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सीढ़ियां चढ़ते वक्त घुटनों से आती है ‘क्लिक’ की आवाज? ये है खतरे की घंटी, डॉक्टर ने दी चेतावनी

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फाइल फोटो

आजकल बहुत से लोग सीढ़ियों की जगह लिफ्ट या एस्केलेटर का इस्तेमाल करना पसंद करते हैं, जिससे घुटनों की गतिशीलता यानी मोबिलिटी कम हो जाती है. लेकिन कुछ लोग जब सीढ़ियां चढ़ते या बैठते हैं, तो उनके घुटनों से हल्की ‘क्लिक’ या बबल्स फूटने जैसी आवाज आती है. अगर आपके साथ भी ऐसा होता है, तो इसे हल्के में न लें. यह घुटनों की हड्डियों में किसी गंभीर समस्या की शुरुआती चेतावनी हो सकती है.

दिल्ली के डॉ. राम मनोहर लोहिया हॉस्पिटल में ऑर्थोपेडिक और स्पोर्ट्स सर्जन डॉ. ओबैदुर रहमान ने अपने एक वीडियो में बताया कि यह आवाज घुटनों में मौजूद कार्टिलेज (हड्डियों के बीच की कुशन जैसी परत) के घिसने का संकेत हो सकती है. उन्होंने इसे Chondromalacia Patellae नाम की स्थिति से जोड़ा, जिसमें घुटने की हड्डी के नीचे की परत कमजोर हो जाती है.

डॉ. रहमान ने बताया कि ऐसे मामले अब युवाओं में तेजी से बढ़ रहे हैं. खासतौर पर उन लोगों में जो लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहते हैं, जैसे दफ्तर में 8–10 घंटे काम करने वाले लोग. ये लोग अक्सर घुटनों की हल्की आवाजों या जकड़न को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे बाद में स्थिति गंभीर हो जाती है.

उन्होंने कहा कि अगर आपके घुटनों से सीढ़ियां चढ़ते या लंबे समय बैठने के बाद आवाज आती है, तो इसे चेतावनी मानें. शरीर दर्द से पहले संकेत देता है कि कुछ गड़बड़ है. अगर इसे अनदेखा किया गया, तो भविष्य में दर्द और चलने-फिरने में दिक्कत शुरू हो सकती है.

बचाव के उपाय

रोज़ाना लेग स्ट्रेचिंग और हल्की एक्सरसाइज करें.

पैरों की मसल्स को मजबूत करने पर ध्यान दें.

लगातार लंबे समय तक बैठने से बचें.

गलत पॉश्चर से बचें और बीच-बीच में हल्की वॉक करें.

याद रखें, घुटनों की आवाज दर्द से पहले आने वाला चेतावनी संकेत है. अगर समय रहते ध्यान दे दिया जाए, तो आगे चलकर बड़ी समस्या से बचा जा सकता है.


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Written by: Taushif

05 Nov 2025  ·  Published: 11:23 IST

महिला सशक्तिकरण की मिसाल बनीं मेधा कुलकर्णी, संसद में उत्कृष्ट योगदान के लिए मिला 'संसद रत्न'

मेधा कुलकर्णी सांसद रत्न अवार्ड से सम्मानित

मेधा कुलकर्णी सांसद रत्न अवार्ड से सम्मानित

Sansad Ratna Award 2025 Winner: भारतीय जनता पार्टी (BJP) की राज्यसभा सांसद डॉ. मेधा कुलकर्णी को संसद में उनके प्रभावशाली और उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रतिष्ठित 'संसद रत्न पुरस्कार' से सम्मानित किया गया है. उन्हें यह पुरस्कार केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने नई दिल्ली स्थित महाराष्ट्र सदन में एक समारोह के दौरान प्रदान किया.

