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Zinc Deficiency Symptoms: मानव शरीर पानी और कई खनिज तत्वों से मिलकर बना है। शरीर में लोहा, जिंक, कॉपर, मैंगनीज और सेलेनियम जैसे ट्रेस मिनरल्स पाए जाते हैं, जो शरीर के लिए बहुत उपयोगी हैं. सप्लीमेंट लेकर उनकी कमी को पूरा करना पड़ता है. आज हम खनिज तत्व जिंक के बारे में बात करेंगे, जिसकी कमी होने पर शरीर में कई तरह के बदलाव दिखते हैं.
जिंक की मात्रा शरीर में बहुत कम ही चाहिए होती है, लेकिन अगर शरीर को पर्याप्त मात्रा में जिंक नहीं मिल पाता है तो इसका असर पाचन शक्ति, त्वचा, बालों, हॉर्मोन, भूख में कमी और रोग प्रतिरोधक क्षमता पर पड़ता है. जिंक शरीर में 300 से ज्यादा एंजाइम को सक्रिय रखता है और शरीर की कोशिकाओं को सही तरीके से बनने में मदद करता है.
अगर शरीर में जिंक की कमी है तो कुछ लक्षण बार-बार परेशान कर सकते हैं, जैसे बार-बार बुखार आना, स्किन पर एलर्जी होना, घावों का जल्दी न भरना, छोटे-छोटे काम करने पर थकान होना, और बालों का समय से पहले झड़ना और सफेद होना, लेकिन डॉक्टर की सलाह के बाद ही जिंक के सप्लीमेंट्स लेना शुरू करें.
जिंक की पूर्ति आहार से भी की जा सकती है, जो मांसाहारी और शाकाहारी दोनों खाद्य पदार्थों में पाया जाता है। महिलाओं को रोजाना 8 मिलीग्राम जिंक और पुरुषों को 11 मिलीग्राम जिंक की जरूरत होती है, जबकि स्तनपान कराने वाली महिलाओं को जिंक ज्यादा मात्रा में चाहिए. सीप में भरपूर मात्रा में जिंक होता है. 90 ग्राम सीप में 15 मिलीग्राम जिंक होता है. अगर इसे कम मात्रा में खाया जाए तो जिंक की डेली डोज पूरी की जा सकती है. 100 ग्राम मांस में 5 मिलीग्राम जिंक होता है, जबकि 100 ग्राम केकड़े से 6 मिलीग्राम जिंक मिल जाएगा.
अगर आप शाकाहारी हैं तो ओट्स का सेवन कर सकते हैं। एक कटोरी ओट्स में 3 मिलीग्राम जिंक मिल पाता है. इसके अलावा 30 ग्राम कद्दू के बीज में 2 मिलीग्राम, अंडे में 1.2 मिलीग्राम और एक कप दूध में 1 मिलीग्राम जिंक मिल जाएगा. काजू जिंक का सबसे ज्यादा सोर्स है. 100 ग्राम काजू में लगभग 5 से 7 मिलीग्राम जिंक होता है, और इसकी मात्रा को बढ़ाकर जिंक की डेली डोज को पूरा किया जा सकता है.
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Winters Joint Pain: सर्दियों की ठंडी हवा शुरू होते ही सबसे पहले असर हमारे जोड़ों पर महसूस होता है. शुरुआत में हल्का दर्द या जकड़न होती है, लेकिन तापमान गिरते ही घुटने, कमर, कंधे और पुरानी चोट वाले हिस्सों में तेज दर्द शुरू हो जाता है. कई लोग इसे उम्र या कमजोरी से जोड़ते हैं, लेकिन असल वजह शरीर में होने वाले बदलाव हैं. ठंड के कारण नसें सिकुड़ जाती हैं और ब्लड सर्कुलेशन धीमा हो जाता है. ऐसे में जोड़ों तक खून का प्रवाह कम पहुंचता है, जिससे वे कठोर और दर्दनाक महसूस होने लगते हैं.
जैसे-जैसे तापमान घटता है, मसल्स भी टाइट होने लगती हैं, और हल्के से खिंचाव में भी ज्यादा दर्द हो सकता है. कई लोगों को सुबह उठते ही लगता है जैसे पूरा शरीर जम गया हो. खासकर जिन्हें पहले फ्रैक्चर या चोट लगी हो, उनके लिए सर्दियां और भी मुश्किल साबित होती हैं. ठंड के कारण पुराने घावों का दर्द फिर उभर आता है. ऐसे में सर्दियों में सावधानी बरतना और सही देखभाल करना बेहद जरूरी है. यहां जानें कुछ आसान सेल्फ-केयर टिप्स...
