पूर्व उपराष्ट्रपति का फोटो
Jagdeep Dhankhar Resignation: संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के साथ ही उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार को अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक भावुक पत्र लिखकर स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपने इस्तीफे की घोषणा की। हालांकि, उनके इस फैसले ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। विपक्ष का कहना है कि सरकार के दबाव में उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।
सूत्रों की मानें तो धनखड़ ने इस्तीफे के दिन से ही अपना सामान पैक करना शुरू कर दिया था, जबकि उनका इस्तीफा अगले दिन यानी मंगलवार को स्वीकार कर लिया गया। उसी दिन शरद पवार और संजय राउत जैसे विपक्षी नेताओं ने मुलाकात का समय मांगा था, लेकिन उन्हें समय नहीं मिला। इस्तीफे के बाद धनखड़ ने किसी भी राजनीतिक नेता से मुलाकात नहीं की है।
क्या है पूरा मामला
गौरतलब है कि सोमवार को उनका पूरा कार्यक्रम सामान्य रहा। उन्होंने सुबह राज्यसभा के मनोनीत सांसदों को शपथ दिलाई, दो बार बीएसी (कार्य मंत्रणा समिति) की बैठक की अध्यक्षता की और कांग्रेस नेता जयराम रमेश से भी मुलाकात की। रमेश ने संकेत दिया कि दोपहर और शाम के बीच कुछ ऐसा हुआ जिसके कारण उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।
संविधान के किस आर्टिकल के तहत उपराष्ट्रपति ने दिया इस्तीफा
संविधान के अनुच्छेद 67(ए) के तहत उन्होंने उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, अब तक आधिकारिक तौर पर स्वास्थ्य कारणों को ही कारण बताया गया है। धनखड़ को इस्तीफे के बाद भी कई सरकारी सुविधाएं मिलेंगी। उन्हें पेंशन, स्टाफ (2 सहायक, 2 चपरासी), मुफ़्त दवाइयां, मेडिकल जांच और ऑपरेशन की सुविधा मिलेगी। नियमित रूप से एक डॉक्टर की तैनाती भी रहेगी। इसके साथ ही, उन्हें कार्यालय खर्च के लिए ₹60,000, मुफ़्त बिजली-पानी और रेल-हवाई यात्रा की सुविधा भी दी जाएगी।
फाइल फोटो
Vice President Election India 2025: देश में उपराष्ट्रपति पद के लिए होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक ने बुधवार को अपने उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी का नामांकन दाखिल करा दिया. नामांकन के मौके पर कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी, पार्टी अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) प्रमुख शरद पवार, समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव और शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के नेता संजय राउत समेत विपक्ष के कई दिग्गज नेता मौजूद रहे. इस दौरान विपक्ष ने अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया.
एनडीए और विपक्ष आमने-सामने
इससे एक दिन पहले ही एनडीए उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन ने नामांकन दाखिल किया था. अब मैदान पूरी तरह साफ है और मुकाबला एनडीए बनाम INDIA गठबंधन के बीच होगा. सूत्रों के मुताबिक, सुदर्शन रेड्डी ने चार सेट में नामांकन दाखिल किया, जिनमें 20 प्रस्तावक और 20 समर्थक शामिल थे. नामांकन से पहले उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों और महान नेताओं को श्रद्धांजलि अर्पित की.
हालांकि नंबर गेम में विपक्षी गठबंधन पीछे है, क्योंकि संसद में एनडीए के पास मजबूत बहुमत है. इसके बावजूद INDIA ब्लॉक ने मुकाबले को दिलचस्प बनाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. विपक्ष के इस कदम को राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें यह दिखाने की कोशिश की जा रही है कि वे पूरी मजबूती और एकता के साथ लोकतांत्रिक लड़ाई लड़ने को तैयार हैं.
