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ICICI Bank Minimum Balance Rules: ग्राहकों की नाराज़गी के बाद आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) ने बचत खातों के लिए न्यूनतम बैलेंस की नई और बढ़ी हुई शर्तें वापस ले ली हैं. बैंक ने अब फिर से वही पुराने नियम लागू कर दिए हैं, जो पहले से लागू थे. यानी अब ग्राहकों को पहले जितना ही औसत मासिक बैलेंस (Minimum Average Balance) बनाए रखना होगा.
क्या था विवाद?
हाल ही में ICICI बैंक ने अपने न्यूनतम बैलेंस के नियमों में बदलाव करते हुए मेट्रो और शहरी क्षेत्रों में बचत खाता धारकों के लिए औसत मासिक बैलेंस 50,000 रुपये करने का ऐलान किया था. इसी तरह अर्ध-शहरी शाखाओं में यह सीमा 25,000 रुपये और ग्रामीण शाखाओं में 10,000 रुपये तय की गई थी. यह बदलाव 1 अगस्त से लागू होना था.
हालांकि, ICICI बैंक के जरिये जारी औसत मासिक बैलेंस की खबर जैसे ही सामने आई, सोशल मीडिया पर ग्राहकों ने बैंक के इस फैसले की कड़ी आलोचना की. कई लोगों ने इसे आम ग्राहकों पर बोझ डालने वाला कदम बताया. आलोचना बढ़ने के बाद बैंक ने यह बढ़ोतरी वापस लेने का फैसला किया.
अब क्या है नया नियम?
ICICI बैंक ने बयान जारी कर बताया कि 1 अगस्त से नए बचत खातों के लिए मेट्रो और शहरी क्षेत्रों में न्यूनतम बैलेंस 15,000 रुपये, अर्ध-शहरी क्षेत्रों में 7,500 रुपये और ग्रामीण क्षेत्रों में 2,500 रुपये ही रहेगा. बैंक के मुताबिक, अगर ग्राहक अपने खाते में निर्धारित न्यूनतम बैलेंस नहीं रखते, तो उनके खाते से 6 फीसदी या 500 रुपये (जो भी कम हो) का जुर्माना काटा जाएगा.
किन्हें नहीं रखना होगा न्यूनतम बैलेंस?
बैंक ने साफ किया है कि वेतन खाते (Salary Accounts), पेंशनभोगी खाते, छात्र बचत खाते, पीएम जन धन योजना (PMJDY) और अन्य विशेष खाते इस नियम से मुक्त रहेंगे. इसके अलावा जिन ग्राहकों के बचत और फिक्स्ड डिपॉजिट में कुल 2 लाख रुपये हैं, उन्हें भी न्यूनतम बैलेंस रखने की जरूरत नहीं होगी.
आरबीआई का क्या कहना है?
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि वाणिज्यिक बैंक अपने बचत खातों के लिए न्यूनतम बैलेंस खुद तय करने के लिए स्वतंत्र हैं. यह निर्णय नियामक दायरे में नहीं आता. ICICI बैंक का यह कदम ग्राहकों के लिए राहत की खबर है, खासकर उन लोगों के लिए जो बढ़े हुए न्यूनतम बैलेंस के बोझ से परेशान थे.
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Bihar Domicile Rule 2025: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हाल ही में एक अहम घोषणा की है, जो सीधे तौर पर राज्य के युवाओं और नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थियों से जुड़ी है. उन्होंने शिक्षकों की भर्ती में डोमिसाइल नीति लागू करने का ऐलान किया है. यानी अब शिक्षक भर्ती में बिहार के निवासियों को प्राथमिकता दी जाएगी. यह नियम TRE-4 (Teacher Recruitment Exam-4) से लागू होगा.
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर यह जानकारी साझा करते हुए कहा कि सरकार 2005 से ही शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए काम कर रही है. अब भर्ती प्रक्रिया में बिहार के निवासियों को वरीयता देने के लिए शिक्षा विभाग को नियमों में संशोधन करने का निर्देश दे दिया गया है.
डोमिसाइल नीति क्या है?