1. शरीर को गर्म रखें
ठंड में शरीर को गर्म रखना सबसे जरूरी है. लेयर वाले कपड़े पहनें, मोजे, टोपी और ग्लव्स का इस्तेमाल करें. घर पर बैठते समय कंबल, रजाई या हीटिंग पैड का उपयोग करें. कोशिश करें कि कमरे का तापमान भी बहुत ठंडा न रहे, क्योंकि ठंडी हवा जोड़ दर्द को और बढ़ा देती है.
2. हल्की एक्सरसाइज करें
सर्दियों में आलस बढ़ जाता है, लेकिन जितना कम चलेंगे, उतना दर्द बढ़ेगा. रोज हल्का स्ट्रेचिंग, योग या तेज चाल से टहलना ब्लड फ्लो बढ़ाता है और स्टिफनेस घटाता है. लंबे समय तक एक जगह न बैठें, बीच-बीच में उठकर टहलें.
3. सही खान-पान अपनाएं
हड्डियों और जोड़ों के लिए कैल्शियम, विटामिन D और ओमेगा-3 जरूरी हैं. दूध-दही, हरी सब्जियां, अंडे, मछली, ड्राई फ्रूट्स और बीज नियमित खाएं. सर्दियों में धूप कम मिलती है, इसलिए विटामिन D की कमी से भी जोड़ दर्द बढ़ सकता है. हल्की धूप लें या जरूरत हो तो डॉक्टर से सलाह लेकर सप्लीमेंट लें. पानी कम न करें, डिहाइड्रेशन से भी जोड़ों की ल्यूब्रिकेशन घटती है.
4. गर्म सेक करें
जोड़ों की स्टिफनेस या दर्द में गर्म सेक बहुत राहत देता है. हीटिंग पैड, गर्म पानी की बोतल या गर्म पानी से स्नान करें. इससे मसल्स रिलैक्स होती हैं और ब्लड फ्लो बेहतर होता है. ध्यान रखें पानी बहुत गर्म न हो.
5. सही पॉस्चर रखें
सर्दियों में सिकुड़कर बैठना आम बात है, जिससे कमर और गर्दन पर जोर पड़ता है. हमेशा सीधा बैठें और पीठ को सपोर्ट दें. मोबाइल-लैपटॉप इस्तेमाल करते समय गर्दन ज्यादा न झुकाएं. घर से काम करने पर सही ऊंचाई वाली कुर्सी-टेबल का उपयोग करें.
6. पुरानी चोटों का विशेष ध्यान रखें
पुराने फ्रैक्चर या ऑपरेशन वाली जगहों पर ठंड के साथ दर्द बढ़ सकता है. इन हिस्सों को गर्म रखें और हल्की स्ट्रेचिंग या फिजियोथेरपी करते रहें. इससे मसल्स एक्टिव रहती हैं और दर्द कम होता है.
7. सुबह हल्का मूवमेंट करें
सर्दियों की सुबह सबसे ज्यादा जकड़न लेकर आती है. उठते ही हल्की स्ट्रेचिंग, टहलना या गर्म पानी से नहाना शरीर को ढीला करता है और पूरे दिन राहत देता है.
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Clever Personality Traits: कुछ लोग थोड़े अलग और बहुत चालाक पैदा होते हैं। खासकर किसी भी महीने की 5, 14 या 23 तारीख को जन्म लेने वालों को ज्योतिष में नंबर 5 वाला माना जाता है. इन लोगों पर बुध ग्रह का असर होता है, जो न सिर्फ उन्हें तेज दिमाग देता है बल्कि उन्हें बातचीत और मेलजोल की कला भी सिखाता है. ये लोग किसी भी हालात में खुद को और अपने काम को आसानी से आगे बढ़ाने में माहिर होते हैं.
नंबर 5 वाले लोग स्वभाव से बहुत मिलनसार और खुशमिजाज होते हैं. उनके आस-पास हमेशा हंसी-खुशी का माहौल रहता है. वे बातूनी होते हैं, और उनकी बातचीत करने की अच्छी स्किल की वजह से लोग उन्हें सुनना पसंद करते हैं. उनमें लोगों की भावनाओं को पढ़ने और उन्हें प्रभावित करने की कमाल की क्षमता होती है. यही वजह है कि वे जहां भी जाते हैं, अपनी तरकीबों और चालाकी से हर काम आसानी से पूरा कर लेते हैं.