“दक्षिण बनाम दक्षिण” की तस्वीर
इस चुनाव की एक खासियत यह है कि दोनों ही गठबंधनों ने अपने-अपने उम्मीदवार दक्षिण भारत से चुने हैं. एनडीए ने जहां तमिलनाडु से आने वाले सी.पी. राधाकृष्णन को उम्मीदवार बनाया है, वहीं INDIA गठबंधन ने आंध्र प्रदेश के सुदर्शन रेड्डी को मैदान में उतारा है. ऐसे में यह चुनाव “दक्षिण बनाम दक्षिण” की दिलचस्प तस्वीर पेश कर रहा है. राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि विपक्ष का यह फैसला एक रणनीतिक कदम है, क्योंकि दक्षिण भारत में बीजेपी का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा है और विपक्ष यहां अपनी पकड़ मजबूत करने का संदेश देना चाहता है.
विपक्ष का शक्ति प्रदर्शन
नामांकन के दिन सुबह 11 बजे कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे के कक्ष में INDIA गठबंधन के सभी प्रमुख नेता एकत्र हुए. इसके बाद वे सामूहिक रूप से राज्यसभा महासचिव और उपराष्ट्रपति चुनाव के रिटर्निंग ऑफिसर पी.सी. मोदी के दफ्तर पहुंचे और सुदर्शन रेड्डी का नामांकन दाखिल कराया. इस मौके पर कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने पूरे कार्यक्रम की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर साझा की.
जयराम रमेश ने लिखा कि विपक्ष के लिए यह केवल एक चुनावी प्रक्रिया नहीं बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने का संकल्प है. उन्होंने कहा कि INDIA ब्लॉक भले ही संख्या के हिसाब से कमजोर दिखाई देता हो, लेकिन उसकी राजनीतिक लड़ाई विचारों और सिद्धांतों पर आधारित है.
विपक्ष के लिए चुनाव का महत्व
विशेषज्ञ मानते हैं कि भले ही उपराष्ट्रपति चुनाव में NDA की जीत लगभग तय मानी जा रही हो, लेकिन विपक्ष का उम्मीदवार उतारना राजनीतिक दृष्टि से अहम है. इससे विपक्ष अपनी मौजूदगी और मुद्दों को सामने रख सकता है. साथ ही यह संदेश भी देने की कोशिश है कि विपक्ष केवल प्रतीकात्मक लड़ाई नहीं लड़ रहा, बल्कि वह संसद से लेकर सड़क तक जनता की आवाज उठाने के लिए तैयार है.
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Amit Shah on Jagdeep Dhankhar Resignation: देश के पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे को लेकर जारी राजनीतिक अटकलों और विपक्ष के आरोपों पर आखिरकार केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पहली बार प्रतिक्रिया दी है. शाह ने साफ किया कि धनखड़ ने किसी दबाव या मजबूरी में नहीं, बल्कि पूरी तरह से स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दिया है. सोमवार (25 अगस्त 2025) को न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में गृहमंत्री ने कहा कि विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे दावे पूरी तरह निराधार हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि धनखड़ को न तो नजरबंद किया गया है और न ही सरकार ने उन पर कोई दबाव बनाया.
अमित शाह ने क्या कहा?
अमित शाह ने कहा, “धनखड़ साहब का इस्तीफा अपने आप में स्पष्ट है. उन्होंने अपने पत्र में साफ लिखा है कि वह स्वास्थ्य कारणों से पद छोड़ रहे हैं. उन्होंने अपने पूरे कार्यकाल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मंत्रिपरिषद और संसद सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया है." उन्होंने विपक्ष की ओर से फैलाए गए दावों को खारिज करते हुए कहा कि केवल राजनीतिक बयानबाज़ी को सच मान लेना उचित नहीं है. शाह ने विपक्ष को चेतावनी दी कि इस मुद्दे पर अनावश्यक हंगामा खड़ा करना देश की संवैधानिक परंपराओं के साथ खिलवाड़ होगा.
विपक्ष पर संगीन इल्जाम
धनखड़ के अचानक इस्तीफे ने विपक्ष को सरकार पर हमला करने का मौका दे दिया. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि यह देश के इतिहास में पहली बार हुआ है जब किसी उपराष्ट्रपति को इस्तीफे के साथ-साथ चुप भी कराया गया है. वहीं, लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने भी इस मामले पर केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा किया. राहुल ने कहा था, “हम ऐसे दौर में पहुंच गए हैं जहां लोकतांत्रिक संस्थाओं की परवाह नहीं की जाती. यहां राजा जैसा माहौल है, जिसे पसंद नहीं आता, उसे ईडी भेजकर दबा दिया जाता है. उपराष्ट्रपति के इस्तीफे को भी उसी नजरिए से देखना चाहिए.” राहुल ने यह तक सवाल किया कि आखिर अचानक देश को नए उपराष्ट्रपति के चुनाव की आवश्यकता क्यों पड़ी.