यह पुरस्कार हर साल प्राइम पॉइंट फाउंडेशन द्वारा संसद के दोनों सदनों में सक्रिय और रचनात्मक कार्य करने वाले सांसदों को दिया जाता है. इस बार कुल 17 सांसदों को यह सम्मान मिला है. खास बात यह है कि डॉ. कुलकर्णी पहली बार राज्यसभा की सदस्य बनी हैं, और पहले ही कार्यकाल में उन्हें यह पुरस्कार मिलना उनके कार्य के प्रति प्रतिबद्धता और समर्पण को दर्शाता है.

सम्मान मिलने के बाद डॉ. कुलकर्णी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पहले ट्विटर) पर खुशी और आभार व्यक्त किया. उन्होंने लिखा, "मुझे केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के हाथों प्राइम पॉइंट फाउंडेशन द्वारा संसद रत्न पुरस्कार प्राप्त हुआ. मैं इसके लिए फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष के. श्रीनिवासन, निर्णायक मंडल के अध्यक्ष हंसराज अहीर और सभी सहयोगियों का हृदय से धन्यवाद करती हूं."

मेधा कुलकर्णी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस समेत अपनी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के प्रति भी आभार जताया. साथ ही उन्होंने अपने सहयोगियों, समर्थकों, महाराष्ट्र की जनता और अपने परिवार को भी इस उपलब्धि का श्रेय दिया.

डॉ. कुलकर्णी ने राज्यसभा में महिला स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, शिक्षा, सामाजिक न्याय और वक्फ बोर्ड से जुड़े मुद्दों को प्रभावशाली ढंग से उठाया है. उन्होंने हाल ही में ग्रामीण महिलाओं में तेजी से बढ़ रहे कैंसर मामलों पर चिंता जताई थी और सरकार से इस दिशा में जागरूकता व स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाने की मांग की थी.

उनकी इस सक्रिय भागीदारी और जमीनी मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने की नीति ने उन्हें न सिर्फ संसद में एक सशक्त आवाज़ के रूप में स्थापित किया है, बल्कि 'संसद रत्न पुरस्कार' जैसे सम्मान के योग्य भी बनाया है. यह सम्मान न केवल डॉ. कुलकर्णी की मेहनत का प्रतीक है, बल्कि यह उन सभी जनप्रतिनिधियों के लिए प्रेरणा है, जो संसद को जनहित का माध्यम मानकर कार्य करते हैं.


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Written by: Raihan

26 Jul 2025  ·  Published: 18:08 IST

मस्जिद में बिना टोपी पहुंचे अखिलेश यादव, मुस्लिम धर्मगुरु ने काटा बवाल

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फाइल फोटो

Akhilesh Yadav Mosque Cap Controversy: समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव के संसद भवन के पास स्थित मस्जिद जाने को लेकर नया विवाद सामने आया है। अलीगढ़ के मुस्लिम धर्मगुरु इफराहिम हुसैन ने इस बात पर सवाल उठाया है कि अखिलेश यादव ने मस्जिद में प्रवेश के दौरान जालीदार टोपी क्यों नहीं पहनी। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव का इस पर सफाई देना जरूरी है।

धर्मगुरु ने कहा कि पहले सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव भी मस्जिद जाया करते थे और उन्होंने हमेशा इस्लामिक परंपराओं का सम्मान किया। इसी परंपरा को अखिलेश यादव भी निभाते रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि अखिलेश यादव हमेशा नमाज और धार्मिक स्थलों पर टोपी पहनते रहे हैं, लेकिन इस बार उनके सिर पर टोपी नहीं दिखी। इससे मुस्लिम समाज में संदेह की स्थिति बनी है और लोग जवाब चाहते हैं।

इफराहिम हुसैन ने कहा, "अखिलेश यादव के दिल में क्या है, यह वही जानते हैं। परंतु यह जरूर पूछना चाहिए कि टोपी इस बार क्यों नहीं पहनी गई। जब पहले पहनी जाती थी, तो अब क्या कारण था कि छोड़ दी गई?" इस मुद्दे पर राजनीति भी तेज हो गई है। सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने पार्टी की ओर से सफाई देते हुए कहा कि नेता मस्जिद में किसी बैठक के लिए नहीं गए थे, बल्कि केवल चाय पीने के लिए वहां गए थे। उन्होंने कहा कि भाजपा इस मसले को बेवजह बड़ा बना रही है और झूठे आरोप लगा रही है।

