सीधा रखें और आंखें बंद कर गहरी सांस लें और छोड़ें. शुरुआत में 1-2 मिनट तक इस आसन में रहें, धीरे-धीरे समय बढ़ाएं.

महिलाओं के लिए भद्रासन कई तरह से फायदेमंद है. पीरियड्स के दौरान पेट में ऐंठन और दर्द को भी कम करने में सहायक है. यह रीढ़ की हड्डी को लचीला रखता है और कब्ज जैसी समस्या से छुटकारा दिलाता है. भद्रासन न केवल शारीरिक, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी है. यह तनाव मुक्ति में भी सहायक है. हालांकि, गर्भवती महिलाओं को डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह लेकर ही अभ्यास करना चाहिए. किसी भी योगासन से पहले चिकित्सक की सलाह जरूरी है.
 


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Written by: Taushif

09 Nov 2025  ·  Published: 10:12 IST

दिनभर खुश और फोकस्ड रहना चाहते हैं? अपनाइए आर्थर ब्रूक्स की मॉर्निंग आदतें

प्रतीकात्मक फोटो

प्रतीकात्मक फोटो

Harvard Morning Routine: हमारी सुबह की शुरुआत सिर्फ मूड पर ही नहीं, बल्कि दिनभर की एनर्जी, क्रिएटिविटी और फोकस पर भी असर डालती है. हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर आर्थर ब्रूक्स ने ऐसा मॉर्निंग रूटीन तैयार किया है, जो उन्हें पूरे दिन एनर्जेटिक, पॉजिटिव और खुश रखता है. आइए जानते हैं उनका पूरा रूटीन...

सूर्योदय से पहले उठना
ब्रूक्स रोज़ाना सुबह 4:30 बजे उठते हैं. उनका मानना है कि जल्दी उठने से दिमाग शांत रहता है और दिन की शुरुआत फोकस के साथ होती है. कई रिसर्च में भी यह साबित हुआ है कि सुबह जल्दी उठने वाले लोग ज़्यादा क्रिएटिव और आत्मविश्वासी होते हैं.

हर दिन एक्सरसाइज
ब्रूक्स उठने के करीब 15 मिनट बाद अपने घर के जिम में एक घंटे की एक्सरसाइज करते हैं. इसमें कार्डियो और रेजिस्टेंस ट्रेनिंग दोनों शामिल होते हैं. वह कहते हैं, “मैं हफ्ते के सातों दिन एक्सरसाइज करता हूं. इससे मेरा मूड अच्छा रहता है और शरीर में एनर्जी बनी रहती है.”

मेडिटेशन या जर्नलिंग
हर दिन वे एनालिटिकल मेडिटेशन करते हैं, जो दलाई लामा से प्रेरित है. कभी वे चर्च में जाकर ध्यान लगाते हैं या कार में बैठकर कैथोलिक मेडिटेशन करते हैं. उनका कहना है कि यह उन्हें आत्मा से जोड़ता है और मन को शांत रखता है. जो लोग ध्यान नहीं कर पाते, वे 20-30 मिनट जर्नलिंग करके भी मन की शांति पा सकते हैं.

हेल्दी और प्रोटीन से भरपूर नाश्ता
ब्रूक्स सुबह के नाश्ते में करीब 60 ग्राम प्रोटीन लेते हैं. वे ग्रीक योगर्ट, व्हे प्रोटीन, अखरोट और बेरीज का मिश्रण खाते हैं. इससे उनका पेट लंबे समय तक भरा रहता है और वे दिनभर एक्टिव महसूस करते हैं.

सुबह के वक्त फोकस्ड वर्क
ब्रूक्स अपनी सुबह की एनर्जी सोशल मीडिया पर बर्बाद नहीं करते. इसके बजाय, वे इस वक्त को अपने सबसे क्रिएटिव और गहन काम में लगाते हैं. उनका कहना है, “सुबह के दो घंटे मेरा सबसे प्रोडक्टिव टाइम होता है.”

अपना रूटीन खुद बनाएं
वे कहते हैं कि हर व्यक्ति का मॉर्निंग रूटीन अलग होता है. किसी को एक्सरसाइज, किसी को मेडिटेशन या राइटिंग सूट करती है. ज़रूरी यह है कि आप एक स्थिर और अनुशासित शुरुआत करें, जिससे दिनभर पॉजिटिविटी बनी रहे.


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Written by: Taushif

25 Oct 2025  ·  Published: 19:12 IST

अच्छी नींद की कीमत रिश्ते में दूरी? कपल्स में बढ़ा स्लीप डिवोर्स का चलन

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फाइल फोटो

यूरोप के कई देशों में इन दिनों ‘स्लीप डिवोर्स’ का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है. यानी पति-पत्नी एक साथ नहीं, बल्कि अलग-अलग बिस्तर या कमरों में सोते हैं ताकि नींद बेहतर हो सके. स्वीडन, नॉर्वे जैसे नॉर्डिक देशों में यह तरीका काफी लोकप्रिय हो रहा है, क्योंकि लोग मानते हैं कि इससे खर्राटे, देर तक जागने या एक-दूसरे की नींद में खलल जैसी दिक्कतें कम होती हैं.