उनकी एक और खासियत यह है कि वे बहुत एनर्जेटिक होते हैं. वे हमेशा एनर्जी से भरे रहते हैं, और इसे सही दिशा में लगाकर, वे सबसे मुश्किल चुनौतियों को भी आसानी से पार कर लेते हैं. कड़ी मेहनत उनके स्वभाव में होती है. काम छोटा हो या बड़ा, ये हमेशा अपने लक्ष्य को पाने के लिए अपना दिमाग और मेहनत लगाते हैं. यह होशियारी और सरलता इतनी नैचुरल होती है कि लोग इससे हैरान रह जाते हैं.
नंबर 5 वाले लोगों को नई जगहों पर घूमना और नई चीज़ों का अनुभव करना पसंद होता है. यह नेचर उन्हें ज़िंदगी में अलग-अलग मौकों और अनुभवों से जोड़ता है. इनके हमेशा दोस्त और साथी होते हैं, क्योंकि लोग इनके खुशमिजाज और मिलनसार नेचर की ओर खिंचे चले आते हैं. मिलनसार होने के कारण, ये आसानी से लोगों के बीच अपनी जगह बना लेते हैं और किसी भी ग्रुप में तुरंत घुल-मिल जाते हैं.
इनकी चतुराई की बात करें तो, नंबर 5 वाले लोग किसी भी सिचुएशन में काम करवाने के लिए अपनी ट्रिक्स और इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करना जानते हैं. यह न केवल उन्हें रोज़मर्रा की ज़िंदगी में मदद करता है, बल्कि प्रोफेशनल और पर्सनल दोनों लेवल पर सफलता में भी योगदान देता है. इनकी चतुराई इंटेलिजेंस और अनुभव का एक परफेक्ट मिक्सचर है. लोग अक्सर इनके तेज़ दिमाग और सोचने की क्षमता से हैरान रह जाते हैं.
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आजकल लोग अपनी डाइट और फिटनेस को लेकर बहुत सजग हो गए हैं. इसी में अंडे सबसे ज़्यादा पसंद किए जाने वाले हेल्दी फूड्स में से एक हैं. अब सफेद और भूरे अंडों के साथ-साथ काले अंडे (ब्लैक एग्स) भी चर्चा में हैं. ये अंडे दिखने में अलग होते हैं. इनका छिलका काला होता है और अंदर का रंग भी थोड़ा गहरा.
काले अंडे कड़कनाथ मुर्गी के होते हैं, जो भारत की एक खास नस्ल है. इसका मीट, पंख और अंडे सभी गहरे रंग के होते हैं. ये मुर्गियां ज़्यादातर मध्य प्रदेश के आदिवासी इलाकों में पाई जाती हैं. इनके अंडे स्वादिष्ट, लो-फैट और हाई-प्रोटीन माने जाते हैं, इसलिए फिटनेस लवर्स इन्हें खूब पसंद करते हैं.
| अंडे का प्रकार | प्रोटीन | फैट | कोलेस्ट्रॉल |
|---|---|---|---|
| कड़कनाथ (काला) | 15.6 ग्राम | 1 ग्राम | 180 मिलीग्राम |
| सामान्य (सफेद) | 6.6 ग्राम | 5.8 ग्राम | 372 मिलीग्राम |
कड़कनाथ अंडों में लगभग दोगुना प्रोटीन होता है, जबकि फैट और कोलेस्ट्रॉल बहुत कम होता है.
इम्यूनिटी बढ़ाते हैं, जिससे बीमारियों से बचाव होता है.
मसल्स मजबूत करते हैं, खासकर जिम जाने वालों के लिए फायदेमंद हैं.
दिल के लिए अच्छे हैं, क्योंकि इनमें वसा और कोलेस्ट्रॉल कम है.
डाइजेशन सुधारते हैं, जिससे शरीर को पोषण आसानी से मिलता है.
इनमें मौजूद ग्लूटामिक एसिड स्वाद को और लाजवाब बनाता है.
सफेद और काले दोनों अंडे फायदेमंद हैं, लेकिन पोषण के मामले में काले अंडे आगे हैं. इनमें ज़्यादा प्रोटीन, कम फैट और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं. हालांकि, ये महंगे होते हैं और हर जगह आसानी से नहीं मिलते, अगर आप रोजाना के लिए सस्ता और हेल्दी विकल्प चाहते हैं, तो सफेद अंडे भी बेहतरीन विकल्प हैं.