डोमिसाइल नीति का मतलब है कि किसी राज्य में सरकारी नौकरी के लिए वही व्यक्ति आवेदन कर सकेगा जो उस राज्य का निवासी हो. यानी, बिहार में शिक्षक बनने के लिए अब बिहार का निवासी होना जरूरी होगा. इस नीति के अंतर्गत माता-पिता के बिहार निवासी होने, या पति/पत्नी के बिहार निवासी होने की स्थिति में भी लाभ मिल सकता है. यह नीति पहले भी 2020 में लागू की गई थी, लेकिन 2023 में इसे खत्म कर दिया गया था. उस समय सरकार का कहना था कि गणित और विज्ञान जैसे विषयों के लिए योग्य शिक्षक बिहार में नहीं मिल पा रहे थे. उस वक्त तेजस्वी यादव भी सरकार का हिस्सा थे.
चुनावी मौसम और घोषणाओं की बाढ़
अब जब बिहार में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, तो एक बार फिर सरकार ने डोमिसाइल नीति को बहाल कर दिया है. इस पर विपक्ष ने तुरंत प्रतिक्रिया दी है. तेजस्वी यादव ने कहा कि यह उनकी पुरानी मांग रही है, जिसे NDA सरकार ने पहले खारिज कर दिया था. अब जब चुनाव पास हैं, तो वही मांगों को नकल करके लागू किया जा रहा है.
तेजस्वी ने आरोप लगाया कि नीतीश सरकार ने हर वर्ग को साधने के लिए एक के बाद एक घोषणाएं की हैं, ताकि चुनाव से पहले सभी वोट बैंक खुश किए जा सकें. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “सामाजिक सुरक्षा पेंशन, बिजली की फ्री यूनिट, सरकारी नौकरी, रसोइयों-रात्रि प्रहरियों और स्वास्थ्य अनुदेशकों के मानदेय में बढ़ोतरी, युवा आयोग का गठन-ये सब हमारी योजनाओं की नकल हैं.”
नीतीश कुमार की रणनीति
राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो नीतीश कुमार अब चाणक्य वाली राजनीति नहीं, बल्कि 'सुशासन बाबू' वाली छवि को सामने रखकर चुनाव लड़ना चाहते हैं. पाला बदलने का विकल्प अब सीमित है, इसलिए सीधे जनता को साधना ही उनका प्रमुख रास्ता बचा है. जुलाई 2025 में नीतीश कुमार ने वादा किया था कि सरकार आने वाले 5 सालों में एक करोड़ युवाओं को नौकरी या रोजगार देगी. उन्होंने यह भी कहा कि अब तक 10 लाख लोगों को सरकारी नौकरी और 39 लाख को रोजगार मिल चुका है.
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India US Relations: अमेरिका में संयुक्त राष्ट्र की पूर्व राजदूत और रिपब्लिकन नेता निक्की हेली ने भारत को सलाह दी है कि वह रूसी तेल आयात के मुद्दे पर पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बात को गंभीरता से ले और जल्द से जल्द इसका समाधान निकाले. हेली के मुताबिक भारत और अमेरिका दोनों के साझा लक्ष्य इतने मजबूत हैं कि किसी भी विवाद को बातचीत से सुलझाया जा सकता है.
निक्की हेली ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “दुनिया की दो सबसे बड़ी लोकतांत्रिक ताकतों के बीच दशकों से चली आ रही दोस्ती और भरोसा मौजूदा मतभेदों से आगे बढ़ने की मजबूत नींव है.” उन्होंने कहा कि रूस से तेल आयात और व्यापार विवाद जैसे मुद्दों पर कठिन बातचीत जरूरी है, लेकिन यह रिश्तों को कमजोर नहीं करना चाहिए. उनके मुताबिक, अमेरिका और भारत के बीच साझेदारी सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक रणनीति और सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है. हेली ने साफ किया कि चीन का सामना करने के लिए अमेरिका को भारत जैसे भरोसेमंद दोस्त की जरूरत है.
ट्रंप-भारत रिश्ते पर फोकस
निक्की हेली का यह बयान उस समय आया है जब डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को चेतावनी दी थी कि अगर रूस से तेल खरीदना जारी रहा तो इससे दोनों देशों के रिश्तों में खटास आ सकती है. हेली का मानना है कि भारत को इस संदेश को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर भारत और अमेरिका ने समय रहते विवादों को हल नहीं किया, तो इससे केवल रिश्तों में अनावश्यक तनाव बढ़ेगा. हेली ने जोर देकर कहा कि ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच सीधी बातचीत होनी चाहिए ताकि दोनों पक्ष मिलकर कोई ठोस रास्ता निकाल सकें.