लेकिन ताइवान के वैज्ञानिकों की एक नई रिसर्च में इस ट्रेंड को लेकर चिंता जताई गई है. ‘बीएमसी पब्लिक हेल्थ’ जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, अलग सोने से कपल्स की मेंटल हेल्थ पर असर पड़ सकता है. इस रिसर्च में उत्तरी ताइवान के 860 जोड़ों पर सर्वे किया गया, जिसमें उनकी नींद की आदतों और मानसिक स्वास्थ्य का विश्लेषण किया गया. इसमें पाया गया कि जो कपल्स अलग-अलग कमरों में सोते हैं, खासकर बुजुर्ग जोड़े, उनकी मेंटल हेल्थ साथ सोने वालों की तुलना में कमजोर पाई गई.

वैज्ञानिकों का मानना है कि नींद की व्यवस्था सिर्फ एक फिजिकल फैक्टर नहीं है, बल्कि यह रिश्ते की इमोशनल बॉन्डिंग से भी जुड़ी होती है. यानी साथ सोने से भले नींद थोड़ी डिस्टर्ब हो, लेकिन मानसिक जुड़ाव मजबूत रहता है. अमेरिकी वैज्ञानिक वेंडी ट्रॉक्सेल, जो किताब ‘Sharing the Covers: Every Couple’s Guide to Better Sleep’ की लेखिका हैं, ने भी कहा कि अलग-अलग सोना कई बार रिश्ते में दूरी का संकेत हो सकता है. 

हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि हर जोड़े की जरूरत अलग होती है, इसलिए नींद और रिश्ते के बीच सही संतुलन बनाना जरूरी है. अंत में शोधकर्ताओं का निष्कर्ष यह रहा कि अगर कपल्स चाहते हैं कि उनका रिश्ता और मानसिक स्वास्थ्य दोनों मजबूत रहें, तो उन्हें नींद की गुणवत्ता के साथ-साथ भावनात्मक नजदीकी पर भी ध्यान देना चाहिए.


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Written by: Taushif

04 Nov 2025  ·  Published: 22:16 IST

उम्र नहीं, पोषण की कमी की चेतावनी देते हैं सफेद बाल, कैसे पाएं इससे छुटकारा

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फाइल फोटो

Premature Grey Hair Causes: बदलती लाइफस्टाइल और तनाव भरी जिंदगी बीमारियों की वजह बन रही है. कम उम्र में ही स्किन और बालों से जुड़ी परेशानियां होने लगती हैं. आज बच्चों से लेकर युवाओं में जल्दी बाल सफेद होने की परेशानी देखी जा रही है. बाल सफेद होना सिर्फ खराब लाइफस्टाइल का कारण नहीं है, बल्कि ये पोषण की कमी, तनाव और लापरवाही का संकेत देता है। पहले जानते हैं कि बाल क्यों असमय सफेद होते हैं.

आयुर्वेद में बाल सफेद होने की परेशानी को वात दोष, रक्त धातु, हॉर्मोन के असंतुलन और रस धातु से जोड़कर देखा गया है. जब शरीर अंदर से स्वस्थ होता है, तो बाल और स्किन दोनों ही चमकदार होते हैं. आयुर्वेद में सफेद बालों की परेशानी को कम करने के लिए कई जड़ी-बूटियों को लाभकारी बताया है. इसमें आंवला, ब्रह्मी, जटामांसी, करी पत्ता, भृंगराज, गुड़हल, मुलेठी और नीम का पाउडर शामिल है. डॉक्टरी परामर्श के साथ अगर इन जड़ी-बूटियों का सेवन किया जाए, तो सफेद बाल होने की परेशानी को रोका जा सकता है.

ये सभी जड़ी बूटियां बालों की जड़ों को पोषित करती हैं और प्राकृतिक तरीके से उन्हें रंग भी देती हैं. वैज्ञानिक दृष्टिकोण से बाल तब सफेद होना शुरू होते हैं जब शरीर में मेलानिन प्रभावित होता है. यह स्किन और बाल दोनों को स्वस्थ रखने में मदद करता है. इसके अलावा, विटामिन बी12, आयरन की कमी, नींद आने में परेशानी होना, तनाव लेना, सिर दर्द की परेशानी लगातार होना और आंखों की रोशनी कम होना भी बालों के सफेद होने का कारण होते हैं.

आयुर्वेदिक उपायों के अलावा शरीर को भीतर से ठीक करने की भी जरूरत होती है. शरीर का आंत का साफ होना और रक्त का शुद्ध होना बालों का स्वास्थ्य दर्शाता है. शरीर की अंदरूनी सफाई के लिए रोजमर्रा की दिनचर्या में बदलाव की जरूरत होती है. इसके लिए सुबह गुनगुना पानी पीना, आंवला का सेवन करना, नाश्ते में फलों का सेवन करना, भुने काले तिल का सेवन करना, सुबह की धूप लेना और हफ्ते में कम से कम दो बार गुनगुने तेल से मालिश करना चाहिए. ये तरीके शरीर को अंदर से पोषण देंगे.

बालों को सही पोषण देने के लिए घर पर आसानी से पोषक तत्वों से भरपूर तेल भी बना सकते हैं, जिसे पोटली तेल कहा जाता है. इसमें अपने पसंदीदा तेल में करी पत्ता, भृंगराज, गुड़हल, नीम, मेथी दाना और आंवला को सूती पोटली में बांधकर तेल में तब तक उबालें जब तक उसका रंग गहरा न हो जाए. तेल को छानकर इस्तेमाल करें और हफ्ते में दो बार लगाएं. इससे बालों को मजबूती मिलेगी.
 


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Written by: Taushif

29 Nov 2025  ·  Published: 19:23 IST