'जनता का नेता' लालू की कहानी
कभी एक छोटे से गांव से निकला एक युवक...आज देश की राजनीति का ऐसा नाम है जिसे भुलाना आसान नहीं, नाम है — लालू प्रसाद यादव, गरीबों की बात करना, वंचितों के लिए लड़ना और जनता की भाषा में बोलना — यही उनकी पहचान बनी, उन्होंने राजनीति को सत्ता का साधन नहीं, बदलाव का औज़ार बनाया। देखिए हमारी रिपोर्ट
पूर्व उपराष्ट्रपति का फोटो
Jagdeep Dhankhar Resignation: संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के साथ ही उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार को अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक भावुक पत्र लिखकर स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपने इस्तीफे की घोषणा की। हालांकि, उनके इस फैसले ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। विपक्ष का कहना है कि सरकार के दबाव में उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।
सूत्रों की मानें तो धनखड़ ने इस्तीफे के दिन से ही अपना सामान पैक करना शुरू कर दिया था, जबकि उनका इस्तीफा अगले दिन यानी मंगलवार को स्वीकार कर लिया गया। उसी दिन शरद पवार और संजय राउत जैसे विपक्षी नेताओं ने मुलाकात का समय मांगा था, लेकिन उन्हें समय नहीं मिला। इस्तीफे के बाद धनखड़ ने किसी भी राजनीतिक नेता से मुलाकात नहीं की है।
क्या है पूरा मामला
गौरतलब है कि सोमवार को उनका पूरा कार्यक्रम सामान्य रहा। उन्होंने सुबह राज्यसभा के मनोनीत सांसदों को शपथ दिलाई, दो बार बीएसी (कार्य मंत्रणा समिति) की बैठक की अध्यक्षता की और कांग्रेस नेता जयराम रमेश से भी मुलाकात की। रमेश ने संकेत दिया कि दोपहर और शाम के बीच कुछ ऐसा हुआ जिसके कारण उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।
संविधान के किस आर्टिकल के तहत उपराष्ट्रपति ने दिया इस्तीफा
संविधान के अनुच्छेद 67(ए) के तहत उन्होंने उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, अब तक आधिकारिक तौर पर स्वास्थ्य कारणों को ही कारण बताया गया है। धनखड़ को इस्तीफे के बाद भी कई सरकारी सुविधाएं मिलेंगी। उन्हें पेंशन, स्टाफ (2 सहायक, 2 चपरासी), मुफ़्त दवाइयां, मेडिकल जांच और ऑपरेशन की सुविधा मिलेगी। नियमित रूप से एक डॉक्टर की तैनाती भी रहेगी। इसके साथ ही, उन्हें कार्यालय खर्च के लिए ₹60,000, मुफ़्त बिजली-पानी और रेल-हवाई यात्रा की सुविधा भी दी जाएगी।
फाइल फोटो
India US Trade War 2025: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान किसानों के हितों को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने साफ कहा कि किसानों, पशुपालकों और मछुआरों के फायदे के लिए सरकार हमेशा काम करती रहेगी और उनके हितों से कभी भी समझौता नहीं किया जाएगा.
पीएम मोदी ने कहा, "हमारे लिए अपने किसानों का हित सर्वोच्च प्राथमिकता है. भारत अपने किसानों के, पशुपालकों के और मछुआरे भाई-बहनों के हितों के साथ कभी समझौता नहीं करेगा." उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें इस फैसले की वजह से व्यक्तिगत रूप से बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है, लेकिन वो इसके लिए तैयार हैं.
पीएम मोदी ने भले ही अपने भाषण में अमेरिका या डोनाल्ड ट्रंप का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और भारत के बीच ट्रेड वॉर की स्थिति बनी हुई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में भारत पर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ (कर) लगाने का ऐलान किया है. यह कदम तब उठाया गया जब दोनों देशों के बीच व्यापार को लेकर बातचीत चल रही थी.
भारत और अमेरिका के बीच चल रहे व्यापार विवाद में कृषि क्षेत्र सबसे बड़ा मुद्दा बनकर सामने आया है. अमेरिका चाहता है कि भारत अपना कृषि बाजार अमेरिका के लिए खोले ताकि अमेरिकी कृषि उत्पाद भारत में आ सकें. लेकिन भारत इस पर तैयार नहीं है. भारत की दलील है कि देश में कृषि, पशुपालन और मत्स्यपालन लाखों लोगों की रोजी-रोटी का जरिया है और खाद्य सुरक्षा से जुड़ा मामला है. इसलिए विदेशी कंपनियों और उत्पादों के लिए बाजार खोलना देश के किसानों के हित में नहीं है.
दिल्ली के एक थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अनुसार, भारत, अमेरिकी कृषि उत्पादों पर औसतन 37.7% टैरिफ़ लगाता है. जबकि अमेरिका, भारतीय कृषि उत्पादों पर केवल 5.3% टैरिफ़ लगाता है. भारत में कृषि उत्पादों पर टैरिफ 0% से लेकर 150% तक हो सकता है. भारत इन टैरिफ्स का इस्तेमाल अपने किसानों को सस्ते आयात से बचाने के लिए करता है. इसके पीछे तर्क है कि यदि विदेशी कृषि उत्पाद बिना शुल्क के आ जाएंगे तो भारतीय किसान उनकी कीमतों से मुकाबला नहीं कर पाएंगे और उन्हें नुकसान होगा.
फाइल फोटो
Mansa Devi Stampede: उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित प्रसिद्ध मनसा देवी मंदिर में रविवार सुबह एक बड़ा हादसा हो गया। मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के चलते भगदड़ मच गई, जिसमें 6 लोगों की मौत हो गई है और लगभग 15 श्रद्धालु घायल हुए हैं। यह हादसा मंदिर की सीढ़ियों पर हुआ, जहां भीड़ अधिक थी और अचानक अफरा-तफरी मच गई।
क्या करंट लगने की वजह से मची भगदड़?
शुरुआती जानकारी के अनुसार, हादसा मंदिर के सीढ़ी वाले मार्ग पर हुआ। कुछ प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि वहां सीढ़ियों में करंट उतरने की आशंका जताई जा रही है। इसी कारण श्रद्धालुओं में डर फैल गया और भगदड़ की स्थिति बन गई। हालांकि, अधिकारिक रूप से करंट की पुष्टि नहीं हुई है और जांच चल रही है।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, प्रशासन और UKSDRF की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत व बचाव कार्य शुरू कर दिया गया। घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है और स्थिति को काबू में लाने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जताया शोक
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर लिखा, "हरिद्वार स्थित मनसा देवी मंदिर में भगदड़ मचने का अत्यंत दुखद समाचार प्राप्त हुआ है। राहत कार्य जारी है और मैं स्थानीय प्रशासन के संपर्क में हूं। माता रानी से सभी श्रद्धालुओं के सकुशल होने की प्रार्थना करता हूं।"
रविवार के दिन श्रद्धालुओं की भीड़ अधिक
हर रविवार और विशेष अवसरों पर मनसा देवी मंदिर में दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस बार भीड़ अधिक थी और मंदिर परिसर में व्यवस्था चरमरा गई, जिससे हादसा हुआ।
गढ़वाल मंडल आयुक्त विनय शंकर पांडे और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौके के लिए रवाना हो चुके हैं। फिलहाल मंदिर परिसर और आसपास के इलाके में अफरा-तफरी का माहौल है, लेकिन प्रशासन स्थिति को सामान्य करने की कोशिश कर रहा है। सरकार की ओर से घटना की जांच के आदेश दिए गए हैं और भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया गया है।