पहले भी दी थी चेतावनी
निक्की हेली इससे पहले भी कई बार आगाह कर चुकी हैं कि भारत-अमेरिका संबंध नाजुक मोड़ पर खड़े हैं. हाल ही में उन्होंने न्यूजवीक में लिखे लेख में कहा था कि रूस से तेल आयात और टैरिफ विवाद दोनों देशों के रिश्तों में स्थायी दरार का कारण नहीं बनने देना चाहिए. हेली ने लिखा था कि भारत और अमेरिका के बीच सहयोग केवल आर्थिक स्तर पर ही नहीं बल्कि भू-राजनीतिक संतुलन के लिए भी जरूरी है.
चीन उठा सकता है फायदा
निक्की हेली ने चेतावनी दी कि अगर भारत और अमेरिका के बीच मतभेद गहराए, तो चीन इसका सबसे बड़ा फायदा उठा सकता है. उनके मुताबिक, भारत का उभार चीन की बढ़ती महत्वाकांक्षाओं को चुनौती देता है. जैसे-जैसे भारत मजबूत होगा, चीन की विस्तारवादी नीतियों को झटका लगेगा. इसीलिए, हेली ने कहा कि अमेरिका को भारत जैसे दोस्त को हर हाल में साथ रखना चाहिए. उन्होंने यह भी जोड़ा कि दोनों देशों के रिश्ते केवल आज की जरूरत नहीं, बल्कि आने वाले दशकों की वैश्विक स्थिरता के लिए भी अहम हैं.
क्यों अहम है यह बयान?
निक्की हेली का यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत हाल के वर्षों में रूस से कच्चे तेल की बड़ी मात्रा खरीद रहा है. रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद जब पश्चिमी देशों ने रूस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए, तो भारत ने सस्ती दरों पर रूसी तेल खरीदकर अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा किया. अमेरिका की तरफ से कई बार चिंता जताई गई है कि इससे रूस को आर्थिक सहारा मिल रहा है. हालांकि भारत का तर्क है कि उसे अपनी ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए फैसले लेने पड़ते हैं.
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CJI BR Gavai: सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी.आर. गवई ने सोशल मीडिया पर चलने वाले ट्रेंड्स को लेकर मज़ाकिया लेकिन सटीक टिप्पणी की. उन्होंने कहा, “आजकल क्लाइंट को बहुत जल्दी बुरा लग जाता है, आपके मुवक्किल बहुत नाराज़ हो जाते हैं.”
दरअसल, कोर्ट में एक केस की सुनवाई चल रही थी जिसमें न्यायिक सेवा (Judicial Service) में पदोन्नति के सीमित अवसरों से जुड़े मुद्दे पर बहस हो रही थी. इस मामले की सुनवाई CJI बी.आर. गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच कर रही थी. सुनवाई के दौरान जब जस्टिस चंद्रन को कुछ निजी तौर पर कहना था, तो उन्होंने कुछ सेकंड के लिए कोर्ट रूम का माइक म्यूट (Mute) कर दिया. इसके बाद उन्होंने CJI गवई से कुछ बात की जो पब्लिक ऑडियो में नहीं आई.
CJI ने क्या कहा?
इस पर CJI ने मुस्कराते हुए कहा, “मेरे भाई (जस्टिस चंद्रन) को कुछ कहना था, लेकिन हमें नहीं पता कि इसकी रिपोर्टिंग कैसे की जाएगी, इसलिए उन्होंने बात सिर्फ मुझसे की.” इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर चलने वाले ट्रेंड्स पर व्यंग्य किया और कहा, “आजकल सोशल मीडिया पर हमें नहीं पता होता कि कौन सी बात कैसे रिपोर्ट होगी. हो सकता है कि आपका क्लाइंट बहुत नाराज़ हो जाए.”
CJI के टिप्पणी के क्या है मायने
CJI की यह टिप्पणी अदालत में मौजूद लोगों को हल्के-फुल्के अंदाज़ में हंसाने वाली थी, लेकिन इसमें एक गंभीर संदेश भी छिपा था कि अब सोशल मीडिया पर न्यायालय की हर छोटी बात तुरंत वायरल हो जाती है और कई बार उसका गलत अर्थ निकाला जाता है. यह टिप्पणी उस घटना के एक दिन बाद आई जब सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में एक वकील ने CJI पर जूता फेंकने की कोशिश की थी. वकील, CJI की एक टिप्पणी से नाराज़ था और उसने अदालत में ही गुस्से का इज़हार किया था. हालांकि, सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत स्थिति को संभाल लिया था.