क्या वाकई नजरबंद थे धनखड़?
विपक्ष के कई नेताओं ने दावा किया था कि जगदीप धनखड़ इस्तीफे के बाद से ही नजरबंद जैसे हालात में हैं और उन्हें मीडिया या बाहर की दुनिया से दूर रखा गया है. हालांकि, अमित शाह ने इन सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया. उन्होंने कहा कि धनखड़ पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ हैं, बस अपने डॉक्टर्स की सलाह पर राजनीतिक व्यस्तताओं से दूरी बना रहे हैं.
क्या है पूरा मामला
जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई 2025 को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन इस्तीफा दिया था. उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजे अपने पत्र में लिखा कि वह अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना चाहते हैं और डॉक्टरों की सलाह का पालन करना उनके लिए अनिवार्य है. धनखड़ के इस्तीफे के बाद उच्च सदन की कार्यवाही की जिम्मेदारी राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण को सौंपी गई थी.
दिल्ली सीएम रेखा गुप्ता (फाइल फोटो)
Delhi News Today: देशभर में हाल के वर्षों में रेलवे स्टेशनों और ऐतिहासिक स्थलों के नाम बदलने का सिलसिला जारी है. उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने मुगलसराय स्टेशन का नाम पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन किया, जबकि हबीबगंज स्टेशन को रानी कमलापति स्टेशन नाम मिला. अब दिल्ली से भी एक ऐसा ही प्रस्ताव सामने आया है.
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने केंद्र सरकार से राजधानी के सबसे पुराने रेलवे स्टेशन में से एक पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन का नाम बदलने की मांग की है. उन्होंने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर स्टेशन का नाम 'महाराजा अग्रसेन रेलवे स्टेशन' करने की गुजारिश की है.
दिल्ली सीएम ने लिखा पत्र
रेखा गुप्ता ने अपने 19 जून को लिखे पत्र में कहा कि यह नाम परिवर्तन महान समाज सुधारक महाराजा अग्रसेन को सच्ची श्रद्धांजलि होगी, जो अहिंसा, सामाजिक न्याय और आर्थिक समरसता के प्रतीक माने जाते हैं. उन्होंने पत्र में लिखा कि "महाराजा अग्रसेन का योगदान दिल्ली और भारत के सामाजिक-आर्थिक ढांचे पर गहरा प्रभाव डालता है. उनके वंशज आज भी दिल्ली के व्यापार, समाज और संस्कृति में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं."
मीडिया में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आगे लिखा कि "पुरानी दिल्ली स्टेशन का नाम बदलकर महाराजा अग्रसेन रेलवे स्टेशन करना न सिर्फ ऐतिहासिक दृष्टि से उचित होगा, बल्कि यह दिल्लीवासियों की भावनाओं से भी गहराई से जुड़ता है. मैं आशा करती हूं कि मंत्रालय इस प्रस्ताव पर सकारात्मक और शीघ्र निर्णय लेगा."
पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन का इतिहास
केंद्रीय राजधानी दिल्ली की चांदनी चौक क्षेत्र में स्थित यह रेलवे स्टेशन 1864 में बना था और इसे दिल्ली जंक्शन भी कहा जाता है. इसकी इमारत को लाल किले की स्थापत्य शैली में तैयार किया गया था. यह स्टेशन दिल्ली के व्यस्ततम रेलवे स्टेशनों में से एक है, जहां 18 प्लेटफॉर्म हैं. दो प्लेटफॉर्म पर एक साथ 24-कोच की दो ट्रेनें खड़ी की जा सकती हैं. अब देखना होगा कि केंद्र सरकार इस प्रस्ताव पर क्या रुख अपनाती है, लेकिन नाम बदलने की यह मांग राजनीतिक और सांस्कृतिक बहस को जरूर जन्म दे सकती है.