डिंपल यादव ने क्या कहा?
वहीं, सपा सांसद डिंपल यादव ने भी स्पष्ट किया कि कोई बैठक नहीं हुई थी। उन्होंने कहा, "हमारे सांसद वहां एक सामाजिक कार्यक्रम के तहत पहुंचे थे। वहां न तो कोई बैठक हुई और न ही कोई राजनीतिक गतिविधि।" इस पूरे मामले को लेकर सियासी घमासान मचा हुआ है, लेकिन मुस्लिम धर्मगुरु की तरफ से उठाए गए सवाल ने अखिलेश यादव के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है। अब सबकी नजरें इस पर हैं कि अखिलेश यादव इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।


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Written by: Taushif

24 Jul 2025  ·  Published: 04:25 IST

अल कायदा के निशाने पर असम से लेकर गुजरात, ISI के खौफनाक मंसूबे उजागर

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फाइल फोटो

Gujarat News: गुजरात एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) ने अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) के एक बड़े मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में चार संदिग्धों – मोहम्मद फैक, मोहम्मद फरदीन, सेफुल्लाह कुरैशी और जीशान अली – को गिरफ्तार किया गया है। ये सभी आतंकी संगठन की विचारधारा फैलाने और फेक करेंसी के जरिए फंड जुटाने में लगे थे।

ATS की जांच में खुलासा हुआ कि आतंकियों के पास ऐसे मोबाइल ऐप थे, जिनसे संदेश अपने-आप डिलीट हो जाते हैं। एजेंसियों का मानना है कि यह मॉड्यूल गुजरात को खास निशाना बना रहा था। इससे पहले असम में भी इसी तरह का एक मॉड्यूल सामने आया था, जहां आतंकियों के बांग्लादेशी आतंकी संगठन अंसारुल्लाह बांग्ला टीम से संपर्क होने के प्रमाण मिले हैं।

सूत्र ने किया बड़ा दावा
सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI "ऑपरेशन सिंदूर" के जवाब में AQIS के जरिए भारत में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा दे रही है। AQIS की स्थापना 2014 में अयमान अल-जवाहिरी ने की थी और इसका नेतृत्व भारतीय मूल का असीम मुनीर कर रहा था। यह संगठन अब जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर और गुजरात में सक्रियता बढ़ा रहा है।

भगवा शासन के पीछे कौन
खतरनाक बात यह है कि AQIS ने अपने एक बयान में भारतीय मुसलमानों से 'भगवा शासन' के खिलाफ जिहाद छेड़ने की अपील की थी। यह बयान ऑपरेशन सिंदूर के बाद सामने आया, जिससे साफ है कि यह संगठन पाकिस्तान के हितों को भारत में लागू करना चाहता है।

AQIS क्या है?
इतिहास में भी AQIS भारत के खिलाफ सक्रिय रहा है। मुंबई हमलों से पहले डेविड हेडली ने इस संगठन से मिलकर गुजरात और यूपी जैसे राज्यों में हमले की योजना बनाई थी। हाल ही में प्रत्यर्पित आतंकी तहव्वुर राणा भी देश के कई हिस्सों की यात्रा कर चुका था।

कौन चला रहा है गजवा-ए-हिंद मिशन?
अब AQIS भारत में ‘गजवा-ए-हिंद’ नाम से मिशन चला रहा है और ‘नवा-ए-गजवा-ए-हिंद’ नाम की उर्दू मैगजीन भी निकाल रहा है। एजेंसियों के अनुसार, यह संगठन सोशल मीडिया और धार्मिक कट्टरता के जरिए भारत में युवाओं को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है।


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Written by: Taushif

24 Jul 2025  ·  Published: 04:33 IST